जिस पर पांच करोड़ का जुर्माना उसे बना दिया मुख्य वक्ता : देर रात को दो सचिवों के बीच मचा विवाद : रिटायर्ड आईएएस ने घोड़ों से कर दी अपने बिरादरी के अफसरों की तुलना

1 जिस पर पांच करोड़ का जुर्माना उसे बना दिया मुख्य वक्ता
तीन दिवसीय आईएएस मीट का आज समापन होने जा रहा है। इस बार “द नारदमुनि” में चर्चाओं का केंद्र यही आयोजन है। सबसे पहले बात उद्घाटन समारोह में शामिल हुए मुख्य वक्ता की। मुख्य वक्ता को लेकर आईएएस बिरादरी के भीतर ही सवाल उठने लगे हैं। वे निवेश से जुड़े सेक्टर से आते हैं और कभी केंद्र सरकार के एक उपक्रम द्वारा उन पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया जा चुका है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि एक विवादित छवि वाले व्यक्ति को मुख्य वक्ता के रूप में आमंत्रित करने की जरूरत क्यों पड़ी। कुछ अफसरों का कहना है कि एक साहब अपने पोस्ट–रिटायरमेंट प्लान को ध्यान में रखकर कदम बढ़ा रहे हैं और सेवानिवृत्ति के बाद उसी कंपनी से जुड़ने की मंशा रखते हैं। वहीं, कुछ अन्य अफसरों की दलील है कि केवल पैसा कमाना ही नहीं, बल्कि उसका सही जगह निवेश भी उतना ही अहम है, और इसी सोच के तहत इन महोदय को बुलाया गया था।
2 देर रात को दो सचिवों के बीच मचा विवाद
आईएएस सब्मिट से जुड़ी एक और दिलचस्प खबर सामने आ रही है। आयोजन के दौरान अलग-अलग गेम्स के लिए हाउस बनाए गए थे। देर रात सीधी भर्ती के एक सीनियर और एक जूनियर सचिव के बीच इसी मुद्दे को लेकर विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि जूनियर सचिव स्तर के एक आईएएस ने अफसरों के सोशल मीडिया ग्रुप में टिप्पणी कर दी कि रेड हाउस ने दिनभर बेईमानी की है। उन्होंने यहां तक लिख दिया कि “यह नहीं चलेगा, मैच फिक्स्ड था।” इस टिप्पणी पर सीनियर सचिव ने तंज कसते हुए जवाब दिया—“यह बात तुम्हें रात 12 बजे पता चली? दिनभर क्या कर रहे थे?” इस पर जूनियर सचिव साहब ने पलटकर लिखा कि अब साहस जुटाकर यह बात कह पा रहे हैं। इसके बाद सीनियर सचिव ने फिर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर इतनी ही दिक्कत है तो अपना हाउस बदलने के लिए आवेदन कर दें। जवाब में जूनियर सचिव ने भी साफ शब्दों में लिख दिया—“बिल्कुल नहीं।” एक साहब ने तो जूनियर सचिव के लिए यहां तक लिख दिया कि इनको तीन पैग लगाने के बाद यह सब बातें याद आ रही हैं।
3 रिटायर्ड आईएएस ने घोड़ों से कर दी अपने बिरादरी के अफसरों की तुलना
इस आईएएस सब्मिट को लेकर एक रिटायर्ड प्रमोटी आईएएस ने भी सोशल मीडिया पर टिप्पणी की है। उन्होंने आईएएस अफसरों की तुलना घोणों से कर दी है। साहब ने लिखा है कि तीन दिन बस तीन दिन। जब न तो घोड़ों के मुंह पर कोई लगाम है और न ही उनकी पीठ पर कोई सवार। घोड़े मुक्त हैं। मुक्त घोड़े कुछ भी कर सकते हैं। आखिर स्पिरिट (शराब) से युक्त हैं। वैसे आपकी जानकारी के लिए बताते दें कि साहब शराब वाले विभाग में अपनी सेवाएं बतौर कमिश्नर दे चुके हैं।
4 पूर्व मंत्री का सीनियर आईपीएस के लिए बंगला खाली करने से इन्कार
हाल ही में सरल और सहज स्वभाव के एक सीनियर आईपीएस, डेप्युटेशन पूरा होने से पहले ही प्रदेश वापस लौट आए हैं। लौटते ही अफसरों की दो अहम जरूरतें सामने आ जाती हैं—पहली पोस्टिंग और दूसरी सरकारी बंगला। पोस्टिंग मिलने में हो रही देरी के चलते साहब फिलहाल बंगले की जुगाड़ में जुटे हुए हैं। उन्हें एक पूर्व मंत्री का सरकारी बंगला आवंटित किया गया था। खास बात यह है कि यह पूर्व मंत्री अब विधायक भी नहीं रह गए हैं और सरकार भी उनसे बंगला खाली कराना चाहती है। लेकिन पूर्व मंत्री ने बंगला खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। उधर, आईपीएस साहब भी किसी तरह का विवाद नहीं चाहते। इसी वजह से उन्होंने वैकल्पिक रूप से किसी दूसरे बंगले के आवंटन पर सहमति दे दी है।
5 पीएस का शाहरुख खान जैसा हेयर स्टाइल चर्चा में
ईमानदार और सख्त छवि वाले पीएस स्तर के एक आईएएस इन दिनों अपनी कार्यशैली से ज्यादा हेयर स्टाइल को लेकर चर्चा में हैं। आम तौर पर बेहद लो-प्रोफाइल रहकर काम करने वाले साहब हमेशा अपने काम के दम पर पहचाने जाते रहे हैं, न कि किसी दिखावे की वजह से। लेकिन हाल ही में पता नहीं क्या सूझी कि साहब ने अपना लुक पूरी तरह बदल लिया। उन्होंने न सिर्फ बाल लंबे कर लिए, बल्कि अब शाहरुख खान की फिल्म पठान वाले स्टाइल में बालों की चोटी भी रखने लगे हैं। इस बदलाव ने आईएएस बिरादरी में खासा कौतूहल पैदा कर दिया है और गलियारों में इसकी खूब चर्चा हो रही है। दिलचस्प यह है कि यह वही साहब हैं जो बेहद कम बोलते हैं और काम ज्यादा करने में यकीन रखते हैं। फाइलों पर उनकी सख्ती और फैसलों में स्पष्टता को लेकर उनकी अलग पहचान है। ऐसे में अचानक आया यह स्टाइल स्टेटमेंट लोगों के लिए हैरानी का विषय बन गया है। अफसरों के बीच अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह महज शौक है या फिर साहब के व्यक्तित्व का कोई नया, अब तक अनदेखा पहलू सामने आ रहा है।
6 आईपीएस के प्रमोशन का रास्ता हुआ साफ
एक सीनियर आईपीएस के लिए नया साल खुशियों भरी खबर लेकर आ रहा है। आखिरकार साहब के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। हाल ही में हुई डीपीसी की बैठक में उन्हें पदोन्नति देने पर हरी झंडी दे दी गई है। दरअसल, डीआईजी स्तर के ये साहब करीब दस साल पहले पड़ोसी राज्य में डेप्युटेशन पर गए थे। वहां कुछ अफसर उनकी कार्यशैली से नाराज हो गए और उनकी सर्विस बुक में यह टिप्पणी दर्ज कर दी कि वे सेवा के लिए फिट नहीं हैं। बस यहीं से साहब के प्रमोशन की राह में अड़चनें आने लगीं। नतीजा यह हुआ कि उनके बैचमेट एडीजी तक पहुंच गए, जबकि वे खुद डीआईजी पद पर ही अटके रह गए। अब डीपीसी में यह तय हुआ है कि दस में से साहब की आठ सीआर बेहतर हैं। ऐसे में उन्हें सीधे एडीजी तो नहीं, लेकिन आईजी पद पर प्रमोशन दिया जा सकता है। इस फैसले ने साहब को बड़ी राहत दी है और लंबे समय से चले आ रहे इंतजार का आखिरकार अंत होता नजर आ रहा है।
7 भाई नहीं अब साला होगा पीएस का पार्टनर
कहते हैं मूल से ज्यादा प्यारा ब्याज होता है। कुछ इसी तर्ज पर मलाईदार विभाग में जमे प्रमुख सचिव साहब इन दिनों काम कर रहे हैं। अब तक साहब अपने भाई के साथ मिलकर सारा खेल संभाल रहे थे, लेकिन लगता है कि रुपये-पैसे को लेकर अब भाई और साहब के बीच भरोसा पहले जैसा नहीं रहा। इसी वजह से साहब ने अपना कारोबारी दायरा बदल लिया है और अब नए सिरे से अपने साले के साथ काम शुरू कर दिया है। बताया जा रहा है कि जब भी कोई ठेकेदार साहब के पास पहुंचता है, तो उसे सीधे साले के साथ पार्टनर बनाने का ऑफर दे दिया जाता है। दिलचस्प बात यह है कि पार्टनरशिप के इस नए फॉर्मूले के बावजूद साहब अपना कमीशन लेना नहीं भूलते। वैसे भी साहब के रिटायरमेंट में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। ऐसे में वे कोई भी गेंद खाली नहीं छोड़ना चाहते। हर मौके पर शॉट लगाने के मूड में दिख रहे साहब पूरी कोशिश में हैं कि जाते-जाते ज्यादा से ज्यादा “ब्याज” समेट लिया जाए।
8 बाबू का तबादला करने से नाराज होकर छुट्टी पर गए युवा आईएएस
एडिशनल सेक्रेट्री स्तर के एक आईएएस इन दिनों अपने सीनियर अफसरों से खासे नाराज चल रहे हैं। नाराजगी की वजह उनके चहेते बाबू का तबादला है, जिसे सीनियर अफसरों ने किसी दूसरे विभाग में भेज दिया। साहब नहीं चाहते थे कि बाबू को उनके पास से हटाया जाए। हालांकि, बाबू पर लगे आरोप काफी गंभीर थे, इसी वजह से विभाग के एसीएस पहले से ही खासे नाराज थे। दरअसल, हाल ही में एक तबादला सूची विभाग से लीक हो गई थी, जिस पर एसीएस को मुख्यमंत्री कार्यालय की कड़ी नाराजगी झेलनी पड़ी। मामले की जांच की गई तो सामने आया कि यही बाबू अफसरों को मोबाइल पर उनके तबादलों की जानकारी पहले ही दे रहा था। इसके बाद एसीएस ने बिना देर किए बाबू को विभाग से हटाने की नोटशीट चला दी। इसी कार्रवाई से खफा होकर एडिशनल सेक्रेट्री साहब अवकाश पर चले गए हैं और फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर विभागीय गलियारों में चर्चाएं तेज हैं।
9 अफसर का आतंक, कोई काम फ्री में नहीं करुंगा
एक बोर्ड में संविदा पर आए एक अफसर इन दिनों जबरदस्त आतंक मचाए हुए हैं। हालात यह हैं कि मंत्री, विधायक या कोई भी सीनियर अफसर किसी काम के लिए कह दे, तब भी साहब किसी की सुनने को तैयार नहीं हैं। जब तक साहब के पास लक्ष्मी जी नहीं पहुंचतीं, तब तक फाइल आगे नहीं बढ़ती। वैसे बड़े साहब इन्हें संविदा नियुक्ति देने के बिल्कुल भी पक्ष में नहीं थे, लेकिन ऊपर से आई सिफारिश के चलते अलसुबह ही इनके आदेश जारी करने पड़े। दिलचस्प बात यह है कि साहब अपनी ‘ईमानदारी’ का भी खुलकर प्रदर्शन करते हैं। जो भी व्यक्ति काम लेकर आता है, उसे साफ-साफ बता देते हैं कि ऊपर तक देकर आया हूं, इसलिए अब खुलकर वसूली करूंगा।इसी कड़ी में साहब ने अब करीब चार हजार लोगों को नोटिस जारी कर तलब कर लिया है। बोर्ड के गलियारों में इन दिनों इसी अफसर के कारनामों की सबसे ज्यादा चर्चा है।
10 मुख्यमंत्री ने रिटायर आईपीएस के जख्म कर दिए हरे
एक रिटायर्ड सीनियर आईपीएस के पुराने जख्म पिछले दिनों एक बार फिर हरे हो गए हैं। दरअसल, यह साहब खुद को मुख्यमंत्री का बेहद करीबी अफसर मानते रहे हैं। यही नहीं, रिटायरमेंट के बाद उन्हें संविदा पर कोई अहम जिम्मेदारी मिलने की भी पूरी उम्मीद थी। इसके लिए उन्होंने ऐड़ी से चोटी तक जोर लगाया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद कोई पद नसीब नहीं हुआ। पिछले दिनों मुख्यमंत्री पुलिस मुख्यालय पहुंचे और वहां एक समीक्षा बैठक ली। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इस रिटायर आईपीएस की न सिर्फ खुलकर तारीफ की, बल्कि मौजूद अफसरों को उनसे सीख लेने की सलाह भी दे डाली। बस फिर क्या था, जैसे ही यह बात साहब तक पहुंची, उनका दर्द एक बार फिर उभर आया। तारीफ सुनकर खुशी की जगह मायूसी हाथ लगी। साहब का कहना है कि जब वे इतने ही शानदार और काबिल अफसर थे, तो फिर रिटायरमेंट के बाद उन्हें संविदा नियुक्ति क्यों नहीं दी गई। इसी सवाल के साथ साहब एक बार फिर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।





