पीएस की फटकार से बिगड़ी एडीएम मैडम की तबीयत : आईपीएस कंफ्यूज हैं कि शराब छोड़ें या नहीं : युवा आईएएस बनेंगे पॉवरफुल पर्सन के दामाद जी

पीएस की फटकार से बिगड़ी एडीएम मैडम की तबीयत : आईपीएस कंफ्यूज हैं कि शराब छोड़ें या नहीं : युवा आईएएस बनेंगे पॉवरफुल पर्सन के दामाद जी
1 पीएस की फटकार से बिगड़ी एडीएम मैडम की तबीयत
लूप लाइन में पदस्थ एक प्रमुख सचिव साहब का मिजाज इन दिनों फिर से गरमाया हुआ है। लंबे समय तक शांत रहने के बाद साहब अब अपने ही संस्थान के अफसरों को परेशान करने में जुटे हैं। हाल ही में एडीएम स्तर की एक मैडम को साहब ने ऐसी डांट पिलाई कि उनकी तबीयत ही बिगड़ गई और वे छुट्टी पर चली गईं। इतना ही नहीं, एक प्रमोटी आईएएस को साहब ने शो कॉज नोटिस थमा दिया और जवाब भी “फौरन चाहिए” कह डाला। वैसे ये पहला मौका नहीं है। साहब जहां भी रहे हैं, अधीनस्थ अफसरों को परेशान करने का उनका रिकॉर्ड रहा है। दिलचस्प बात यह है कि इस बार तो वे ऐसे संस्थान में पदस्थ हैं, जहां करने को कोई खास काम भी नहीं है। बावजूद इसके, साहब की तुनक मिजाजी कम होने का नाम ही नहीं ले रही।

2 आईपीएस कंफ्यूज हैं कि शराब छोड़ें या नहीं
लाख कोशिशें करने के बाद भी एक प्रमोटी आईपीएस की शराब से दुश्मनी खत्म नहीं हो पा रही है। बेचारे साहब की किस्मत ही कुछ ऐसी है कि शराब चाहे खुद पी लें या कोई और, सजा हर बार इन्हीं को मिलती है। कुछ साल पहले साहब ने खुद जाम छलकाया था और मदहोशी में छात्रों से अभद्रता कर बैठे। नतीजे के तौर पर मिली सजा के बाद कसम खाई थी कि अब शराब से दूरी रखनी है। साहब ने अपने लिए बाकायदा "शराब प्रोटोकॉल" भी बना लिया था न ज्यादा पीना, और अगर पी भी ली तो न किसी से मिलना और न मोबाइल उठाना। लेकिन हाय रे किस्मत! इस बार तो साहब खुद नहीं पिए थे। किसी और की पी हुई बोतल ने उनके क्षेत्र में हंगामा करा दिया और साहब को फिर से अटैच होकर मुख्यालय का रास्ता देखना पड़ा। अब बेचारे साहब कंफ्यूज हैं कि आखिर शराब छोड़ें या न छोड़ें—क्योंकि शराब साहब पीएं या कोई और गाज तो उन्हीं पर गिरती ही है।

3 युवा आईएएस बनेंगे पॉवरफुल पर्सन के दामाद जी
एक युवा आईएएस, जो इस वक्त आदिवासी बहुल जिले में बतौर सीईओ पदस्थ हैं, जल्द ही एक बेहद पॉवरफुल पर्सन के दामाद बनने जा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि जमाई बाबू बनने वाले इस अफसर की गहन खोजबीन करने के बाद पॉवरफुल पर्सन ने बेटी की शादी पक्की कर दी है। वैसे ये पॉवरफुल पर्सन कोई आम शख्स नहीं हैं—कभी पड़ोसी राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रह चुके और आज देश के नंबर वन उद्योगपति के सबसे भरोसेमंद कर्ताधर्ताओं में शामिल। राजधानी के सबसे पॉश इलाके में इनकी आलीशान हवेली पहले ही तैयार हो चुकी है। अंदर की खबर यह है कि अगर सब कुछ तय कार्यक्रम के मुताबिक रहा तो आने वाली देवउठनी ग्यारस के बाद इसी हवेली में शहनाई की मधुर धुन गूंजेगी।

4 पीएस को रुपयों के साथ चाहिए पार्टनरशिप 
मलाईदार विभाग के प्रमुख सचिव और विभाग के ही अफसर सोलंकी जी इन दिनों खूब चर्चाओं में हैं। वजह है उनका नया फॉर्मूला—रुपयों के साथ-साथ पार्टनरशिप भी चाहिए! गलियारों में कानाफूसी है कि जो भी शख्स दोनों में से किसी एक शर्त को भी मानने से इनकार करता है, उसका काम अटकना तय है। प्रमुख सचिव अपने करीबियों के नाम पर पार्टनरशिप ले रहे हैं, तो सोलंकी जी अपनी एक खास महिला मित्र और उसके रिश्तेदारों के नाम पर। सूत्रों का कहना है कि इस खेल की खबर अब बड़े साहब तक पहुंचाई जाने लगी है। ऐसे में इन दोनों की बिदाई कब हो जाए, कहना मुश्किल है। इधर प्रमुख सचिव का रिटायरमेंट भी करीब है, लिहाजा वे “नो शरम-नो हया” मोड में काम निपटाने में जुटे हुए हैं। स्थिति ये है कि अब विभाग में नया नारा गूंज रहा है—“रुपया लाओ और ऑर्डर पाओ! एक अफसर ने रुपया लाने में देर कर दी, तो साहब ने उसको निपटाने में जरा भी देर नहीं की—सीधे अगले दिन ही सस्पेंड!

5 आयुक्त साहब की कड़क एंट्री!
तेज-तर्रार कार्यप्रणाली वाले एक युवा आईएएस ने हाल ही में नगर निगम आयुक्त का कार्यभार संभाला है और ज्वॉइन करने के महज 24 घंटे के भीतर ही अपने तेवर साफ कर दिए हैं—“नेताओं से ज्यादा सेटिंग-वेटिंग नहीं चलेगी।” साहब ने आते ही स्वच्छता अभियान के तहत नगर निगम अमले को शहर भर से सारे होर्डिंग्स हटाने का आदेश दे डाला। कर्मचारियों ने भी आदेश का पालन करते हुए एक कदम आगे बढ़ाया—होर्डिंग्स को सीधा कचरे की गाड़ी में पटक कर शहर से बाहर फेंक दिया। बवाल तब खड़ा हुआ जब इन होर्डिंग्स में विधायक महोदया के लाड़ले बेटे की तस्वीरें भी शामिल थीं। बस फिर क्या, समर्थकों ने आयुक्त कार्यालय में हंगामा काट दिया। लेकिन आयुक्त साहब अपने फैसले पर अड़े रहे और दो टूक कह दिया—“आगे भी यही होगा।”

6 सीनियर के सामने भिड़ गए दो अफसर
बड़े साहब ने आते ही मंत्रालय से लेकर सभी जिलों में जो ड्रीम प्रोजेक्ट शुरू कराया था, वह अचानक पांच दिनों के लिए ठप्प पड़ गया। पता नहीं किसकी नजर लगी और झटके में पूरे प्रोजेक्ट का काम रुक गया। इसकी वजह से न सिर्फ हजारों फाइलों का मूवमेंट रुक गया, बल्कि मंत्रीमंडल की बैठक तक टल गई। प्रोजेक्ट की नोडल एजेंसी के मुखिया ने दो अफसरों—एक केन्द्र से जुड़े संस्थान के और दूसरा प्रदेश का युवा आईएएस—को अपने कार्यालय में तलब किया। जब सीनियर अफसर ने दोनों से पूछा कि आखिर क्यों प्रोजेक्ट ठप्प पड़ा, तो दोनों अफसरों ने एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराना शुरू कर दिया। बस फिर क्या था,—दोनों अफसरों में वहीं बहसबाजी चलती रही और सीनियर अफसर मजबूरन चुपचाप देखते रहे। लंबी बहस के बाद भी न कोई कारण निकला और न जिम्मेदार।

7 युवा आईएएस के मन की मुराद हुई पूरी
एक युवा आईएएस पिछले दिनों अपनी कलेक्टर मैडम और उनकी रोज-रोज की बैठकों से खासे परेशान थे। आलम ये था कि उन्होंने बड़े साहब से साफ कह दिया था—“हमें कहीं भी भेज दीजिए, बस यहां से हटा दीजिए… हम खुशी-खुशी चले जाएंगे। खैर, उनकी दुआ रंग लाई। हाल ही में आई तबादला सूची में साहब की मुराद पूरी हो गई। अब उन्हें महाकौशल इलाके में ही एक विभाग का एचओडी बना दिया गया है। इस नई जिम्मेदारी में न तो रोज-रोज की मीटिंग का झंझट रहेगा और न ही सिर पर कोई सीनियर का दबाव। साथ ही रहने को बड़ा शहर भी मिल गया है। अब यही चर्चा है—“साहब का तबादला नहीं, मानो टेंशन का ट्रांसफर हो गया हो।”

8 एसीएस को विभाग के गुर सिखा रहे बड़े साहब
एसीएस स्तर के एक अफसर को हाल ही में एक बड़े और बेहद संवेदनशील विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। काम इतना बारीक और पेचीदा है कि हर फाइल पर गहरी नजर डालनी पड़ती है। यही वजह है कि बड़े साहब खुद एसीएस को विभाग की बारीकियों से अवगत करा रहे हैं। कभी चैंबर में बुलाकर गाइड कर रहे हैं, तो कभी उन्हें सीधे उन सीनियर अफसरों से मिलवा रहे हैं जो पहले इस विभाग को संभाल चुके हैं। बड़े साहब का तो साफ इरादा है—भविष्य में यहीं एसीएस विभाग की कमान संभालें। लेकिन अंदर की खबर ये है कि एसीएस साहब अपने छोटे से विभाग में ही मस्त हैं। वे इस बड़े विभाग की भारी-भरकम जिम्मेदारी लेना ही नहीं चाहते। दिक्कत ये है कि मन की बात कह भी नहीं पा रहे हैं।

9 विदेश से लौटे पीएस साहब का नया अंदाज़!
प्रमुख सचिव स्तर के एक आईएएस साहब विदेश से पढ़ाई करके क्या लौटे, उनकी पूरी चाल-ढाल ही बदल गई है। पहले लो-प्रोफाइल रहने वाले ये अफसर अब स्टाइलिश अंदाज़ में दिखते हैं। चैंबर में फाइल निपटानी हो या कॉन्फ्रेंस हॉल में मीटिंग लेना—साहब के पास हमेशा ब्लैक कॉफी का मग मौजूद रहता है। और हां, बात-बात पर अधीनस्थ अफसरों को इंग्लिश में अच्छी-खासी सुनाना अब उनका नया शगल बन गया है। अंदर की खबर ये भी है कि प्रदेश में काम करने का उनका मन अब ज्यादा नहीं लग रहा। चर्चा है कि कभी भी दिल्ली डेप्युटेशन के आदेश आ सकते हैं। यानी ब्लैक कॉफी के साथ-साथ दिल्ली की हवा भी साहब को खूब भा रही है।

10 पौधे लगाने की योजना, संगीत पर खर्च होंगे 26 लाख
प्रदेश सरकार की एक योजना है “एक बगिया मां के नाम”—मकसद है स्व-सहायता समूह की महिलाओं को अपनी जमीन पर फलदार पौधे लगाने के लिए प्रेरित करना। लेकिन बड़े जिले के कलेक्टर साहब शायद इसे नाच-गाने और संगीत को बढ़ावा देने की योजना समझ बैठे हैं। तभी तो एक निजी संस्थान से मिले प्रस्ताव के आधार पर उन्होंने सरकार से सीधा 26 लाख रुपये की मांग कर डाली! अब यह जल्दबाज़ी कलेक्टर साहब की थी या उनके स्टाफ की कलाकारी, यह तो अंदर की बात है। लेकिन अगर सरकार ने भी इतनी ही जल्दी रुपये स्वीकृत कर दिए, तो निजी संस्थान के तो मजे ही मजे हैं।



Abhishek Dubey

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Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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