बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर अभिजीत दीपके का दौरा, बोले- बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलीं तो बड़ा आंदोलन करेंगे

बालाघाट। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में बच्चों की मौत का मामला अब सियासी और सामाजिक तौर पर भी गरमाता जा रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके शनिवार को बालाघाट पहुंचे। वे उन गांवों का दौरा कर रहे हैं, जहां हाल के महीनों में आदिवासी बच्चों की मौत हुई है और प्रभावित परिवारों से मुलाकात करेंगे।
दीपके ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि बच्चों को बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। उन्होंने टीकाकरण, साफ पानी और इलाज की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए।
‘बच्चों की अनदेखी हुई, बड़ा आंदोलन करेंगे’
अभिजीत दीपके ने कहा कि आदिवासी बच्चे लगातार बीमार हो रहे हैं, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की अनदेखी की ओर इशारा करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई गांवों में लोगों को साफ पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है और उन्हें झीरिया का पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वह प्रभावित गांवों में जाकर वास्तविक स्थिति देखेंगे और जरूरत पड़ने पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
दीपके ने कहा कि एक तरफ देश में 7.8 प्रतिशत की ग्रोथ रेट की बात की जा रही है, जबकि आदिवासी क्षेत्रों में लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक विकास का मतलब केवल बड़े एयरपोर्ट, संसद या सरकारी भवनों को बेहतर बनाना नहीं है, बल्कि आदिवासी इलाकों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार के अवसर देना भी है।
‘आदिवासी बच्चों की मौत के लिए जवाबदेही तय हो’
CJP फाउंडर ने आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में सरकार और प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आदिवासी विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अधिकारियों को इस पूरे मामले पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को आलीशान भवन बनाने या हेलीकॉप्टर में घूमने के लिए नहीं चुना गया है, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना गया है।
दीपके ने प्रभावित परिवारों से मुलाकात के बाद उनकी मदद और न्याय के लिए आगे लड़ाई लड़ने की बात कही।
‘जिन परिवारों ने बच्चे खोए, उन्हें न्याय दिलाएंगे’
बालाघाट पहुंचने के बाद दीपके ने कहा कि वह उन गांवों में जाएंगे, जहां बच्चों की मौत हुई है। वे मृत बच्चों के परिजनों से मिलकर उनकी समस्याएं समझेंगे।
उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चे खोए हैं, उनके लिए जो जरूरी होगा, वह किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन की जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए आंदोलन को आगे बढ़ाने की बात भी कही।
दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि उनके दौरे की तैयारियों में जुटे कुछ आदिवासी युवाओं पर पुलिस की ओर से दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर पीछे हटने वाले नहीं हैं और जरूरत पड़ी तो लंबा संघर्ष किया जाएगा।
बालाघाट पहुंचते ही युवाओं ने घेरा
अभिजीत दीपके के बालाघाट पहुंचने पर युवाओं में उनके साथ फोटो खिंचाने को लेकर उत्साह भी नजर आया। उनके साथ फोटो लेने के लिए युवाओं की भीड़ जुट गई।
बताया गया कि जब दीपके कार में बैठने जा रहे थे, तभी एक बच्चे ने उन्हें आवाज देकर ऑटोग्राफ मांगा। दीपके ने बच्चे का नाम पूछा और उसके हाथ पर ऑटोग्राफ दिया।
बच्चों की मौत का आंकड़ा बना बड़ा सवाल
बालाघाट के बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला पिछले कुछ समय से चर्चा में है। अलग-अलग रिपोर्टों और स्थानीय संगठनों के दावों में मृत बच्चों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
कुछ स्थानीय आदिवासी समूहों की ओर से 31 बच्चों की मौत का दावा किया गया है। वहीं, अगस्त के अंत तक सामने आई एक रिपोर्ट में मछुरदा, अडोरी, बोंदारी, कोरका और कुंडेकसा सहित कुछ गांवों में 10 बच्चों की मौत की जानकारी दी गई थी।
इसी वजह से मौतों की वास्तविक संख्या और कारणों को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। केंद्र की जांच में भी किसी एक बीमारी या एकल संक्रमण को सभी मौतों का कारण नहीं पाया गया। जांच में खसरा, मलेरिया, सह-संक्रमण, सांस संबंधी परेशानी, डिहाइड्रेशन, कुपोषण, एनीमिया और शॉक जैसे कई चिकित्सकीय कारण सामने आए हैं।
अस्पताल में अब भी बड़ी संख्या में बच्चे भर्ती
स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों से बीमार बच्चों को अस्पताल लाया जा रहा है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक अस्पताल में खसरा, मलेरिया, निमोनिया, चर्म रोग और बुखार जैसी समस्याओं से पीड़ित करीब 50 बच्चे भर्ती हैं। रोजाना भी कई बच्चों के अस्पताल पहुंचने की बात कही गई है।
ऐसे में प्रभावित आदिवासी गांवों में स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और चिकित्सा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
बालाघाट में पहले से मलेरिया का खतरा
बालाघाट प्रदेश के मलेरिया प्रभावित जिलों में प्रमुख रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 2026 में जुलाई तक मध्य प्रदेश में मलेरिया के 583 मामले सामने आए थे, जिनमें अकेले बालाघाट में 174 मामले थे। यह प्रदेश में सबसे अधिक था।
ऐसे में बच्चों की मौत के मामले के बीच मलेरिया समेत अन्य संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों की रोकथाम को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है।
अब आंदोलन की तैयारी
अभिजीत दीपके के बालाघाट दौरे के बाद इस मुद्दे पर आंदोलन तेज होने के संकेत हैं। वे प्रभावित गांवों का दौरा कर मृत बच्चों के परिवारों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद प्रशासन से जवाबदेही तय करने और आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति तय की जा सकती है।
बालाघाट में बच्चों की मौत के आंकड़ों और कारणों को लेकर अलग-अलग दावों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिलेंगी और पूरे मामले में जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
