स्टे देकर बुरी तरह फंस गए प्रमोटी आईएएस : जिस फॉर्म हॉउस में एसपी की पार्टी वहां से पकड़ाई ड्रग्स : युवा आईएएस की कारस्तानी से सरकार खफा, तीन सीनियर अफसरों पर हुए नाराज

1 स्टे देकर बुरी तरह फंस गए प्रमोटी आईएएस
एडिशनल कमिश्नर की कुर्सी संभाल रहे एक आईएएस चार सौ करोड़ रुपये की जमीन के मामले में एक संस्था को स्टे देकर बुरी तरह फंस गए हैं। आर्थिक नगरी क्षेत्र में सरकार ने एक संस्था को लीज पर जमीन आवंटित की थी। बाद में जब संस्था द्वारा शर्तों के उल्लंघन की पुष्टि हुई तो कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए लीज निरस्त कर दी और जमीन को दोबारा सरकारी घोषित कर दिया। लेकिन एडिशनल कमिश्नर साहब ने इस फैसले पर स्टे दे दिया, और यही कदम अब उनके लिए भारी पड़ता दिख रहा है। सरकार को यह फैसला बिल्कुल रास नहीं आया है। सूत्रों की मानें तो साहब से सरकार बेहद नाराज़ है और कभी भी उन्हें इस पद से हटाकर मंत्रालय में किनारे लगाने जैसी पोस्टिंग दी जा सकती है। दिलचस्प बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब साहब जमीन से जुड़े मामलों में विवादों में आए हों। सरकारी जमीन को प्राइवेट करने के एक पुराने मामले में न सिर्फ उनकी जांच चल रही है, बल्कि पिछली सरकार के दौरान तो उन्हें भरे मंच से कलेक्टर पद से हटाकर लूप लाइन में डाल दिया गया था। उस वक्त भी अफसरशाही में यह संदेश साफ था कि साहब की कार्यशैली सरकार को मंजूर नहीं। इसके बावजूद, मौजूदा मामले में साहब ने आखिर किसके दबाव में आकर इतना बड़ा स्टे दे दिया यह मंत्रालय में चर्चा का विषय बन गया है।
2 जिस फॉर्म हॉउस में एसपी की पार्टी वहां से पकड़ाई ड्रग्स
प्रदेश के एक छोटे से जिले में हाल ही में हुई एक कार्रवाई ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है। एक केंद्रीय एजेंसी ने छापा मारते हुए लाखों रुपये की ड्रग्स बरामद की। लेकिन असली चर्चा ड्रग्स से ज़्यादा उस फार्म हाउस को लेकर है, जहां से यह खेप पकड़ी गई। बताया जा रहा है कि यही वही फार्म हाउस है, जहां जिले के एसपी साहब आए-दिन पार्टी फरमाने जाया करते थे। जैसे-जैसे यह बात आम होने लगी, वैसे-वैसे एसपी साहब की कुर्सी पर खतरे के बादल मंडराने लगे। मामला ऊपर तक पहुंचने की आशंका ने साहब की नींद उड़ा दी। नतीजा यह हुआ कि कुर्सी बचाने की जद्दोजहद में एसपी साहब ने न सिर्फ ड्रग्स पकड़ने की कार्रवाई करवाई, बल्कि उसका जमकर ढोल-नगाड़ा भी पिटवाया। यह है कि ये एसपी साहब प्रमोटी आईपीएस हैं। अब महकमे में यह चर्चा जोरों पर है कि कार्रवाई असल में अपराध के खिलाफ थी या फिर कुर्सी बचाने की मजबूरी का नतीजा।
3 युवा आईएएस की कारस्तानी से सरकार खफा, तीन सीनियर अफसरों पर हुए नाराज
एक अहम संस्था में सीईओ की कुर्सी संभाले बैठे एक युवा आईएएस लंबे समय से कुछ प्राइवेट लोगों के साथ मिलकर वसूली का पूरा तंत्र चला रहे थे। खेल इतना सधा हुआ था कि अब तक किसी को भनक तक नहीं लगी। किस्मत ने साथ दिया और साहब ट्रेनिंग पर चले गए। इधर पीछे से एक स्टिंग ऑपरेशन ने पूरा मामला उधेड़कर रख दिया। स्टिंग की चपेट में साहब के खास चेले आ गए। पूछताछ में चेलों ने न सिर्फ “रेट कार्ड” खोला, बल्कि वसूली की पूरी कारगुजारी भी बेझिझक बयां कर दी। मामला प्रधानमंत्री से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना से जुड़ा था, इसलिए सरकार ने भी इसे हल्के में नहीं लिया। आनन-फानन में विभाग के तीन अफसरों को तलब किया गया और जमकर नाराजगी जताई गई। दिलचस्प बात यह रही कि जिन तीन अफसरों के सामने सरकार नाराज हुए, उनमें से एक-दो तो सिर्फ अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे थे, जबकि एक अफसर को पद जॉइन किए महज एक हफ्ता ही हुआ था। फिलहाल सरकार ने साहब के चेलों को तो निपटा दिया है, लेकिन असली निशाना अब युवा आईएएस हैं। कहा जा रहा है कि इस संस्था के जरिए साहब ने अब तक करोड़ों रुपये की कमाई कर चुके हैं। सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि बहुत जल्द साहब पर भी कार्रवाई का शिकंजा कस सकता है।
4 प्रभारी रजिस्ट्रार ने रुकवाई फिर पीएस ने करवाई आईएएस की ज्वॉइनिंग
पिछले दिनों एक शैक्षणिक संस्था में इतिहास रचते हुए पहली बार रजिस्ट्रार पद पर आईएएस अफसर की नियुक्ति की गई। माना जा रहा था कि अब व्यवस्था में कसावट आएगी, लेकिन कहानी ने शुरुआत में ही अलग मोड़ ले लिया। दरअसल, रजिस्ट्रार का प्रभार देख रहा एक अदना सा अफसर ही इस आईएएस पर भारी पड़ गया। अपने रसूख के दम पर उसने आईएएस की ज्वॉइनिंग तक रुकवा दी। प्रमोटी आईएएस ने सीधे विभाग के प्रमुख सचिव को इसकी जानकारी दे दी। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे महकमे का तापमान बढ़ा दिया। प्रमुख सचिव ने प्रभारी रजिस्ट्रार को तलब कर जमकर फटकार लगाई और दो टूक चेतावनी दे डाली—अगर आईएएस अफसर को ज्वॉइन करने से रोका गया, तो सस्पेंशन तय है। फटकार का असर तुरंत दिखा। प्रभारी रजिस्ट्रार के तेवर ठंडे पड़े और आखिरकार उन्होंने आईएएस अफसर को पदभार ग्रहण करने दिया।
5 नक्सल मोर्चे पर सफलता का इनाम, आईपीएस को बड़े शहर की कमान
सरकार ने पिछले दिनों एक बड़ा और चौंकाने वाला फैसला लिया। नक्सल प्रभावित जोन की कमान संभाल रहे एक आईपीएस अफसर को सीधे प्रदेश के एक बड़े शहर का पुलिस कमिश्नर बना दिया गया। इसे महज तबादला नहीं, बल्कि उनकी मेहनत का खुला इनाम माना जा रहा है। बताया जाता है कि साहब ने नक्सल उन्मूलन के मोर्चे पर जमकर काम किया और पूरे अभियान में बेहद सख्त, लेकिन साफ-सुथरी छवि बनाए रखी। ईमानदारी और फील्ड में पकड़ ही उनकी सबसे बड़ी पहचान रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस आईपीएस अफसर के नाम का प्रस्ताव खुद प्रदेश पुलिस कप्तान ने सरकार के पास भेजा था। सरकार ने भी बिना कोई देरी किए इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी। वैसे इस पद के लिए बड़े-बड़े दिग्गज अफसर लाइन में लगे हुए थे।
6 पीएस के फोन नहीं उठा रहा दलाल अफसर
पिछले दिनों आई तबादला सूची ने एक पीएस साहब की पूरी गणित ही बिगाड़ दी। सरकार ने उन्हें मलाईदार विभाग से उठाकर सीधे लूप लाइन में भेज दिया। सूची आते ही साहब के माथे पर बल पड़ गए, क्योंकि महीने की ‘बंदी’ का हिसाब अभी पूरा भी नहीं हुआ था। घबराए साहब ने फौरन विभाग में पदस्थ अपने भरोसेमंद दलाल अफसर को फोन घुमा दिया। उधर से आश्वासन मिला कि “सुबह आकर पूरी रकम दे दूँगा।” साहब का दिल जरा हल्का हुआ। लेकिन कहानी में ट्विस्ट अगले ही दिन आ गया। तय समय बीत गया, अफसर नहीं आया। साहब ने फिर फोन लगाया… और फिर लगाया… मगर उधर से सिर्फ रिंग। फोन तब से लगातार जा रहा है, लेकिन रिसीव कोई नहीं कर रहा। अब साहब किस्मत को कोसते हुए अफसोस जता रहे हैं—“काश यह तबादला सूची एक हफ्ते बाद आ जाती, कम से कम एक महीने की रकम तो हाथ में आ जाती।” साहब का मिज़ाज भी पूरी तरह बदल चुका है। चेहरे पर झुंझलाहट, बात-बात पर चिड़चिड़ापन और गुस्सा—बेचारे स्टाफ की तो शामत ही आ गई है। लगता है साहब का नुकसान सिर्फ पोस्टिंग का नहीं, मूड का भी भारी पड़ा है।
7 सीनियर आईएएस का नहीं लग रहा है मन
प्रमुख सचिव स्तर के एक सीनियर आईएएस का मन प्रदेश में काम करने में नहीं लग पा रहा है। तेज तर्रार और ईमानदार कार्यशैली वाले यह साहब फिर से डेप्युटेशन पर जाने के प्रयास में लगे हुए हैं। साहब पहले विदेश में डेप्युटेशन पर पदस्थ रह चुके हैं। इस बार भी साहब की मंशा है कि विदेश में कोई पोस्ट डेप्युटेशन पर मिल जाए। साहब ने पिछले दिनों सरकार के साथ विदेश दौरा भी किया है। इस दौरान भी साहब ने डेप्युटेशन वाली पोस्ट तलाशने का काम किया है।
8 रिटायर्ड आईपीएस ने शुरू की क्रिकेट अकादमी
प्रदेश काडर से रिटायर हुए एक सीनियर आईपीएस साहब इन दिनों नई पिच तैयार करने में जुटे हैं। प्रशासन की पारी खेलने के बाद अब साहब ने क्रिकेट की दुनिया में एंट्री मार दी है। साहब ने हाल ही में एक क्रिकेट अकादमी की शुरुआत की है। वैसे यह पहला मौका नहीं है जब साहब शिक्षा के मैदान में उतरे हों। इससे पहले भी वे प्रदेश में स्कूलों का संचालन कर रहे हैं। साहब का मानना है कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और थोड़ी तराश की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार करने के बड़े मकसद के साथ शुरू की गई इस अकादमी को लेकर साहब काफी आत्मविश्वास में हैं। उनका दावा है कि बहुत जल्द उनके संस्थान से ऐसे खिलाड़ी निकलने लगेंगे, जो प्रदेश ही नहीं देश का नाम रोशन करेंगे।
9 बड़े साहब का मिशन शुरू करने में फैल हो रहीं सचिव मैडम
बड़े साहब इन दिनों महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक बेहद अहम मिशन को लेकर खासे गंभीर हैं। इस मिशन की कमान उन्होंने एक बड़े विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही सचिव मैडम को सौंप रखी है। मंशा साफ है—काम दिखे, असर दिखे। लेकिन अफसोस, मिशन फाइलों से आगे बढ़ ही नहीं पा रहा। जिम्मेदारी मिले हुए अच्छा-खासा वक्त गुजर चुका है, मगर हालात यह हैं कि न तो अब तक मिशन की कार्यकारिणी की बैठक हो सकी है, न उसका लोगो तैयार हुआ है और न ही कोई दमदार टैगलाइन सामने आ पाई है। मिशन तो दूर, पहचान तक अधूरी है। हर समीक्षा बैठक में बड़े साहब मिशन की जरूरत, उसकी सामाजिक उपयोगिता और सरकार की प्राथमिकताओं पर लंबा भाषण देते हैं। सचिव मैडम भी पूरे आत्मविश्वास के साथ अगली बैठक में पूरी तैयारी के साथ आने का भरोसा दिलाती हैं। लेकिन अगली बैठक आते-आते कहानी फिर वहीं की वहीं—मैडम बिना किसी ठोस प्रेजेंटेशन के हाजिर। नतीजा वही पुराना। बड़े साहब की भौंहें तनती हैं, नसीहतों का दौर शुरू होता है और मिशन एक बार फिर ‘अगली बैठक’ के भरोसे छोड़ दिया जाता है।
10 आईएएस मैडम के कुत्तों से कॉलोनी के लोग परेशान
राजधानी की सबसे पॉश कॉलोनी में रहने वाली एक आईएएस मैडम इन दिनों अपने शौक को लेकर खासा चर्चा में हैं। शौक भी ऐसा कि पड़ोसी ही नहीं, बंगले पर काम करने वाले लोग भी परेशान हो उठे हैं। दरअसल मैडम को कुत्ते पालने का बेहद शौक है, लेकिन यह शौक अब पूरे मोहल्ले के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। बताया जा रहा है कि मैडम ने सरकारी आवास में देशी नस्ल के कुत्ते पाल रखे हैं—वो भी एक-दो नहीं, बल्कि दो दर्जन से ज्यादा। नतीजा यह कि आसपास के लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो गया है। कभी कोई शिकायत लेकर जाता है तो मामला रोज़मर्रा के विवाद में बदल जाता है। परेशानी सिर्फ पड़ोस तक सीमित नहीं है। मैडम के बंगले पर काम करने वाले नौकर-चाकर भी इन कुत्तों की देखरेख और रोज़ की उठा-पटक से खासे त्रस्त हैं। सेवा करते-करते कई लोग मन ही मन गिनती करने लगे हैं कि आखिर यह सिलसिला कब थमेगा। कॉलोनी में अब यही चर्चा है कि आखिर मैडम ने इतनी बड़ी तादाद में कुत्ते पालने का फैसला क्यों किया। वजह जो भी हो, फिलहाल तो पॉश कॉलोनी में कुत्तों की मौजूदगी ने शांति की नींद उड़ा रखी है।





