युवा आईएएस के दलालों की कुंडली तैयार कर रही है केन्द्रीय खुफिया एजेंसी! : पूर्व मंत्री का बंगला अब आईपीएस के नाम! : रिटायर्ड आईएएस को इनकम टैक्स का नोटिस

1 युवा आईएएस के दलालों की कुंडली तैयार कर रही है केन्द्रीय खुफिया एजेंसी
सीईओ के पद पर तैनात एक युवा आईएएस इन दिनों खासे टेंशन में बताए जा रहे हैं। वजह है—उनके करीबी दलालों का एक स्टिंग ऑपरेशन की जद में आ जाना। स्टिंग सामने आने के बाद से साहब को डर सताने लगा है कि कहीं न सिर्फ मलाईदार पद हाथ से न निकल जाए, बल्कि जल्द मिलने वाली कलेक्टरी की राह भी मुश्किल न हो जाए। इसी आशंका के चलते साहब अब खुद को बेहद ईमानदार अफसर साबित करने में जुट गए हैं। इसके लिए वे अपनी संस्था में आउटसोर्स पर काम कर रहे छोटे-मोटे कर्मचारियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रहे हैं, ताकि संदेश जाए कि साहब भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त हैं। हालांकि, अंदरखाने की खबर यह है कि जिन मुख्य दलालों के नाम पर पूरा खेल चल रहा है, वे अब भी साहब का नाम लेकर धड़ल्ले से वसूली में लगे हुए हैं। यानी कार्रवाई नीचे तक सीमित है, ऊपर सब कुछ जस का तस। साहब ने प्राइवेट एजेंसियों में अपने दलालों की भर्ती कराकर उनसे वसूली कराते हैं। मामला इसलिए भी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि साहब प्रधानमंत्री की एक महत्वपूर्ण योजना को संचालित करने वाली एजेंसी से जुड़े हुए हैं। इसी वजह से चर्चा है कि केंद्रीय खुफिया एजेंसी भी साहब की कुंडली खंगालने में जुट चुकी है।
2 पूर्व मंत्री का बंगला अब आईपीएस के नाम!
पूर्व मुख्यमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले एक पूर्व मंत्री की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। राजधानी में स्थित उनका आलीशान सरकारी बंगला अब उनसे खाली करवाया जा सकता है। वजह साफ है—सरकार ने यह बंगला हाल ही में राजधानी में एक अहम पद पर पदस्थ किए गए सीनियर आईपीएस को आवंटित कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले भी यह बंगला एडीजी रैंक के एक अधिकारी को ऑफर किया गया था, लेकिन तब साहब ने इसे लेने से साफ इन्कार कर दिया था। वहीं, पूर्व मंत्री चुनाव हारने के बाद से ही इस बंगले पर कथित तौर पर अवैध रूप से कब्जा जमाए बैठे हैं। अब हालात ऐसे बन गए हैं कि सत्ता और सिस्टम दोनों का दबाव बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस बार मामला टलने वाला नहीं है और पूर्व मंत्री को हर हाल में बंगला खाली करना ही पड़ेगा।
3 रिटायर्ड आईएएस को इनकम टैक्स का नोटिस
नौकरी के दिनों में एसीएस स्तर के जिस आईएएस साहब का प्रशासन पर जलवा रहता था, रिटायरमेंट के बाद से उनकी किस्मत मानो उनसे रूठ गई है। एक के बाद एक मुसीबतें साहब का पीछा नहीं छोड़ रहीं। अब ताज़ा मामला इनकम टैक्स विभाग का है, जिसने साहब को नोटिस थमाकर नई टेंशन दे दी है। कहानी उस दौर की है जब साहब जल वाले विभाग में अहम पद पर पदस्थ थे। बताते हैं कि उसी समय एक बड़े कॉरपोरेट मामले में ईडी ने एक नामी कंपनी के कर्ताधर्ता को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान जब कंपनी के बैंक खातों की खाक छानी गई, तो पैसों की ट्रेलिंग करते-करते जांच एजेंसियां सीधे साहब के खाते तक पहुंच गईं। रिकॉर्ड्स के मुताबिक, कंपनी की ओर से साहब के खाते में करीब एक करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थे। अब इसी लेन-देन को लेकर इनकम टैक्स विभाग ने साहब से जवाब तलब किया है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही साहब से इस रकम को लेकर लंबी पूछताछ हो सकती है।
4 चुनावी ड्यूटी से परेशान आईजी साहब
सीधी भर्ती वाले आईजी रैंक के एक आईपीएस साहब इन दिनों खासे तनाव में हैं। हालात ऐसे हैं कि साहब की रातों की नींद तक उड़ चुकी है। वजह है—आगामी विधानसभा चुनाव में उनकी ड्यूटी लग जाना। बताया जा रहा है कि साहब ने अपनी अस्वस्थता का हवाला देते हुए सरकार के माध्यम से केन्द्रीय चुनाव आयोग को चुनावी ड्यूटी से नाम कटवाने का अनुरोध भी भेजा है। लेकिन दिल्ली से अब तक कोई जवाब नहीं आया है। इधर, केन्द्रीय चुनाव आयोग ने दिल्ली में ऑब्जर्वर बनाए गए आईएएस और आईपीएस अफसरों की बाकायदा ब्रीफिंग भी कर दी है, जिससे साहब की बेचैनी और बढ़ गई है। असल चिंता की जड़ कुछ पुरानी यादों में छुपी है। सूत्र बताते हैं कि साहब कभी पड़ोसी राज्य में डेप्युटेशन पर गए थे। वहां उनकी कार्यशैली से राज्य के अफसर इतने नाखुश हुए कि साहब की सर्विस बुक में ही “नौकरी के लिए अयोग्य” होने की टीप चढ़ा दी गई थी। इसी टीप का असर रहा कि साहब को प्रमोशन मिलने में पूरे दस साल लग गए। अब साहब को डर सता रहा है कि अगर चुनावी ड्यूटी में जरा-सी भी चूक हो गई, तो अगला प्रमोशन फिर से खतरे में पड़ सकता है। शायद इसी वजह से साहब किसी भी सूरत में प्रदेश के बाहर जाकर जिम्मेदारी उठाने के मूड में नहीं हैं।
5 काम देखते ही बढ़ जाता है मैडम का ब्लड प्रेशर
एक प्रमोटी आईएएस मैडम को हाल ही में एक बड़े और बेहद संवेदनशील विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। विभाग वैसे ही अफसरों की कमी से जूझ रहा है, ऊपर से काम का दबाव इतना कि मैडम का ब्लड प्रेशर बार-बार हाई हो जा रहा है। आलम यह है कि ब्लड प्रेशर चेक करने के लिए मैडम को बार-बार मशीन मंगवानी पड़ रही है। दिलचस्प बात यह है कि इस विभाग में पोस्टिंग के लिए मैडम का नाम काफी लंबे समय से चर्चा में था। हर बार कोई न कोई अड़चन आ जाती थी और बात टल जाती थी। अब जब आखिरकार विभाग मिल ही गया है, तो काम की रफ्तार और फाइलों के अंबार ने मैडम की सेहत पर असर डालना शुरू कर दिया है। सूत्रों की मानें तो विभाग में काम कम होने वाला नहीं है, ऐसे में देखना होगा कि मैडम काम संभालेंगी या ब्लड प्रेशर पहले काबू में आएगा।
6 एसीएस साहब को फिर विपश्यना की ज़रूरत!
काफी अरसे तक शांत रहने के बाद गुस्सैल मिज़ाज वाले एसीएस साहब एक बार फिर अपने पुराने रौद्र रूप में लौट आए हैं। सचिवालय के गलियारों में इन दिनों उनकी नाराज़गी के किस्से आम हो चले हैं। हालात ये हैं कि लगभग हर बैठक में साहब किसी न किसी अधीनस्थ अफसर पर भड़कते नज़र आ रहे हैं। हाल ही में तो मामला यहां तक पहुंच गया कि साहब की ठन गई एक प्रमुख सचिव स्तर के सीनियर आईएएस से ही। वाकया वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का है। जैसे ही सीधे और सरल स्वभाव वाले पीएस ने यह कहा कि संबंधित जानकारी उन्होंने विभाग के एचओडी से मंगा ली है, एसीएस साहब का पारा चढ़ गया। गुस्से में साहब ने यहां तक कह दिया—“फिर शासन की कोई ज़रूरत ही क्या है? आप हर काम अपने स्तर पर ही कर लिया करें!”साहब का यह पुराना अंदाज़ देखकर मंत्रालय में अफसर आपस में कानाफूसी करने लगे हैं। चर्चा है कि अगर यही हाल रहा तो एसीएस साहब को एक बार फिर विपश्यना केंद्र की राह पकड़नी पड़ सकती है, ताकि भीतर का ज्वालामुखी कुछ तो शांत हो सके।
7 सरकार से नाराज़ चल रहे हैं पूर्व मंत्री के रिश्तेदार आईएएस
सीधी भर्ती वाले सचिव स्तर के एक आईएएस इन दिनों सरकार से खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं। साहब का सियासी बैकग्राउंड भी कम दिलचस्प नहीं है—वे सत्ताधारी दल के एक कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री के करीबी रिश्तेदार हैं। जब तक रिश्तेदार की सरकार में धाक थी, तब तक साहब को मनपसंद और मलाईदार पोस्टिंग मिलती रहती थी। लेकिन चुनाव में रिश्तेदार की हार के बाद साहब के सितारे भी गर्दिश में आ गए। हाल ही में जारी तबादला सूची में साहब को एक अच्छे और प्रभावशाली विभाग से हटाकर लूप लाइन में डाल दिया गया। इसके बाद से ही साहब का मूड खासा खराब बताया जा रहा है। सूत्रों की मानें तो तभी से साहब केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का रास्ता तलाशने लगे थे। दिलचस्प बात यह है कि इस बार कोशिश रंग भी ला गई है और काबिलियत के आधार पर साहब को हरी झंडी मिल चुकी है। अब बस केंद्र सरकार के औपचारिक आदेश का इंतज़ार है। आदेश निकलते ही साहब प्रदेश की राजधानी से देश की राजधानी की ओर कूच करेंगे।
8 तीन आईएएस पर भारी एक चीफ इंजीनियर
विभाग में इन दिनों एक चीफ इंजीनियर का ऐसा जलवा है कि तीन-तीन आईएएस मिलकर भी साहब को काबू में नहीं कर पा रहे। हैरानी की बात यह है कि इस लिस्ट में एक एसीएस, एक सचिव और एक डिप्टी सेक्रेट्री स्तर के आईएएस शामिल हैं। चीफ इंजीनियर साहब का क्षेत्राधिकार कोई छोटा-मोटा नहीं—करीब दो दर्जन जिले उनके कंट्रोल में आते हैं। चर्चा है कि साहब ने हर जिले के मुखिया इंजीनियर को साफ फरमान दे रखा है—“कुछ भी करो, लेकिन हर महीने एक से दो लाख रुपये चाहिए। ऊपर तक भेजना होता है।” अब ऐसे फरमान को कौन सा इंजीनियर नजरअंदाज करने की हिम्मत करेगा? नतीजा यह है कि जिले-जिले में इंजीनियर साहब रकम जुटाने में लगे हैं और पैसा नियमित रूप से ऊपर पहुंचाया जा रहा है।विभागीय गलियारों में सवाल यही तैर रहा है—जब तीन आईएएस भी बेबस हों, तो फिर कार्रवाई की उम्मीद किससे की जाए?
9 काश! ऐसी लूप लाइन सभी अफसरों को नसीब हो
एक प्रमोटी आईएएस साहब पिछले काफी अरसे से एक ही निगम में बतौर एमडी कुर्सी जमाए बैठे हैं। निगम को अफसरशाही में भले ही लूप लाइन माना जाता हो, लेकिन साहब के लिए यह पोस्टिंग किसी जन्नत से कम नहीं है। अंदरखाने की खबर है कि सालाना करोड़ों रुपये तो साहब सिर्फ प्रिंटिंग के काम से ही कमा लेते हैं। हाल ही में जैसे ही उनके तबादले की हल्की-सी सुगबुगाहट कानों तक पहुँची, साहब हरकत में आ गए। पूरी ताकत झोंक दी गई और आखिरकार तबादला निरस्त भी हो गया। बताया जाता है कि साहब ने ऊपर तक साफ संदेश भिजवाया—उन्हें इसी लूप लाइन वाले निगम में ही बने रहना है, कहीं और पोस्टिंग उन्हें मंजूर नहीं। साहब की दलीलों में वजन भी था या यूं कहें कि वजनदार संपर्क। चर्चा है कि वे एक पूर्व केंद्रीय मंत्री के बेहद करीबी माने जाते हैं, और यही नज़दीकी इस बार भी उनके काम आ गई। वैसे, ये वही साहब हैं जिन्हें कभी आईएएस अवार्ड मिलना भी आसान नहीं था—काफी जद्दोजहद के बाद यह तमगा नसीब हुआ था।
10 एक शहर में अनफिट, दूसरे में फिट!
आर्थिक नगरी की नगर सरकार में अहम कुर्सी पर बैठे एक इंजीनियर साहब इन दिनों खासी चर्चा में हैं। वजह भी दिलचस्प है। हाईकोर्ट के आदेश पर साहब से उनके सारे काम वापस ले लिए गए थे। अदालत ने साफ तौर पर उन्हें उस पद के लिए अनफिट करार दिया था। नतीजा यह हुआ कि इंजीनियर साहब करीब आठ महीने तक बिना किसी जिम्मेदारी के बैठे रहे। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। अब करीब आठ महीने बाद वही इंजीनियर साहब एक बड़े शहर की नगर सरकार में उसी तरह की जिम्मेदारी संभालते नजर आ रहे हैं, जिसके लिए हाईकोर्ट ने उन्हें पहले ही अनफिट बता दिया था। अब गलियारों में सवाल गूंज रहे हैं—जब एक शहर में साहब उस काम के काबिल नहीं थे, तो ऐसा क्या चमत्कार हो गया कि दूसरे शहर में वही काम करने के लिए वे पूरी तरह फिट हो गए? क्या फिटनेस सर्टिफिकेट का पता बदल गया या फिर शहर बदलते ही योग्यता भी अपडेट हो गई? नगर सरकार के गलियारों में इस ‘अनफिट से फिट’ होने की कहानी को लेकर कानाफूसी तेज है और लोग इसे सिस्टम का नया कमाल बता रहे हैं।





