एसीएस मैडम जमकर हुईं नाराज : सीनियर आईपीएस के कारण “सुप्रीम” फटकार : प्रमोटी आईएएस की मांग, विधायक के बेटे पर हो सख्त कार्रवाई

एसीएस मैडम जमकर हुईं नाराज : सीनियर आईपीएस के कारण “सुप्रीम” फटकार : प्रमोटी आईएएस की मांग, विधायक के बेटे पर हो सख्त कार्रवाई
1 एसीएस मैडम जमकर हुईं नाराज
एक सेमिनार में शामिल होने पहुंचीं एसीएस उस वक्त आयोजकों पर भड़क उठीं, जब एक साधारण सी चूक ने पूरे कार्यक्रम की लय बिगाड़ दी। यह कार्यक्रम प्रशासन अकादमी में आयोजित किया गया था, जहां उन्हें प्रोजेक्टर के जरिए प्रेजेंटेशन देना था। लेकिन जैसे ही प्रोजेक्टर चालू हुआ, स्थिति असहज हो गई। व्हाइट स्क्रीन पर पहले से किसी ने सूचना लिख रखी थी, जिससे प्रेजेंटेशन के स्लाइड्स और लिखे हुए शब्द आपस में गड्डमड्ड हो गए। न ठीक से स्लाइड्स पढ़ी जा रही थीं, न ही दर्शकों को कुछ समझ आ रहा था। यह देखकर एसीएस ने आयोजकों और अकादमी स्टाफ को जमकर फटकार लगाई और तुरंत स्क्रीन साफ कराने को कहा। हालांकि, मुश्किल तब और बढ़ गई जब पता चला कि सूचना पर्मानेंट मार्कर से लिखी गई है, जो आसानी से मिट नहीं रही थी।नतीजा यह रहा कि एक तरफ प्रेजेंटेशन चलता रहा, तो दूसरी तरफ स्क्रीन साफ करने की कोशिशें जारी रहीं। पूरे घटनाक्रम ने कार्यक्रम की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए।
2 सीनियर आईपीएस के कारण “सुप्रीम” फटकार
एक सीनियर आईपीएस अधिकारी की लापरवाही के कारण सरकार को सुप्रीम कोर्ट की कड़ी फटकार झेलनी पड़ी। मामला एक जनहित याचिका की सुनवाई से जुड़ा है, जिसमें कोर्ट ने देश के सभी राज्यों से जवाब मांगा था। यह जवाब पुलिस मुख्यालय की एक विशेष शाखा द्वारा तैयार किया जाना था, लेकिन शाखा के मुखिया सीनियर आईपीएस अधिकारी ने न तो जवाब तैयार कराया और न ही इस काम के लिए किसी अधिकारी की नियुक्ति की। सुनवाई के दौरान स्थिति तब असहज हो गई, जब पता चला कि सिर्फ यही राज्य ऐसा है जिसने कोर्ट को कोई जवाब नहीं भेजा। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सरकार के रवैये को असंवेदनशील बताया। कोर्ट की फटकार के बाद विभाग में हड़कंप मच गया। सीनियर अधिकारियों की नाराजगी सामने आते ही छुट्टी के दिन पुलिस मुख्यालय खोला गया और आनन-फानन में बैठकर जवाब तैयार किया गया।
3 प्रमोटी आईएएस की मांग, विधायक के बेटे पर हो सख्त कार्रवाई
एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी की सत्ताधारी दल के विधायकों से नाराजगी खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। जब वे एक बड़े जिले में कलेक्टर थे, तब उनकी क्षेत्रीय विधायक से तीखी बहस हुई थी, जिसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था। अब एक नया मामला फिर चर्चा में है, जो सत्ताधारी दल के ही एक विधायक से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि विधायक के बेटे ने अपने वाहन से कुछ लोगों को टक्कर मार दी। इस घटना पर एक तेज-तर्रार रिटायर्ड महिला आईएएस ने सोशल मीडिया पर तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा—“चाय से ज्यादा केतली गर्म”, इशारा साफ तौर पर विधायक से ज्यादा उनके बेटे के रवैये की ओर था। उन्होंने पूरा घटनाक्रम भी साझा किया। इसके बाद मामला और गरमा गया, जब उसी पोस्ट के कमेंट सेक्शन में प्रमोटी आईएएस अधिकारी भी कूद पड़े। उन्होंने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए टिप्पणी की। दिलचस्प बात यह है कि यही अधिकारी हाल ही में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए हैं, लेकिन उनके तेवर अब भी पहले जैसे ही नजर आ रहे हैं।
4 कलेक्टर और एसपी मैडम के बीच सब कुछ ठीक नहीं?
एक जिले की कलेक्टर और वहां की तेज-तर्रार एसपी मैडम के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हालात ऐसे हैं कि छोटे-बड़े मसलों को सुलझाने के लिए भी अक्सर राजधानी का रुख करना पड़ रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री से जुड़े एक प्रोजेक्ट को लेकर यह तनातनी फिर सामने आई। प्रोजेक्ट के तहत कुछ लोगों का विस्थापन होना है, जिसके लिए कलेक्टर मैडम ने एसपी मैडम से पुलिस फोर्स की मांग की। लेकिन कई बार अनुरोध के बावजूद जब फोर्स उपलब्ध नहीं कराई गई, तो मामला ऊपर तक पहुंच गया।कलेक्टर मैडम ने राजधानी में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों को पूरी स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद एसपी मैडम ने पुलिस बल तो मुहैया करा दिया, लेकिन साथ ही यह नसीहत भी दे दी कि कोई सख्त कार्रवाई न की जाए।
5 दो अफसरों के रसूख के कारण सरकार बदलेगी पॉलिसी
एक बड़े विभाग में संविदा पर पदस्थ दो रसूखदार अधिकारियों की वजह से सरकार को अपनी ही पॉलिसी बदलने की तैयारी करनी पड़ रही है। मामला जल्द ही कैबिनेट में लाए जाने की चर्चा है। दरअसल, प्रदेश सरकार की नीति के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद अधिकारियों को अधिकतम 65 वर्ष की उम्र तक ही संविदा नियुक्ति दी जा सकती है। लेकिन जिन दो अधिकारियों की बात हो रही है, वे इस उम्र सीमा को पार कर चुके हैं। इसके बावजूद सरकार उन्हें हटाने के मूड में नहीं दिख रही है। बताया जा रहा है कि उनकी उपयोगिता को देखते हुए पॉलिसी में बदलाव का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि उन्हें आगे भी पद पर बनाए रखा जा सके। दिलचस्प बात यह भी है कि ये दोनों अधिकारी अपने रसूख के चलते पांचवीं मंजिल से नीचे के अधिकारियों से न तो मिलना पसंद करते हैं और न ही बातचीत करना जरूरी समझते हैं।
6 ग्रह बिगड़े तो विभाग हुआ अनाथ
एक विभाग के हालात इन दिनों कुछ ठीक नहीं चल रहे हैं—मानो ग्रह-नक्षत्र ही उल्टे पड़ गए हों। सबसे पहले विभाग के एसीएस बीमारी के चलते अवकाश पर चले गए। उनके जाने के बाद जिम्मेदारी एक ऐसे एसीएस को सौंपी गई, जो पहले से ही “लूप लाइन” में माने जा रहे थे। उन्होंने आते ही फंड से जुड़ी फाइलें तो निपटा दीं, लेकिन जैसे ही बाकी काम का दबाव बढ़ा, वे भी छुट्टी पर निकल गए। इसके बाद तीसरे एसीएस को विभाग का प्रभार दिया गया। सरल और संवेदनशील माने जाने वाले इस अधिकारी से उम्मीद थी कि वे कुछ समय तक कमान संभालेंगे। लेकिन उन्होंने विभाग के मुखिया के कक्ष में बैठने तक से इनकार कर दिया और अपने मूल विभाग के कमरे से ही फाइलों का निपटारा करते रहे। अब खबर है कि वे भी अवकाश पर चले गए हैं। फिलहाल स्थिति यह है कि इस विभाग का प्रभार किसी के पास नहीं है—और विभाग लगभग “अनाथ” जैसी स्थिति में पहुंच गया है।
7 कलेक्टर की ब्रांडिंग ने ही खोल दी सरकारी दावों की पोल
एक प्रमोटी आईएएस, जो इस समय एक जिले में कलेक्टर के तौर पर पदस्थ हैं, अपनी ब्रांडिंग के शौक के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार उनकी यही ब्रांडिंग सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। दरअसल, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो साझा की, जिसमें वे अपने जिले के एक सरकारी स्कूल में जमीन पर बैठकर बच्चों को पढ़ाते नजर आ रहे हैं। पहली नजर में यह तस्वीर सरल और संवेदनशील छवि पेश करती है, लेकिन गौर से देखने पर कई बातें सामने आती हैं। तस्वीर में कलेक्टर जिस टाट-पट्टी पर बच्चों के साथ बैठे हैं, वह फटी हुई दिखाई दे रही है। वहां केवल आठ बच्चे मौजूद हैं, जिनमें से किसी ने भी यूनिफॉर्म नहीं पहनी है। इतना ही नहीं, तीन बच्चे तो उनके पीछे बैठे नजर आ रहे हैं। अब इस तस्वीर को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जब सरकार सरकारी स्कूलों के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर बेंच और यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने का दावा करती है, तो फिर जमीनी हकीकत कुछ और क्यों दिख रही है? आखिर यह सामान जा कहां रहा है?
8 एसीएस साहब फिर गए विपश्यना केन्द्र
गुस्से वाले स्वभाव के लिए चर्चित एक एसीएस एक बार फिर विपश्यना केंद्र पहुंच गए हैं। इस बार खास बात यह है कि उनका प्रवास सामान्य से कुछ लंबा बताया जा रहा है, जिससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि वे हाल के दिनों में ज्यादा तनाव में रहे होंगे। साहब का विपश्यना के लिए जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन इस बार अवधि बढ़ने से विभाग में भी चर्चा गर्म है। इधर, उनके अवकाश पर जाने के बाद विभाग में पदस्थ अधिकारियों ने कुछ राहत जरूर महसूस की है। बताया जाता है कि साहब की मौजूदगी में काम का दबाव काफी ज्यादा रहता है और उनके सख्त रवैये के कारण स्टाफ हमेशा व्यस्त बना रहता है। ऐसे में उनके विपश्यना प्रवास ने विभाग को थोड़ी “सांस लेने” की मोहलत दे दी है।
9 विदेश में फंसी आईएएस अफसरों की पत्नियां
पिछले दिनों प्रदेश के कुछ सीनियर आईएएस अधिकारियों के परिवारों की एक खास यात्रा चर्चा में रही। अफसरों की पत्नियां प्राइवेट चार्टर्ड प्लेन से विदेश घूमने निकलीं, जहां उन्होंने जमकर शॉपिंग और सैर-सपाटा किया। लेकिन वापसी के वक्त एक ऐसी अड़चन आ गई, जिसने पूरी ट्रिप का मजा किरकिरा कर दिया। बताया जाता है कि अंतरराष्ट्रीय हालात, खासकर अमेरिका-ईरान के बीच तनाव के चलते विमान के लिए फ्यूल की व्यवस्था करना मुश्किल हो गया। स्थिति इतनी पेचीदा हो गई कि सभी ने अपने-अपने स्तर पर संपर्क साधने शुरू कर दिए। फोन पर लगातार कोशिशें हुईं, मामला बड़े अधिकारियों तक भी पहुंचा, लेकिन तुरंत कोई समाधान नहीं निकल सका। आखिरकार एक लोकल कनेक्शन काम आया और किसी तरह फ्यूल की व्यवस्था हो सकी। तब जाकर सभी की सुरक्षित वापसी संभव हो पाई—हालांकि इस घटनाक्रम ने उनकी पूरी यात्रा की चमक फीकी जरूर कर दी।
10 नए कलेक्टर ने ज्वॉइन करते ही पुराने की कार्यशैली पर खड़े किए सवाल
हाल ही में जारी तबादला सूची के बाद एक जिले में नए कलेक्टर ने पदभार संभालते ही अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। ज्वॉइन करने के तुरंत बाद उन्होंने अधिकारियों की बैठक बुलाई और इशारों-इशारों में अपने पूर्ववर्ती कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। साहब ने कहा कि जिला कई मामलों में पीछे रह गया है और जिस स्तर का विकास होना चाहिए था, वह नहीं हो पाया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अब तेजी से काम करते हुए जिले को हर क्षेत्र में आगे लाना होगा। इसके बाद कलेक्टर ने कार्यालय का निरीक्षण भी किया और मीडिया के सामने कहा कि “अच्छे काम की शुरुआत घर से होती है”, लेकिन यहां तो “घर” की ही स्थिति ठीक नहीं है, जिसे सुधारने की जरूरत है। हालांकि, अफसरशाही के गलियारों में यह भी चर्चा है कि यही अधिकारी पहले कथित शिकायतों के चलते लूप लाइन में भेजे गए थे, लेकिन अब फिर से कलेक्टर की कुर्सी तक पहुंच गए हैं।
Abhishek Dubey

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Managing Editor

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