बोल्ड नगर निगम कमिश्नर और महापौर में टकराव : एसपी बनते-बनते रह गए प्रमोटी आईपीएस : “सीईओ साहब की ट्रांसफर फैक्ट्री!”

बोल्ड नगर निगम कमिश्नर और महापौर में टकराव : एसपी बनते-बनते रह गए प्रमोटी आईपीएस : “सीईओ साहब की ट्रांसफर फैक्ट्री!”
1 बोल्ड कमिश्नर और महापौर में टकराव
कोयले के लिए मशहूर एक जिले में नगर निगम की कमिश्नर और महापौर के बीच की खींचतान अब राजधानी तक चर्चा का विषय बन चुकी है। तेज़-तर्रार और बोल्ड स्वभाव की कमिश्नर ने हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र भेजकर महापौर की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। सूत्रों के अनुसार, कमिश्नर ने शिकायत में कहा है कि बैठक में लिए गए फैसलों को महापौर अपने अनुसार मिनिट्स में बदल देती हैं। साथ ही अधिकारियों के निलंबन व बहाली जैसे निर्णय भी मनमर्जी से किए जाते हैं। कमिश्नर का यह भी कहना है कि कई मामलों में नियमों का पालन नहीं हो रहा है। स्थिति तब और खराब हो गई जब कमिश्नर मैडम ने महापौर मैडम के पति पर प्रॉपर्टी टैक्स चोरी की करीब 12 लाख रुपये की रिकवरी निकाल दी। दिलचस्प बात यह है कि कमिश्नर प्रशासनिक हलकों में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के काफ़ी करीबी मानी जाती हैं। शायद इसीलिए माना जा रहा है कि यह विवाद यहीं थमने वाला नहीं—और कमिश्नर भी पीछे हटने वाली नहीं हैं।

2 एसपी बनते-बनते रह गए प्रमोटी आईपीएस
लूप लाइन में पदस्थ एक प्रमोटी आईपीएस अफसर की किस्मत खुलते-खुलते रह गई। चर्चा है कि साहब कोयले के लिए मशहूर बड़े जिले में एसपी बनने से बस एक कदम दूर थे। दरअसल, राजधानी से सटे जिले में हाल ही में हुई बड़ी घटना के बाद वहां के एसपी को बदलने की तैयारी शुरू हुई। पुलिस मुख्यालय ने जो प्रस्ताव भेजा, उसमें सुझाव था कि कोयले वाले जिले के एसपी को घटना वाले जिले में भेजा जाए और उनकी जगह लूप लाइन वाले प्रमोटी आईपीएस साहब को पोस्ट किया जाए। सब कुछ तय माना जा रहा था, लेकिन एन-वक्त पर बाज़ी पलट गई। प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक मुखिया ने अचानक फैसला बदलते हुए राजधानी में पदस्थ एक ईमानदार छवि वाले, सीधी भर्ती के I आईपीएस को घटना वाले जिले का एसपी बना दिया। खास बात यह कि नए एसपी ने पदभार संभालते ही बड़े साहब के भरोसे पर खरा उतरते हुए मात्र 24 घंटे में पूरा मामला सुलझा दिया।

3 “सीईओ साहब की ट्रांसफर फैक्ट्री!”
जिला पंचायत में पदस्थ एक प्रमोटी आईएएस ने इन दिनों अपना नया “बिज़नेस मॉडल” खड़ा कर लिया है—ट्रांसफर इंडस्ट्री! इस इंडस्ट्री की खासियत यह है कि इसमें न मशीन चाहिए, न पूंजी… बस कमाई ही कमाई! बताया जाता है कि साहब रोज़ाना 2-3 ट्रांसफर का टारगेट लेकर ऑफिस पहुंचते हैं। पंचायत सचिवों के तबादले किए जाते हैं और फिर उन्हीं ट्रांसफरों को 15 से 20 हज़ार रुपये में निरस्त भी कर दिया जाता है। कलेक्शन की जिम्मेदारी साहब ने अपने सबसे भरोसेमंद साथी को सौंप रखी है—विश्वसनीय ड्राइवर साहब! वही लेन-देन का पूरा खेल संभालते हैं।साहब की एक और खासियत चर्चा में है—उनके पास 8 मोबाइल फोन हैं! कहते हैं, हर फोन से साहब अपनी अलग-अलग “मित्रों” से बात करते हैं।

4 प्रमोटी आईएएस को आवंटित बंगले के लिए खींचतान
प्रदेश में एक प्रमोटी आईएएस को आवंटित सरकारी बंगला इन दिनों विवाद का कारण बना हुआ है। यह वही बंगला है जो पहले एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के पास था। चूंकि उनके पास पहले से दो सरकारी आवास थे, इसलिए विभाग ने यह बंगला हाल ही में जिले की कलेक्टरी से हटाए गए अफसर को दे दिया। विवाद तब शुरू हुआ जब इसी बंगले पर एक सीनियर आईआरएस अधिकारी की नजर पड़ गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने अपने प्रभाव और संपर्कों का इस्तेमाल करते हुए बंगला अपने नाम कराने की कवायद शुरू कर दी है। अफसरशाही में चर्चा है कि जल्द ही यह आवास उनके नाम भी हो सकता है। दिलचस्प बात यह है कि बंगले का वास्तविक कब्जा अभी भी उसी पुराने अधिकारी के पास है जिनके पास पहले दो आवास थे—और यह साहब भी दक्षिण पृष्ठभूमि वाले ही बताए जाते हैं।

5 बड़े जिले की कलेक्टर मैडम पर बड़ी नाराज़गी?
राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक बड़े जिले की कलेक्टर मैडम की खूब चर्चा है। बताया जाता है कि हाल ही में लॉ-एंड-ऑर्डर की समीक्षा के लिए हुई एक महत्वपूर्ण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में बड़े साहब ने उन्हें जमकर फटकार लगाई। सूत्रों के मुताबिक, साहब ने नाराज़गी जताते हुए यह तक कह दिया कि “आपका जिला हर मामले में पिछड़ जाता है!” कहते हैं कि इस टिप्पणी के बाद मैडम का चेहरा देखने लायक था। दिलचस्प बात यह है कि मैडम को इस जिले की कमान संभाले काफी वक्त हो चुका है। इधर, चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे SIR के कामकाज के पूरा होने के बाद जिले में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होने की संभावना जताई जा रही है।

6 कुख्यात एएसपी के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
इन दिनों एक कुख्यात एडिशनल एसपी की चर्चा खूब है। कहा जा रहा है कि हाल ही में हुई बड़ी घटना का असली मास्टरमाइंड यही साहब थे। इन्हें एक बड़े जिले से हटाकर मुख्यालय भेज दिया गया था, लेकिन जनाब को वहां आमद देना ही मंजूर नहीं हुआ। छह महीने बीत गए, लेकिन साहब मुख्यालय पहुंचने की ज़हमत तक नहीं उठाई। ऊपर से ट्रांसफर निरस्त कराने हाईकोर्ट की शरण ले ली। लेकिन अब किस्मत ने साथ छोड़ दिया—हाईकोर्ट ने साहब की याचिका सीधे खारिज कर दी है। उधर मुख्यालय ने भी फाइल आगे बढ़ा दी है और सरकार को आधिकारिक पत्र भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी कार्रवाई की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और एएसपी की मुश्किलें बढ़ना तो तय है।

7 आईएएस बिरादरी में ‘बर्थडे कल्चर’ की चर्चा—नई परंपरा की गूंज!
राजधानी के पावर कॉरिडोर में इन दिनों एक सीनियर आईएएस की नई पहल सबसे चर्चित मुद्दा बनी हुई है। हाल ही में एसोसिएशन की कमान संभालने वाले इन साहब ने अध्यक्ष बनने के कुछ ही हफ्तों में ऐसा कदम उठाया है, जिसकी चर्चा सिर्फ मंत्रालय में ही नहीं बल्कि जिलों तक में है। साहब ने फैसला लिया है कि एसोसिएशन के हर सदस्य को उनके जन्मदिन पर एसोसिएशन की तरफ से एक शुभकामना पत्र, केक और साथ में एक विशेष पुस्तक भेजी जाएगी। कहा जा रहा है कि यह “गुडविल जेस्चर” न केवल सदस्यों को जोड़ने की कोशिश है, बल्कि अफसरों के बीच संवाद और आपसी रिश्ते मजबूत करने का प्रयास भी है। अब तक ऐसा सिर्फ आईपीएस सर्विस कैडर में होता आया था, पर कहा जा रहा है कि आईएएस एसोसिएशन पहली बार इस परंपरा को औपचारिक रूप से अपनाने जा रहा है। सचिवालय में इस कदम की खूब चर्चा है—कुछ इसे शानदार पहल बता रहे हैं तो कुछ इसे नए तरीके से ‘मैनेजमेंट ऑफ हार्ट’ कह रहे हैं।

8 पुलिस का मिशन मैगी की तलाश
बेहद बड़े जिले में इन दिनों पुलिस एक अनोखे मिशन पर जुटी है। मिशन का नाम—मैगी की तलाश!
अब आप समझिए… यह वो मैगी नहीं है जो दो मिनट में पककर तैयार हो जाती है। यह है मैगी नाम की फीमेल डॉग, जिसकी गुमशुदगी ने पुलिस को खासा परेशान कर दिया है। दरअसल, शहर के एक प्रतिष्ठित परिवार ने अपनी प्रिय मैगी के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट दर्ज होते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए तलाश में पूरी टीम लगा दी है। परिवार ने भी ऐलान कर दिया है कि जो भी व्यक्ति मैगी के बारे में सूचना देगा, उसे 10 हजार रुपये का इनाम दिया जाएगा। परिवार का कहना है—मैगी उनके लिए सिर्फ एक डॉग नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य की तरह है। यही वजह है कि जिले की पुलिस अब अपराधियों से ज्यादा मैगी के सुराग तलाशने में व्यस्त है। शहर में चर्चा है कि यह मामला अब अधिकारियों तक भी पहुंच गया है। देखना दिलचस्प होगा, मैगी दो मिनट में नहीं तो कम से कम कुछ ही दिनों में अपनी फैमिली के पास वापस लौट आती है या नहीं!

9 रिटायर्ड सीनियर आईएएस के बेटे की कैंटीन को लेकर विवाद
राजधानी से सटे जिले की एक यूनिवर्सिटी में इन दिनों माहौल कुछ ज़्यादा ही गर्म है। वजह भी कम दिलचस्प नहीं—कैंटीन को लेकर छात्रों में जबरदस्त असंतोष उबाल पर है। छात्रों का कहना है कि कैंटीन में मिलने वाले खाने की क्वालिटी ठीक नहीं है, जबकि इसके बदले में अच्छी-खासी रकम वसूली जा रही है।सूत्रों का कहना है कि इस कैंटीन को एक रिटायर्ड सीनियर अफसर के सुपुत्र द्वारा संचालित किया जा रहा है। ऐसे में शिकायतों का मुद्दा और भी सुर्खियों में है। स्टूडेंट्स का आरोप है कि चाय-नाश्ते से लेकर थाली तक… सब कुछ औसत से नीचे है। ऊपर से जब बात प्रबंधन तक पहुंचती है तो छात्रों को ही नियम-कायदों का डर दिखा दिया जाता है।कैंपस में चर्चा यह भी है कि आने वाले दिनों में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है। फिलहाल तो कैंटीन और यूनिवर्सिटी प्रशासन के बीच टेंशन हाई है और छात्र इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।

10 सीनियर आईपीएस की प्रदेश वापसी पर लगी मुहर!
आखिरकार लंबे इंतज़ार के बाद एक सीनियर आईपीएस की प्रदेश वापसी का रास्ता साफ हो गया है। डेप्युटेशन पर गए इस अफसर की वापसी के आदेश हाल ही में केंद्र की ओर से जारी कर दिए गए हैं। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने खुद ही प्रदेश लौटने के लिए आवेदन दिया था। सूत्रों के मुताबिक, पहले उनकी वापसी की फाइल प्रदेश सरकार में चली थी। लेकिन जब मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंचा तो उसने कुछ समय के लिए रोक लगा दी—स्टाइल वही पुराना: “थोड़ा इंतज़ार कीजिए।” हालांकि कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मुख्यमंत्री हैदराबाद दौरे पर गए और वहां इस अफसर से मुलाकात हो गई। उसके तुरंत बाद ही फाइल पर सहमति की मुहर लग गई। यह अफसर अपनी शांत और सरल छवि के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उम्मीद लगाई जा रही है कि लौटते ही उन्हें एक बेहतर और अच्छी-खासी जिम्मेदारी वाली पोस्टिंग भी मिल सकती है। उनके साथियों में भी इस बात को लेकर काफी उत्साह है।

Abhishek Dubey

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