Sagar Toxic Liquor Case: NHRC सदस्य प्रियंक कानूनगो ने किया बंडा का दौरा, बोले- कोई दोषी नहीं बचना चाहिए

सागर। मध्य प्रदेश के सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब त्रासदी के बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भी सक्रिय हुआ है। मंगलवार को आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने जहरीली शराब से प्रभावित परिवारों और मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर घटना की जानकारी ली और पीड़ित परिवारों का दर्द साझा किया।
दौरे के दौरान कानूनगो ने प्रशासन और पुलिस के अधिकारियों से भी चर्चा की तथा मामले की जांच और पीड़ित परिवारों को राहत से जुड़े कई निर्देश दिए।
दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई
प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद मीडिया से बातचीत में प्रियंक कानूनगो ने कहा कि घटना में शामिल कोई भी दोषी बचना नहीं चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासन से निष्पक्ष एवं सख्त विवेचना सुनिश्चित करने को कहा।
कानूनगो के मुताबिक जांच इस तरह होनी चाहिए कि वास्तविक अपराधियों की पहचान हो और उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि केवल छोटे स्तर पर कार्रवाई करने के बजाय पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच जरूरी है।
मृतकों के परिजनों के बयान पर उठाए सवाल
आबकारी विभाग की भूमिका को लेकर पूछे गए सवाल पर कानूनगो ने कहा कि विभाग अपनी जांच रिपोर्ट तैयार करेगा, लेकिन पुलिस को तत्काल मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह बात आई है कि पुलिस अब तक मृतकों के परिजनों के बयान दर्ज नहीं कर सकी है। कानूनगो ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि गांव-गांव अवैध तरीके से शराब बेचने वाले लोगों की पहचान कर उनके नाम भी मुख्य आरोपियों की सूची में शामिल किए जाने चाहिए, यदि जांच में उनकी भूमिका सामने आती है।
वैध दुकान से बिक्री हुई तो हर्जाने की बात
NHRC सदस्य ने पीड़ित परिवारों को राहत और न्याय दिलाने के लिए मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी सरकार द्वारा अधिकृत या वैध शराब दुकान से जहरीली शराब की बिक्री हुई थी, तो पीड़ित परिवारों को नियमानुसार न्यायालय के माध्यम से हर्जाना दिलाया जाना चाहिए।
कानूनगो ने यह भी सुझाव दिया कि जिन मौतों की आधिकारिक रूप से जहरीली शराब से होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है, उनके मामलों में भी मानवीय आधार पर ₹2-₹2 लाख की सहायता देने पर सरकार को विचार करना चाहिए।
माता-पिता खोने वाले बच्चों के भविष्य पर जोर
त्रासदी में अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को लेकर भी प्रियंक कानूनगो ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसे बच्चों के बेहतर भविष्य, शिक्षा और पालन-पोषण के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।
उनके मुताबिक यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि प्रभावित बच्चों को सरकार की सभी पात्र योजनाओं का लाभ मिले और उनकी देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे।
‘मामले का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए’
NHRC सदस्य ने घटना को लेकर राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इस त्रासदी का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि राजनीति होने से पीड़ितों और प्रभावित परिवारों का पक्ष कमजोर पड़ सकता है।
उन्होंने सभी पक्षों से मिलकर काम करने और प्राथमिकता के तौर पर पीड़ित परिवारों को न्याय तथा राहत दिलाने की दिशा में प्रयास करने की अपील की।
सागर के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब की घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई के साथ अब NHRC की सक्रियता से मामले की जांच और पीड़ितों को राहत का मुद्दा भी महत्वपूर्ण हो गया है। कानूनगो के दौरे के बाद पुलिस जांच, आबकारी विभाग की रिपोर्ट और पीड़ित परिवारों को मुआवजे को लेकर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।


