रिटायर्ड इंजीनियर ने जुबली हिल्स में खरीदा एक अरब का पैलेस : एसपी पर भारी पड़ रहा है टीआई पुत्र : इतना सस्ता आईएएस पहली बार देखा है!

रिटायर्ड इंजीनियर ने जुबली हिल्स में खरीदा एक अरब का पैलेस : एसपी पर भारी पड़ रहा है टीआई पुत्र : इतना सस्ता आईएएस पहली बार देखा है!
1 रिटायर्ड इंजीनियर ने जुबली हिल्स में खरीदा एक अरब का पैलेस 
नर्मदा के पानी से खेतों तक हरियाली पहुंचाने वाले प्राधिकरण के एक रिटायर्ड इंजीनियर इन दिनों खुद सुर्खियों में हैं। वजह भी ऐसी कि सुनने वाले दंग रह जाएं। साहब ने हाल ही में हैदराबाद के सबसे पॉश इलाके जुबली हिल्स में करीब एक अरब रुपये का आलीशान पैलेस खरीद लिया। वही जुबली हिल्स, जहां दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के बड़े स्टार, उद्योगपति और दिग्गज राजनेता अपने-अपने महलों में रहते हैं। ऐसे इलाके में एक रिटायर्ड इंजीनियर का एंट्री लेना ही चर्चा का विषय बन गया। यही नहीं, चर्चा है कि साहब ने बेटे के नाम पर लगभग 16 करोड़ रुपये के शेयर भी खरीद डाले। अब अफसरशाही के गलियारों में कानाफूसी तेज है—आखिर एक इंजीनियर की वैध कमाई इतनी कैसे बढ़ गई कि सीधा अरबपति क्लब में एंट्री हो गई? सूत्रों की मानें तो केन्द्रीय एजेंसियों की नजर इस पूरे मामले पर टिकी हुई है। फाइलें खंगाली जा रही हैं, लेन-देन की परतें खोली जा रही हैं और कहा जा रहा है कि कभी भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह साहब कुछ साल पहले इंजीनियर इन चीफ के पद से रिटायर हुए हैं। 

2 एसपी पर भारी पड़ रहा है टीआई पुत्र
एक बड़े जिले में पदस्थ युवा एसपी साहब इन दिनों एक अजीब मुश्किल में फंसे हुए हैं। मुश्किल किसी बड़े गैंगस्टर या माफिया से नहीं, बल्कि एक “टीआई पुत्र” से है, जिसने पूरे जिले में अपनी समानांतर सत्ता चला रखी है। कहते हैं कि जनाब के संरक्षण में शहर के कई इलाकों में जुए और सट्टे के अड्डे धड़ल्ले से चल रहे हैं। इतना ही नहीं, नशीले पदार्थों का कारोबार भी जमकर फल-फूल रहा है। एसपी साहब तक जब ये खबरें पहुंचीं तो उन्होंने पहले समझाइश का रास्ता चुना। संदेश भिजवाया गया कि अवैध धंधे समेट लें, वरना कार्रवाई होगी। लेकिन “टीआई पुत्र” ने शायद इसे हल्के में ले लिया। फिर क्या था, एसपी साहब ने अपनी विशेष टीम को मैदान में उतार दिया। कुछ अड्डों पर छापे भी पड़े। कार्रवाई हुई, सामान जब्त हुआ, लेकिन जानकार बताते हैं कि पूरी कवायद में असली किरदार को बड़े करीने से बचा लिया गया। दिलचस्प बात यह है कि छापेमारी के बाद भी टीआई पुत्र के तेवर ढीले नहीं पड़े। बताया जाता है कि जब जिला प्रशासन अवैध निर्माण ढहाने पहुंचा तो उसे भी बैरंग लौटना पड़ा।

3 इतना सस्ता आईएएस पहली बार देखा है!
सीधी भर्ती के सचिव स्तर के एक आईएएस साहब ने हाल ही में अपनी नई पोस्टिंग वाली जगह पर आमद दर्ज कराई। ज्वॉइनिंग के बाद विभाग के एक इंजीनियर साहब से सौजन्य भेंट करने पहुंचे। बातचीत के दौरान इंजीनियर ने परंपरागत अंदाज़ में कहा—“सर, सेवा का मौका दीजिए।” बस फिर क्या था! साहब ने भी बिना समय गंवाए “सेवा” का पहला अवसर थमा दिया। आदेश हुआ—सबसे पहले तो उनका नेटफ्लिक्स का सब्सक्रिप्शन खत्म हो गया है, एक साल का प्रीमियम प्लान रिचार्ज करा दिया जाए। साथ ही अब वे फिटनेस पर विशेष ध्यान देना चाहते हैं, इसलिए एक साल का गोल्ड जिम मेंबरशिप भी एक्टिवेट कराई जाए। इंजीनियर साहब तो मानो धन्य हो गए। इतनी “सरल” डिमांड! फटाफट दोनों काम निपटाए और बाहर निकलते ही साहब के पुराने विभाग में पदस्थ मित्र को फोन मिलाया। उधर से हालचाल पूछा गया तो इन्होंने उत्साह में बताया—“भाई, इतना सस्ता आईएएस पहली बार देखा है!” मित्र ने ठहाका लगाया और समझाया—“अरे, अभी तो ट्रेलर है। जिस राज्य से साहब आते हैं, वहां ‘नजराना’, ‘शुकराना’ और ‘जबराना’ में से कम से कम एक तो लिया ही जाता है… लेकिन ये साहब तीनों में विश्वास रखते हैं!” अब बेचारे इंजीनियर के चेहरे की मुस्कान गायब है। नेटफ्लिक्स और जिम तो हो गया, मगर असली टेंशन इस बात की है कि कहीं आगे चलकर ‘शुकराना’ और ‘जबराना’ की बारी न आ जाए।

4 एसपी साहब से सत्तापक्ष के विधायक खफा, सदन तक गूंजा मामला
एक जिले में पदस्थ प्रमोटी आईपीएस एसपी साहब इन दिनों खासे चर्चाओं में हैं। वजह—उनकी कार्यशैली से सत्तापक्ष के ही विधायक बेहद नाराज बताए जा रहे हैं। पहले कुछ विधायकों ने सीनियर आईपीएस अफसरों तक अपनी बात पहुंचाई। जब वहां से भी बात नहीं बनी तो मामला सीधे मुख्यमंत्री तक ले जाया गया। लेकिन समाधान न निकलता देख आखिरकार सत्तापक्ष के विधायकों ने अपनी ही सरकार को विधानसभा में घेर लिया। विधायकों का आरोप है कि एसपी साहब न तो फोन उठाते हैं और न ही ऑफिस में आसानी से मिलते हैं। बंगले पर कॉल करो तो जवाब मिलता है—“साहब दौरे पर हैं।” उधर जिले में दोपहर ढलते ही पुलिस की सड़कों पर चेकिंग शुरू हो जाती है और चेकिंग के नाम पर वसूली की चर्चा जोरों पर है। कुछ विधायकों ने तो यह तक कह दिया कि अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चल रहा है और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। करीब आधे घंटे तक सदन में इस मुद्दे पर जोरदार हंगामा हुआ। नाराज विधायकों ने तुलना भी कर डाली—कहने लगे कि पूर्व एसपी ने जिस तरह तालमेल और सख्ती के बीच संतुलन बनाकर काम किया, वैसा संतुलन मौजूदा साहब में नजर नहीं आ रहा।

5 बड़े साहब के गुस्से का शिकार हुए ‘करीबी’ कमिश्नर
दिल्ली से लौटे सचिव स्तर के एक सीधी भर्ती वाले आईएएस साहब जब प्रदेश पहुंचे, तो उन्होंने खुद को बड़े साहब का सबसे भरोसेमंद अफसर बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। दफ्तरों के गलियारों में चर्चा थी कि दिल्ली में साथ काम करने की वजह से ही बड़े साहब ने उन्हें खास तौर पर वापस बुलाया है। साहब भी इशारों-इशारों में यही जताते रहे कि उनकी सीधी लाइन ऊपर तक है। लेकिन सत्ता के गलियारों में बातें जितनी जल्दी बनती हैं, उतनी ही जल्दी खुल भी जाती हैं। कुछ ही दिनों में तस्वीर बदलती नजर आने लगी। एक अहम विभाग में कमिश्नर की कुर्सी संभाल रहे इस ‘करीबी’ साहब के एजेंडे पर बड़े साहब ने ब्रेक लगा दी। ऊपर से बैठकों में तल्ख़ टिप्पणियां अलग मिलने लगीं। हाल ही की एक अहम बैठक ने तो पूरे सिस्टम को चौंका दिया। प्रधानमंत्री गति शक्ति की समीक्षा बैठक चल रही थी, जिसमें केवल अफसरों को शामिल होना था। लेकिन कमिश्नर साहब को न जाने क्या सूझा—उन्होंने एक एनआरआई को ऑनलाइन जोड़ लिया। बस फिर क्या था! बड़े साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बताया जाता है कि भरी बैठक में ऐसी कड़ी फटकार लगी कि बाकी अफसर भी सन्न रह गए।

6 काम नहीं आई शिकायत
वन विभाग के मुखिया की कुर्सी को लेकर इस बार गलियारों में खूब सरगर्मी रही। वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर बैठे एक सीनियर आईएफएस साहब ने खुद को स्वाभाविक दावेदार मानते हुए पूरी ताकत झोंक दी। लेकिन जैसे ही उन्हें आभास हुआ कि बाजी उनके हाथ से फिसल सकती है, उन्होंने मोर्चा खोल दिया। बात प्रदेश की राजधानी से लेकर देश की राजधानी तक पहुंचा दी गई। दावेदारों के खिलाफ शिकायतों का पुलिंदा तैयार हुआ और हर संभव दरवाजा खटखटाया गया। मगर कहते हैं ना, हर दांव कामयाब नहीं होता। शिकायतों का शोर तो खूब उठा, लेकिन असर ज़ीरो रहा। आखिरकार वही साहब मुखिया की कुर्सी पर विराजमान हुए, जिनके खिलाफ सबसे ज्यादा मोर्चेबंदी की जा रही थी। दिलचस्प यह है कि नए मुखिया का कार्यकाल भी लंबा बताया जा रहा है। अब हालत यह है कि इस कुर्सी पर नजर गड़ाए बैठे कई दावेदार, इंतजार करते-करते रिटायरमेंट की दहलीज पर पहुंच जाएंगे। उधर, शिकायत करने वाले साहब के खेमे में सन्नाटा पसरा है—क्योंकि इस बार शिकायत सच में काम नहीं आई।

7 युवा आईएएस को लगा बड़ा झटका
प्रधानमंत्री की फ्लैगशिप योजना से जुड़े एक अहम विभाग में पदस्थ एक युवा आईएएस के सितारे इन दिनों कुछ गर्दिश में नजर आ रहे हैं। कभी हालात ऐसे थे कि साहब की तूती बोलती थी—जो चाहा, वही हुआ। फैसले उनके, फायदे उनके लोगों के। लेकिन वक्त कब करवट बदल ले, कौन जानता है! जैसे ही विभाग में सीनियर अफसरों की नई पदस्थापना हुई, साहब के ‘अच्छे दिन’ ढलान पर आते दिखने लगे। सबसे पहला झटका तब लगा जब साहब का एक खास टेंडर प्लान धड़ाम से नीचे आ गिरा। बताया जाता है कि साहब अपने एक ‘प्रिय’ को टेंडर दिलाने की पूरी तैयारी में थे। नियम-शर्तें भी ऐसे गढ़ी गईं कि रास्ता साफ रहे। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया—प्रिय व्यक्ति ने ही आवेदन में इतनी तकनीकी गलतियां कर दीं कि पूरा टेंडर निरस्त होने की कगार पर पहुंच गया। मामला यहीं नहीं थमा। सूत्र बताते हैं कि अन्य टेंडरों में भी कई खामियां सीनियर अफसरों की नजर से बच नहीं पाईं। एक-एक कर फाइलें खुलने लगीं और गड़बड़ियां सामने आने लगीं। अब हालात ऐसे हैं कि कई टेंडर रद्द होने की तैयारी में हैं। इधर विभाग के गलियारों में एक और चर्चा गर्म है—साहब की इस संस्था से विदाई भी अब ज्यादा दूर नहीं। 

8 बिना एसपी के चल रहा है जिला
प्रदेश के बारे में यूं ही नहीं कहा जाता—“अजब है, सबसे गजब है।” अब जरा आदिवासी बाहुल्य एक जिले का ताजा हाल सुन लीजिए। यहां के जिला कप्तान साहब को रिटायर हुए एक महीना से ज्यादा हो गया, लेकिन सरकार को मानो खबर ही नहीं कि जिला बिना एसपी के चल रहा है। कुर्सी खाली है, फाइलें चल रही हैं और जिम्मेदारी किसके कंधे पर है—यह सवाल हवा में तैर रहा है। मजेदार बात यह है कि इसी जिले में जल्द ही कृषि कैबिनेट की बैठक होने वाली है। मुख्यमंत्री से लेकर मंत्री और आला अफसरों का जमावड़ा लगने वाला है। तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन जिले का सबसे अहम पद अब भी खाली पड़ा है। ऐसे में सत्ता के गलियारों में कानाफूसी तेज है—क्या यह महज चूक है या फिर किसी खास नाम पर सहमति नहीं बन पा रही?

9 मैनस्ट्रीम में वापस आते ही आईएएस साहब ने बदली कार्यशैली
कई साल तक ‘लूप लाइन’ में रहने के बाद आखिरकार एक आईएएस साहब की किस्मत का पिटारा खुल ही गया। लंबे समय तक फाइलों में मीन-मेख निकालने और हर नोटशीट में पेंच तलाशने की आदत ने उन्हें मैनस्ट्रीम से दूर कर रखा था। आलम यह था कि सरकार भी उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने से कतराती रही। लेकिन कहते हैं न, ऊपर वाले की मेहर हो तो पांचवीं मंजिल भी मेहरबान हो जाती है। सो हुआ भी कुछ ऐसा ही। पांचवीं मंजिल पर बैठे अफसरों ने साहब को “ब्रेकथ्रू” देते हुए एक ठीकठाक, मध्यम दर्जे का विभाग थमा दिया। बस फिर क्या था—साहब ने मानो अपनी पूरी कार्यशैली ही रीब्रांड कर ली। जो साहब कभी फाइलों में महीनियां गुजार देते थे, वही अब रफ्तार के पर्याय बन गए हैं। इन दिनों उनके दफ्तर में फाइलें रुकती नहीं, दौड़ती नजर आती हैं। हाल ही में केन्द्र सरकार ने हर राज्य में एक नए प्रकार के संस्थान खोलने की घोषणा की और प्रस्ताव मांगे। बाकी विभाग जहां सोच-विचार में जुटे थे, वहीं साहब ने अगले ही दिन प्रस्ताव बनवाकर दिल्ली रवाना भी कर दिया। इतना ही नहीं, भरी बैठक में बड़े साहब को यह बताना भी नहीं भूले कि “सर, हमारा प्रस्ताव सबसे पहले चला गया है।” 

10 मंत्री जी की बयानबाजी से टेंशन में हैं प्रमोटी आईएएस
सरकार के एक सीनियर और कद्दावर मंत्री इन दिनों अपनी ही सरकार के खिलाफ लगातार बयान देकर सियासी हलकों में हलचल मचा रहे हैं। लेकिन मंत्री जी की इस बयानबाजी से सबसे ज्यादा पसीना अगर किसी को आ रहा है, तो वह हैं एक प्रमोटी आईएएस साहब। मामला दिलचस्प है। सूत्र बताते हैं कि साहब की अब तक की लगभग हर महत्वपूर्ण पोस्टिंग में मंत्री जी की अहम भूमिका रही है। दोनों के रिश्ते जगजाहिर हैं और साहब भी खुले तौर पर मंत्री जी के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में साहब पूरे जोर-शोर से कोशिश में थे कि अगली सूची में उन्हें किसी मलाईदार जिले का कलेक्टर बना दिया जाए। बातचीत भी काफी आगे बढ़ चुकी थी। लेकिन तभी मंत्री जी ने अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। आए दिन तीखे बयान, सार्वजनिक मंचों से नाराजगी और संगठन तक संदेश… नतीजा यह कि सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि मंत्री जी खुद ही मुश्किल में पड़ सकते हैं। अब साहब की चिंता लाजिमी है। अगर मंत्री जी का प्रभाव कम हुआ या समीकरण बिगड़े, तो कलेक्टर बनने का सपना फाइलों में ही दबकर रह सकता है। अंदरखाने साहब इन दिनों बेहद ‘लो-प्रोफाइल’ हो गए हैं और हालात पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं।






Abhishek Dubey

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