सचिव मैडम की वर्किंग बड़ा रही बड़े साहब की टेंशन : एक और सीनियर आईपीएस की जल्द होगी प्रदेश वापसी : युवा आईएएस और जिला पंचायत अध्यक्ष में जबरदस्त टकराव

सचिव मैडम की वर्किंग बड़ा रही बड़े साहब की टेंशन : एक और सीनियर आईपीएस की जल्द होगी प्रदेश वापसी : युवा आईएएस और जिला पंचायत अध्यक्ष में जबरदस्त टकराव
1 सचिव मैडम की वर्किंग बड़ा रही बड़े साहब की टेंशन
बड़े साहब इन दिनों एक बड़े विभाग के प्रमुख सचिव का काम संभाल रहीं सचिव स्तर की आईएएस मैडम की वर्किंग से परेशान चल रहे हैं। हालात यह हैं कि बैठकों में बड़े साहब मैडम को जो भी टास्क सौंपते हैं, वह समय पर पूरा नहीं हो पा रहा है। असल में मैडम के विभाग का सीधा कनेक्शन हेल्थ और एजुकेशन जैसे अहम विभागों से है। बेहतर डिलिवरी के लिए बड़े साहब हर बैठक में साफ निर्देश देते हैं कि दोनों विभागों से समन्वय बनाकर काम किया जाए। दिलचस्प यह है कि मैडम बैठक में बड़े साहब के सामने हर बार हामी भर देती हैं, लेकिन बाद में समन्वय की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं करतीं। नतीजा यह है कि बड़े साहब को वही बात बार-बार समझानी पड़ रही है। लेकिन मैडम मानने को तैयार नहीं हैं।

2 एक और सीनियर आईपीएस की जल्द होगी प्रदेश वापसी
प्रदेश में सीनियर आईपीएस अफसरों की वापसी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस महीने अब तक दो आईपीएस अफसर अपना सेंट्रल डेप्युटेशन पूरा होने से पहले ही प्रदेश लौट चुके हैं। दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों को अभी कोई जिम्मेदारी मिल भी नहीं पाई थी कि एक और डीजी स्तर के आईपीएस की प्रदेश वापसी तय मानी जा रही है। इस डीजी स्तर के साहब का केन्द्रीय डेप्युटेशन का कार्यकाल तो पूरा हो चुका है। सूत्र बताते हैं कि साहब ने केन्द्र में ही टिके रहने और किसी स्वतंत्र यूनिट की कमान संभालने के लिए काफी कोशिशें कीं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल सकी। ऐसे में अब मजबूरन प्रदेश लौटने की तैयारी करनी पड़ रही है। अब अफसरशाही के गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि एक साथ लौटे इन तीनों सीनियर आईपीएस को कब और कहां पोस्टिंग मिलती है।

3 युवा आईएएस और जिला पंचायत अध्यक्ष में जबरदस्त टकराव
आदिवासी बाहुल्य एक छोटे से जिले में जिला पंचायत सीईओ की कुर्सी संभाल रहे एक युवा आईएएस और जिला पंचायत अध्यक्ष के बीच टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। हालात यहां तक पहुंच गए कि मामला चैंबर से निकलकर थाने की दहलीज तक जा पहुंचा। कुछ दिन पहले जिला पंचायत अध्यक्ष अचानक सीईओ के चैंबर में घुस आए और जमकर गाली-गलौज की। बात इतनी बढ़ गई कि हाथापाई की नौबत आ गई। हालात बिगड़ते देख सीईओ ने तत्काल स्टाफ की मदद से अध्यक्ष को चैंबर से बाहर करवा दिया। इसके बाद सीईओ खुद नजदीकी थाने पहुंचे और जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दे दिया। उधर, जिला पंचायत अध्यक्ष का आरोप है कि सीईओ ने पौधारोपण के नाम पर लाखों रुपये की अनियमितता करते हुए एक ही वेंडर से पौधे खरीद लिए। वहीं सीईओ का कहना है कि अध्यक्ष लगातार नियम विरुद्ध काम कराने का दबाव बनाते हैं और उनकी बात न मानने पर अभद्र व्यवहार किया जाता है। खास बात यह है कि सीईओ की इस जिले में पोस्टिंग हुए अभी ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। ऐसे में अगर दोनों के बीच जल्द ही समन्वय नहीं बना, तो यह टकराव आगे चलकर बड़े बवाल का रूप ले सकता है।

4 पड़ौस में बन रही हवेली के निर्माण से परेशान रिटायर्ड आईपीएस
कभी प्रदेश के बेहद रसूखदार आईपीएस अफसरों में गिने जाने वाले एक रिटायर्ड प्रमोटी आईपीएस इन दिनों खासे परेशान नजर आ रहे हैं। परेशानी की वजह कोई और नहीं, बल्कि उनके पड़ोस में बन रही एक आलीशान हवेली है, जहां दिन-रात निर्माण कार्य चलता रहता है। हालात ऐसे हैं कि न तो साहब खुद दिन में सुकून से रह पा रहे हैं और न ही रात में चैन की नींद ले पा रहा है उनका परिवार। मजबूर होकर साहब ने इस मामले की शिकायत जिला प्रशासन से लेकर कई जिम्मेदार अफसरों तक की, लेकिन हर जगह से उन्हें निराशा ही हाथ लगी। सुनवाई न होने की असली वजह हवेली का मालिक बताया जा रहा है, जिसके संबंध कई रिटायर्ड और मौजूदा आईएएस-आईपीएस अफसरों से हैं। चर्चा है कि जैसे ही किसी कार्रवाई की भनक मालिक को लगती है, वह तुरंत फोन घुमवाकर संबंधित अफसर से बात कर लेता है और मामला वहीं ठंडे बस्ते में चला जाता है। अफसरशाही के गलियारों में यह चर्चा भी है कि कभी जिन आदेशों से पूरा सिस्टम हिल जाता था, आज वही साहब अपनी ही गली में हो रही गड़बड़ी रोकने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।

5 आईएएस मीट के बाद भी नहीं थमी नाराजगी
आईएएस मीट को खत्म हुए भले ही एक हफ्ते का समय बीत चुका हो, लेकिन इस आयोजन में खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे रिटायर्ड अफसरों की पीड़ा अब भी उभरकर सामने आ रही है। मामला इतना बढ़ गया कि एक रिटायर्ड आईएएस ने अफसरों के व्हाट्सग्रुप में अपनी नाराजगी खुलकर जाहिर कर दी।पोस्ट में रिटायर्ड अफसर ने लिखा कि आईएएस एसोसिएशन को आज जिस मुकाम पर देखा जा रहा है, उसमें रिटायर्ड अफसरों का योगदान बेहद अहम रहा है। इसके बावजूद इस मीट में उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे। चाहे ग्रुप फोटो खिंचवाने की बात हो या फिर प्राइज डिस्ट्रीब्यूशन की, हर जगह रिटायर्ड आईएएस अफसरों की अनदेखी की गई। इतना ही नहीं, मुलाकात के दौरान भी वरिष्ठ रिटायर्ड अफसरों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलने की बात पोस्ट में कही गई है। नाराज अफसर ने यहां तक लिखा कि सीनियर रिटायर्ड अफसरों को सम्मान देने के तौर-तरीकों को लेकर हमें आर्मी से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। हालांकि, दिलचस्प यह है कि अपनी पोस्ट की शुरुआत में रिटायर्ड अफसर ने मीट के आयोजन की जिम्मेदारी संभालने वाली कमेटी को पूरे नंबर देते हुए कार्यक्रम को सफल बताया। लेकिन इसके बाद जो लिखा गया, उसने अफसरशाही के गलियारों में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।

6 एसपी साहब की मानवीय पहल चर्चा में
पहली बार किसी जिले की कमान संभाल रहे एक सीधी भर्ती आईपीएस इन दिनों अपनी एक अनोखी पहल को लेकर खूब सुर्खियों में हैं। चर्चा की वजह है पुलिसकर्मियों के लिए उनका नया फैसला—जन्मदिन पर अवकाश। एसपी साहब की योजना के मुताबिक अब पुलिसकर्मी अपने जन्मदिन पर छुट्टी ले सकेंगे, ताकि भागदौड़ भरी ड्यूटी से थोड़ा वक्त निकालकर परिवार और दोस्तों के साथ अपना खास दिन मना सकें। यही नहीं, पत्नी और बच्चों के जन्मदिन पर भी अवकाश लेने की सुविधा दी जाएगी। इस पहल की शुरुआत नए साल से किए जाने की तैयारी है। दिलचस्प बात यह है कि ऐसी ही एक योजना कभी कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी लाई गई थी। तब घोषणा तो हो गई थी, लेकिन पुलिसकर्मियों को इसका फायदा मिल पाता, उससे पहले ही सरकार गिर गई। नतीजा यह रहा कि फाइलें ठंडे बस्ते में चली गईं।

7 शादी के बाद काडर पर मंथन
हाल ही में दो युवा आईएएस अफसर शादी के बंधन में बंधे हैं और यह शादी अफसरशाही के गलियारों में जमकर चर्चा का विषय बनी हुई है। शादी की रस्में खत्म होते ही अब नई चर्चा ने जोर पकड़ लिया है—साहब मैडम के काडर में जाएंगे या मैडम साहब के प्रदेश काडर में अपनी सेवा देंगी। सूत्रों की मानें तो पूरी संभावना है कि मैडम ही अपना काडर बदलवाकर साहब के काडर में आ सकती हैं। इसकी एक बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि साहब के काडर में काम के लिए भरपूर स्कोप है और मौके भी ज्यादा हैं। चर्चा यह भी है कि मैडम जल्द ही काडर परिवर्तन को लेकर औपचारिक आवेदन कर सकती हैं। फिलहाल तो शादी की खुशियों के बीच अफसरशाही में काडर को लेकर कयासों का दौर तेज हो गया है।

8 रिटायर्ड आईपीएस की आईएएस बेटी पहल चर्चा में
प्रदेश काडर से रिटायर्ड सीधी भर्ती के एक आईपीएस अफसर की कलेक्टर बेटी इन दिनों राजस्थान में खासा नाम कमा रही हैं। जिले के सरकारी स्कूलों पर नजर डालते ही कलेक्टर मैडम ने एक दिलचस्प बात नोटिस की। सौ में से महज दस छात्र ही साइंस स्ट्रीम को अपना करियर विकल्प मान रहे थे। पड़ताल की तो असली वजह सामने आई—छात्रों की कमजोर गणित। बस फिर क्या था। मैडम ने समस्या का देसी नहीं, बल्कि हाईटेक समाधान निकाल डाला। सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए एक एआई आधारित मैथ्स प्रैक्टिस वेबसाइट तैयार करवा दी गई। अब हालात यह हैं कि बच्चे इसी प्लेटफॉर्म के जरिए जमकर गणित का अभ्यास कर रहे हैं और साइंस से दूरी धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। मैडम की इस पहल की गूंज जयपुर तक पहुंच चुकी है। सरकार भी कलेक्टर मैडम के इस नवाचार की खुलकर सराहना कर चुकी है। 

9 नारा इंडिया फर्स्ट, बेटे की पढ़ाई यूएसए में
एक प्रमोटी आईएएस अफसर अक्सर राष्ट्रवाद और इंडिया फर्स्ट का नारा बुलंद करते नजर आते हैं। मंच हो या बैठक, साहब की जुबान पर देशभक्ति सबसे ऊपर रहती है। लेकिन हाल ही में उनका यही नारा अफसरशाही के गलियारों में चर्चा और चुटकी का विषय बन गया है। दरअसल, साहब ने विदेश जाने के लिए अवकाश का आवेदन दिया। जब वजह पूछी गई तो उन्होंने बताया कि उनका बेटा यूएसए में पढ़ रहा है और अब उसके दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए उन्हें वहां जाना है। बस फिर क्या था, जैसे ही यह बात उनके मित्रों और परिचितों तक पहुंची, चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। चटखारे लेकर कहा जा रहा है कि साहब का इंडिया फर्स्ट का नारा शायद दूसरों के लिए था, अपने बेटे के मामले में नहीं। गलियारों में तंज कसते हुए यह भी कहा जा रहा है कि मंच की बातें और निजी फैसलों के बीच फर्क साफ नजर आ रहा है। फिलहाल, साहब के राष्ट्रवाद और निजी प्राथमिकताओं को लेकर अफसरशाही में यह किस्सा खूब चटकारे लेकर सुनाया जा रहा है।

10 पुराने अंदाज़ में लौटे एसपी साहब
सीधी भर्ती के एसपी साहब एक बार फिर अपने पुराने रंग में लौट आए हैं। हालात यह हैं कि वे अब सप्ताह में कभी-कभार ही ऑफिस जाना मुनासिब समझते हैं। ज्यादातर फाइलों का निपटारा वे अपने बंगले पर बने कैंप ऑफिस से ही करना पसंद कर रहे हैं। बहुत ज्यादा जरूरी काम होने पर ही एसपी साहब जिला कार्यालय का रुख करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह कोई नई आदत नहीं है। इससे पहले जिस जिले में वे पदस्थ थे, वहां भी उनका यही अंदाज़ रहा था—ऑफिस में मौजूदगी कम और कामकाज का संचालन ज्यादा तर कैंप ऑफिस से।  पुलिस महकमे में अब यह चर्चा आम है कि साहब की फाइलें भले ही समय पर निपट रही हों, लेकिन ऑफिस की रौनक पहले जैसी नहीं रही। अफसरशाही के गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां भी हो रही हैं।

Abhishek Dubey

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