डीएसपी ने एसीएस को पैदल चलवाया : बैचमेट की वापसी न होने की दुआ कर रहे सीनियर आईपीएस : कमिश्नर पर झूठे आरोप लगाने वाले युवा कलेक्टर को फटकार

1 डीएसपी ने एसीएस को पैदल चलवाया
पिछले दिनों एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री एक बड़े ग्रुप के नए होटल का उद्घाटन करने पहुंचे। कार्यक्रम भव्य था, इंतज़ाम कड़े थे, सुरक्षा चाक-चौबंद थी इसी बीच सीएम के काफिले में चल रहे एसीएस साहब के वाहन को अचानक एक डीएसपी ने रोक लिया। बतौर नियम जांच शुरू हुई, और जब एसीएस ने अपना परिचय दिया, तब भी डीएसपी साहब टस से मस नहीं हुए। सुना है, उन्होंने एसीएस को वाहन से उतरवा ही दिया! नतीजा—इतने बड़े अधिकारी को कार्यक्रम स्थल तक पैदल ही पहुंचना पड़ा। कार्यक्रम खत्म होने पर एसीएस ने मामले की जानकारी कलेक्टर और प्रभारी एसपी को जरूर दे दी, लेकिन बड़ा दिल दिखाते हुए किसी भी कार्रवाई से साफ इंकार कर दिया। प्रभारी एसपी इन दिनों हर जगह सफाई देते फिर रहे हैं कि “इसमें हमारी कोई गलती नहीं! पूरा प्लान तो एसपी साहब बनाकर गए थे, हम तो सिर्फ प्रभार संभाल रहे हैं।”
2 बैचमेट की वापसी न होने की दुआ कर रहे सीनियर आईपीएस
प्रदेश पुलिस महकमे में आजकल एक सीनियर आईपीएस साहब की बस एक ही दुआ चल रही है—भगवान ऐसा चमत्कार कर दें कि उनके बैचमेट की प्रदेश वापसी न हो! वजह भी बड़ी दिलचस्प है। अगर बैचमेट वापस नहीं आते तो साहब को झट से प्रमोशन मिल जाएगा, वरना फिर महीनों तक इंतजार की लाइन में खड़े रहना पड़ेगा। साहब का तो यह भी मानना है कि सरकार से कोई दमदार पोस्टिंग मिलने की उम्मीद वैसे भी नहीं है, ऐसे में प्रमोशन ही मिल जाए तो उसी में खुश होने लायक कारण मिल जाएगा। उधर बैचमेट की सोच भी कम मजेदार नहीं है। चर्चा है कि वे भी वापस आने के मूड में नहीं हैं और दिल्ली में ही कोई नई जिम्मेदारी तलाश रहे हैं। उनका मौजूदा टर्म खत्म होने को है, इसलिए इधर-उधर की खिड़कियां खुल चुकी हैं।
3 कमिश्नर पर झूठे आरोप लगाने वाले युवा कलेक्टर को फटकार
प्रदेश के सबसे संवेदनशील जिलों में से एक की कमान हाल ही में एक युवा आईएएस साहब को सौंपी गई थी। नियुक्ति के साथ ही उम्मीदें भी बड़ी थीं—नई सोच, नया जोश और नई प्रशासनिक ऊर्जा। लेकिन कुछ ही दिनों में साहब खुद विवादों के घेरे में आ गए। कहानी एक मंदिर की जमीन से जुड़े मामले की बताई जा रही है, जो सीधे हाईकोर्ट की दहलीज़ तक जा पहुंचा। कोर्ट ने जब कलेक्टर साहब से अब तक की कार्रवाई का ब्यौरा मांगा, तो उन्होंने यह कह दिया कि मामला संभागायुक्त के पास लंबित है। बस, यहीं से शुरुआत हुई ड्रामा की। जैसे ही अदालत के सामने असल स्थिति साफ हुई, पूरे कोर्टरूम का माहौल गर्म हो गया। माननीय जज ने कलेक्टर साहब को काफी सख्त लहजे में फटकार लगाई, और साहब लगातार माफी मांगते रहे। लेकिन कोर्ट ने माफी स्वीकार करने के बजाय उन्हें चेतावनी देकर मामला आगे बढ़ा दिया। यह साहब रिज़र्व नेचर वाले हैं, जिसकी वजह से वे अक्सर अधिकारियों, नेता और जनता से दूरी बनाए रखते हैं।
4 लेडी युवा आईपीएस मैडम की अनोखी पहल चर्चा में
प्रदेश के एक जिले में तैनात ईमानदार और तेजतर्रार छवि वाली युवा आईपीएस मैडम इन दिनों खूब सुर्खियां बटोर रही हैं। वजह है उनकी अनोखी पहल—"मुस्कान की टोकरी"। जी हां, मैडम ने सार्वजनिक स्थलों, खासकर स्कूल-कॉलेज के आसपास टोकरीनुमा बॉक्स रखवाए हैं, जिनमें कोई भी छात्रा या युवती बिना नाम लिखे अपनी समस्या की पर्ची डाल सकती है। खास बात यह कि मैडम ने हर शिकायत के समाधान के लिए 24 से 48 घंटे की समय सीमा तय कर रखी है। अब छात्राओं के बीच यह पहल चर्चा का बड़ा विषय बनी हुई है—कहते हैं, पर्चियां इतनी आ रही हैं कि मैडम की पूरी टीम व्यस्त हो गई है! बताया जाता है कि मैडम ने काफी संघर्ष के बाद आईपीएस की वर्दी हासिल की है, इसलिए जमीनी समस्याओं को बारीकी से समझती हैं। अफसरशाही गलियारों में चर्चा है कि अगर यह पहल सफल रही तो इसे प्रदेशभर में लागू करने की तैयारी भी हो सकती है।
5 युवा आईएएस को मिला वक्त से पहले किस्मत से ज्यादा
प्रदेश की अफसरशाही में इन दिनों एक युवा आईएएस खूब चर्चा बटोर रहे हैं। वजह भी अनोखी है—बेहद जूनियर होने के बावजूद साहब अब तक तीन जिलों की कलेक्टरी कर चुके हैं! पहले इंटरस्टेट डेप्युटेशन पर दूसरे राज्य गए और वहां दो जिलों की कमान संभाल ली। अब साहब प्रदेश लौटे तो उन्हें एक बड़े विकास प्राधिकरण की जिम्मेदारी मिल गई। तभी राजधानी से सटे एक जिले के कलेक्टर छुट्टी पर चले गए और साहब की किस्मत फिर चमक उठी। आमतौर पर ऐसे मौके पर जिला पंचायत सीईओ या एडीएम को प्रभार दिया जाता है, लेकिन इस बार सरकार ने विशेष मेहरबानी दिखाते हुए दूसरे जिले से साहब को बुलाकर सीधे कलेक्टर का प्रभार थमा दिया। वैसे अफसरशाही के गलियारों में चर्चा है कि नियमित कलेक्टरी मिलने में अभी उन्हें एक-दो साल लग सकते हैं। साहब एक कद्दावर मंत्री के रिश्तेदार हैं।
6 सीनियर आईएएस मैडम की अपनी ढपली अपना राग
एक सीनियर आईएएस मैडम को केन्द्र में डेप्युटेशन पर गए काफी समय हो चुका है, लेकिन चर्चा यह है कि मैडम आज भी वहीं प्रदेश वाला ही रौब और अंदाज दिखाने की कोशिश में जुटी हुई हैं। प्रदेश में अपने तरीके से नियम-कायदे चलाने की आदी रही मैडम अब केन्द्र में भी वही ढपली-अपना राग बजाना चाहती हैं। मामला उनके विभाग के एक अफसर के सस्पेंशन से जुड़ा है। नियम साफ कहते हैं कि सस्पेंड अफसर की सीआर नहीं लिखी जा सकती, लेकिन मैडम तो प्रदेश में ऐसा आराम से कर लिया करती थीं। बस, अब भी उसी पर अड़ी हुई हैं—सीआर लिखनी ही है! केन्द्र के अफसर मैडम के इन ‘स्वनिर्मित नियमों’ से खासे परेशान बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, वे अब मैडम के होम कैडर के अफसरों से पूछताछ कर रहे हैं कि क्या मैडम अपने राज्य में भी ऐसे ही नियम तोड़ती थीं।
7 फिर एक्टिव हुए पूर्व चीफ सेक्रेट्री के दोस्त
पूर्व चीफ सेक्रेट्री के बेहद करीबी दोस्त और देश के सबसे बड़े उद्योग घराने से जुड़े एक नामचीन शख्स ने हाल ही में प्रदेश में दस्तक दी है। लंबे समय से लो प्रोफाइल में रहने वाला यह जनाब अब फिर से प्रदेश की सत्ता और अफसरशाही गलियारों में अपना रौब जमाने की कोशिश में सक्रिय बताए जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो उद्योग घराने का जो बड़ा प्रोजेक्ट प्रदेश में लगाने की बात कही जा रही है, वह महज दिखावा भर है। असल मकसद तो प्रदेश में दोबारा पैर जमाना और पुरानी पकड़ को मजबूत करना है। इसी वजह से पिछले दिनों मुख्यमंत्री और कई सीनियर अफसरों के साथ इनकी मुलाकातें चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लेकिन खेल यहां खत्म नहीं होता। जैसे ही इनकी सक्रियता बढ़ी, पूर्व चीफ सेक्रेट्री के विरोधी भी मैदान में उतर आए। खबर है कि उन्होंने इस शख्स की पूरी ‘कुंडली’ खंगालकर सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचा दी है।
8 डीपीसी में लगा अफसर को झटका
राज्य पुलिस सेवा से आईपीएस अवार्ड की आस लगाए बैठे एक अफसर के सपने पर पिछले दिनों हुई डीपीसी ने जोरदार ब्रेक लगा दिया। साहब को पूरा भरोसा था कि सिस्टम को चकमा देकर वे आखिरकार आईपीएस का तमगा हासिल कर ही लेंगे। तैयारियां भी उसी अंदाज़ में चल रही थीं—नेटवर्किंग, पैरवी और आत्मविश्वास का तड़का अलग! लेकिन कहानी में ट्विस्ट तो होना ही था। साहब पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी हासिल करने के आरोप पहले से ही लगे थे। इतना ही नहीं, एक सीनियर आईपीएस ने तो उनके खिलाफ बाकायदा एफआईआर भी दर्ज करवा दी थी। साहब ने कोर्ट के जरिए किसी तरह यह एफआईआर निरस्त भी करा ली, और यहीं उन्हें लगा कि अब राह साफ है। मगर कोर्ट ने आदेश में एक लाइन लिख दी—“मामले की फिर से जांच होनी चाहिए।” बस, इसी एक लाइन ने साहब के सारे अरमानों पर पानी फेर दिया। डीपीसी में फाइल अटक गई और आईपीएस अवार्ड का मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
9 “मिश्रा जी का जादू, साहब हुए फिदा!”
प्रदेश के एक प्रमुख सचिव इन दिनों अपने विभाग के “मिश्रा जी” पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान बताए जा रहे हैं। और मेहरबानी की वजह भी कम दिलचस्प नहीं है। चर्चा यह है कि इस बार दिवाली पर “मिश्रा जी” ने साहब की ऐसी चमकदार दिवाली करा दी कि साहब को भी उम्मीद नहीं थी। “मिश्रा जी” ने दिवाली के नाम पर पूरे प्रदेश से इतना “कलेक्शन” कर डाला कि साहब भी गदगद हो गए। रकम देखकर साहब इतने खुश हुए कि उन्होंने तत्काल “मिश्रा जी” को विभाग का “मंथली कलेक्शन इंचार्ज” घोषित कर दिया। अब विभाग के अफसर-कर्मचारियों को साफ निर्देश जारी हो गए हैं—“काम कराना है? तो पहले “मिश्रा जी” के दरबार में हाजिरी लगाओ!” अंदरखाने चर्चा यह भी चल रही है कि “मिश्रा जी” का रसूख अब इतना बढ़ गया है कि विभाग में फाइलें तब तक नहीं हिलतीं जब तक वे हरी झंडी न दे दें।
10 प्रदेश में नहीं लग रहा है प्रमोटी आईपीएस का मन
पिछले दिनों एक बड़े विवाद की आंच में झुलसकर हटाए गए प्रमोटी आईपीएस साहब अब प्रदेश छोड़ने के मूड में पूरी तरह आ चुके हैं। अफसरशाही गलियारों में चर्चा है कि साहब को साफ अंदाज़ा हो गया है—यहां अब उन्हें कोई खास पोस्टिंग मिलने वाली नहीं है। न कुर्सी का सुख, न विभाग का रुतबा… ऐसे में प्रदेश में रुके रहने का क्या फायदा! साहब ने सरकार को बाकायदा प्रदेश से बाहर जाने के लिए आवेदन भी थमा दिया है। वैसे उनकी सोच में दम भी है—मैडम पहले से ही दिल्ली में पदस्थ हैं, तो परिवार से दूर रहकर निराशा पालने से अच्छा है कि सीधे राजधानी पहुंचकर पारिवारिक सुख भोगा जाए। अब सबकी नजर इस पर है कि सरकार साहब की यह “दिल्ली जाने की इच्छा” कब पूरी करती है।
साहब की सोच शायद यही है— “पोस्टिंग नहीं मिली तो क्या… परिवार के साथ जिंदगी ही सही!”





