बड़े साहब के सवालों से पुलिस अफसरों की यात्रा पर संकट : एसपी की बेटी के एकॉउंट से 89 लाख रुपये गायब : "सवा सौ करोड़ वाले अफसर" पर अब ईडी की नज़र !

बड़े साहब के सवालों से पुलिस अफसरों की यात्रा पर संकट : एसपी की बेटी के एकॉउंट से 89 लाख रुपये गायब : "सवा सौ करोड़ वाले अफसर" पर अब ईडी की नज़र !
1 बड़े साहब के सवालों से पुलिस अफसरों की यात्रा पर संकट
प्रदेश के बीस पुलिस अफसरों की कोरिया यात्रा पर अब बादल नहीं, पूरा तूफान मंडरा रहा है। फाइल जैसे ही बड़े साहब के टेबल तक पहुंची, उन्होंने कुछ ऐसे सवाल दाग दिए कि नीचे वालों की बोलती बंद! अब अफसर जवाब ढूंढ रहे हैं और तारीखें नज़दीक आती जा रही हैं। चर्चा है कि इस डेलीगेशन में आधे आईपीएस और आधे राज्य पुलिस सेवा के अफसर हैं, और सभी ने सूटकेस तक पैक कर लिए थे। यात्रा अक्टूबर के आख़िरी हफ्ते में होनी थी, लेकिन अब लग रहा है कि एयर टिकट की बजाय “क्लैरिफिकेशन नोट” काटना पड़ेगा।
2 एसपी की बेटी के एकॉउंट से 89 लाख रुपये गायब
बड़े जिले के कप्तान साहब इन दिनों खुद एक बड़ी साइबर मिस्ट्री सुलझाने में लगे हैं और केस उनका अपना है! खबर है कि साहब की बेटी के बैंक अकाउंट से ठगों ने पूरे 89 लाख रुपये ऐसे गायब कर दिए जैसे जादू हो गया हो। हालांकि साहब अपनी ताकत लगाकर डेढ़ लाख रुपये तो वापस खींच लाए हैं, मगर बाकी रकम अब तक ठग के एकॉउंट में ही है। बताया जाता है कि साहब की बेटी, पत्नी और मां — तीनों के अकाउंट से गोल्ड इन्वेस्टमेंट किया जाता है। इन्हीं खातों में मोटी रकम देखकर साइबर ठगों ने टारगेट साध लिया। अब हालत ये है कि बदनामी के डर से एफआईआर भी नहीं हुई, लेकिन साइबर टीम को दिन-रात एक कर कह दिया गया है कि “किसी भी कीमत पर पैसे वापस लाओ।
3 "सवा सौ करोड़ वाले अफसर" पर अब ईडी की नज़र !
सहायक आबकारी आयुक्त के मामले में अब कहानी ने नया मोड़ ले लिया है। जी हां, अब ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय भी मैदान में उतर आया है। खबर है कि ईडी ने इस हाई-प्रोफाइल केस में ईसआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। करीब छह साल पहले आई एक शिकायत के बाद जब जांच हुई थी तो साहब के पास से करीब सवा सौ करोड़ की संपत्ति निकल आई थी — वो भी “सरकारी वेतन” से! दो साल पहले लोकायुक्त ने इस मामले में अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी, लेकिन साहब अपने रसूख और नेटवर्क के दम पर फाइल पर ब्रेक लगवाने में कामयाब रहे। अब जब आखिरकार स्वीकृति मिल ही गई तो लोकायुक्त ने साहब और उनकी धर्मपत्नी दोनों के खिलाफ चार्जशीट दायर कर दी है। इसके बाद ईडी ने भी एंट्री मारी और अब साहब के “कैश कनेक्शन” की परतें खुलने लगी हैं।
4 अपने करीबी बिल्डर की पार्टी में पहुंचे कई आईएएस-आईपीएस
राजधानी के एक फाइव स्टार होटल में हाल ही में हुई एक आलीशान पार्टी ने अफसरशाही गलियारों में खलबली मचा दी है। पार्टी देने वाले थे विंध्य इलाके के एक बेहद रसूखदार बिल्डर, जिनकी पहुंच सड़कों से लेकर सत्ताकक्ष तक बताई जाती है। पार्टी में कई आईएएस-आईपीएस और अन्य सेवा के अफसरों ने अपनी मौजूदगी से चार चाँद लगा दिए। लेकिन मज़ा तब आया जब कुछ अफसर एक-दूसरे को देखकर चकित रह गए किसी ने दबी आवाज़ में कहा, “अरे! ये भी इसी बिल्डर से डील करते हैं जिससे मैं करता हूं। दरअसल यह बिल्डर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, बल्कि “संबंधों की पक्की सड़कें” भी बिछाने में माहिर है। कहते हैं, अगर किसी अफसर के पास आपका मामला फंसा है तो यह सज्जन रुपयों का पुल बना कर मामला रफा-दफा करवा देते हैं। वैसे पार्टी में मौजूद कुछ लोग थोड़े असहज भी दिखे — आखिर ये वही बिल्डर हैं जिन्हें कुछ वक्त पहले सीबीआई तलाश रही थी।
5 यंग ब्रिगेड की “प्री-दिवाली पार्टी” में गुटबाज़ी की गूंज!
आर्थिक राजधानी के एक युवा आईएएस अफसर ने पिछले दिनों बड़े ठाठ-बाट से प्री-दिवाली मिलन समारोह रखा। महफ़िल सजी, संगीत बजा, और स्वादिष्ट व्यजंनों की जमावट भी थी लेकिन चर्चा उस पर नहीं, “कौन आया और कौन नहीं बुलाया गया” पर है! दरअसल, पार्टी में कुछ चुनिंदा युवा अफसरों को ही न्योता मिला, जबकि बाकी को तो इंविटेशन कार्ड का दर्शन तक नहीं हुआ। अब वही अफसर एक-दूसरे से पूछ रहे हैं —“हम सब एक ही शहर में हैं, फिर हमें ही क्यों छोड़ा गया?” बताया जाता है कि इस “गेस्ट लिस्ट” का रहस्य सीनियर-जूनियर समीकरणों में छिपा है कोई दो साल सीनियर, कोई तीन साल जूनियर लेकिन ईगो का फासला अब काफी लंबा हो चला है।
6 एसपी बनने के बाद भी नाराज हैं प्रमोटी आईपीएस
सीधी भर्ती से हो या प्रमोटी, हर आईपीएस का सपना तो यही होता है — जिले का पुलिस कप्तान बनो, बंगला, गाड़ी और सारी सुविधाएं हाथ में आएं। लेकिन हाल ही में एक प्रमोटी आईपीएस को जो छोटे से जिले में भेजा गया, उसके हालात देखकर अफ़सर कह रहे हैं कि इससे अच्छा तो पुलिस मुख्यालय में ही खुश हैं। बताते हैं, जिले का ऑफिस न सही ढंग का, न स्टाफ का, और रहने के लिए जो बंगला होना चाहिए, वो भी नहीं। जिला इतना छोटा है कि बहुरंगी बत्ती वाला सरकारी वाहन थोड़ा तेज चला लिया, तो साहब अपने जिले की सीमा छोड़कर दूसरे जिले में पहुंच जाते हैं! साहब अब स्टाफ से लेकर संसाधनों तक के लिए चिट्ठियां लिख-लिखकर परेशान हो गए हैं, लेकिन सुविधा मिलना तो दूर, जवाब तक नहीं मिल रहा।
7 चीफ इंजीनियर का पांच करोड़ का रेस्टो-बार
राजधानी के अफसरशाही गलियारों में इन दिनों सबसे हॉट टॉपिक हैं हमारे एक नामचीन चीफ इंजीनियर साहब, जिन्होंने सरकारी नक्शों से निकलकर अब सीधे शहर के सबसे मॉडर्न मॉल में रेस्टो-बार खोल डाला है! बताया जा रहा है कि इस आलीशान ठिकाने पर करीब पांच करोड़ रुपये की मोटी पूंजी लगाई गई है। संचालन की जिम्मेदारी साहब ने अपने एक बेहद खास करीबी को थमा दी है। पिछले हफ्ते यहां प्री-दिवाली बैश हुआ, जिसमें शहर के रसूखदार चेहरे, अफसरों के मित्र-मंडल और कुछ “विशेष मेहमान” देर रात तक मस्ती करते नजर आए। पार्टी में जो नहीं पहुंचे, वे अब तक तस्वीरें ढूंढ रहे हैं! बार का नाम भी इतना “क्लासी” रखा गया है कि सुनकर लगता है मानो यहां रोज कोई क्वाली नाइट होती हो। लेकिन चर्चा सिर्फ नाम की नहीं है — लोग याद दिला रहे हैं कि यही वो साहब हैं जिनकी महिला मित्र संग तस्वीर कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थी। अब कहा जा रहा है, वही मित्र कभी विभाग में ठेकों की महारथी मानी जाती थीं
8 तीन दिग्गज नेताओं से निपटने की आईपीएस की तरकीब
बड़े जिले की सियासत इन दिनों खासा गरमा रही है। यहां के तीन दिग्गज नेता एक-दूसरे को पटखनी देने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। दो नेता तो पहले से ही सत्ताधारी दल में थे, तीसरे ने भी विपक्ष का दामन छोड़ उसी खेमे में दस्तक दे दी। अब तीनों का असली मुकाबला सीधे नहीं, बल्कि कलेक्टर और एसपी के सहारे चल रहा है। लेकिन जिले में पदस्थ युवा एसपी ने नेताओं की इस जंग से निपटने का बड़ा दिलचस्प तरीका निकाल लिया है। साहब ने ऑफिस जाना ही बंद कर दिया! न तो नेतागण के मोबाइल रिसीव करते हैं, न ही उनकी फरमाइशों पर ध्यान देते हैं। कभी क्रिकेट खेलने निकल जाते हैं, तो कभी गांव-गांव दौरा कर आम जनता से गुफ्तगू करते मिलते हैं। नेताओं को साहब की तलाश रहती है, लेकिन मिलते कहीं नहीं। साहब का कहना है—“फर्जी कार्रवाई करने से बेहतर है ऑफिस न जाना।” जिले के हालात से वाकिफ सीनियर अफसर भी इस तरकीब को लेकर पूरी तरह संतुष्ट बताए जा रहे हैं।
9 आखिरकार एएसपी को देनी पड़ी आमद
निमाड़ इलाके के एक जिले में पदस्थ एडिशनल एसपी इन दिनों सीबीआई जांच में उलझ गए। गिरफ्तार होने के डर से साहब फरार हो गए। सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत एएसपी का तबादला पुलिस मुख्यालय कर दिया। कई दिनों तक आमद नहीं होने पर पता चला कि साहब कोर्ट से स्टे लेने के मूड में हैं। बस फिर क्या था, मुख्यालय बैठे अफसरों ने साहब को ऐसी फटकार लगाई कि अगले ही पल एएसपी ने मुख्यालय में हाज़िरी दे दी। लेकिन अफसरों की राहत ज्यादा दिन टिक नहीं सकी—आमद के बाद से साहब अवकाश लेकर गायब हैं। अंदर की खबर ये है कि अब साहब दोबारा फील्ड में जाने की जुगत में नेता और अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
10 “साहब गए बिहार पर चैन नहीं मिला किसी को!”
ईमानदार और शांत स्वभाव वाले साहब की जब बिहार विधानसभा चुनाव में ड्यूटी लग गई, तो विभाग में सबको लगा था कि अब कुछ दिन मौज-मस्ती के निकल आएंगे। लेकिन साहब ने सबकी गणना ग़लत साबित कर दी! साहब भले ही बिहार में हों, मगर कनेक्शन राजधानी से सीधा लाइव है। जनाब हर दो दिन में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए विभाग के कामकाज की सघन समीक्षा कर रहे हैं। अब तो विभाग के कुछ अफसरों ने कहना शुरू कर दिया है “काश साहब की ड्यूटी नहीं लगी होती, कम से कम एक बार आमने-सामने बात करके निपट जाते... ये तो हर दो दिन स्क्रीन पर हाज़िरी लगानी पड़ रही है!”
Abhishek Dubey

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Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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