AIIMS भोपाल में बनेगा मध्य प्रदेश का पहला हाइब्रिड हार्ट ऑपरेशन थिएटर 6 आधुनिक मशीनें और 35 नए बेड मिलेंगे

भोपाल। मध्य प्रदेश में हृदय रोगियों के इलाज की सुविधाओं को बढ़ाने के लिए एम्स भोपाल में कार्डियक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने की तैयारी है। यहां प्रदेश का पहला हाइब्रिड हार्ट ऑपरेशन थिएटर और आधुनिक बाइप्लेन कैथ लैब स्थापित करने की योजना है। इसके साथ 6 आधुनिक मशीनें और 30 से 35 अतिरिक्त बेड भी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। हालांकि, परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बजट की मंजूरी मिलना बाकी है।
यह सेंटर एम्स भोपाल की क्रिटिकल केयर यूनिट की पांचवीं मंजिल पर प्रस्तावित है। इसका उद्देश्य जटिल हृदय रोगों की जांच और इलाज की क्षमता बढ़ाना तथा मरीजों को लंबी वेटिंग से राहत देना है।
रोजाना 350 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में
एम्स भोपाल की कार्डियोलॉजी ओपीडी में रोजाना करीब 350 मरीज पहुंच रहे हैं। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण इको और कैथ लैब से जुड़ी कुछ प्रक्रियाओं के लिए ढाई से तीन महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता जांचने वाले सीपीईटी टेस्ट की वेटिंग करीब चार महीने तक बताई गई है।
नया सेंटर शुरू होने पर जांच और उपचार की क्षमता बढ़ने की उम्मीद है। इससे गंभीर हृदय रोगियों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
सेंटर में लगेंगी 6 आधुनिक मशीनें
प्रस्तावित कार्डियक सेंटर में ये आधुनिक मशीनें लगाने की योजना है:
- बाइप्लेन कैथ लैब: दो कोणों से तस्वीरें लेकर जटिल एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग में मदद करेगी।
- इंट्रावास्कुलर अल्ट्रासाउंड: धमनी के भीतर ब्लॉकेज की स्थिति और गंभीरता समझने में मदद करेगा।
- ऑप्टिकल कोहेरेंस टोमोग्राफी: धमनियों और स्टेंट की बारीक तस्वीरें उपलब्ध कराएगी।
- ट्रांसईसोफेगल इकोकार्डियोग्राफी: हार्ट वाल्व और जन्मजात हृदय दोषों की विस्तृत जांच में उपयोगी होगी।
- एडवांस्ड ट्रेडमिल टेस्ट और सीपीईटी: व्यायाम के दौरान दिल और फेफड़ों की कार्यक्षमता का आकलन करेंगे।
- होल्टर मॉनिटर: 24 से 48 घंटे तक दिल की धड़कनों को रिकॉर्ड कर अनियमित धड़कन की पहचान में मदद करेगा।
एक ही जगह सर्जरी और आधुनिक जांच की सुविधा
हाइब्रिड ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी के साथ आधुनिक इमेजिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है। इससे जटिल हृदय रोगों में सर्जरी और कैथेटर आधारित उपचार को एक ही स्थान पर संभव बनाने में मदद मिलेगी। बाइप्लेन कैथ लैब से जटिल ब्लॉकेज, स्टेंट लगाने और बच्चों में जन्मजात हृदय दोषों के उपचार की सुविधाओं का भी विस्तार हो सकेगा।
एम्स में हो चुके हैं 5 हार्ट ट्रांसप्लांट
जानकारी के मुताबिक, एम्स भोपाल में अब तक 5 हार्ट ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। संस्थान में हृदय से जुड़ी 18 से अधिक अन्य प्रक्रियाएं भी की गई हैं। नए सेंटर में एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर और हार्ट ट्रांसप्लांट से संबंधित सुविधाओं का विस्तार प्रस्तावित है।
एम्स में फिलहाल दो कैथ लैब हैं। नई लैब बनने से हार्ट अटैक के गंभीर मरीजों के इलाज की क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, अतिरिक्त बेड जटिल प्रक्रियाओं के बाद मरीजों की निगरानी और देखभाल के लिए उपयोगी होंगे।
एम्स के वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. भूषण शाह के अनुसार, नई कैथ लैब से जांच और उपचार की क्षमता बढ़ेगी। फिलहाल यह परियोजना बजट मंजूरी की प्रक्रिया में है। स्वीकृति मिलने के बाद ही निर्माण और उपकरण स्थापित करने का काम आगे बढ़ सकेगा।





