सचिव साहब को दिल्ली के अफसरों पर ज्यादा भरोसा : सीनियर आईपीएस की प्रदेश वापसी पर फिलहाल लगा ब्रेक : “वजनदार” मंत्री पर भारी पड़ा कर्मचारी

1 सचिव साहब को दिल्ली के अफसरों पर ज्यादा भरोसा
दिल्ली से डेपुटेशन खत्म कर लौटे सचिव स्तर के एक अफसर को शायद अब प्रदेश के अफसरों और कर्मचारियों पर भरोसा नहीं रहा! तभी तो साहब ने एक-एक करके दिल्ली में अपने साथ काम कर चुके अफसरों को यहां बुलाना शुरू कर दिया है — और सीधे अपने विभाग की अहम कुर्सियों पर बिठा भी दिया है। दिल्ली से आए अफसरों के साथ सबसे बड़ी समस्या यह आ रही है कि वे प्रदेश के अफसरों के साथ न तो सही तालमेल बैठा पा रहे हैं और न प्रदेश की कार्यशैली को समझ पा रहे हैं। यह अफसर सिर्फ प्रदेश के अफसरों को रौब दिखाने का काम कर रहे हैं। बताया जाता है कि ये सभी अफसर दिल्ली कार्यकाल के दौरान साहब के “खास चेले” माने जाते थे। फिलहाल सचिव साहब एक बेहद बड़े विभाग में कमिश्नर की कुर्सी संभाल रहे हैं, लेकिन उनकी नजरें तो उस संभाग पर थीं जहां देश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होने वाला है। अफसोस, मुखिया जी ने कुछ दिन पहले ही वहां अपने भरोसेमंद अफसर को तैनात कर दिया। अब देखना यह है कि साहब अपनी “दिल्ली टीम” के सहारे कितनी दूर तक खेल जाते हैं।
2 सीनियर आईपीएस की प्रदेश वापसी पर फिलहाल लगा ब्रेक
डेपुटेशन पर गए एक सीनियर आईपीएस अफसर इन दिनों थोड़े असमंजस में हैं। उनका इंपैनलमेंट नहीं हो सका है, ऐसे में अब साहब की इच्छा है कि वे प्रदेश लौट आएं। अफसर के मिलनसार और सौम्य स्वभाव के चलते उनके कुछ करीबी मित्र अफसरों ने तो प्रदेश में उनकी वापसी और अच्छी पोस्टिंग दिलाने की फाइल भी बड़ी तेजी से दौड़ा दी थी। माहौल ऐसा बन गया था कि सब कुछ आसानी से हो जाएगा और साहब जल्द ही प्रदेश की किसी महत्वपूर्ण कुर्सी पर दिखेंगे। बताया जाता है कि “बड़े साहब” ने भी फाइल को बिना किसी अड़चन के हरी झंडी दे दी थी। लेकिन तभी किसी पुराने “शत्रु” ने मुखिया जी के कान में कुछ फूंक दिया — और देखते ही देखते फाइल पर ब्रेक लग गया। अब साहब चाहें तो केंद्र सरकार को आवेदन देकर लौट सकते हैं, मगर मुखिया जी के तेवर देखकर जानकारों का कहना है — वापसी तो हो जाएगी, पर कुर्सी शायद मनमाफिक न मिले!
3 “वजनदार” मंत्री पर भारी पड़ा कर्मचारी
प्रदेश के सबसे “वजनदार” मंत्री पर इस बार एक अदना-सा कर्मचारी ही भारी पड़ गया! जी हां, वही मंत्री जी जो अपनी ईमानदारी और सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इस बार खुद अपने ही बनाए नियम के जाल में उलझ गए। कहानी कुछ यूं है — मंत्री जी ने विभाग में नया फरमान जारी किया था कि पिछले दस सालों में जिन किसी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई हुई है, उन्हें संविदा पर नहीं लिया जाएगा। लेकिन देखते ही देखते वही मंत्री जी, दिल्ली में पदस्थ एक ऐसे कर्मचारी को संविदा दे बैठे, जिस पर फर्जीवाड़े का मामला चल चुका है!सुना है, शुरुआत में मंत्री जी इस नियुक्ति पर सख्त रुख में थे — साफ मना कर दिया था। मगर फिर अचानक, कुछ तो ऐसा हुआ कि उन्होंने फाइल पर साइन कर दी। अब ये “कुछ” क्या था — दबाव, प्रभाव या कोई खास सिफारिश — यही तो प्रशासनिक गलियारों का नया रहस्य बन गया है।
4 एसपी साहब फिर से बन गए “गोल्डन गुरू”
कुछ दिनों की लो प्रोफाइल लाइफ के बाद, हमारे एक प्रमोटी आईपीएस साहब फिर से फुल फॉर्म में लौट आए हैं ! जी हां, एसपी साहब ने दोबारा से गोल्ड में निवेश का काम शुरू कर दिया है। साहब पहले की तरह ही खुद के साथ-साथ अधिनस्थों को भी गोल्डन गुरु बनकर ज्ञान दे रहे हैं — “भाइयों, गोल्ड में निवेश करो, रिश्वत की ज़रूरत ही नहीं पड़ेगी!” बैठकों में खुलेआम कहते हैं “जो गोल्ड में इन्वेस्ट करना चाहता है, मेरी बेटी से कॉन्टैक्ट करे।” (मतलब अब गोल्ड एडवाइजर का ठेका घर में ही!) ये वही एसपी साहब हैं, जिनके जिले में पुलिसवालों ने खुद ही हवाला कारोबारी के साथ डकैती कर ली थी! तब तो टॉप लेवल पर माना जा रहा था कि साहब की कुर्सी हिलने वाली है, मगर अब लगता है सब “मैनेज” हो गया है।
5 सीनियर आईएएस मैडम पर भड़के सीईसी
बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायज़ा लेने जब देश के चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ने ऑब्जर्वर्स की ऑनलाइन मीटिंग ली, तो कई अफसरों के पसीने छूट गए। लेकिन सबसे हॉट मोमेंट तब आया जब एक प्रमुख सचिव स्तर की आईएएस मैडम से सीईसी ने मासूम-सा सवाल पूछ लिया “मैडम, स्ट्रॉन्ग रूम में कैमरे लग गए क्या?” मैडम ने पूरे आत्मविश्वास से जवाब दिया — “जी हां, मैंने स्ट्रॉन्ग रूम के अंदर कैमरे लगवा दिए हैं।” बस फिर क्या था! सीईसी का चेहरा एकदम “ब्रेकिंग न्यूज़” मोड में आ गया। उन्होंने कहा “इतनी सीनियर अफसर होकर आपको ये भी नहीं पता कि कैमरे अंदर नहीं, बाहर लगते हैं?” कहते हैं, मैडम के चेहरे का रंग उसी वक्त “वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग मोड” से “साइलेंट मोड” में बदल गया। मीटिंग में मौजूद बाकी अफसरों की सांसें भी अटक गईं — क्योंकि सीईसी का मूड अब किसी रियलिटी शो जज जैसा हो चुका था। कई और अफसर भी उनके निशाने पर आए।
6 एमडी साहब का फरमान फोटो कॉपी का हिसाब दो
निगम में पदस्थ युवा आईएएस एमडी साहब इन दिनों अपने अनोखे फरमानों से चर्चा में हैं — और सच कहें तो, कर्मचारियों की प्रार्थना सूची में “साहब का ट्रांसफर” अब टॉप पर आ गया है! साहब का ताज़ा आदेश सुनिए — अब दफ्तर में कोई भी फोटोकॉपी करेगा, तो उसका पूरा ‘चार्ट शीट’ बनेगा!
मतलब — कौन-सा दस्तावेज़ कॉपी किया, क्यों किया, कितने पन्ने कॉपी किए, और उसका इस्तेमाल कहां होगा — सब कुछ रजिस्टर में लिखकर देना होगा! दरअसल, साहब ने हाल ही में ऑफिस में एक नई चमचमाती फोटोकॉपी मशीन लगवाई है। साथ ही उसके पास रखवा दिया है एक “ईमानदारी रजिस्टर”। कहते हैं, साहब को शक है कि दफ्तर से कागज़ की कॉपियां बाहर जा रही हैं — इसलिए अब हर पन्ने का ऑडिट होगा! मज़ेदार बात ये है कि साहब की अपने विभाग के एसीएस से भी पटरी नहीं बैठ रही।
7 चार्ज लेकर छुट्टी पर चले गए एडिशनल सेक्रेट्री साहब
एक बड़े विभाग में इन दिनों ‘चार्ज’ ड्रामा खूब चर्चा में है। हुआ यूं कि विभाग के सचिव साहब बिहार चुनाव में ऑब्जर्वर बनकर गए हुए हैं। उनकी गैरमौजूदगी में चार्ज एक अन्य विभाग के डिप्टी सेक्रेट्री रैंक वाले आईएएस अफसर को दिया गया। बस फिर क्या था! विभाग के अतिरिक्त सचिव साहब का ईगो मीटर एकदम हाई हो गया! साहब ने ऊपर तक हंगामा मचा दिया — “हम डिप्टी सेक्रेट्री लेवल के अफसर के अंडर में काम नहीं करेंगे!” मेहनत, मैनेजमेंट और थोड़ा-सा मंत्रालयी जादू दिखाकर आखिरकार उन्होंने सचिव का चार्ज खुद के पास करवा लिया। सबने सोचा — चलिए, अब विभाग में काम की रफ्तार बढ़ेगी... लेकिन कहानी में आया ट्विस्ट! जैसे ही चार्ज उनके पास आया — साहब छुट्टी पर चले गए! अब विभाग में चर्चा गर्म है — “जब काम करना ही नहीं था तो इतना चार्ज ड्रामा क्यों किया?”
8 आईपीएस का ऑपरेशन “बंगला खाली करो”
अब तक तो एक सीनियर आईपीएस साहब से उनके अधीनस्थ ही परेशान थे, लेकिन अब तो जूनियर आईपीएस अफसरों ने भी साहब के नाम से रोना शुरू कर दिया है। कहानी का सिरा जुड़ा है सरकारी बंगलों से — जी हां, वही बंगले जिन पर आजकल प्रदेशभर में “जुगाड़-जंग” चल रही है। जहां बाकी अफसर अपने लिए किसी तरह ठिकाना सेट करने में जुटे हैं, वहीं साहब ने नया “ऑपरेशन बंगला खाली करो” शुरू कर दिया है। उन्होंने अपनी शाखा के अंडर आने वाले आर्थिक राजधानी में बने कुछ सरकारी बंगलों पर नज़र डाली और सीधे अपने जूनियर आईपीएस अफसरों को नोटिस थमा दिए —“तुरंत खाली करो बंगला!” अब बेचारे जूनियर अफसर हैरान — “हम तो नियम से रह रहे थे, फिर ये अचानक डोज़ क्यों?” सबसे मज़ेदार बात — बंगले खाली भी हो गए तो उनमें कोई रहने वाला नहीं है! क्योंकि साहब के विभाग में अभी किसी की पदस्थापना ही नहीं हुई है।
9 स्थापना दिवस पर “गायब” रहीं विधायक मैडम!
प्रदेश के स्थापना दिवस के सरकारी जलसे में जहां सबकी मौजूदगी दर्ज थी, वहीं एक युवा और चर्चित विधायक मैडम की गैर-मौजूदगी ने खूब सुर्खियां बटोरीं। सत्ताधारी दल से जुड़ी यह मैडम यूं तो हर सरकारी मंच पर फ्रंट रो में दिखाई देती हैं, लेकिन इस बार उनकी कुर्सी खाली रही — और यही खाली कुर्सी अब प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा बन गई है। दरअसल, मैडम का अपने जिले के कलेक्टर और एसपी से छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। मैडम का कहना है — “दोनों अफसर मेरा काम तो दूर, मेरा फोन तक नहीं उठाते!” उन्होंने सरकार से लेकर संगठन तक शिकायतें भी कीं, लेकिन नतीजा — ज़ीरो रिस्पॉन्स! अब माना जा रहा है कि इस सरकारी कार्यक्रम से दूरी बनाकर मैडम ने पहली बार अपनी नाराज़गी को सार्वजनिक कर दिया है। कॉरिडोर में तो यह भी चर्चा है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आने वाले दिनों में मैडम का “मूड स्विंग” बड़ा पॉलिटिकल तूफान खड़ा कर सकता है।
10 पूर्व आईएएस करेंगे छह महीने की पैदल नर्मदा यात्रा
रिटायर्ड आईएएस और उनकी पत्नी अब पूरी तरह आध्यात्मिक मोड़ पर हैं। गीता के उपदेश के बाद साहब सपत्नीक छह महीने की नर्मदा यात्रा पर जाने वाले हैं। करीब साढ़े तीन हजार किलोमीटर की यह यात्रा साहब पैदल करेंगे, और रास्ते में कई भक्तों और यात्रियों को प्रेरणा और मार्गदर्शन देंगे। इससे पहले ही साहब ने नर्मदा किनारे बसे अपने घर के एक हिस्से में परिक्रमावासियों के रुकने और भोजन की व्यवस्था कर दी है। मजेदार बात यह है कि साहब ने अपनी पेंशन का एक हिस्सा भी इसी धार्मिक कार्य में लगा रहे हैं।





