पुरानी दोस्त से परेशान साहब का ‘हाई-सिक्योरिटी प्लान’ : युवा आईपीएस पर भारी पड़ रहा एडीएम रैंक का अफसर : पचास लाख वापस लेने वेंडर लगा रहा युवा आईएएस के चक्कर

1 पुरानी दोस्त से परेशान साहब का ‘हाई-सिक्योरिटी प्लान’
लूप लाइन में पदस्थ प्रमुख सचिव स्तर के एक आईएएस अफसर इन दिनों अपनी पुरानी परिचित से खासे परेशान बताए जा रहे हैं। मैडम रोज़ाना साहब के दफ़्तर पहुंच जाती थीं—और साहब, जो पहले तो औपचारिकता निभाते रहे, अब इस अनचाही मुलाकात से तंग आ चुके हैं। सूत्रों की मानें तो साहब ने हाल ही में दफ्तर के सुरक्षा कर्मियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि मैडम को किसी भी हालत में दफ्तर के भीतर न आने दिया जाए। इतना ही नहीं, साहब ने उनका मोबाइल नंबर भी ब्लॉक लिस्ट में डाल दिया है।—साहब इस झंझट से बचने के लिए प्रदेश से दिल्ली का रुख करने की तैयारी में हैं। खास बात यह है कि साहब का दफ़्तर प्रदेश के सबसे हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में स्थित है। ऐसे में रोज़-रोज़ होने वाली यह एंट्री खुद सुरक्षा कर्मियों के लिए भी चर्चा का विषय बन गई थी।
2 युवा आईपीएस पर भारी पड़ रहा एडीएम रैंक का अफसर
राज्य प्रशासनिक सेवा का एडीएम स्तर का एक अफसर इन दिनों सीधी भर्ती के युवा आईपीएस पर सरकारी बंगले के मामले में भारी पड़ रहा है। हुआ यूं कि एडीएम साहब का तबादला आर्थिक राजधानी से एक बड़ी धार्मिक नगरी में हो गया। लेकिन उन्होंने आर्थिक राजधानी वाला सरकारी बंगला खाली ही नहीं किया; बल्कि अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुए धार्मिक नगरी में भी एक सरकारी बंगला आवंटित करा लिया। अब स्थिति यह है कि साहब दो-दो सरकारी बंगलों के मालिक बन बैठे हैं। इसी बीच धार्मिक नगरी वाला बंगला वरिष्ठ अधिकारियों ने एक आईपीएस को आवंटित कर दिया। लेकिन आईपीएस साहब को अब तक उसकी चाबी नहीं मिली है, क्योंकि एडीएम साहब बंगला खाली करने को तैयार ही नहीं हैं। बताया जाता है कि एडीएम साहब वीकेंड पर धार्मिक नगरी से चोरी-छुपे आर्थिक राजधानी आते हैं और उसी पुराने बंगले में डेरा डालकर वापस लौट जाते हैं।
3 पचास लाख वापस लेने वेंडर लगा रहा युवा आईएएस के चक्कर
सीधी भर्ती से आए एडिशनल सेक्रेटरी रैंक के एक आईएएस अफसर इन दिनों एक वेंडर को लेकर खासे परेशान हैं। दरअसल, खरीदी–बिक्री से जुड़े एक विभाग में एमडी रहते हुए उन्होंने उस वेंडर को टेंडर दिलाने का वादा किया था और इसी भरोसे पर उससे करीब पचास लाख रुपये एडवांस भी ले लिए थे। लेकिन इसी बीच साहब का तबादला ऐसे विभाग में हो गया, जहां भले ही फाइनेंस से जुड़ा काम है, मगर ऊपरी कमाई की कोई खास गुंजाइश नहीं। अब वेंडर अपने पैसे वापस लेने के लिए लगातार साहब के चक्कर काट रहा है। साहब कभी उसे भविष्य में किसी अच्छे टेंडर का भरोसा दिला रहे हैं, तो कभी जल्द ही रकम लौटाने का आश्वासन दे देते हैं। उधर, कुछ महीने पहले साहब ने सरकार से मिलकर एक “अच्छी पोस्टिंग” दिलाने की भी गुहार लगाई थी, लेकिन अब तक उम्मीद की कोई ठोस किरण नजर नहीं आ रही है।
4 बड़े साहब ने कमिश्नर के अरमानों को दिया झटका
एक बड़े और मलाईदार विभाग के कमिश्नर के अरमानों को बड़े साहब ने जोरदार झटका दे दिया है। खुद को बड़े साहब का बेहद करीबी बताने वाले यह अधिकारी अक्सर दावा करते थे कि उनसे जो चाहें, वही करवा सकते हैं। लेकिन उनकी हेकड़ी तब निकल गई, जब बड़े साहब ने उनके दो हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को पूरी प्रक्रिया से पूरा करने का फरमान जारी कर दिया है। मामला पूरे प्रदेश में सीसीटीवी कैमरे लगाने से जुड़े प्रोजेक्ट का है। कमिश्नर साहब न सिर्फ बेंगलुरु की एक प्राइवेट फर्म को ठेका देने का मन बना चुके थे, बल्कि उस फर्म के डायरेक्टर को बड़े साहब की बैठकों में ‘एक्सपर्ट’ बनाकर बैठाने लगे थे। अब बड़े साहब ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए एक कमेटी गठित कर दी है। यही कमेटी शर्तें तय करेगी, प्रक्रिया बनाएगी और उसके बाद टेंडर जारी किया जाएगा।
5 तबादला सूची लीक होने से नाराज एसीएस
एक बड़े और संवेदनशील विभाग के एसीएस इन दिनों अपने विभागीय अफसरों से खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं। उनकी नाराज़गी की वजह भी वाजिब मानी जा रही है, क्योंकि विभाग की महत्वपूर्ण तबादला सूची लीक हो गई। इस मामले में एसीएस से सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जवाब तलब किया गया, जिससे साहब का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। जांच-पड़ताल में सामने आया कि दो बाबुओं ने संबंधित अफसरों को मोबाइल पर कॉल कर तबादला सूची में उनके नाम होने की जानकारी दी थी। अब विभागीय गोपनीयता भंग करने के आरोप में इन दोनों बाबुओं को विभाग से हटाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
6 दिल्ली में पदस्थ आईएएस मैडम से नाराजगी
दिल्ली में बेहद महत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ एक सीनियर आईएएस मैडम को लेकर इन दिनों सत्ता के गलियारों में खासी चर्चा है। बताया जा रहा है कि उनके कामकाज को लेकर कैबिनेट सेक्रेटरी खासे नाराज़ हैं और उन्होंने इस नाराज़गी को औपचारिक रूप से पत्र के माध्यम से भी जता दिया है। दरअसल मामला प्रधानमंत्री की एक बेहद महत्वाकांक्षी फ्लैगशिप योजना से जुड़ा हुआ है। इस योजना के क्रियान्वयन और मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी मैडम के विभाग पर थी, लेकिन हालिया रिव्यू मीटिंग में विभाग का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। आंकड़ों और प्रोग्रेस रिपोर्ट में गंभीर खामियां सामने आने के बाद कैबिनेट सेक्रेटरी ने कड़ा रुख अपनाया। सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट सेक्रेटरी ने मैडम को भेजे गए पत्र में न सिर्फ खराब परफॉरमेंस पर नाराज़गी जताई, बल्कि समयबद्ध तरीके से सुधार लाने के स्पष्ट निर्देश भी दिए हैं। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि आगे होने वाले रिव्यू में प्रगति की बारीकी से समीक्षा की जाएगी।इस पूरे घटनाक्रम के बाद से सीनियर आईएएस मैडम खासे दबाव और तनाव में बताई जा रही हैं।
7 आईजी ने एसपी को लगाई जमकर फटकार
एक बड़ी रेंज की जिम्मेदारी संभाल रहे सीधे भर्ती के एक आईपीएस अधिकारी ने हाल ही में एक प्रमोटी एसपी को जमकर फटकार लगाई। दरअसल, यह एसपी एक एएसपी पर जरूरत से ज़्यादा मेहरबानी दिखा रहे थे। एएसपी का तबादला हुए करीब पाँच महीने बीत चुके थे, लेकिन इसके बावजूद न तो वे सरकारी बंगला खाली करने को तैयार थे और न ही सरकारी वाहन लौटाने को। आईजी ने इस पूरे मामले पर नाराज़गी जताते हुए एसपी को स्पष्ट निर्देश दिया कि एएसपी से तत्काल सरकारी वाहन वापस लिया जाए और बंगला खाली कराया जाए। आईजी की फटकार के बाद अब एसपी मजबूरी में एएसपी के बेदखली के आदेश जारी करने पड़े हैं।
8 जिले के कप्तान बने बिना बन जाएंगे डीआईजी
चाहे प्रमोटी हों या सीधी भर्ती के आईपीएस, सभी का सपना होता है कि उन्हें ज्यादा से ज्यादा जिलों की कप्तानी करने का मौका मिले। लेकिन डीआईजी पद पर पहुंचते ही यह अवसर स्वतः समाप्त हो जाता है।इसी बीच, आईपीएस अफसरों को डीआईजी पद पर पदोन्नति देने के लिए जल्द होने वाली डीपीसी की बैठक को लेकर चर्चा तेज है। इस सूची में एक ऐसा अफसर भी शामिल है, जो किसी तरह आईपीएस तो बन गया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदेश के एक भी जिले का कप्तान नहीं बन सका। दरअसल, यह अफसर राज्य पुलिस सेवा से प्रमोट होकर आया था और अपने कार्यकाल में काफी विवादों में रहा। एक लंबे समय तक निलंबन झेलने के बाद उसे आईपीएस अवार्ड तो मिल गया, लेकिन जिले की कप्तानी का सपना अधूरा ही रह गया।
9 सीनियर आईएएस की वीसी कलेक्टरों के लिए बनी सिरदर्द
लूप लाइन मानी जाने वाली एक संस्था में पदस्थ सीनियर आईएएस की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग इन दिनों प्रदेश भर के कलेक्टरों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि कलेक्टर रोज़ाना वीसी से जुड़कर घंटों अपना कीमती समय गंवा रहे हैं। स्थिति यह है कि साहब हर दिन शाम ठीक पांच बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग शुरू कर बैठ जाते हैं। सभी कलेक्टरों को सख्त निर्देश हैं कि इस वीसी में अनिवार्य रूप से जुड़ना होगा। जो कलेक्टर किसी कारणवश नहीं जुड़ पाता, उसे साहब खुलेआम जलील करने से भी नहीं चूकते। एक बार वीसी शुरू हो जाए तो उसका कोई तय समय नहीं होता — यह घंटों तक खिंचती रहती है। कलेक्टरों का दर्द यह है कि वीसी के दौरान दिए गए टास्क को पूरा करने में भी समय लगता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर रोज़ सिर्फ वीसी ही चलती रहेगी, तो ज़मीनी काम आखिर कब होगा?
10 बेटी के आईएएस बनने पर छलका प्रमोटी आईएएस का दर्द
एक प्रमोटी आईएएस अफसर इन दिनों कुछ ज्यादा ही भावुक नजर आ रहे हैं। जहां भी जाते हैं, मौका मिलते ही यह कहने से नहीं चूकते कि एक समय ऐसा था जब उन्हें प्रमोटी होने की वजह से कोई ढंग से आईएएस मानने को तैयार नहीं था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उनकी बेटी आईएएस बन चुकी है और शादी के बाद दूसरे कैडर में भी चली गई है। साहब बड़े गर्व से बताते हैं कि बेटी के आईएएस बनते ही उनकी पूछ-परख बढ़ गई है। अब हर जगह उन्हें सम्मान मिलता है, लोग अहमियत देने लगे हैं—और इसकी वजह, उनके मुताबिक, यह है कि उनकी बेटी सीधी भर्ती की आईएएस है। हालांकि साहब के जाते ही पीछे लोग चुटकी लेने से नहीं चूकते। चर्चा यह रहती है कि न जाने कितने सालों से साहब यह दर्द दिल में दबाए घूम रहे थे, जो बेटी के आईएएस बनते ही अचानक बाहर आ गया।





