बड़े साहब कर रहे आईएएस अफसरों का 360 डिग्री : दो पत्नी वाले रिटायर्ड आईपीएस की रुकेगी पेंशन : मेहमानवाजी हो तो आईएएस के बेटे के बर्थ-डे पार्टी जैसी

1 बड़े साहब कर रहे आईएएस अफसरों का 360 डिग्री
बड़े साहब को एक्सटेंशन को मिलने के बाद वे आईएएस अफसरों की ट्रांसफर सूची तैयार करने में जुट गए हैं। ट्रांसफर लिस्ट कब आएगी, ये तो खुद भगवान भी नहीं बता सकते, लेकिन उससे पहले साहब ने अफसरों की 360 डिग्री जांच शुरू कर दी है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसियों से भी यह पूछा जा रहा है कि “कौन-कौन से अफसरों के खिलाफ क्या-क्या शिकायतें दर्ज हैं और कितनी गंभीर हैं?” इतना ही नहीं, विभागों से यह हिसाब-किताब भी तलब किया जा रहा है कि अफसरों ने योजनाओं पर कितना काम किया और कितनी हवा में उड़ाई। लोकल इंटेलिजेंस से भी रिपोर्ट मांगी गई है और जनप्रतिनिधियों का फीडबैक भी लिया जा रहा है। लूप लाइन में बैठे अफसरों में खुसुर-फुसुर यह है कि चाहे जितना इनपुट जहां से लेना हो ले लो बस प्रभु सूची जल्दी निकाल दो।
2 दो पत्नी वाले रिटायर्ड आईपीएस की रुकेगी पेंशन
कहते हैं, “सरकार में देर है पर अंधेर नहीं” और यह कहावत बिल्कुल फिट बैठ रही है एक प्रमोटी आईपीएस साहब पर, जो कई साल पहले रिटायर हो चुके हैं। साहब जब नौकरी में थे तभी उनके खिलाफ शिकायत आई थी कि उन्होंने बिना पहली पत्नी को तलाक दिए गैरकानूनी तरीके से दूसरी शादी कर ली है। शिकायत तो हुई, जांच भी बैठी। कई साल तक जांच चलने के बाद अब जाकर जांच पूरी हुई और मामला सच निकला। सरकार ने तय कर लिया है कि साहब पर सख्त एक्शन होगा। खबर है कि सरकार केंद्र से सिफारिश करेगी कि उनकी पेंशन रोक दी जाए। यानि रिटायरमेंट के सालों बाद भी साहब की पेंशन पर अब तलवार लटकने वाली है।
3 मेहमानवाजी हो तो आईएएस के बेटे के बर्थ-डे पार्टी जैसी
कलेक्टरी से हटाकर लूप लाइन में भेजे गए एक युवा आईएएस के अच्छे दिन आखिरकार लौट ही आए। नए-नवेले चार्ज में जनाब को आरक्षित वर्ग के कल्याण की जिम्मेदारी क्या मिली, मानो किस्मत ही पलट गई। चार्ज मिलने के कुछ ही दिन बाद साहब के बेटे का जन्मदिन आया और उन्होंने इसे मनाने का जो अंदाज़ चुना, उसने राजधानी की चर्चा ही बदल दी। राजधानी के सबसे महंगे होटल में ऐसी ग्रांड पार्टी दी गई कि मेहमानों की आंखें सचमुच “चुंधिया” गईं। बिरादरी के कई आईएएस अफसर और साहब के खास व्यापारी मित्र (जिनसे डीलिंग भी जारी रहती है) पार्टी में मौजूद रहे। हर तरह के पेय पदार्थों से लेकर लजीज व्यंजनों तक का ऐसा इंतजाम था कि कई मेहमान तो कहते सुने गए “भाई, जन्मदिन हो तो ऐसा! हमने तो अब तक ऐसी आलीशान बर्थ डे पार्टी नहीं देखी।”
4 बवाल से खुल गई कलेक्टर-एसपी के विवाद की पोल
एक बड़े जिले में कलेक्टर और एसपी की बोलचाल बंद होने की खबरें तो लंबे समय से चल रही थीं, लेकिन असली मामला तब खुला जब कलेक्टर साहब विधायक के साथ बड़े विवाद में फंस गए। राजधानी में बैठे अफसरों को पता चला तो हड़कंप मच गया। खुलासा हुआ कि कलेक्टर साहब, एसपी को बताए बिना ही मोटरसाइकिल पर बैठकर खुद ही रेत माफिया पकड़ने निकल जाते थे। पकड़ने के बाद पीछे से “डिमांड” का खेल शुरू हो जाता था। इतना ही नहीं, साहब अपने ही जूनियर अफसरों पर भी भरोसा नहीं करते। “ना एसपी पर भरोसा, ना जूनियर पर साहब अकेले ही कानून-व्यवस्था संभालने निकले थे! बहुत बेइज्जती होने के बाद कलेक्टर साहब ने थाने में आवेदन देकर विवाद करने वाले विधायक के खिलाफ एफआईआर के लिए आवेदन दिया। विवाद के बाद कलेक्टर साहब की रही-सही थोड़ी बहुत इज्जत भी तब और मिट्टी में मिल गई जब थानेदार ने आवेदन पर कोई कार्रवाई न कर उसे रद्दी की टोकरी में डाल दिया। ” वैसे यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले भी कलेक्टर साहब कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं।
5 सीनियर आईपीएस की ड्राइवर से दोस्ती
पुलिस मुख्यालय में इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चे किसी अफसर के कामकाज से नहीं, बल्कि एक सीनियर आईपीएस और उनके ड्राइवर की जबरदस्त दोस्ती को लेकर हैं। ड्राइवर साहब न केवल अपने बड़े साहब को शाखा से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी मुहैया कराते हैं, बल्कि सुबह-सुबह कसरत के लिए भी उनके साथ ही जाता है। राजधानी के एक सरकारी मैदान में बने जिम में दोनों को साथ पसीना बहाते देख लोग हंसते-हंसते यही कहते हैं “दोस्ती हो तो साहब और उनके ड्राइवर जैसी! कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ड्राइवर साहब ने तो अब अपनी ब्रांडिंग भी कर ली है। वे दावा करते हैं कि उनकी शाखा में ट्रांसफर और पोस्टिंग कराने का काम भी उनके जिम्मे है। यानी ड्राइवर कम, “पावर ब्रोकिंग पार्टनर” ज्यादा।
6 कोई तो एसीएस साहब का चैन लौटा दो
सरल और शांत स्वभाव से काम करने वाले एक सीनियर आईएएस अफसर इन दिनों बड़ी उलझन में हैं। वजह भी खास है— सरकार ने उन्हें एक भारी-भरकम विभाग का मुखिया बना दिया है। अब हालत यह है कि सुबह से शाम तक बैठकों का सिलसिला चलता रहता है। किसी तरह बैठक खत्म होती है तो चैंबर में फाइलों का ऐसा अंबार मिलता है जैसे कोई “फाइल प्रदर्शनी” लगी हो। ऊपर से बीच-बीच में मुख्यमंत्री या बड़े साहब का बुलावा भी आ जाता है। अब बेचारे अफसर दिनभर “बैठक-फाइल-बुलावा” के चक्रव्यूह में फंसे रहते हैं। खास बात यह है कि अफसर को ऊपर से साफ संदेश भी दे दिया गया है “अपने नए विभाग की बारीकियां अच्छे से समझ लो, यहां आपको लंबी पारी खेलनी है।”
7 कब होगी प्रोफेसर साहब की मनोकामना पूरी
अच्छी नीतियों को बनाने के लिए स्थापित हुए एक शासकीय संस्थान में लंबे समय से वाइस चेयरमेन नहीं है। वाइस चेयरमेन की नियुक्ति के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय से एक प्रोफेसर के नाम की ए प्लस की नोटशीट चलाई गई। इस नोटशीट को चले हुए करीब एक महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है लेकिन अब तक यह पांचवे से चौथे फ्लोर तक ही पहुंच पाई है। वहां जाकर यह नोटशीट ऐसी अटकी है कि निकलने का नाम ही नहीं ले रही है। अब इसे दोबारा पांचवे फ्लोर पर आना है लेकिन कब आएगी किसी को पता नहीं है। इसी बीच प्रोफेसर राजधानी के चक्कर काट-काटकर थके जा रहे हैं। लेकिन कहीं से कुछ जवाब नहीं मिल रहा है। बताते हैं कि सरकार और प्रोफेसर साहब का शहर एक ही है।
8 सीनियर आईपीएस अफसरों पर भारी एएसपी
एक एएसपी को पुलिस मुख्यालय के कुछ सीनियर आईपीएस अफसरों ने लंबी कवायद के बाद फील्ड से हटवाकर उनकी मूल शाखा में पदस्थ करवाया था। मूल शाखा लूप लाइन मानी जाती है। इस वजह से वहां कोई रहना नहीं चाहता है। लेकिन एएसपी साहब भी तेज बुद्धि वाले निकले। वे पुलिस मुख्यालय में ही बैठे कुछ अन्य अफसरों के सहारे कुछ ही दिन में फील्ड में दोबारा लौट आए हैं। वो भी पहले से बड़े और मलाईदार जिले में। हाल ही में जारी एएसपी की तबादला सूची में साहब ने अपनी पोस्टिंग करवा ली है। अब तो सीनियर अफसरों ने भी इनके सामने हथियार डाल दिए हैं।
9 जब बंगले से निकलकर भागे एसपी-कलेक्टर
मुख्यमंत्री साहब इन दिनों बिल्कुल “बदले-बदले” अंदाज़ में नजर आ रहे हैं। पहले तो बैठकों में अफसरों को शांति से समझा दिया करते थे, बिना ज्यादा डांट-फटकार के ही अपनी मंशा जाहिर कर देते थे। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। पिछली मीटिंग में कई कलेक्टर साहब सीएम के निशाने पर ऐसे आए कि सबके कान खड़े हो गए। मुख्यमंत्री ने यहां तक कह डाला “तुम लोग कलेक्टरी करने लायक ही नहीं हो। इतना ही नहीं, साहब अब तो छुट्टियों में भी चैन से नहीं बैठने दे रहे। हाल ही में एक अवकाश के दिन अचानक आदेश हुआ कि सभी सीनियर अफसर मंत्रालय पहुंचें। साथ ही प्रदेश के हर कलेक्टर-एसपी को वीसी से जुड़ने का फरमान जारी हो गया। इसके बाद आया असली ट्विस्ट मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि सभी कलेक्टर अपने-अपने जिले के गणेश विसर्जन घाट पर जाकर तैयारियां दिखाएं। अब कोई कलेक्टर बंगले पर आराम कर रहा था, तो कोई कैंप ऑफिस में फाइलें निपटा रहा था। लेकिन सीएम का आदेश मिलते ही सबकी हालत “भागो-भागो” जैसी हो गई। अफसर सीधे मोबाइल कैमरा ऑन करके घाट पहुंचे और वहीं से मुख्यमंत्री को लाइव रिपोर्टिंग करने लगे।
10 डीएफओ के खिलाफ भाजपा नेत्रियों ने खोला मोर्चा
एक बड़े जिले के जिला वनाधिकारी (डीएफओ) के खिलाफ महिला नेत्रियों ने मोर्चा खोल दिया है। खास बात यह है कि सभी महिला नेत्री सत्ताधारी दल से जुड़ी हुई हैं। इनमें विधायक से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक शामिल हैं। महिला नेत्रियों का कहना है कि डीएफओ उनके काम करना तो दूर मोबाइल भी रिसीव नहीं करते हैं। बैठक में भी उपस्थित नहीं होते हैं। जब उनके स्टाफ से साहब के बैठक में नहीं आने का कारण पूछो तो पता चलता है कि साहब भोपाल में हैं। महिला नेत्रियों ने निंदा प्रस्ताव पारित करके वरिष्ठ अधिकारियों को भेज दिया है। साथ ही मुख्यमंत्री से भी शिकायत करने की बात कही है।





