Bhopal Garba Controversy: गरबा में मुस्लिमों की एंट्री पर तिलक-पंचद्रव्य की शर्त, रामेश्वर शर्मा के बयान पर सियासत

भोपाल। नवरात्रि से पहले गरबा आयोजनों में मुस्लिम और गैर-हिंदू समुदाय के लोगों की भागीदारी को लेकर विवाद मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। महाराष्ट्र में बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय द्वारा गरबा आयोजनों में मुस्लिमों की एंट्री को लेकर तिलक और देवी पूजा जैसी शर्तों की बात कहे जाने के बाद यह मुद्दा मध्य प्रदेश में भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बन गया है।
भोपाल में साधु-संतों और हिंदूवादी संगठनों से जुड़े लोगों की बैठक में गरबा आयोजनों को लेकर कुछ नियमों और निगरानी व्यवस्था की बात सामने आई है। वहीं बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी इस मुद्दे पर तीखा बयान दिया है। कांग्रेस की ओर से प्रदेश प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने उनके बयान पर आपत्ति जताते हुए पलटवार किया है।
गरबा आयोजनों में तिलक और पूजा की बात
हिंदूवादी संगठनों की ओर से कहा गया है कि गरबा केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि देवी आराधना से जुड़ा आयोजन है। उनका कहना है कि जो लोग मूर्ति पूजा में विश्वास नहीं रखते, उन्हें गरबा आयोजनों में शामिल नहीं होना चाहिए।
संगठनों की ओर से यह भी कहा गया है कि यदि मुस्लिम या अन्य गैर-हिंदू समुदाय के लोग गरबा में शामिल होते हैं तो उनके लिए तिलक लगाने और देवी पूजा में शामिल होने जैसी शर्तें रखी जाएंगी।
भोपाल में हुई बैठक के संबंध में सामने आई जानकारी के मुताबिक आयोजनों में पंचद्रव्य/पंचगव्य से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान और पंडालों की निगरानी की बात भी कही गई है। हालांकि, ये किसी सरकारी आदेश के तहत लागू नियम नहीं हैं, बल्कि संबंधित संगठनों की ओर से रखे गए प्रस्ताव और मांगें हैं।
इससे पहले भोपाल की हिंदू उत्सव समिति की ओर से भी गरबा पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित करने और नियमित आरती-पूजन की मांग सामने आई थी।
औचक निरीक्षण और निगरानी की बात
बैठक में गरबा पंडालों में औचक निरीक्षण करने की बात भी कही गई। आयोजनों के दौरान यदि किसी तरह की अश्लीलता या विवाद की स्थिति सामने आती है तो पुलिस प्रशासन को सूचना देने और कार्रवाई कराने की बात कही गई है।
संगठनों का कहना है कि नवरात्रि के धार्मिक स्वरूप और आयोजन की मर्यादा बनाए रखने के लिए पंडालों में निगरानी जरूरी है।
हालांकि, किसी भी निजी गरबा आयोजन में प्रवेश के नियम अंततः आयोजक, स्थानीय प्रशासन और लागू कानूनों के दायरे में ही तय किए जा सकते हैं। संगठनों की मांग अपने आप में सरकारी प्रतिबंध नहीं है।
रामेश्वर शर्मा बोले- ‘गरबा को तमाशा मत बनाओ’
इस मुद्दे पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी बयान दिया है। उन्होंने मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा कि यदि उन्हें हिंदू धर्म और गरबा से लगाव है तो वे सनातन परंपराओं को समझें और उनका सम्मान करें।
रामेश्वर शर्मा ने अपने बयान में रहीम और रसखान का उदाहरण देते हुए राम, कृष्ण, महावीर और गौतम बुद्ध को अपने मन में बसाने की बात कही।
उन्होंने गरबा में कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ की गतिविधियों के आरोपों का जिक्र करते हुए कहा कि यदि गरबा को तमाशा बनाया जाएगा तो इसका विरोध होगा। उन्होंने कहा कि भारत का युवा अपनी बहनों की सुरक्षा के लिए तैयार है और मां जगदंबा का आशीर्वाद लेकर ‘राक्षसों का अंत’ भी करेगा।
यह बयान रामेश्वर शर्मा की राजनीतिक प्रतिक्रिया है। ‘लव जिहाद’ संबंधी उनके आरोपों के समर्थन में इस बयान में कोई विशिष्ट घटना या आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया गया।
महाराष्ट्र से शुरू हुआ विवाद
गरबा में मुस्लिमों की भागीदारी को लेकर महाराष्ट्र में भी इस समय बहस चल रही है। मुंबई के बोरीवली में बीजेपी विधायक संजय उपाध्याय ने कहा कि मुस्लिमों को गरबा में प्रवेश के लिए तिलक लगाने और देवी की पूजा करने जैसी शर्तें स्वीकार करनी होंगी। कार्यक्रम के आयोजक की ओर से आधार कार्ड जांच की बात भी कही गई है।
वहीं विश्व हिंदू परिषद ने महाराष्ट्र में गरबा और डांडिया आयोजनों में मुस्लिमों की भागीदारी पर रोक की मांग करते हुए आयोजकों से पहचान सत्यापन और तिलक लगाने जैसे उपायों की अपील की है।
इसी पृष्ठभूमि में मध्य प्रदेश में भी गरबा आयोजनों को लेकर बहस तेज होती दिखाई दे रही है।
कांग्रेस ने कहा- जहां विवाद हो, वहां नहीं जाना चाहिए
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अब्बास हाफिज ने इस मामले में कहा कि सभी लोगों को अपने-अपने आयोजनों में भाग लेना चाहिए और जहां विवाद की स्थिति बनने की आशंका हो, वहां नहीं जाना चाहिए।
उन्होंने बीजेपी और हिंदूवादी संगठनों पर धर्म के नाम पर राजनीति करने का आरोप लगाया और रामेश्वर शर्मा के बयान की आलोचना की।
इस तरह गरबा आयोजनों से जुड़ा विवाद अब धार्मिक आयोजन की व्यवस्था से आगे बढ़कर राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।
अब गरबा आयोजनों पर रहेगी नजर
नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है और उससे पहले गरबा व डांडिया आयोजनों की तैयारियां तेज हो रही हैं। महाराष्ट्र में प्रवेश और पहचान को लेकर उठे विवाद के बाद मध्य प्रदेश में भी आयोजकों और संगठनों की गतिविधियों पर नजर रहेगी।
फिलहाल तिलक, धार्मिक अनुष्ठान या पहचान जांच से जुड़े जो प्रस्ताव सामने आए हैं, वे संबंधित संगठनों और आयोजकों की मांगों के रूप में सामने आए हैं। इन्हें प्रदेश में लागू कोई सरकारी नियम नहीं माना जा सकता, जब तक प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक आदेश जारी न हो।





