Bhopal Police Lawyer Dispute: फटकार के बाद निलंबित TI ने हटाया वीडियो, महिला अधिकारी पर लगाए थे आरोप

भोपाल। राजधानी भोपाल में पुलिस-वकील विवाद के बाद निलंबित जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किया गया वीडियो अब फेसबुक और इंस्टाग्राम से हटा दिया गया है। वीडियो में अहिरवार ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अपना पक्ष रखा था और एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी पर भी गंभीर आरोप लगाए थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने निलंबित टीआई को फटकार लगाई, जिसके बाद वीडियो हटा दिया गया। अब इस मामले में उनके खिलाफ अतिरिक्त विभागीय कार्रवाई की संभावना की बात सामने आ रही है। हालांकि, ऐसी किसी नई विभागीय कार्रवाई का आधिकारिक आदेश अभी सामने नहीं आया है।
सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर रखा था अपना पक्ष
निलंबित टीआई राजन सिंह अहिरवार ने गुरुवार को फेसबुक और इंस्टाग्राम समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो जारी किया था। वीडियो में उन्होंने पुलिस-वकील विवाद और अपने निलंबन को लेकर अपना पक्ष रखा।
उन्होंने कहा कि वह बहुत कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन पुलिस सेवा में रहते हुए सार्वजनिक मंच पर हर बात कहना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सही समय आने पर तथ्यों और सबूतों के साथ पूरी सच्चाई सामने आएगी।
वरिष्ठ महिला अधिकारी पर लगाए आरोप
वीडियो में अहिरवार ने एक वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी पर अधिकारियों को कथित तौर पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। उन्होंने संबंधित अधिकारी को मामले की जांच से दूर रखने की मांग भी की।
अहिरवार ने दावा किया कि उक्त अधिकारी छोटी-छोटी बातों को लेकर अधीनस्थ पुलिसकर्मियों पर मानसिक दबाव बनाती हैं। ये आरोप निलंबित टीआई की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
उन्होंने जहांगीराबाद क्षेत्र के लोगों का भी आभार जताया और कहा कि वहां के लोगों ने उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें सहयोग दिया।
बोले- गलत काम के लिए निलंबित नहीं हुआ
अपने वीडियो में राजन सिंह अहिरवार ने अपने निलंबन को लेकर भी सफाई दी। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी गलत काम या आपराधिक गतिविधि के कारण निलंबित नहीं किया गया है।
उन्होंने लोगों और रिश्तेदारों से चिंता नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि “सत्य सूर्य के समान” है और सही समय आने पर सच्चाई सामने आएगी। हालांकि, उनके खिलाफ अधिवक्ता राकेश रावल की शिकायत पर आपराधिक मामला दर्ज होने की बात पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में सामने आई है।
वायरल होने के बाद हटाया वीडियो
वीडियो सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ। रिपोर्टों के अनुसार वरिष्ठ अधिकारियों की फटकार के बाद अहिरवार ने इसे फेसबुक और इंस्टाग्राम से हटा दिया।
इस घटनाक्रम के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि निलंबन की स्थिति में सोशल मीडिया पर इस तरह का सार्वजनिक बयान देने को लेकर पुलिस विभाग आगे क्या कदम उठाता है। फिलहाल अतिरिक्त विभागीय कार्रवाई का कोई आधिकारिक आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है।
22 सितंबर को शुरू हुआ था विवाद
पूरा मामला 22 सितंबर 2026 की रात गणेश विसर्जन के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन को लेकर शुरू हुआ था। पुलिस के अनुसार, ट्रैफिक ड्यूटी के दौरान अधिवक्ता राकेश रावल को रोका गया था। पुलिस पक्ष का आरोप है कि रावल ने पुलिसकर्मियों के साथ अभद्रता की और शासकीय कार्य में बाधा डाली।
वहीं अधिवक्ता राकेश रावल ने पुलिस पर उनके साथ बदसलूकी और जहांगीराबाद थाने ले जाकर मारपीट करने का आरोप लगाया। रावल के मुताबिक, उन्हें लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच की जा रही है।
टीआई समेत तीन पुलिसकर्मी निलंबित
विवाद के बाद जहांगीराबाद थाना प्रभारी राजन सिंह अहिरवार के अलावा आरक्षक यश लखेरा और रामस्वरूप को भी निलंबित कर दिया गया था। तीनों को निलंबन अवधि में पुलिस लाइन से संबद्ध किया गया है। मामले की प्रारंभिक जांच के भी निर्देश दिए गए थे।
इसके बाद अधिवक्ता की शिकायत पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज हुई। दूसरी ओर पुलिस की शिकायत पर अधिवक्ता राकेश रावल के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया, यानी प्रकरण में दोनों पक्षों की ओर से आपराधिक मामले दर्ज हुए हैं।
विभागीय कार्रवाई पर अब नजर
निलंबन के बाद सोशल मीडिया पर वीडियो जारी करना और फिर उसे हटाना अब इस पूरे मामले का नया पहलू बन गया है। वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से फटकार दिए जाने की रिपोर्ट सामने आई है, लेकिन वीडियो को लेकर आगे कौन-सी विभागीय कार्रवाई होगी, यह संबंधित जांच और पुलिस प्रशासन के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल पुलिस-वकील विवाद की मूल जांच भी जारी है और दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के निष्कर्ष के आधार पर होगी।





