कलेक्टर साहब के नक्शे से कश्मीर हुआ गायब : काम नहीं आया सीनियर आईपीएस का भक्ति भाव : बड़े साहब ने फिर प्रमोटी आईएएस से पूछा—“आप कौन हैं?”

कलेक्टर साहब के नक्शे से कश्मीर हुआ गायब : काम नहीं आया सीनियर आईपीएस का भक्ति भाव : बड़े साहब ने फिर प्रमोटी आईएएस से पूछा—“आप कौन हैं?”
1 कलेक्टर के नक्शे से कश्मीर हुआ गायब
एक कलेक्टर इन दिनों अपने जोश और सक्रियता को लेकर चर्चा में हैं। कभी वे ग्रामीणों के बीच पहुंचकर संवाद करते नजर आते हैं, तो कभी खुले में रखे गेहूं को खुद तिरपाल से ढंकते दिखाई देते हैं। हाल ही में वे एक सरकारी स्कूल भी पहुंचे और बच्चों को पढ़ाने लगे। यहां तक सब कुछ सराहनीय रहा, लेकिन पढ़ाते-पढ़ाते उनसे एक बड़ी चूक हो गई, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, बच्चों को राज्यों के बारे में समझाने के लिए उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर भारत का नक्शा बनाया, लेकिन इस नक्शे में कश्मीर को शामिल करना भूल गए। मामला यहीं तक सीमित नहीं रहा। कलेक्टर का यह फोटो जिले के जनसंपर्क विभाग के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से भी जारी कर दिया गया, जिसके बाद यह गलती और ज्यादा सुर्खियों में आ गई।
2 काम नहीं आया सीनियर आईपीएस का भक्ति भाव
एक सीनियर आईपीएस लगातार भक्ति भाव से काम कर रहे थे। साहब कभी सरकारी संस्थान में गीता का पाठ पढ़वा रहे थे तो कभी हनुमान चालीसा। वे इसका जमकर प्रचार प्रसार भी कर रहे थे। साहब का मानना था कि सनातनी सरकार में हिन्दुत्व का पाठ पढ़ाकर अच्छी पोस्टिंग तो हासिल कर ही लेंगे। साथ ही रिटायर होने के बाद वे प्रदेश की एक विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ लेंगे। लेकिन सरकार ने साहब के भक्ति भाव को दरकिनार कर और ज्यादा लूप लाइन माने जानी वाली शाखा में पदस्थ कर दिया है। साथ ही साहब की जगह जिन आईपीएस की पोस्टिंग हुई है उन्हें उस अतिरिक्त प्रभार के साथ भेजा गया है जिसके लिए साहब एड़ी चोटी का जोर लगाए हुए थे।
3 बड़े साहब ने फिर प्रमोटी आईएएस से पूछा—“आप कौन हैं?”
बड़े साहब एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी का नाम और पद अक्सर भूल जाते हैं। हर बार उनसे दोबारा परिचय लेना जैसे उनकी आदत बन गई है। हाल ही में हुई एक समीक्षा बैठक में भी कुछ ऐसा ही नज़ारा देखने को मिला। दरअसल, प्रमोटी आईएएस अधिकारी अपने विभाग की जानकारी दे रहे थे। तभी बड़े साहब ने बीच में टोकते हुए पहले उनका नाम पूछा, फिर पद के बारे में जानना चाहा। बात यहीं नहीं रुकी—उन्होंने यह भी पूछ लिया कि वे इस पद पर कब से कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने यह तक कह दिया, “मुझे तो आप कभी नज़र ही नहीं आते।” बड़े साहब लगातार सवाल पर सवाल दागते रहे। हालांकि, एक-दो सवालों के जवाब देने के बाद प्रमोटी आईएएस अधिकारी चुप्पी साधकर बैठ गए।
4 नोटिस के जरिए कमिश्नर का ‘वसूली अभियान’
कमिश्नर के पद पर काबिज एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी कुछ ही महीनों में रिटायर होने वाले हैं। रिटायरमेंट से पहले वे इन दिनों खासे सक्रिय नजर आ रहे हैं—और चर्चा है कि यह सक्रियता एक तरह के ‘वसूली अभियान’ में बदल गई है। बताया जा रहा है कि जिस संभाग में वे पदस्थ हैं, वहां अधिकांश कलेक्टर सीधे भर्ती वाले हैं। यही वजह है कि ये कलेक्टर कमिश्नर के निर्देशों को ज्यादा तवज्जो नहीं देते। ऐसे में कमिश्नर साहब ने अपना ध्यान ‘सॉफ्ट टारगेट’ की ओर मोड़ दिया है। संभाग के तहसीलदार अब उनके निशाने पर हैं। उन्हें नोटिस जारी कर मिलने के लिए तलब किया जाता है। मुलाकात के दौरान काम में लापरवाही के आरोप लगाते हुए कड़ी फटकार लगाई जाती है। अगर कोई तहसीलदार अपनी बात रखने की कोशिश करे, तो उसे निलंबन तक की चेतावनी दे दी जाती है। इसके बाद मामला यहीं खत्म नहीं होता। धीरे-धीरे कमिश्नर का रीडर संबंधित तहसीलदारों से संपर्क करता है और ‘डील’ के जरिए मामला शांत कराने का भरोसा देता है।
5 नौकरी का दावा करने वाले पीएस ने साधी चुप्पी
एक प्राइवेट कंपनी के सीनियर मैनेजर ने एक विभाग के प्राइवेट सेक्रेटरी स्तर के अधिकारी से संपर्क कर दावा किया कि उनकी कंपनी एक हजार युवकों को रोजगार देना चाहती है। बिना कंपनी की पूरी पड़ताल किए ही पीएस साहब ने अपने विभाग के अफसरों पर एक हजार युवकों की व्यवस्था करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया। काफी मशक्कत के बाद विभागीय अफसरों ने किसी तरह एक हजार युवकों को तैयार कर लिया। उन्हें ज्वॉइनिंग के लिए राजधानी से सटे जिले में भेजा गया, लेकिन वहां पहुंचने पर पता चला कि उस नाम की कोई कंपनी मौके पर मौजूद ही नहीं है। आगे जांच-पड़ताल में सामने आया कि कंपनी को फिलहाल सिर्फ जमीन आवंटित हुई है और फैक्ट्री का निर्माण अभी शुरू भी नहीं हुआ है। दोबारा संपर्क करने पर कंपनी के मैनेजर ने सफाई दी कि निर्माण कार्य जल्द शुरू होगा और पहले चरण में केवल सौ युवकों को ही रोजगार दिया जा सकेगा। पूरे मामले के सामने आने के बाद अब पीएस साहब ने चुप्पी साध ली है।
6 रिटायरमेंट के बाद भी एसीएस का सरकारी बंगले पर कब्जा
एसीएस के पद से रिटायर हुए एक अधिकारी को एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन वे अब भी नवाबों की तरह सरकारी बंगले पर काबिज हैं। नियमों के मुताबिक रिटायरमेंट के बाद आवास खाली कर देना चाहिए, लेकिन यहां मामला कुछ अलग ही नजर आता है। बताया जा रहा है कि उनका प्रभाव अब भी इतना मजबूत है कि कोई भी अधिकारी उनसे बंगला खाली कराने की पहल नहीं कर पा रहा है। इसकी एक बड़ी वजह ब्यूरोक्रेसी में बैठे एक सीनियर आईएएस अधिकारी से उनकी करीबी मानी जा रही है। इसी रसूख के चलते अब तक न तो कोई सख्त कार्रवाई हो पाई है और न ही बंगला खाली कराया जा सका है।
7 सस्पेंड होने से बचे एएसपी
एक एडिशनल एएसपी हाल ही में सस्पेंड होते-होते बाल-बाल बच गए। मामला उस समय का है जब प्रदेश के मुखिया अपने दौरे पर जिले में पहुंचे हुए थे।बताया जाता है कि इस दौरान एएसपी ने मुख्यमंत्री को सैल्यूट नहीं किया, बल्कि कमर पर हाथ रखे खड़े रहे। उनके इस व्यवहार से मुख्यमंत्री काफी नाराज हो गए और मौके पर मौजूद सीनियर आईपीएस अधिकारी को उन्हें तत्काल सस्पेंड करने के निर्देश दे दिए।
इसी बीच यह बात एएसपी तक पहुंची। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए उन्होंने क्षेत्रीय विधायक और एक मंत्री के जरिए मुख्यमंत्री तक अपना माफीनामा पहुंचवाया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने नरम रुख अपनाते हुए एएसपी को माफ कर दिया, और इस तरह वे सस्पेंशन की कार्रवाई से बच गए।
8 सचिव के डिमांड वाले फोन से परेशान वेंडर
एक बड़े विभाग के वेंडर इन दिनों एक सचिव स्तर के आईएएस अधिकारी के लगातार आने वाले फोन कॉल्स से खासे परेशान हैं। बताया जाता है कि साहब कभी उनसे कोई सामान मंगवाने की बात करते हैं, तो कभी ऐसे काम बता देते हैं जिनमें अच्छा-खासा खर्च आता है। वेंडरों का कहना है कि जब तक साहब उसी विभाग में पदस्थ थे, तब तक स्थिति किसी तरह संभाल में थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि दूसरे विभाग में चले जाने के बाद भी उन्होंने पुराने विभाग और उससे जुड़े वेंडरों का पीछा नहीं छोड़ा है। इतना ही नहीं, जहां वे फिलहाल पदस्थ हैं, वहां के इंजीनियर भी उनकी लगातार बढ़ती मांगों से कुछ ही महीनों में परेशान हो चुके हैं।
9 एडीएम मैडम की पोस्ट से मचा बवाल
एक एडीएम मैडम की सोशल मीडिया पर डाली गई पोस्ट इन दिनों जमकर वायरल हो रही है। पोस्ट में मैडम ने लिखा कि उन्हें ऐसे व्यक्ति की तलाश है, जो उनके एक इशारे पर सामने वाले को दो थप्पड़ जड़ सके। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि आखिर उन्हें किसी को थप्पड़ मारने की जरूरत क्यों पड़ रही है। वजह का जिक्र न होने से लोगों की जिज्ञासा और भी बढ़ गई। मैडम की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने भी दिलचस्प और मजेदार प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कोई इसे मजाक के तौर पर ले रहा है, तो कोई इसे गंभीरता से लेते हुए सवाल उठा रहा है। कुल मिलाकर, यह पोस्ट चर्चा का विषय बन गई है। कुछ देर बाद वैसे मैडम ने यह पोस्ट को हटा लिया।
10 एसीएस की छुट्टियों से विभाग में ‘चार्ज’ का खेल
एक बड़े विभाग के एसीएस के छुट्टी पर जाने के बाद विभाग का कामकाज लगातार चर्चा में है। दरअसल, उनके अवकाश पर जाते ही अस्थायी रूप से किसी वरिष्ठ अधिकारी को विभाग का प्रभार सौंपा गया, लेकिन उन्होंने भी जल्द ही छुट्टी ले ली।
इसके बाद अगले अधिकारी को चार्ज दिया गया, तो वे भी कुछ ही दिनों में अवकाश पर चले गए। इस तरह विभाग का जिम्मा एक के बाद एक अधिकारियों के बीच घूमता रहा, लेकिन कोई भी लंबे समय तक कार्यभार संभाल नहीं सका। इसी बीच पहले अधिकारी के लौटने पर सरकार ने उन्हें एक बार फिर वही प्रभार सौंप दिया, लेकिन हैरानी की बात यह रही कि उन्होंने महज एक दिन बाद फिर से छुट्टी ले ली। फिलहाल स्थिति यह है कि विभाग का चार्ज अभी तक किसी स्थायी व्यवस्था के तहत किसी को नहीं सौंपा गया है।
Abhishek Dubey

लेखक के बारे में

Abhishek Dubey

Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

View all posts by Abhishek Dubey →