CEC Gyanesh Kumar Removal: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ फिर घेराबंदी, AAP-DMK भी साथ; संसद में तीसरी बार आएगा हटाने का नोटिस?

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर विपक्ष एक बार फिर संसद में नया नोटिस लाने की तैयारी में है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक विपक्षी दल लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग नोटिस पेश करने की तैयारी कर रहे हैं। यह ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष की तीसरी संसदीय कोशिश होगी।
इस बीच आम आदमी पार्टी (AAP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत INDIA गठबंधन से बाहर या उससे अलग रुख रखने वाले कुछ विपक्षी दलों को भी इस अभियान से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। AAP और DMK पहले ही चुनाव आयोग के कामकाज और SIR को लेकर CEC के खिलाफ सवाल उठा चुके हैं।
तीसरी बार हटाने का नोटिस लाने की तैयारी
रिपोर्टों के मुताबिक नया नोटिस अभी तैयार किया जा रहा है और संसद में पेश किए जाने से पहले कानूनी विशेषज्ञों से इसकी समीक्षा कराई जा रही है। विपक्षी दलों की योजना लोकसभा और राज्यसभा दोनों में नोटिस देने की है।
इससे पहले 12 मार्च 2026 को लोकसभा और राज्यसभा में ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए गए थे। इन नोटिसों को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति ने स्वीकार नहीं किया था।
इसके बाद 24 अप्रैल 2026 को राज्यसभा में विपक्षी सांसदों ने दोबारा नोटिस दिया। इस नोटिस पर 73 सांसदों के हस्ताक्षर थे और इसमें ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नौ आधार बताए गए थे। यह नोटिस अभी राज्यसभा में लंबित बताया जा रहा है।
AAP और DMK को साथ लाने की कोशिश
नए प्रस्ताव के लिए कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल INDIA गठबंधन से बाहर या उससे अलग रुख रखने वाले दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्टों में AAP और DMK का नाम भी सामने आया है।
AAP सांसद संजय सिंह ने हाल में SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वहीं DMK भी चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों के साथ सवाल उठाता रहा है।
हालांकि, 30 सितंबर को होने वाली विपक्षी बैठक में AAP और DMK के शामिल नहीं होने की भी रिपोर्ट है। इसलिए नए हटाने के नोटिस पर दोनों दलों के अंतिम संसदीय समर्थन को औपचारिक रूप से स्पष्ट होने तक अलग-अलग रखना जरूरी है।
विपक्षी नेताओं के बीच बैठकों का दौर
CEC के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए विपक्षी नेताओं के बीच संपर्क और बैठकों का दौर भी जारी है। AAP सांसद संजय सिंह और अन्य विपक्षी नेताओं के बीच मुलाकातों के अलावा TMC, वाम दल और कांग्रेस के नेता भी इस मुद्दे पर समन्वय कर रहे हैं।
30 सितंबर को दिल्ली में विपक्षी दलों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें SIR, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग पर आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
14 आपत्तियों की रिपोर्ट से बढ़ा विवाद
CEC के खिलाफ विपक्ष की ताजा लामबंदी उस रिपोर्ट के बाद तेज हुई जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर चुनाव आयोग के फैसलों और प्रक्रियाओं को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इन आपत्तियों में नए मतदाताओं को जोड़ने, मतदाता सूची से नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकृत नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों को अपनी जानकारी के बिना लिए जाने पर भी सवाल उठाए थे।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के बाद कहा था कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य है और आयोग के आदेश कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला
CEC और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। अदालत ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज और SIR से जुड़े फैसलों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग के कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या सहमति के बिना लिए गए। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का भी मुद्दा उठाया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगले सप्ताह सुनवाई कर सकता है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
आंतरिक मतभेदों की रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग ने कहा है कि अलग-अलग अधिकारियों की ओर से सुझाव या टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग का कहना है कि उसके आदेश कानूनी रूप से वैध हैं और स्थापित प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं।
ऐसे में अब निगाहें विपक्ष की प्रस्तावित नई कार्रवाई और 30 सितंबर की बैठक पर हैं। यदि नया नोटिस पेश किया जाता है तो यह ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष की संसद में तीसरी कोशिश होगी। हालांकि नोटिस पेश होना अपने आप में पद से हटाने का निर्णय नहीं है; आगे की संसदीय प्रक्रिया और आवश्यक मंजूरियां अलग चरण हैं।





