Ujjain News: दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा 20 अक्टूबर से शुरू RSS पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप

उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह अपनी प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा से पहले उज्जैन पहुंचे। यहां उन्होंने मां हरसिद्धि मंदिर, काल भैरव मंदिर और बड़े गणेश मंदिर में दर्शन कर पूजा-अर्चना की। दिग्विजय सिंह ने आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में लगकर दर्शन किए। उनकी यात्रा 20 अक्टूबर से उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर से शुरू होकर अयोध्या तक जाएगी।
उज्जैन प्रवास के दौरान दिग्विजय सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यात्रा के उद्देश्य और अपनी मांगों की जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह यात्रा राजनीतिक नहीं है और इसमें कोई भी व्यक्ति शामिल हो सकता है। यात्रा में राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पूर्व कारसेवक संतोष दुबे भी शामिल होंगे।
राम मंदिर ट्रस्ट में बदलाव समेत पांच मांगें
दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर की व्यवस्था को लेकर पांच मांगें रखीं। इनमें श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट को भंग कर व्यवस्था रामालय ट्रस्ट को सौंपने, मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में निष्पक्ष जांच और संबंधित पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट में राजनेताओं और सांप्रदायिक संगठनों के सदस्यों को पदाधिकारी नहीं बनाया जाना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री से पूरे मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने वोट चोरी और चंदा चोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच की आवश्यकता भी बताई।
महाकाल मंदिर के पास RSS पर सरकारी जमीन कब्जाने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास सरकारी जमीन पर कब्जा करने और वहां होटल बनाकर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में प्रमाण होने की बात भी कही। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या संबंधित पक्ष का जवाब इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
दिग्विजय सिंह ने चुनाव में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर के इस्तेमाल की मांग भी दोहराई। उन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में लोगों से एक मोबाइल नंबर पर मिस कॉल करने की अपील की।
20 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह यात्रा उज्जैन से अयोध्या तक जाएगी। दिग्विजय सिंह ने इसे धार्मिक आस्था, मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को उठाने का माध्यम बताया है।





