पीएस को “वन”वास भेजने में कामयाब हुए बड़े साहब : सरल छवि, सख्त मिजाज… और आते ही आईपीएस के तेवर! : पीसीसीएफ मैडम ने सीएफ साहब को जमकर लगाई फटकार

1 पीएस को “वन”वास भेजने में कामयाब हुए बड़े साहब
सरकार के बेहद करीबी माने जाने वाले प्रमुख सचिव स्तर के एक आईएएस को उनके अहम विभाग से हटवाने के लिए “बड़े साहब” काफी समय से मोर्चा खोले हुए थे। कहते हैं, बड़े साहब शिकायतों की फाइलें दिल्ली दरबार तक भी पहुंचा चुके थे। लेकिन हर बार किस्मत पीएस साहब का साथ देती रही। सरकार अपने चहेते अफसर को बचाने में कामयाब हो जाते और बड़े साहब की रणनीति धरी की धरी रह जाती। इस बार तस्वीर बदली हुई नजर आई। हाल ही में जारी आईएएस अफसरों की तबादला सूची में आखिरकार बड़े साहब की कोशिश रंग लाई और पीएस साहब को अहम विभाग से हटाकर ऐसा ठिकाना दे दिया गया, जिसे अफसरशाही की भाषा में “वनवास” कहा जा रहा है। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सरल और सीधे स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाले पीएस साहब के चेहरे पर शिकन तक नहीं है। वे इसे भी सेवा का हिस्सा मानकर सहज भाव से बहुत पहले ही स्वीकार कर चुके थे।
2 सरल छवि, सख्त मिजाज… और आते ही आईपीएस के तेवर!
एक बड़े शहर में नए-नवेले कप्तान के तौर पर पहुंचे ईमानदार और सादगी पसंद आईपीएस साहब ने कुर्सी संभालते ही साफ कर दिया कि अब “पुराना सिस्टम” नहीं चलेगा। चार्ज लेते ही साहब ने सभी पुलिस अफसरों की ताबड़तोड़ बैठक बुलाई और एजेंडा टेबल पर रख दिया—शहर में अवैध धंधों पर पूरी तरह ब्रेक लगेगा, वरना जिम्मेदार अफसर सीधे कार्रवाई के लिए तैयार रहें। बैठक में साहब की दो टूक बातें सुनकर कई अफसरों ने तो वहीं से अपनी कार्यशैली दुरुस्त करने की ठान ली, लेकिन एक टीआई साहब शायद पुराने ढर्रे के आदी थे। उन्होंने कप्तान के सख्त संदेश को हल्के में ले लिया और अपनी “स्टाइल” में कोई बदलाव नहीं किया। फिर क्या था… खबर साहब तक पहुंची और कार्रवाई में जरा भी देर नहीं लगी। टीआई को निलंबित कर अटैच कर दिया गया। आदेश निकलते ही पुलिस महकमे में हलचल मच गई। अब महकमे में चर्चा है कि नए साहब की कथनी और करनी में जरा भी फर्क नहीं है।
3 पीसीसीएफ मैडम ने सीएफ साहब को जमकर लगाई फटकार
सरकार की नगरी में पिछले दिनों जंगल महकमे का एक बड़ा और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम आयोजित हुआ। चूंकि इसमें सरकार की मौजूदगी तय थी, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि आयोजन गरिमामय, सधा हुआ और पूरी तरह व्यवस्थित होगा। लेकिन हुआ इसका उल्टा। कार्यक्रम शुरू होते ही अव्यवस्थाएं सामने आने लगीं—बैठक व्यवस्था गड़बड़, समन्वय ढीला और जिम्मेदार अफसर नदारद। बताया जा रहा है कि पूरी जिम्मेदारी संभाल रहे सीएफ साहब का मैनेजमेंट इस बार पटरी से उतर गया। बस फिर क्या था, तेज-तर्रार पीसीसीएफ मैडम का पारा चढ़ गया। अंदरखाने खबर है कि मैडम ने सीएफ साहब को जमकर फटकार लगाई और साफ शब्दों में व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई। दिलचस्प बात यह है कि सीएफ महोदय प्रमोटी आईएफएस हैं और अपने लिए अनुकूल पोस्टिंग व बढ़िया कुर्सी का मैनेजमेंट करने में माहिर माने जाते हैं। लेकिन इस बार कार्यक्रम का मैनेजमेंट ही उन पर भारी पड़ गया। अब महकमे में चर्चा यही है कि साहब अपनी छवि सुधारने के लिए क्या नई रणनीति अपनाते हैं। जंगल महकमे के गलियारों में फिलहाल इसी किस्से की सबसे ज्यादा सरगोशियां सुनाई दे रही हैं।
4 आखिरकार आईएएस को मिल गई बॉस से मुक्ति!
सचिव स्तर के एक सीधी भर्ती वाले आईएएस साहब इन दिनों राहत की सांस ले रहे हैं। वजह भी खास है। लंबे समय से साहब दोहरी परेशानी झेल रहे थे। एक तो विभाग में “कमाई” की गुंजाइश नहीं बन पा रही थी, ऊपर से बॉस के साथ उनकी पटरी भी बिल्कुल नहीं बैठ रही थी। हालात इतने तल्ख हो चुके थे कि हर फाइल मानो परीक्षा बन गई थी। दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा बॉस ही नहीं, इससे पहले वाले बॉस से भी साहब की खास निभ नहीं पाई थी। नतीजा यह हुआ कि साहब ने मन ही मन ठान लिया—अब यहां ज्यादा दिन नहीं रुकना है। तबादले की जमीन तैयार की गई, संपर्क साधे गए और कोशिशों का दौर शुरू हो गया। पहले उन्होंने विभाग के मध्य क्षेत्र वाले एक संस्थान में पोस्टिंग के लिए जोर लगाया, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। फाइलें चलीं, चर्चा हुई, लेकिन मंज़िल हाथ नहीं लगी। हालांकि साहब भी कहां हार मानने वाले थे! उन्होंने प्रयासों की धार बनाए रखी। आखिरकार हाल ही में जारी तबादला सूची ने साहब के चेहरे पर मुस्कान ला दी। उन्हें उसी विभाग के महाकौशल क्षेत्र वाले संस्थान में पोस्टिंग मिल गई है। बताया जाता है कि इस बार विभाग के ही एक प्रभावशाली सचिव ने उनकी राह आसान कर दी।
5 एसीएस का तेज-तर्रार एक्शन मोड
बेहद संवेदनशील विभाग की कमान संभाल रहे एक एसीएस साहब शुरुआत में इस नई जिम्मेदारी को लेकर खास उत्साहित नजर नहीं आ रहे थे। चर्चा तो यहां तक थी कि उनका मन इस विभाग में रम ही नहीं रहा। लेकिन जैसे ही साहब ने कमान को गंभीरता से थामा, पूरे महकमे का मिजाज ही बदल गया। अब हालत यह है कि बड़े-बड़े अफसर भी फाइल लेकर उनके कक्ष में जाने से पहले दो बार सोच रहे हैं। साहब ने कुछ ही दिनों में विभाग पर ऐसी पकड़ बना ली है कि बिना पूरी तैयारी के उनके सामने पेश होना खतरे से खाली नहीं। बताया जाता है कि जो अफसर होमवर्क अधूरा लेकर पहुंच जाता है, उसे साहब के तीखे तेवर झेलने पड़ते हैं। तेज-तर्रार फैसले लेना हो या लंबित मामलों को पटरी पर लाना—एसीएस साहब हर मोर्चे पर एक्शन मोड में दिख रहे हैं। विभाग के गलियारों में इन दिनों बस एक ही चर्चा है—“साहब अब पूरी तरह फॉर्म में आ गए हैं।”कमिश्नर साहब के प्रोजेक्ट को बड़े साहब ने दिया झटका
6 युवा आईएएस अपने दलालों को दे रहे हैं सेफ एग्जिट!
एक बड़े संस्थान में सीईओ की कुर्सी संभाल रहे युवा आईएएस इन दिनों खासे परेशान बताए जा रहे हैं। वजह है—उनके करीबी माने जाने वाले कुछ ‘सेटिंगबाज’ चेहरे हाल ही में एक स्टिंग ऑपरेशन की जद में आ गए। जैसे ही मामला सुर्खियों में आया, साहब का टेंशन लेवल भी हाई हो गया। सूत्रों की मानें तो ये सभी लोग आउटसोर्सिंग के जरिए एक प्राइवेट कंपनी से संस्थान में एंट्री पाए थे और साहब के बेहद भरोसेमंद माने जाते थे। लेकिन अब जब मामला उलझा, तो साहब ने सीधे कार्रवाई करने की बजाय एक ‘सॉफ्ट लैंडिंग प्लान’ तैयार कर लिया। बताया जा रहा है कि इन्हें बाहर का रास्ता दिखाने के बजाय चुपचाप इस्तीफा दिलवाकर विदा किया जा रहा है, ताकि “करियर खराब” न हो। हालांकि, अंदरखाने चर्चा कुछ और ही है। गलियारों में फुसफुसाहट है कि साहब का कथित वसूली अभियान पहले की तरह ही बेखौफ जारी है। फर्क बस इतना आया है कि चेहरे बदल गए हैं, तरीके नहीं। जिन लोगों को ‘सेफ एग्जिट’ दिया गया, वही अब भी मोबाइल पर संपर्क साधकर लोगों को संस्थान बुलाने और पुराने काम को अंजाम देने में जुटे बताए जा रहे हैं।
7 विधायक और आईएएस में बन नहीं रही
एक बड़े नगर की जिला पंचायत में इन दिनों सियासी तापमान कुछ ज्यादा ही बढ़ा हुआ है। वजह हैं—युवा और ऊर्जावान आईएएस सीईओ साहब और उसी इलाके के विधायक जी के बीच छिड़ा ताज़ा टकराव। पिछले दिनों एक कार्यक्रम को लेकर भी दोनों में टकराव की स्थिति बन गई। कार्यक्रम की व्यवस्था की कमान आईएएस ने अपने हाथों में ली हुई थी। इस व्यवस्था से विधायक खुश नहीं थे। उन्होंने आईएएस से कहा है कि भविष्य में कोई भी काम करने के पहले उनसे या उनके प्रतिनिधियों से चर्चा कर लिया करें। जिसके बाद मामला शांत हो गया।
8 पूर्व चीफ सेक्रेट्री को इन्कम टैक्स डिपार्टमेंट ने भेजा नोटिस
रिटायरमेंट के बाद आराम फरमाने की तैयारी में लगे पूर्व चीफ सेक्रेट्री साहब को शायद अंदाजा नहीं था कि एक जमीन का सौदा उन्हें फिर सुर्खियों में ला खड़ा करेगा। सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक ही चर्चा है—इन्कम टैक्स विभाग का नोटिस और उसका निशाना बने साहब। कहानी जुड़ी है मोहाली के सेक्टर 67 से। बताया जा रहा है कि यहां खरीदी गई जमीन के सौदे में करीब दस करोड़ रुपये नकद चुकाए गए। अब इतने बड़े कैश ट्रांजैक्शन पर सवाल उठना तय ही था। कागजों में सब कुछ ‘साफ-सुथरा’ दिखाने की कोशिशों के बीच विभाग ने सीधा सवाल दाग दिया है—इतना कैश आया कहां से? अफसरशाही की दुनिया में अक्सर फाइलों की स्याही बहुत कुछ ढक देती है, लेकिन कैश की चमक दूर तक दिखाई देती है। यही चमक अब साहब की मुश्किलों का कारण बनती दिख रही है। नोटिस मिलने के साथ ही साहब ने दिल्ली दौड़ लगाकर मामले में राहत लेने की कोशिशें शुरू कर दी हैं।
9 सीनियर अफसरों से भिड़ने के कारण हटे पीएस
कुछ दिनों पहले प्रमुख सचिव स्तर के एक तेजतर्रार आईएएस से अचानक एक ऐसा विभाग ले लिया गया, जिसे आम बोलचाल में “लूप लाइन” कहा जाता है, और उसका जिम्मा एक सचिव स्तर के अफसर को सौंप दिया गया। अब वजह क्या रही, इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कहा जा रहा है कि पीएस साहब की कार्यशैली से उनके सीनियर खासे नाराज थे। ऊपर से साहब का अंदाज भी कुछ अलग ही रहा—सीनियर्स के निर्देशों पर अपनी शैली में काम करना और बैठकों में खुलकर असहमति जताना। कई बार तो मामला बहस से आगे बढ़कर सीधी नोकझोंक तक पहुंच गया। मंत्रालय में चर्चा है कि एक-दो बैठकों में तो माहौल इतना गरमा गया कि बाकी अफसर भी असहज हो उठे। पीएस साहब को तुनकमिजाज माना जाता है। गिने-चुने अफसर ही हैं जिनसे उनकी पटरी बैठती है। नेताओं से तो उनकी दूरी जगजाहिर है—कहा जाता है कि राजनीतिक निर्देशों को लेकर उनका रवैया हमेशा सख्त रहा। ऐसे में सीनियर्स और राजनीतिक हलकों दोनों में नाराजगी पनपती रही।
10 पीएस मैडम के खिलाफ कर्मचारियों ने खोला मोर्चा
राजधानी के एक अहम विभाग में इन दिनों माहौल गरमाया हुआ है। वजह हैं वहां पदस्थ एक प्रमुख सचिव (पीएस) मैडम, जिनके खिलाफ अब उनके ही विभाग के कर्मचारी खुलकर सामने आ गए हैं। कर्मचारियों की सबसे बड़ी शिकायत यह है कि मैडम अधिकतर निर्देश मौखिक रूप से देती हैं। फाइलों पर कुछ भी लिखने से परहेज़ किया जाता है। ऐसे में जब कभी अधिकारी या कर्मचारी लिखित मार्गदर्शन की मांग करते हैं, तो उन्हें सीधे चैंबर में तलब कर लिया जाता है। अंदर क्या होता है, यह तो वही जानें, लेकिन बाहर निकलने वालों के चेहरे बहुत कुछ बयां कर जाते हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि डांट-फटकार तो आम बात हो गई है, कई बार तो सार्वजनिक रूप से भी फटकार लगा दी जाती है। विभाग के गलियारों में चर्चा है कि लंबे समय से लोग यह सब चुपचाप सह रहे थे, लेकिन अब पानी सिर के ऊपर पहुंच चुका है। कहते हैं कि हाल ही में कर्मचारियों के एक समूह ने अनौपचारिक बैठक कर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कर्मचारियों का कहना है कि या तो मैडम का विभाग बदले या फिर उनका तबादला किया जाए।





