Gwalior News: ग्वालियर में पुलिस कस्टडी से हथकड़ी समेत फरार हुआ चोरी का आरोपी सन्नी पाल

ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में पुलिसकर्मियों की लापरवाही का मामला सामने आया है। छतरपुर में चोरी के आरोप में पकड़ा गया सन्नी पाल इलाज के लिए ग्वालियर लाए जाने के दौरान पुलिस कस्टडी से हथकड़ी समेत फरार हो गया। आरोप है कि रात में अस्पताल में इलाज नहीं मिलने पर पुलिसकर्मी उसे थाने ले जाने के बजाय अपने रिश्तेदार के फ्लैट पर ले गए। वहां जाने से पहले पुलिसकर्मियों के होटल में खाना खाने और पार्टी करने की बात भी सामने आई है।
हाथ की चोट का इलाज कराने लाए थे ग्वालियर
विश्वविद्यालय सीएसपी रवि भदौरिया के मुताबिक, छतरपुर पुलिस में पदस्थ आरक्षक विजय यादव, शुभम शर्मा और संदीप चोरी के आरोप में पकड़े गए 30 वर्षीय सन्नी पाल को हाथ में चोट के इलाज के लिए ग्वालियर लेकर आए थे। सन्नी पाल उत्तराखंड का निवासी बताया जा रहा है।
ट्रॉमा सेंटर से होटल और फिर फ्लैट पर पहुंचे
जानकारी के अनुसार, पुलिसकर्मी तड़के करीब 4 बजे आरोपी को ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टर उपलब्ध नहीं होने के कारण सुबह आने की सलाह दी गई। आरोप है कि इसके बाद आरोपी को नजदीकी थाने में सुरक्षित रखने के बजाय आरक्षक शुभम शर्मा अपने साथियों के साथ उसे विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र स्थित लोटस विला में अपने भाई गौरव शर्मा के फ्लैट पर ले गए।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि पुलिसकर्मी आरोपी को एक होटल में ले गए थे, जहां उसने खाना खाया। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें सन्नी पाल होटल में खाना खाते नजर आ रहा है।
सुबह जागे तो आरोपी गायब हथकड़ी मिली
आरोप है कि होटल से लौटने के बाद पुलिसकर्मी आरोपी के साथ फ्लैट पर सो गए। सुबह करीब 7 बजे जब उनकी नींद खुली, तो सन्नी पाल वहां से गायब था। मौके पर हथकड़ी मौजूद मिली। पुलिसकर्मियों ने आसपास तलाश की, लेकिन आरोपी का पता नहीं चला।
इसके बाद अधिकारियों को सूचना दी गई और पुलिसकर्मी विश्वविद्यालय थाने पहुंचे। घटना के बाद फरार आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई है।
पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई की संभावना
पुलिस कस्टडी से आरोपी के फरार होने की घटना ने बंदियों की सुरक्षा और पुलिसकर्मियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोपी को थाने में रखने के बजाय निजी फ्लैट पर ले जाने और उसकी निगरानी में कथित लापरवाही की जांच की जा रही है। मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी हो सकती है।





