Gyanesh Kumar Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का देशव्यापी प्रदर्शन, देहरादून में बैरिकेडिंग पर चढ़े कार्यकर्ता

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने विभिन्न राज्यों में चुनाव आयोग के कार्यालयों और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के कार्यालयों की ओर मार्च किया। दिल्ली समेत कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए।
कांग्रेस का यह प्रदर्शन चुनाव आयोग में SIR यानी Special Intensive Revision को लेकर सामने आई आपत्तियों और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ पार्टी के आरोपों के बाद हुआ है। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
देहरादून में बैरिकेडिंग पर चढ़े कांग्रेस कार्यकर्ता
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सचिवालय की ओर मार्च किया। पुलिस ने सचिवालय से पहले बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया। इसके बाद कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और पुलिस के साथ उनकी नोकझोंक भी हुई।
प्रदर्शन में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण मेहरा और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल हुए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इस्तीफे की मांग की।
पटना में प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन
बिहार की राजधानी पटना में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च निकाला। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को चुनाव कार्यालय की ओर आगे बढ़ने से रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
कांग्रेस का कहना है कि मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को लेकर चुनाव आयोग से जवाबदेही तय होनी चाहिए।
CJP ने दी 48 घंटे की डेडलाइन
इधर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार शनिवार तक इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी।
CJP ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने की डेडलाइन दी थी। पार्टी ने कहा है कि आंदोलन की शुरुआत मुंबई से की जाएगी और इसके बाद इसे देश के दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा।
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कुछ फैसले, दिशानिर्देश और चुनावी सॉफ्टवेयर में किए गए बदलाव अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना किए गए।
याचिकाकर्ता ने इन फैसलों और बदलावों को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है। इसके अलावा करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की SIT जांच कराने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी याचिका में की गई है।
याचिका में मूल Form 6 को बहाल करने की मांग भी की गई है। हालांकि, ये सभी मांगें याचिका में की गई मांगें हैं; सुप्रीम कोर्ट ने इन पर अंतिम फैसला नहीं दिया है।
14 बार आपत्ति का दावा, क्या है पूरा मामला?
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में The Indian Express की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों या आदेशों पर रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट में SIR, मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े बदलावों का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ मामलों में यह सवाल उठाया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जाते हैं और सभी निर्णयों में दोनों चुनाव आयुक्तों की सहमति रही है।
यानी विवाद का एक पक्ष चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों और SIR से जुड़े फैसलों को लेकर है, जबकि आयोग इन फैसलों को प्रक्रिया के अनुरूप और सर्वसम्मत बताता रहा है।
कांग्रेस का आरोप- चुनाव आयोग में मनमानी हो रही
कांग्रेस ने चुनाव आयोग में कथित अंदरूनी मतभेदों को आधार बनाते हुए ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा है। पार्टी का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर रहे हैं और आयोग के स्तर पर मनमाने तरीके से फैसले लिए जा रहे हैं।
कांग्रेस ने 25 सितंबर को राज्य स्तर पर और 28 सितंबर को जिला स्तर पर विरोध प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया था। पार्टी की मांगों में CEC के खिलाफ कार्रवाई और चुनावी फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा शामिल है।
वहीं, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच अपने निर्णयों को प्रक्रिया के तहत लिया गया बताया है। इसलिए मौजूदा विवाद में कांग्रेस के आरोप, चुनाव आयोग का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका—तीनों अलग-अलग पहलू हैं।





