Indore Soy Conclave 2026: CM मोहन यादव ने सोयाबीन उद्योग और किसान कल्याण पर क्या कहा?

इंदौर। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) के 9वें अंतरराष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव में शामिल हुए। कार्यक्रम में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों, उद्योगपतियों और सोया क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने सोयाबीन उद्योग की संभावनाओं, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।
सोयाबीन उत्पादन और बाजार पर मंथन
कॉन्क्लेव में सोयाबीन की मौजूदा फसल, बाजार के रुझान, कीमतों, प्रोसेसिंग तकनीक और व्यापार नीतियों जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसका उद्देश्य किसानों, प्रोसेसर्स और कारोबारियों को बदलते बाजार के अनुरूप नए अवसर उपलब्ध कराने के साथ उद्योग की चुनौतियों का समाधान तलाशना है।
कार्यक्रम में सोपा अध्यक्ष नरेश गोयनका, पूर्व अध्यक्ष डॉ. देविश जैन सहित सोया उद्योग से जुड़े कई प्रमुख प्रतिनिधि मौजूद रहे।
मध्यप्रदेश देश का प्रमुख सोयाबीन उत्पादक राज्य: CM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में मध्यप्रदेश को देश का प्रमुख खाद्य उत्पादन केंद्र बताते हुए कृषि और सोयाबीन उत्पादन में प्रदेश की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र है। कार्यक्रम में प्रदेश की हिस्सेदारी देश के कुल सोयाबीन उत्पादन में लगभग 45 प्रतिशत बताई गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार इस वर्ष को किसान कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए सोयाबीन उत्पादकों और प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े लोगों के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। ऐसे आयोजन कृषि उत्पादन, प्रोसेसिंग और व्यापार के बीच समन्वय बढ़ाने में मददगार हो सकते हैं।
निवेश और औद्योगिक विकास पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और मार्गदर्शन में देश और प्रदेश विकास के नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। उद्योगों के अनुकूल नीतियों और निवेश को प्रोत्साहित करने वाली व्यवस्थाओं से विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
उन्होंने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के पुराने और आत्मीय संबंधों का जिक्र करते हुए दोनों राज्यों के बीच विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
किसानों और सोया उद्योग के लिए क्यों अहम है कॉन्क्लेव?
इंदौर में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय कॉन्क्लेव ऐसे समय में हुआ है, जब सोयाबीन की फसल, बाजार भाव, प्रसंस्करण क्षमता और व्यापार नीतियां किसानों से लेकर उद्योग जगत तक के लिए महत्वपूर्ण हैं। यहां होने वाला विचार-विमर्श सोयाबीन उद्योग की भावी रणनीति तय करने और किसानों व कारोबारियों के लिए नए अवसर तलाशने में अहम भूमिका निभा सकता है।





