आईपीएस ने आरोपी एसीएस से ही मांग ली अभियोजन स्वीकृति : इंस्पेक्टर मैडम की डिमांड से परेशान हुए एसपी साहब : इंजीनियर साहब का बर्थडे निकल गया, लेकिन गिफ्ट का सिलसिला जारी है

1 आईपीएस ने आरोपी एसीएस से ही मांग ली अभियोजन स्वीकृति
एक आईपीएस अधिकारी द्वारा एक एसीएस को लिखा गया पत्र इन दिनों पूरे मंत्रालय में चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला एक पुराने और बहुचर्चित प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें एक एसीएस समेत पांच आईएएस अधिकारी आरोपी हैं। इनमें से कुछ अधिकारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। अब इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया जाना है, जिसके लिए अभियोजन स्वीकृति आवश्यक है। दिलचस्प बात यह है कि संबंधित आईपीएस अधिकारी ने अभियोजन स्वीकृति के लिए जिस विभाग के मुखिया को पत्र लिखा, वे स्वयं भी इस मामले में आरोपी हैं। एसीएस ने भी तत्काल जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि आईएएस अधिकारी केंद्र सरकार के अधीन आते हैं। इसलिए उनके खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाना आवश्यक होगा।
2 इंस्पेक्टर मैडम की डिमांड से परेशान हुए एसपी साहब
एक बड़े जिले के एसपी साहब इन दिनों एक इंस्पेक्टर मैडम की डिमांड से परेशान बताए जा रहे हैं। दरअसल, एसपी ने हाल ही में विवादों में रही इस महिला अधिकारी को महिला थाना प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है। लेकिन मैडम की इच्छा कुछ और ही है। वे शहर के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण थाने का प्रभार चाहती हैं और इसी मांग पर अड़ी हुई हैं। अपनी इच्छा पूरी कराने के लिए मैडम कई नेताओं के माध्यम से एसपी साहब तक सिफारिशें पहुंचवा चुकी हैं। इतना ही नहीं, जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो उन्होंने कुछ नेताओं से एसपी की शिकायत भी करवा दी। बताया जाता है कि इससे पहले मैडम जीआरपी में पदस्थ थीं, लेकिन राजनीतिक सिफारिशों के जरिए उन्होंने अपना तबादला जिला बल में करवा लिया। मैडम का नाम पहले भी विवादों में रह चुका है। जीआरपी में एक जिले में पदस्थापना के दौरान उनकी हिरासत में दादी और पोते की पिटाई का मामला भी सामने आ चुका है। जिसमें मैडम को मुख्यमंत्री के निर्देश पर ससपेंड कर दिया गया था, उधर, एसपी साहब को एक संवेदनशील और अनुभवी अधिकारी माना जाता है। शायद यही वजह है कि वे अच्छी तरह समझते हैं कि मैडम शहर के सबसे बड़े थाने की कमान हासिल करने के लिए इतनी सक्रियता क्यों दिखा रही हैं।
3 इंजीनियर साहब का बर्थडे निकल गया, लेकिन गिफ्ट का सिलसिला जारी है
एक महत्वपूर्ण विभाग के चीफ इंजीनियर साहब ने पिछले दिनों राजधानी के एक बड़े रिसॉर्ट में अपना जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया। इस आयोजन में ठेकेदारों समेत कई खास मेहमानों को स्वयं साहब ने आमंत्रित किया था। निमंत्रण के साथ ही मेहमानों तक यह संदेश भी पहुंच गया था कि जन्मदिन समारोह में खाली हाथ पहुंचना ठीक नहीं रहेगा। साहब की नाराजगी से बचने के लिए अधिकांश मेहमान महंगे गिफ्ट लेकर ही समारोह में पहुंचे। जन्मदिन का कार्यक्रम तो संपन्न हो गया, लेकिन साहब का गिफ्ट संग्रह अभियान अभी भी जारी बताया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, साहब ने उन ठेकेदारों की अलग से सूची तैयार करवाई है जो किसी कारणवश समारोह में शामिल नहीं हो सके थे। अब उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन कर अनुपस्थित रहने का कारण पूछा जा रहा है और साथ ही बंगले पर आने का न्योता भी दिया जा रहा है। उधर, ठेकेदार भी पूरे घटनाक्रम का मतलब अच्छी तरह समझ रहे हैं। उन्हें पता है कि बंगले पर बुलावे का मकसद सिर्फ हालचाल पूछना नहीं है। ऐसे में जन्मदिन भले ही बीत चुका हो, लेकिन साहब के लिए गिफ्ट आने का सिलसिला अभी थमता नजर नहीं आ रहा है।
4 सीनियर आईपीएस ने मुख्यमंत्री की बैठक में बहाई ज्ञान की गंगा
पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने एक बड़े विभाग की समीक्षा बैठक बुलाई थी। बैठक के दौरान एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी खासे सक्रिय नजर आए। चर्चा चाहे किसी भी विषय पर हो, साहब अपनी राय और सुझाव देने से नहीं चूके। उनकी सक्रियता ऐसी थी मानो हर विषय के विशेषज्ञ वही हों। बैठक में मौजूद वरिष्ठ अधिकारी भी इस उत्साह का कारण अच्छी तरह समझ रहे थे। उनका मानना था कि साहब मुख्यमंत्री के सामने अपनी उपस्थिति और सक्रियता दर्ज कराने की कोशिश में जुटे हुए हैं, ताकि उनके खाते में कुछ अतिरिक्त अंक जुड़ सकें। दरअसल, वर्तमान में यह वरिष्ठ आईपीएस पुलिस मुख्यालय में पदस्थ हैं और जिस शाखा की जिम्मेदारी उनके पास है, उसे महकमे में खास प्रभावशाली पोस्टिंग नहीं माना जाता। ऐसे में बेहतर और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल करने की उम्मीद में साहब हर मौके पर अपनी उपयोगिता साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। शायद यही वजह रही कि समीक्षा बैठक में उन्होंने ज्ञान की ऐसी गंगा बहाई कि उनकी सक्रियता पूरे समय चर्चा का विषय बनी रही।
5 बड़े साहब ने निरस्त कराया टेंडर
एक बड़े विभाग को हाल ही में मैनपावर सप्लाई से जुड़े एक महत्वपूर्ण टेंडर को निरस्त करना पड़ा है। बताया जाता है कि इसके पीछे बड़े साहब का दबाव प्रमुख वजह रहा। साहब को शिकायत मिली थी कि टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया है और इसकी कुछ शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं, जिससे किसी खास फर्म को लाभ पहुंचाया जा सके। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि टेंडर की अनुमानित राशि एक हजार करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद पूरे मामले की समीक्षा की गई और अंततः टेंडर को निरस्त करने का फैसला लेना पड़ा।अंदरखाने की खबर है कि इस घटनाक्रम के बाद विभागीय अधिकारी भी काफी सतर्क हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, विभाग ने फिलहाल जल्दबाजी से बचने का निर्णय लिया है और अगले करीब तीन महीनों तक कोई नया टेंडर जारी नहीं करने की रणनीति बनाई है। ऐसे में टेंडर निरस्तीकरण का यह मामला अब विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
6 सस्पेंड होने के बाद भी एसपी को तेवर दिखा रहा है कांस्टेबल
रील बनाने और अमर्यादित आचरण के आरोपों के चलते एक बड़े जिले के एसपी साहब ने हाल ही में एक ट्रैफिक कांस्टेबल को निलंबित कर दिया। बताया जाता है कि कार्रवाई से पहले एसपी ने कांस्टेबल को कई बार अपना व्यवहार सुधारने की चेतावनी भी दी थी, लेकिन उस पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। नतीजा यह हुआ कि आखिरकार एसपी को सख्त कदम उठाते हुए उसे सस्पेंड करना पड़ा। हालांकि, निलंबन के बाद भी कांस्टेबल के तेवर कम होते नजर नहीं आ रहे हैं। उल्टे उसने सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता और बढ़ा दी है। सूत्रों के मुताबिक, कांस्टेबल विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बिना किसी का नाम लिए शेर-ओ-शायरी और सांकेतिक पोस्ट साझा कर रहा है। इन पोस्टों में इशारों-इशारों में एसपी साहब को निशाने पर लिया जा रहा है। साथ ही वह यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि न तो वह सस्पेंशन से डरने वाला है और न ही किसी दबाव के आगे झुकने वाला।
7 डॉक्टर से नाराज हुए कमिश्नर साहब
पिछले दिनों एक बड़े मेडिकल कॉलेज में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे डॉक्टर साहब अपनी एक समस्या लेकर कमिश्नर साहब से मिलने उनके कार्यालय पहुंच गए। डॉक्टर को उम्मीद थी कि वे सीधे अपनी बात रखेंगे और समाधान का रास्ता निकल आएगा। बताया जाता है कि जैसे ही डॉक्टर साहब कमिश्नर के सामने कुर्सी पर बैठने लगे और उन्होंने कहा कि, "सर, एक समस्या के समाधान के लिए आपके पास आया हूं", तभी कमिश्नर साहब ने बीच में ही उनसे एक सवाल पूछ लिया—"क्या मुझसे मिलने के लिए पहले समय लिया था?" डॉक्टर साहब ने जैसे ही 'नहीं' में जवाब दिया, कमिश्नर का मिजाज बदल गया। उन्होंने तत्काल डॉक्टर से कुर्सी से उठने और बाहर जाने के लिए कह दिया। साथ ही नसीहत भी दे डाली कि अगली बार मिलने आना हो तो पहले समय लेकर आएं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से डॉक्टर साहब खासे निराश हो गए और मुंह लटकाए कार्यालय से लौट गए। अब वे अपने परिचितों के बीच अपना दुखड़ा सुनाते फिर रहे हैं। उनका कहना है कि जब वे सामने तक पहुंच ही गए थे, तो कम से कम उनकी समस्या एक बार सुन तो ली जाती।
8 मेंबर को सस्पेंड करके ही माने सीनियर आईपीएस
पिछले दिनों एक सीनियर आईपीएस अधिकारी की पार्टी में हंगामा करना एक क्लब सदस्य को भारी पड़ गया। मामला तब का है, जब साहब एक बड़े जिले के दौरे पर पहुंचे थे। दौरे के दौरान वे शहर के चर्चित क्लब में आयोजित अपनी पार्टी में शामिल होने गए। खास बात यह है कि साहब उसी क्लब के अध्यक्ष भी हैं। इसी बीच क्लब का एक सदस्य अपने परिवार के साथ वहां पहुंचा और भोजन की मांग करने लगा। क्लब स्टाफ ने उसे बताया कि फिलहाल पूरा स्टाफ साहब की पार्टी की व्यवस्था में व्यस्त है, इसलिए भोजन परोसने में कुछ समय लगेगा। बस, इतना सुनते ही सदस्य का पारा चढ़ गया और उसने क्लब में हंगामा शुरू कर दिया। हंगामे की खबर जब साहब तक पहुंची तो उन्होंने भी मामले को हल्के में नहीं लिया। अध्यक्ष होने के अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने संबंधित सदस्य की क्लब सदस्यता ही निलंबित कर दी।
9 कलेक्टर साहब कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं
एक कलेक्टर साहब ने जिले की कमान संभालते समय बड़े दावे किए थे। उनका कहना था कि वे किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव में काम नहीं करते और हर फैसला नियम-कायदों के अनुसार लेते हैं। शुरुआती दिनों में उन्होंने गांव-गांव जाकर सरपंचों के साथ फोटो सेशन भी कराया, जिससे उनकी छवि एक सख्त और जनहितैषी अधिकारी की बनी। लेकिन हाल ही में घटी एक घटना ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, उनके एक एसडीएम ने सत्तारूढ़ दल के जिलाध्यक्ष से जुड़ी बताई जा रही एक अवैध खदान पर कार्रवाई करते हुए उसे बंद करा दिया। कार्रवाई के कुछ ही समय बाद संबंधित डिप्टी कलेक्टर को उनके पद से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया और उन्हें कार्यालय में बैठने की जिम्मेदारी दे दी गई। अंदरखाने चर्चा है कि इस पूरे घटनाक्रम के बाद कलेक्टर साहब ने जिलाध्यक्ष को यह भरोसा भी दिलाया कि भविष्य में उनके रहते ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।
10 नए एसपी की विदेश यात्रा बनी चर्चा का विषय
एक छोटे से जिले में हाल ही में एसपी बनकर पहुंचे प्रमोटी आईपीएस अधिकारी के विदेश दौरे को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि नियुक्ति से पहले उन्होंने पहले से ही सिडनी और बाली की यात्रा का प्लान बना लिया था। सूत्रों के अनुसार, उस समय उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि सरकार उन्हें इस जिले में एसपी के तौर पर तैनात करेगी। इसी कारण उन्होंने अपनी विदेश यात्रा की तैयारी पहले ही कर ली थी, जिसमें टिकट और अन्य बुकिंग भी शामिल थीं। इसी बीच उनके एसपी पद पर नियुक्ति के आदेश जारी हो गए। हालांकि तब तक यात्रा की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। ऐसे में अधिकारी ने पहले से तय कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए विदेश यात्रा पर जाने का निर्णय लिया और सिडनी व बाली की यात्रा पर रवाना हो गए।





