Mauganj Jal Jeevan Mission Scam: 200 करोड़ की योजना पर सवाल 183 गांवों में अधूरा काम और नलों पर शराब की बोतलें

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत ग्रामीणों तक नल से पानी पहुंचाने की योजना पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि 200 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद कई गांवों में घरों तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी है। मऊगंज, नईगढ़ी और हनुमना विकासखंड के 30 से अधिक गांवों में योजना के क्रियान्वयन को लेकर सामने आई शिकायतों ने सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर उजागर किया है।
कई जगह नलों में टोंटियां नहीं लगाई गई हैं। जहां कभी-कभार पानी पहुंचता भी है, वहां पानी की बर्बादी रोकने के लिए ग्रामीणों ने नलों के मुहाने पर खाली शराब की बोतलें लगा रखी हैं। यह स्थिति योजना के निर्माण कार्यों, निगरानी और गुणवत्ता पर सवाल खड़े करती है।
200 गांवों की योजना और 183 गांवों में काम अधूरा होने का दावा
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जल प्रदाय योजना को मैकेनिकल और सिविल कार्यों में बांटा गया था।
मैकेनिकल योजना: इसके तहत 200 गांव शामिल किए गए। विभाग का दावा है कि 167 गांवों में पानी पहुंचाया जा चुका है और 155 गांवों को प्रमाणित किया गया है।
सिविल योजना: इसके तहत 184 गांव शामिल थे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इनमें से केवल मड़ना गांव का काम पूरा बताया गया है, जबकि शेष 183 गांवों को पुनरीक्षित योजना में शामिल किया गया।
आरोप है कि वर्ष 2021 में शुरू हुई योजना को 6 से 9 महीने में पूरा किया जाना था, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी काम अधूरा है। कुछ ठेकेदारों को समय पर काम पूरा नहीं करने की शिकायतों के बावजूद पुनरीक्षित योजना में भी काम दिए जाने पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पानी की टंकी गिरने के मामले में EOW की कार्रवाई
नईगढ़ी जनपद पंचायत के खटखरी गांव में जल जीवन मिशन के तहत बनी पानी की टंकी पहली बार पानी भरने के दौरान ढह गई थी। मामले की जांच के बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ (EOW) ने कार्य पूरा किए बिना कथित तौर पर 3.85 करोड़ रुपये का भुगतान लेने के मामले में आपराधिक प्रकरण दर्ज किया।
इस मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, तत्कालीन सहायक यंत्री संजय पांडेय, तत्कालीन उपयंत्री ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के नाम शामिल बताए गए हैं। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।
कई गांवों में निर्माण और कनेक्शन पर सवाल
जमीनी पड़ताल में अलग-अलग गांवों में काम अधूरा होने के आरोप सामने आए हैं।
- करह उर्फ खैरागढ़: पांच सबमर्सिबल मोटर पंपों के स्थान पर केवल एक पंप लगाए जाने का आरोप है। 740 कनेक्शन देने के दावे के बावजूद घरों के भीतर नल की फिटिंग नहीं मिलने की बात कही गई है।
- सिवराजपुर: ओवरहेड टैंक और संपवेल का निर्माण अधूरा बताया गया है।
- जुड़मनिया रघुनाथ: मुख्य पाइपलाइन आधे गांव तक ही बिछाए जाने और घरों में पानी नहीं पहुंचने का दावा है।
- अन्य गांव: विभागीय स्तर पर जलापूर्ति शुरू होने के दावों के विपरीत कई स्थानों पर पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्य अधूरे होने की बात सामने आई है।
इन शिकायतों के आधार पर योजना के काम की गुणवत्ता, कनेक्शनों की वास्तविक संख्या और जलापूर्ति शुरू होने के दावों की जांच की मांग उठ रही है।
फर्जी हस्ताक्षर और पोर्टल पर गलत सत्यापन के आरोप
पड़ताल में पंचायतों के प्रस्तावों और योजना के आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड किए गए वीडियो को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। दावा है कि जांच के दायरे में आई 30 पंचायतों के कुछ प्रस्तावों में फर्जी हस्ताक्षर पाए गए। बरया कला के सरपंच-सचिव और नईगढ़ी के गेरुआरी सेगरान के सचिव की ओर से कथित फर्जी हस्ताक्षरों को लेकर पुलिस में शिकायत दिए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसके अलावा, कुछ गांवों में जलापूर्ति का सत्यापन दिखाने के लिए सतना जिले और बिहार के पुराने वीडियो अपलोड किए जाने का आरोप है। यह भी दावा किया गया कि काम पूरा हुए बिना ग्रामीणों के दस्तावेज लेकर कागजों पर कनेक्शन दर्ज कर दिए गए। पाइपलाइन की गहराई और लीकेज की पहचान के लिए जरूरी कॉपर वायर के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
विधानसभा में उठा मुद्दा
मऊगंज के विधायक प्रदीप पटेल ने विधानसभा में प्रश्न क्रमांक 365 के माध्यम से जल जीवन मिशन के कार्यों, भुगतान और बीओक्यू की जानकारी मांगी थी। जवाब में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके की ओर से बताया गया कि ठेकेदारों ने अनुबंध की शर्तों और निर्धारित मानकों के अनुसार काम किया तथा मापन के बाद भुगतान किया गया।
हालांकि, योजना के क्रियान्वयन को लेकर सामने आई शिकायतें सरकारी जवाब और जमीनी स्थिति के बीच अंतर की जांच की जरूरत बताती हैं।
अधिकारियों से जवाब का इंतजार
मामले पर विभागीय अधिकारियों से प्रतिक्रिया लेने के प्रयास किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। सिविल कार्यों की स्थिति पूछने पर संबंधित अधिकारी ने बाद में जानकारी देने की बात कही, जबकि मैकेनिकल कार्यों के संबंध में संपर्क नहीं हो सका।
मऊगंज में जल जीवन मिशन को लेकर उठे सवालों के बीच अब जरूरत इस बात की है कि गांववार वास्तविक जलापूर्ति, खर्च की गई राशि, निर्माण की गुणवत्ता और कनेक्शनों के सत्यापन की निष्पक्ष जांच हो। योजना का उद्देश्य हर घर तक पेयजल पहुंचाना है, इसलिए जिम्मेदार एजेंसियों को यह स्पष्ट करना होगा कि सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज उपलब्धियों का लाभ ग्रामीणों तक वास्तव में क्यों नहीं पहुंच पा रहा है।





