बड़े साहब का 'सरप्राइज'! फिर मिलेगा एक्सटेंशन? : रिटायरमेंट के बाद भी आईपीएस काट रहे हैं मंत्रालय के चक्कर! : अपना उत्तराधिकारी तलाश रहे युवा आईएएस

1 बड़े साहब देंगे 'सरप्राइज'! फिर मिलेगा एक्सटेंशन?
प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी में इन दिनों एक ही चर्चा गर्म है—क्या बड़े साहब को एक और एक्सटेंशन मिलने वाला है? वजह भी दिलचस्प है। अगले महीने बड़े साहब के एक साल के एक्सटेंशन की अवधि पूरी हो रही है। ऐसे में हर कोई यही जोड़-घटाव कर रहा है कि अब विदाई होगी या फिर एक और पारी शुरू होगी। इसी बीच सत्ता के गलियारों से एक नई खबर हवा में तैर रही है। चर्चा है कि बड़े साहब अगले महीने के आखिर में कलेक्टर्स-कमिश्नर कॉन्फ्रेंस बुलाने की तैयारी में हैं। बस, इसी ने अटकलों के बाजार को और गर्म कर दिया है। ब्यूरोक्रेसी के जानकारों का कहना है कि अगर बड़े साहब रिटायरमेंट की तैयारी में होते, तो कॉन्फ्रेंस नहीं बुलाते। इसलिए गलियारों में इसे साफ संकेत माना जा रहा है कि एक्सटेंशन की पटकथा लगभग तैयार है और सिर्फ आधिकारिक मुहर लगना बाकी है।
2 रिटायरमेंट के बाद भी आईपीएस काट रहे हैं मंत्रालय के चक्कर!
एक रिटायर्ड आईपीएस अफसर इन दिनों फिर से मंत्रालय के गलियारों में खूब नजर आ रहे हैं। फर्क बस इतना है कि इस बार न तो उनके पास वर्दी का रुतबा है और न ही सरकारी कुर्सी की ताकत, बल्कि हाथ में है अपनी लंबित फाइल को मंजिल तक पहुंचाने की उम्मीद। चर्चा है कि सेवा के आखिरी दौर में तत्कालीन मुख्य सचिव उनसे इतने नाराज हुए कि एक मामले में जांच बैठा दी। जांच का असर ऐसा हुआ कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले कई अहम लाभ, यहां तक कि पेंशन भी अटक गई। दिलचस्प बात यह है कि आईपीएस साहब अदालत का दरवाजा भी खटखटा आए और हाईकोर्ट से राहत भी मिल गई। लेकिन मंत्रालय की फाइलें अभी भी पूरी तरह पिघलती नजर नहीं आ रहीं। गलियारों में कानाफूसी है कि सरकार अब भी इस मामले में नरमी दिखाने के मूड में नहीं है। इधर, साहब लगातार मंत्रालय के वरिष्ठ अफसरों से मुलाकात कर रहे हैं। अफसरशाही के गलियारों में मजाकिया अंदाज में कहा जा रहा है कि साहब की एक ही गुजारिश है—"सजा तो बहुत मिल गई... अब माफ भी कर दीजिए।"
3 अपना उत्तराधिकारी तलाश रहे युवा आईएएस
एक युवा आईएएस अफसर इन दिनों अपने अनोखे अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं। साहब फिलहाल एक बड़े विभाग के संचालनालय में एडिशनल कमिश्नर हैं और जल्द ही कलेक्टर बनने वाले हैं। नई जिम्मेदारी संभालने से पहले उन्होंने अपनी मौजूदा कुर्सी के लिए खुद ही उत्तराधिकारी तलाशना शुरू कर दिया।बताया जाता है कि साहब ने युवा आईएएस अधिकारियों के व्हाट्सऐप ग्रुप में संदेश भेजकर पूछा कि उनके विभाग का काम संभालने में किस-किस की रुचि है। उन्होंने 2019 से 2022 बैच के अधिकारियों से सीधे संपर्क करने को भी कहा। नौकरशाही में यह तरीका थोड़ा अलग माना जा रहा है। आमतौर पर किसी पद पर किस अधिकारी की तैनाती होगी, इसका फैसला सरकार करती है, लेकिन साहब ने पहले ही इच्छुक अधिकारियों की राय जानने की पहल कर दी। अब देखना यह है कि उनकी पसंद को तवज्जो मिलती है या फिर सरकार अपनी पसंद का अधिकारी भेजती है।
4 सचिव साहब पर क्यों भड़के बड़े साहब?
मंत्रालय के गलियारों में इन दिनों एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की खूब चर्चा है। बताते हैं कि पिछले दिनों बड़े साहब आईएएस अफसरों के साथ समीक्षा बैठक ले रहे थे। इसी दौरान मैदानी जिम्मेदारी से हटाकर हाल ही में मंत्रालय के एक छोटे लेकिन अहम विभाग की कमान संभालने वाले एक सीधी भर्ती के आईएएस अफसर बड़े साहब के निशाने पर आ गए। हुआ यूं कि बड़े साहब ने एक मामले में सचिव साहब से जवाब तलब किया। लेकिन जवाब देने के बजाय सचिव साहब ने जिम्मेदारी नीचे बैठे अधिकारियों के पाले में डालने की कोशिश कर दी। बस, फिर क्या था... बड़े साहब का पारा चढ़ गया। कहते हैं कि उन्होंने दो टूक अंदाज में समझा दिया, "अब आप मैदान में नहीं, मंत्रालय में बैठे हैं। यहां जवाबदेही आपकी है। हर बात के लिए मातहतों पर ठीकरा फोड़ने से काम नहीं चलेगा।" बैठक में मौजूद अफसरों के मुताबिक, बड़े साहब का यह संदेश सिर्फ एक सचिव तक सीमित नहीं था, बल्कि मंत्रालय में बैठे सभी अफसरों के लिए था कि अब जवाबदेही से बचने का रास्ता आसान नहीं होगा।
5 मलाईदार कुर्सी छोड़ दिल्ली की राह!
प्रदेश के एक बेहद अहम और मलाईदार विभाग के मुखिया इन दिनों नई पारी की तैयारी में जुटे हैं। अफसरशाही के गलियारों में चर्चा है कि साहब ने डेप्युटेशन पर जाने के लिए सरकार को आवेदन दे दिया है। इतना ही नहीं, दिल्ली दरबार में भी अपनी नई तैनाती के लिए जोर-शोर से कोशिशें शुरू कर दी हैं। वैसे भी साहब की पहचान तेज-तर्रार और नतीजे देने वाले अफसर के रूप में होती है। यही वजह है कि उनके कदम को लेकर मंत्रालय में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनकी आईएएस पत्नी पहले ही केंद्र सरकार में डेप्युटेशन पर अपनी नई जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं। अब माना जा रहा है कि साहब भी जल्द ही उसी राह पर निकल सकते हैं। ब्यूरोक्रेसी में कानाफूसी है कि अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो जल्द ही प्रदेश एक और वरिष्ठ आईपीएस को दिल्ली के लिए विदा करेगा। फिलहाल मंत्रालय में यही सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है—"साहब का दिल्ली टिकट कब कन्फर्म होगा?"
6 दो महिला आईएएस की तकरार पहुंची बड़े साहब के दरबार!
मंत्रालय के एक बड़े और बेहद संवेदनशील विभाग में इन दिनों दो महिला आईएएस अफसरों की तनातनी चर्चा का सबसे बड़ा विषय बनी हुई है। खबर है कि पिछले दिनों दोनों के बीच किसी कामकाज को लेकर ऐसी तीखी नोकझोंक हुई कि मामला चैंबर की चारदीवारी से निकलकर सीधे बड़े साहब के दरबार तक पहुंच गया। बताया जाता है कि विवाद बढ़ने के बाद जूनियर अफसर, जो प्रमोटी आईएएस और एडिशनल सेक्रेट्री स्तर की हैं, सीधे बड़े साहब से मिलने पहुंच गईं। वहां उन्होंने अपनी सीनियर, सीधी भर्ती की सचिव स्तर की आईएएस, के कामकाज के तौर-तरीकों पर खुलकर नाराजगी जताई। मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है कि जूनियर मैडम ने बड़े साहब से कहा कि विभाग में सीनियर मैडम का व्यवहार अधिकारी-कर्मचारियों के साथ बेहद खराब है। फाइलों पर छोटी-छोटी बातों पर आपत्तियां, बेवजह की सख्ती और बात-बात पर फटकार से पूरे विभाग का माहौल प्रभावित हो रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने खुद को किसी दूसरे विभाग में भेजने की इच्छा भी जता दी।
7 सिफारिशों के 'सैलाब' से परेशान हुए युवा एसपी साहब!
प्रदेश के सबसे बड़े और मलाईदार जिलों में से एक की कमान संभालने वाले युवा एसपी साहब इन दिनों अपराध से कम और सिफारिशों से ज्यादा जूझ रहे हैं। महकमे के गलियारों में चर्चा है कि कुर्सी संभालते ही नेताओं की लंबी फेहरिस्त उनके दरवाजे तक पहुंच गई। बताते हैं कि लगभग हर नेता की पहली पसंद कानून-व्यवस्था नहीं, बल्कि अपने चहेते टीआई की पोस्टिंग है। कोशिश यही है कि समर्थक अफसर को जिले के सबसे अहम और चर्चित थाने की जिम्मेदारी मिल जाए। इसके लिए फोन, मुलाकात और सिफारिशों का दौर लगातार जारी है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि अपनी साफ-सुथरी और बेदाग छवि के लिए पहचाने जाने वाले युवा एसपी साहब अब तक किसी भी राजनीतिक सिफारिश के आगे झुके नहीं हैं। अफसरशाही में चर्चा है कि वे हर सिफारिश बड़े धैर्य से सुनते हैं, मुस्कुराकर "देखते हैं" कह देते हैं और फिर फाइल अपने हिसाब से आगे बढ़ाते हैं।
8 कलेक्टर साहब से नाराज़ सांसद ने मुख्यमंत्री से की शिकायत
प्रदेश के एक बड़े जिले के कलेक्टर साहब इन दिनों अपने काम से ज्यादा अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। खबर है कि जिले के सांसद ने हाल ही में मुख्यमंत्री से मुलाकात कर कलेक्टर साहब की कार्यशैली पर खुलकर नाराजगी जताई। सियासी गलियारों में चर्चा है कि सांसद की सबसे बड़ी शिकायत यही रही कि कलेक्टर साहब तक पहुंचना आसान नहीं है। न फोन आसानी से उठता है, न मुलाकात का समय मिलता है। यही शिकायत जिले के कुछ विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भी बताई जा रही है। उनका मानना है कि जनता के मुद्दों को लेकर अफसर से संवाद ही न हो, तो फिर काम कैसे आगे बढ़े? मामला सिर्फ मुलाकात तक सीमित नहीं है। मंत्रालय तक यह चर्चा पहुंची है कि कलेक्टर साहब की फाइल निपटाने की रफ्तार भी उम्मीद से काफी धीमी है। छोटे-छोटे मामलों में भी फाइलें लंबा इंतजार करती हैं, जिससे कई काम अटक रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि सीधी भर्ती के इस युवा आईएएस अफसर को जिले की कमान संभाले अभी ज्यादा समय भी नहीं हुआ है, लेकिन शिकायतों की फेहरिस्त तेजी से लंबी होती जा रही है। अब अफसरशाही में कानाफूसी यही है कि अगर हालात जल्द नहीं बदले, तो शिकायतों का यह सिलसिला किसी बड़े प्रशासनिक फैसले की वजह भी बन सकता है।
9 प्रभारी के भरोसे चल रहा बड़ा जिला, कलेक्टर की कुर्सी पर किसकी नजर?
प्रदेश का एक बड़ा और बेहद संवेदनशील जिला इन दिनों स्थायी कलेक्टर के बजाय प्रभारी व्यवस्था के भरोसे चल रहा है। वजह यह है कि यहां पदस्थ रहीं कलेक्टर मैडम दो साल की स्टडी लीव पर जा चुकी हैं। उन्हें रिलीव हुए भी काफी समय बीत गया, लेकिन सरकार अब तक उनकी जगह किसी नए अफसर की तैनाती नहीं कर पाई है। फिलहाल जिले की कमान एडीएम के पास है, लेकिन सत्ता और सचिवालय के गलियारों में चर्चा इस बात की ज्यादा है कि आखिर इस अहम कुर्सी पर बैठेगा कौन? अफसरशाही में कई नामों की चर्चा है, मगर सबसे आगे बड़े साहब के कार्यालय में पदस्थ एक सीधी भर्ती के आईएएस अफसर का नाम बताया जा रहा है। कहा जाता है कि यह अफसर अपनी ईमानदार छवि, तेज कार्यशैली और फाइलों के त्वरित निपटारे के लिए जाने जाते हैं। यही वजह है कि उन्हें इस बड़े जिले की जिम्मेदारी का मजबूत दावेदार माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासनिक हलकों का यह भी कहना है कि आखिरी मुहर तो मुख्यमंत्री की मर्जी से ही लगेगी।
10 पूर्व मंत्री की धमकी से बेअसर युवा आईपीएस
एक युवा आईपीएस अफसर पर पूर्व मंत्री की सियासी चेतावनी का कोई असर होता नजर नहीं आ रहा। हाल ही में एक सभा में सत्ताधारी दल के एक पूर्व मंत्री ने एसपी को खुले मंच से नसीहत देते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं पर लाठी चलाकर उन्होंने ठीक नहीं किया और वह दोस्ती के साथ दुश्मनी भी निभाना जानते हैं। मगर जानकारों का कहना है कि एसपी साहब पूरी तरह निश्चिंत हैं। वजह भी खास है। बताया जाता है कि कार्रवाई सरकार की जानकारी और सहमति से हुई थी। दूसरी वजह यह है कि मौजूदा पदस्थापना से पहले युवा आईपीएस "सरकार" के गृह जिले में अहम जिम्मेदारी निभा चुके हैं। ऐसे में उनकी सीधी पहुंच ऊपर तक मानी जाती है। यही कारण है कि पूर्व मंत्री की सख्त चेतावनी के बावजूद एसपी साहब अपनी कुर्सी पर पूरी मजबूती के साथ जमे हुए हैं और फिलहाल उनके तबादले जैसी किसी संभावना को अफसरशाही में गंभीरता से नहीं देखा जा रहा।





