कलेक्टर साहब से नाराज हुए केन्द्रीय मंत्री : एसपी साहब पर बरसे बड़े साहब : तबादलों को लेकर भिड़ी मंत्री और सचिव

कलेक्टर साहब से नाराज हुए केन्द्रीय मंत्री : एसपी साहब पर बरसे बड़े साहब : तबादलों को लेकर भिड़ी मंत्री और सचिव
1 कलेक्टर साहब से नाराज हुए केन्द्रीय मंत्री
एक केंद्रीय मंत्री इन दिनों प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी से खासे नाराज नजर आ रहे हैं। कुछ समय पहले उन्होंने एक युवा आईएएस अधिकारी की कार्यशैली को लेकर मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। अब मंत्री जी का निशाना एक बड़े जिले के कलेक्टर बन गए हैं। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने मंच से ही कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। मंत्री ने दो टूक कहा, "अगर मेरे क्षेत्र की जनता को परेशान किया जाएगा तो यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" उन्होंने यह भी कहा कि कुछ अफसरों का काम ही लोगों के कार्यों में बेवजह आपत्तियां लगाकर उन्हें परेशान करना रह गया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब मंत्री जी ने सार्वजनिक रूप से कलेक्टर पर नाराजगी जताई हो। इससे पहले भी वे जिले में पानी की समस्या को लेकर कलेक्टर को खरी-खोटी सुना चुके हैं।
2 एसपी साहब पर बरसे बड़े साहब
पिछले दिनों आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर्स कॉन्फ्रेंस में इस बार बड़े साहब के निशाने पर कई जिलों के पुलिस कप्तान रहे। एक बड़े जिले के एसपी को तो बैठक के दौरान जमकर फटकार सुननी पड़ी। मामला अपराधियों के खिलाफ समय पर चालान पेश नहीं किए जाने का था। बड़े साहब ने एसपी से सवाल किया कि आखिर ऐसी क्या वजह है कि 90 दिन की निर्धारित अवधि के भीतर आरोपियों के खिलाफ चालान पेश नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि उनके जिले में इतनी बड़ी संख्या में चालान आखिर लंबित क्यों पड़े हैं। सवालों की बौछार के बीच एसपी साहब इतने घबरा गए कि कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। तभी बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए स्थिति संभाली और एसपी का पक्ष रखते हुए उनका बचाव किया।
3 तबादलों को लेकर भिड़ी मंत्री और सचिव
एक बड़े विभाग की मंत्री और विभाग की प्रभारी प्रमुख सचिव के बीच तबादलों को लेकर जमकर ठन गई है। मंत्री जी ने विभागीय अधिकारियों के तबादलों की जो सूची प्रमुख सचिव को सौंपी थी, उसमें शामिल 90 फीसदी से ज्यादा नाम या तो हटा दिए गए या फिर संबंधित अधिकारियों का तबादला प्रस्तावित स्थान की बजाय दूसरी जगह कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम से मंत्री जी बेहद नाराज हैं। उनका मानना है कि प्रमुख सचिव ने उन्हें असहज स्थिति में डालने के मकसद से जानबूझकर ऐसा किया है। चर्चा है कि मंत्री जी जल्द ही इस मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से कर सकती हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा परेशानी उन अधिकारियों की बताई जा रही है, जिन्होंने तबादला मनचाही जगह कराने की उम्मीद में मंत्री जी के स्टाफ को पहले ही एडवांस राशि दे दी थी। अब तबादला सूची बदलने के बाद उनकी चिंता बढ़ गई है।
4 एसपी साहब फिर शुरू करेंगे मंथली कलेक्शन सिस्टम
हाल ही में एक ग्रामीण जिले की कमान संभालने पहुंचे एक एसपी साहब इन दिनों खासे परेशान बताए जा रहे हैं। वजह यह है कि उनसे पहले जिले की कमान एक तेज-तर्रार और ईमानदार आईपीएस मैडम के हाथों में थी। चर्चा है कि मैडम ने पद संभालते ही कथित तौर पर चल रहे 'महीने' के पूरे सिस्टम पर पूरी तरह रोक लगा दी थी। इधर, नए एसपी साहब की कार्यशैली को लेकर अलग ही चर्चाएं हैं। बताया जाता है कि महीने की 10 तारीख तक जब कोई 'कलेक्शन' नहीं पहुंचा तो उन्होंने स्टाफ से पूछा, "यहां महीने का कोई सिस्टम नहीं है क्या?" इस पर स्टाफ ने जवाब दिया कि पहले व्यवस्था थी, लेकिन मैडम ने उसे बंद करवा दिया था। अब चर्चा है कि साहब पुराने सिस्टम को फिर से शुरू कराने के लिए दबाव बना रहे हैं। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा है कि इस बार 'महीने' की रकम पहले से दोगुनी करने की तैयारी है
5 आबकारी विभाग ने कराई कलेक्टर साहब की किरकिरी
एक बड़े जिले के आबकारी विभाग ने अपने ही कलेक्टर साहब की जमकर किरकिरी करा दी। दरअसल, विभाग ने अवैध शराब जब्ती की कार्रवाई का एक प्रेस नोट जारी किया। प्रेस नोट में दावा किया गया कि कलेक्टर साहब के लगातार मिल रहे निर्देशों के आधार पर कार्रवाई करते हुए 450 मिलीलीटर अवैध शराब जब्त की गई। खास बात यह रही कि इस कार्रवाई में आधा दर्जन अधिकारियों की टीम के शामिल होने का भी उल्लेख किया गया। यानी पूरी टीम की मेहनत का नतीजा बोतल से भी कम शराब की जब्ती निकला और उसके लिए भी कलेक्टर के निर्देशों का हवाला दे दिया गया। जिसने भी यह प्रेस नोट पढ़ा, वह मुस्कुराए बिना नहीं रह सका। अब सरकारी गलियारों में चुटकी ली जा रही है कि अगर भविष्य में भी ऐसी ही "बड़ी" कार्रवाई होती रही तो अवैध शराब बेचने वालों में डर नहीं, बल्कि हंसी जरूर बनी रहेगी।
6 सीबीआई में डेप्युटेशन पर जाएंगे डीआईजी
मैदानी क्षेत्र में डीआईजी के तौर पर पदस्थ सीधी भर्ती के एक आईपीएस अधिकारी की लंबे समय से चल रही कोशिशें आखिरकार रंग ले आई हैं। महीनों से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) के लिए प्रयासरत साहब को आखिर मंजूरी मिल गई है। उनके डेप्युटेशन के आदेश जारी हो चुके हैं और अब वे जल्द ही दिल्ली में सीबीआई की जिम्मेदारी संभालेंगे। साहब काफी समय से केंद्रीय एजेंसी में काम करने के इच्छुक थे और इसके लिए लगातार प्रयास कर रहे थे। आखिरकार उनकी यह इच्छा पूरी हो गई। उनके दिल्ली रवाना होने के साथ ही प्रदेश में एक महत्वपूर्ण डीआईजी रैंक की मैदानी पोस्टिंग भी खाली हो जाएगी।अब पुलिस मुख्यालय के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि इस अहम जिम्मेदारी की कमान किस आईपीएस अधिकारी को सौंपी जाएगी। कई डीआईजी स्तर के अधिकारी इस पोस्टिंग के दावेदार माने जा रहे हैं और आने वाले दिनों में इस पद को लेकर हलचल और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
7 एडीएम साहब के प्रयास फिर हुए नाकाम
राज्य प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी लंबे समय से प्रदेश की आर्थिक राजधानी में पोस्टिंग पाने की कोशिशों में जुटे हैं, लेकिन हर बार किस्मत उनका साथ नहीं दे रही है। इस बार तो साहब को पूरा भरोसा था कि तबादला सूची में उनकी मनचाही पोस्टिंग तय है। मगर पिछले दिनों जारी हुई लंबी-चौड़ी तबादला सूची में अपना नाम न पाकर उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। बताया जाता है कि तबादला सूची जारी होने के बाद से साहब खासे निराश हैं और अब इसे अपनी किस्मत का खेल मानकर ही संतोष कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके सेवा जीवन का अधिकांश समय आर्थिक राजधानी या उसके आसपास के जिलों में ही बीता है। शायद यही वजह है कि वे एक बार फिर उसी क्षेत्र में लौटने की कोशिश कर रहे थे। जफिलहाल साहब एक छोटे से जिले में जिला पंचायत के सीईओ की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब उनकी नजर अगली तबादला सूची पर टिकी है।
8 अचानक से बदल गया एडीजी साहब का रुख
एक एडीजी साहब इन दिनों अपने बदले हुए तेवरों को लेकर पुलिस महकमे में चर्चा का विषय बने हुए हैं। कुछ समय पहले तक वे अपने भाषणों और बैठकों में धर्म, संयम और शांति का संदेश देते नजर आते थे। लेकिन अचानक उनके अंदाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अब साहब पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। हाल ही में उन्होंने अपने अधीनस्थ पुलिस अधीक्षकों को साफ संदेश दिया कि अपराधियों के प्रति किसी तरह की नरमी न बरती जाए। चर्चा है कि उन्होंने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़े तो अपराधियों के "हाथ-पैर तोड़ दो", लेकिन उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। हालांकि, साहब के इस संदेश के बाद पुलिस अधीक्षकों के बीच भी अलग तरह की चर्चा शुरू हो गई है। महकमे में चुटकी ली जा रही है कि अपराधियों पर सख्ती तो कर देंगे, लेकिन बाद में यदि जांच बैठी या कानूनी सवाल खड़े हुए तो उससे बचाएगा कौन? यही सवाल इन दिनों पुलिस गलियारों में सबसे ज्यादा सुनाई दे रहा है।
9 मलाईदार निगम में जाने की कोशिश में सीनियर आईएफएस
एक वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी इन दिनों एक मलाईदार माने जाने वाले निगम में प्रबंध संचालक (एमडी) की कुर्सी हासिल करने के लिए जोर-शोर से कोशिशों में जुटे बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, साहब की पहली पसंद यही निगम है और इसके लिए वे हर स्तर पर सक्रिय हैं। फिलहाल अधिकारी दो महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार संभाल रहे हैं, लेकिन चर्चा है कि वे अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों से संतुष्ट नहीं हैं। महकमे में यह भी कहा जा रहा है कि इसी वजह से उनकी नजर अब उस निगम की कुर्सी पर टिकी है, जिसे प्रभाव और संसाधनों के लिहाज से काफी अहम माना जाता है। साहब इससे पहले डेप्युटेशन पर उद्यानिकी विभाग में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हालांकि, वहां उनका कार्यकाल कई कारणों से विवादों में रहा था और उस दौरान लिए गए कुछ फैसलों को लेकर भी काफी चर्चाएं हुई थीं।
10 यह डीएसपी तो बड़ा करामाती निकला
पिछले लंबे समय से सौ से अधिक उप पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) की तबादला सूची एक टेबल से दूसरी टेबल तक भटक रही थी। आखिरकार, उसमें शामिल 65 नामों को हरी झंडी मिली और उनके तबादला आदेश जारी कर दिए गए। लेकिन एक डीएसपी सबसे ज्यादा करामाती निकले। मैदानी पोस्टिंग से पुलिस मुख्यालय लौटे उन्हें अभी महज एक महीना ही हुआ था। इस दौरान उन्होंने पिछले दस दिनों में ऐसा जुगाड़ बैठाया कि फिर से मैदानी पोस्टिंग हासिल कर ली। अब उनकी तैनाती एक धार्मिक नगरी में हो गई है, जहां जल्द ही प्रदेश का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होने वाला है। ऐसे में उनकी यह पोस्टिंग काफी अहम मानी जा रही है।
Abhishek Dubey

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Managing Editor

A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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