MP Employees Protest: 20 साल से नहीं बढ़ा मानदेय? 2-4 हजार में काम का दावा, 28-29 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन

MP Employees Protest: 20 साल से नहीं बढ़ा मानदेय? 2-4 हजार में काम का दावा, 28-29 सितंबर को भोपाल में प्रदर्शन
भोपाल। मध्यप्रदेश में वर्षों से ग्राम पंचायतों, सरकारी स्कूलों, छात्रावासों और आश्रमों में काम कर रहे अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन का ऐलान किया है। ऑल डिपार्टमेंट आउटसोर्स, अस्थाई, अंशकालीन, ग्राम पंचायत कर्मचारी संयुक्त मोर्चे के आह्वान पर कर्मचारी 28 और 29 सितंबर को भोपाल में धरना-प्रदर्शन करेंगे।
संगठन के अनुसार, प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पंचायत चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी, पंप चालक और रसोइए समेत अन्य कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल होंगे। संयुक्त मोर्चे ने दो दिन कामबंद हड़ताल का भी ऐलान किया है।
15 से 20 साल से सेवा, 2 से 4 हजार मानदेय का दावा
संयुक्त मोर्चे का दावा है कि कई कर्मचारी पिछले 15 से 20 वर्षों से अलग-अलग विभागों और संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उन्हें अब भी करीब 2 से 4 हजार रुपये प्रतिमाह तक का मानदेय मिल रहा है।
संगठन का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद लंबे समय से मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं हुई है। इतने कम मानदेय में कर्मचारियों के लिए परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
हालांकि, अलग-अलग विभागों में कार्यरत कर्मचारियों के मानदेय, सेवा शर्तों और नियुक्ति की प्रकृति अलग हो सकती है। संगठन द्वारा बताए गए आंकड़े उसकी ओर से किए गए दावों पर आधारित हैं।
पंचायतों में चौकीदार से लेकर पंप चालक तक संभाल रहे जिम्मेदारियां
संयुक्त मोर्चे के कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह के मुताबिक, ग्राम पंचायतों में कर्मचारी सुरक्षा, स्वच्छता और नल-जल व्यवस्था समेत कई तरह की जिम्मेदारियां संभालते हैं।
वहीं स्कूल शिक्षा और आदिम जाति कल्याण विभाग के स्कूलों, छात्रावासों और आश्रमों में अंशकालीन एवं अस्थाई भृत्य और रसोइए लंबे समय से काम कर रहे हैं।
संगठन का कहना है कि वर्षों तक सेवा देने के बावजूद इन कर्मचारियों को स्थायी कर्मचारियों के समान सेवा लाभ और सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध नहीं है।
चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देना शामिल है। इसके साथ ही न्यूनतम वेतन के प्रावधानों के अनुरूप समान और सम्मानजनक वेतन देने की मांग की गई है।
संयुक्त मोर्चे ने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमावली बनाने की भी मांग उठाई है, ताकि उनकी सेवा शर्तों और अधिकारों को स्पष्ट किया जा सके।
CL, EL, PF, ESI और पेंशन की भी मांग
मानदेय और स्थायीकरण के अलावा कर्मचारियों ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े लाभ देने की मांग भी की है। संगठन के मुताबिक कर्मचारियों को CL, EL, PF, ESI, पेंशन, बीमा और चिकित्सा सुविधा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
इसके अलावा बकाया मानदेय अंतर और पात्र एरियर का भुगतान करने तथा उचित प्रक्रिया के बिना कर्मचारियों को हटाने पर रोक लगाने की मांग भी आंदोलन के जरिए उठाई जाएगी।
28-29 सितंबर को भोपाल में जुटेंगे कर्मचारी
संयुक्त मोर्चे के अनुसार, आंदोलन में ग्राम पंचायत चौकीदार संघ, स्कूल शिक्षा विभाग के अंशकालीन कर्मचारी संघ और आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़े कर्मचारी शामिल होंगे।
संगठन ने प्रदेशभर के कर्मचारियों से 28 और 29 सितंबर को भोपाल पहुंचने की अपील की है। प्रस्तावित प्रदर्शन भाजपा कार्यालय के सामने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के समक्ष किए जाने की बात कही गई है।
संयुक्त मोर्चे का कहना है कि स्थायीकरण, न्यूनतम वेतन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने समेत मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
सरकार के फैसले पर टिकी कर्मचारियों की नजर
अंशकालीन और अस्थाई कर्मचारियों की मांगों में एक तरफ न्यूनतम और सम्मानजनक वेतन का मुद्दा है, वहीं दूसरी ओर स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषय भी शामिल हैं। अब 28-29 सितंबर के प्रस्तावित आंदोलन के बाद सरकार और संबंधित विभागों की ओर से इस मामले में क्या रुख सामने आता है, इस पर कर्मचारियों की नजर रहेगी।
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