MP के 70 हजार शिक्षकों को राहत? पहली नियुक्ति से सेवा जोड़ने के आदेश पर सरकार को 4 हफ्ते

जबलपुर। मध्य प्रदेश के करीब 70 हजार शिक्षकों से जुड़े सेवा अवधि और वेतन लाभ के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश के पालन के लिए 4 सप्ताह का समय दिया है। मामला शिक्षकों की सेवा अवधि को उनकी पहली नियुक्ति की तारीख से जोड़ने से संबंधित है।
सरकार की ओर से हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के पालन के लिए समय मांगा गया था, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
अवमानना याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया समय
मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक खोट की सिंगल बेंच में हुई। सरकार की ओर से पूर्व आदेश के अनुपालन के लिए समय मांगा गया था। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह की मोहलत दी है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र आर्य और राज्य सरकार की ओर से एएस बघेल ने पक्ष रखा। अब अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी।
पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने की मांग
मामले में राजेश पांडेय समेत 497 शिक्षकों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। शिक्षकों का कहना था कि शिक्षा विभाग में संविलियन के दौरान उनकी पहले की शिक्षकीय सेवा को सेवा अवधि की गणना में उचित तरीके से शामिल नहीं किया गया।
शिक्षकों की मांग थी कि उनकी सेवा की गणना पहली नियुक्ति की तारीख से की जाए। उनका तर्क है कि इससे वरिष्ठता, वेतनवृद्धि, पेंशन और अन्य सेवा संबंधी लाभों पर असर पड़ेगा।
2006 से छठे वेतनमान के लाभ का भी दावा
शिक्षकों की ओर से यह तर्क भी दिया गया है कि छठा वेतनमान 1 जनवरी 2006 से लागू हुआ था, लेकिन उन्हें इसका लाभ 2016 से दिया गया।
शिक्षकों के अनुसार, यदि उनकी सेवा अवधि पहली नियुक्ति से मानी जाती है तो 2006 से वेतनमान का लाभ दिए जाने का आधार बन सकता है। इसी वजह से करीब 10 साल के बकाया वेतन का दावा सामने आ रहा है।
₹7–8 लाख एरियर और 12% ब्याज का दावा
शिक्षक पक्ष के मुताबिक, सेवा अवधि और वेतनमान के अंतर के आधार पर प्रत्येक शिक्षक को करीब ₹7 से ₹8 लाख तक का एरियर मिल सकता है। इस राशि पर 12% ब्याज दिए जाने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, ये आंकड़े शिक्षक पक्ष की ओर से बताए गए अनुमान हैं। हाईकोर्ट के आदेश के पालन के बाद प्रत्येक कर्मचारी को मिलने वाली वास्तविक राशि संबंधित शिक्षक की सेवा अवधि, वेतन निर्धारण और लागू नियमों के आधार पर तय होगी।
इसी तरह ₹15–20 हजार मासिक वेतन वृद्धि का दावा भी संभावित वेतन पुनर्निर्धारण से जुड़ा है। इसे अभी सभी 70 हजार शिक्षकों के लिए निश्चित वृद्धि के रूप में नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार की SLP खारिज
हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के बाद राज्य सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सरकार की Special Leave Petition (SLP) 24 अगस्त 2026 को खारिज हो गई।
इसके बाद शिक्षकों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर पूर्व आदेश का पालन कराने की मांग की गई। इसी याचिका पर अब हाईकोर्ट ने सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है।
497 शिक्षकों से शुरू हुई कानूनी लड़ाई
इस मामले की कानूनी लड़ाई 497 शिक्षकों की याचिका से शुरू हुई थी। शिक्षकों का कहना था कि उनकी पहले की सेवा को संविलियन के बाद मिलने वाले सेवा लाभों में उचित तरीके से नहीं जोड़ा गया।
अब मामले का असर व्यापक स्तर पर होने की संभावना बताई जा रही है। हालांकि, अंतिम रूप से कितने शिक्षक पात्र होंगे और उन्हें कितना वित्तीय लाभ मिलेगा, यह सरकार द्वारा आदेश के अनुपालन और व्यक्तिगत सेवा रिकॉर्ड की जांच के बाद स्पष्ट होगा।
शिक्षक संगठनों ने सरकार से आदेश लागू करने की मांग की
शिक्षक नेता उपेंद्र कौशल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में SLP खारिज होने के बाद सरकार को हाईकोर्ट के आदेश का पालन करना चाहिए। शिक्षक संगठनों को उम्मीद है कि पहली नियुक्ति से सेवा अवधि जोड़ने के साथ संबंधित लंबित सेवा लाभ भी मिलेंगे।
600 से ज्यादा दिवंगत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति
इसी बीच शिक्षक संगठनों ने 600 से अधिक दिवंगत शिक्षकों और कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने के फैसले का भी स्वागत किया है।
संगठनों का कहना है कि अनुकंपा नियुक्ति से दिवंगत कर्मचारियों के आश्रित परिवारों को रोजगार और आर्थिक सहारा मिल सकेगा।
अब सरकार के आदेश पर नजर
हाईकोर्ट की ओर से चार सप्ताह की समयसीमा दिए जाने के बाद अब शिक्षकों की नजर राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर है। सरकार को पूर्व न्यायिक आदेश के अनुपालन की दिशा में कदम उठाने हैं।
मामले की अगली सुनवाई 21 अक्टूबर से शुरू होने वाले सप्ताह में प्रस्तावित है। उस समय सरकार की ओर से की गई कार्रवाई और आदेश के अनुपालन की स्थिति सामने आ सकती है।





