PHE विभाग में घमासान: इंजीनियर इन चीफ बनाम फाइनेंस ऑफिसर, ढोल-मंजीरों के साथ पहुंचे अधिकारी-ठेकेदार

PHE विभाग में घमासान: इंजीनियर इन चीफ बनाम फाइनेंस ऑफिसर, ढोल-मंजीरों के साथ पहुंचे अधिकारी-ठेकेदार
भोपाल। मध्य प्रदेश का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी यानी PHE विभाग इन दिनों कामकाज से ज्यादा अंदरूनी घमासान को लेकर चर्चा में है। विभाग में इंजीनियर इन चीफ संजय अंधवान और फाइनेंस ऑफिसर अंजू सिंह के बीच चल रही तनातनी अब खुले टकराव में बदलती दिखाई दे रही है। बुधवार को विवाद ने ऐसा रूप ले लिया कि विभाग के कुछ अधिकारी और ठेकेदार ढोल-मंजीरे लेकर बाणगंगा स्थित PHE के जल भवन कार्यालय पहुंच गए। यहां जमकर हंगामा हुआ और कुछ समय के लिए कार्यालय का कामकाज प्रभावित होने की बात सामने आई।
फाइलों की पड़ताल शुरू हुई तो बढ़ा विवाद
अंजू सिंह की करीब दो महीने पहले फाइनेंस विभाग की ओर से PHE में फाइनेंस ऑफिसर के पद पर पदस्थापना हुई थी। इसके बाद उन्होंने विभाग की पुरानी फाइलों और वित्तीय मामलों की जांच शुरू की। सूत्रों के मुताबिक, पड़ताल के दौरान कुछ भुगतानों और टेंडर प्रक्रियाओं को लेकर नियमों से जुड़े सवाल सामने आए। सिंह ने कथित तौर पर इन मामलों को लेकर इंजीनियर इन चीफ संजय अंधवान से स्पष्टीकरण मांगा। यहीं से दोनों अधिकारियों के बीच टकराव बढ़ने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि सवाल उठाए जाने के बाद सिंह को विभाग की ई-फाइलों के इस्तेमाल से रोक दिया गया। इसके बाद अंधवान की ओर से विभाग के ACS सचिन सिन्हा से सिंह की शिकायत किए जाने की जानकारी सामने आई। शिकायत में उन पर काम नहीं करने का आरोप लगाए जाने की बात कही जा रही है।
अधिकार क्षेत्र को लेकर भी उठे सवाल
विवाद का दूसरा पहलू फाइनेंस ऑफिसर को जारी किए गए नोटिस से जुड़ा है। अंजू सिंह मूल रूप से फाइनेंस विभाग की अधिकारी हैं और उनके प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी आधार पर यह सवाल खड़ा हुआ है कि PHE के स्तर से उन्हें सीधे कारण बताओ नोटिस जारी करने का अधिकार किस सीमा तक है।
वहीं, सिंह की ओर से कथित तौर पर जवाब देते हुए अपने स्तर से पूरे मामले की जानकारी फाइनेंस विभाग को दी गई है। बताया जा रहा है कि उन्होंने अंधवान के खिलाफ वित्तीय और प्रशासनिक मामलों से जुड़े अपने सवालों का भी उल्लेख किया है।
ढोल-मंजीरों के साथ कार्यालय पहुंचने से बढ़ा बवाल
बुधवार की घटना ने इस अंदरूनी विवाद को और सार्वजनिक कर दिया। विभाग के कुछ अधिकारी और ठेकेदार ढोल-मंजीरे लेकर जल भवन पहुंच गए। वहां प्रदर्शन और हंगामे की स्थिति बनी। इसके चलते कार्यालयीन कामकाज प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
अब तक फाइलों और वित्तीय मामलों को लेकर बंद कमरों में चल रही खींचतान बुधवार को खुले प्रदर्शन तक पहुंच गई। इससे विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
KVS कोलसानी बोले- दोनों तरफ से हुई गलती
मामले में जल जीवन मिशन निगम के KVS कोलसानी ने दोनों अधिकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनने की पुष्टि करते हुए कहा कि गलती दोनों पक्षों की ओर से हुई है। उन्होंने बताया कि दोनों पक्षों को समझाइश दी जा रही है। स्थिति ज्यादा खराब होने पर वरिष्ठ अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि PHE विभाग में शुरू हुआ यह विवाद आखिर किस स्तर पर जाकर थमेगा। एक तरफ वित्तीय फाइलों और टेंडरों को लेकर उठ रहे सवाल हैं, तो दूसरी तरफ अधिकारियों के बीच अधिकार क्षेत्र और कामकाज को लेकर टकराव सामने आ गया है। बुधवार का हंगामा इस बात का संकेत जरूर है कि मामला अब महज फाइलों तक सीमित नहीं रहा।
Abhishek Dubey

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