Raghuveer Singh Meena FIR: जाति प्रमाणपत्र विवाद के बाद ममता मीना का सिंधिया पर हमला, बोलीं- ‘दो-चार केस और करा दो, डरेंगे नहीं’

गुना/भोपाल। पूर्व IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ अनुसूचित जनजाति (ST) जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में FIR दर्ज होने के बाद गुना की राजनीति में भी बयानबाजी तेज हो गई है। उनकी पत्नी और चांचौड़ा की पूर्व विधायक ममता मीना ने एक वीडियो जारी कर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ममता मीना ने दावा किया कि उनके परिवार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ कितने भी मामले दर्ज कराए जाएं, वह डरने वाली नहीं हैं और अपनी राजनीतिक लड़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने 2029 के लोकसभा चुनाव का भी जिक्र करते हुए कहा कि समय आने पर जनता जवाब देगी। उनके इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रघुवीर मीना पर किस मामले में FIR?
पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामले में FIR दर्ज की है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, मामला 1984 में विदिशा से जारी ST प्रमाणपत्र और उसके आधार पर पुलिस सेवा में आरक्षण का लाभ लेने के आरोपों से जुड़ा है।
रिपोर्टों के अनुसार, शिकायत के बाद राज्य की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की थी। अब पुलिस FIR के आधार पर प्रमाणपत्र जारी होने की प्रक्रिया, दस्तावेजों और उससे मिले लाभ से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि FIR में लगाए गए आरोप अभी जांच का विषय हैं। अंतिम कानूनी स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
शिक्षक की नौकरी में OBC, DSP भर्ती में ST प्रमाणपत्र का आरोप
मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी अलग-अलग सेवाओं में इस्तेमाल किए गए जाति प्रमाणपत्रों को लेकर है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, रघुवीर सिंह मीना ने शिक्षक पद पर नियुक्ति के समय OBC वर्ग का प्रमाणपत्र लगाया था। बाद में MPPSC के माध्यम से DSP पद के लिए ST प्रमाणपत्र का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है। इसी आधार पर आरक्षण का लाभ लेने की शिकायत की गई थी।
इस मामले में गुना के राघौगढ़ निवासी हरिसिंह रघुवंशी की शिकायत का भी उल्लेख सामने आया है। शिकायत के बाद जाति प्रमाणपत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई और इसके बाद पुलिस कार्रवाई शुरू हुई।
मीना जाति और सिरोंज का पुराना रिकॉर्ड
मीना जाति को लेकर मध्यप्रदेश में स्थिति ऐतिहासिक रूप से सामान्य नहीं रही है। मध्यप्रदेश विधानसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी के अनुसार, सिरोंज और लटेरी तहसीलों में मीना/मीणा जाति को एक समय ST वर्ग में माना गया था।
सितंबर 2020 के विधानसभा उत्तर में सरकार ने बताया था कि 2 अप्रैल 1997 की OBC सूची में मीना (रावत) देशवाली, मेवाती और मीणा को शामिल किया गया था, लेकिन विदिशा जिले की सिरोंज एवं लटेरी तहसील को इससे अलग रखा गया था, जबकि मीणा/मीना को सिरोंज तहसील में अनुसूचित जनजाति में घोषित किया गया था। इसी जवाब में सरकार ने यह भी बताया कि The Scheduled Castes and Scheduled Tribes Orders (Amendment) Act, 2002 के तहत मीना को ST सूची से विलोपित किया गया।
2026 में विधानसभा में दिए गए एक अन्य जवाब में भी सिरोंज में मीना जाति के पुराने ST प्रमाणपत्रों और उच्च स्तरीय छानबीन समिति की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। सरकार ने बताया कि ST प्रमाणपत्रों की जांच के लिए 1997 में राज्य उच्च स्तरीय छानबीन समिति गठित की गई थी।
इसलिए इस मामले को केवल यह कहकर नहीं समझा जा सकता कि “मीना जाति पूरे मध्यप्रदेश में ST थी।” सरकारी रिकॉर्ड में सिरोंज क्षेत्र की ऐतिहासिक स्थिति अलग दर्ज है और बाद में संवैधानिक सूची में बदलाव हुआ।
FIR के बाद ममता मीना का राजनीतिक पलटवार
रघुवीर सिंह मीना पर FIR के बाद ममता मीना ने वीडियो जारी कर कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार पर राजनीतिक दबाव बनाया जा रहा है और उन्हें डराने की कोशिश हो रही है।
ममता मीना ने कहा कि यदि उनके खिलाफ दो-चार और मामले दर्ज किए जाते हैं, तब भी वह पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने अपने बयान में रानी लक्ष्मीबाई का उदाहरण देते हुए संघर्ष जारी रखने की बात कही।
उन्होंने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र और आसपास के इलाकों में जाकर लोगों के बीच अपनी बात रखने की बात भी कही है।
2029 का जिक्र, गुना से ग्वालियर-चंबल तक ले जाने की बात
ममता मीना ने अपने बयान में सीधे 2029 के लोकसभा चुनाव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2029 दूर नहीं है और समय आने पर जनता जवाब देगी।
उनके बयान के बाद मामला केवल FIR और जाति प्रमाणपत्र की जांच तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि इसके राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, FIR की कार्रवाई और सिंधिया पर लगाए गए राजनीतिक दबाव के आरोपों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
रघुवीर सिंह मीना के खिलाफ FIR पुलिस की कानूनी जांच का हिस्सा है, जबकि सिंधिया पर दबाव बनाने के आरोप ममता मीना के राजनीतिक दावे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में सिंधिया की ओर से इन आरोपों पर कोई जवाब सामने नहीं आया है।
अब जांच से स्पष्ट होगी आरोपों की स्थिति
मामले में पुलिस अब जाति प्रमाणपत्र जारी होने की परिस्थितियों, संबंधित दस्तावेजों, MPPSC चयन प्रक्रिया और आरक्षण के लाभ से जुड़े रिकॉर्ड की जांच करेगी।
वहीं, जाति प्रमाणपत्र की वैधता और उससे जुड़े प्रशासनिक फैसलों का अंतिम प्रभाव कानूनी प्रक्रिया से तय होगा। फिलहाल FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों का अंतिम प्रमाण नहीं है।





