रिटायर्ड आईएएस बोले ऑटोबायोग्राफी लिखने वाले इडियट होते हैं : आईपीएस मैडम अब बनेंगी सब इंस्पेक्टर : लूप लाइन से मेन लाइन में लौटने की जुगाड़ में पीएस

रिटायर्ड आईएएस बोले ऑटोबायोग्राफी लिखने वाले इडियट होते हैं : आईपीएस मैडम अब बनेंगी सब इंस्पेक्टर : लूप लाइन से मेन लाइन में लौटने की जुगाड़ में पीएस
1 रिटायर्ड आईएएस बोले ऑटोबायोग्राफी लिखने वाले इडियट होते हैं
इन दिनों आईएएस अफसरों के एक व्हाट्सएप ग्रुप में बड़ा दिलचस्प घमासान छिड़ा हुआ है। मुद्दा बना है—ऑटोबायोग्राफी लिखने का। शुरुआत तब हुई जब एक रिटायर्ड सीनियर आईएएस अफसर ने ग्रुप में टिप्पणी कर दी कि “ऑटोबायोग्राफी लिखने वाले इडियट्स होते हैं, जबकि समझदार लोग अपने जीवन का कचरा बाहर नहीं आने देते। बस फिर क्या था… टिप्पणी आते ही ग्रुप में बहस का पारा चढ़ गया। एक के बाद एक रिटायर्ड अफसर मैदान में उतर आए और अपने-अपने तर्कों के साथ ऑटोबायोग्राफी के पक्ष और विपक्ष में लंबी-लंबी दलीलें देने लगे। किसी ने इसे अनुभव साझा करने का माध्यम बताया तो किसी ने इसे आत्मप्रचार का जरिया करार दिया। हालात तब दिलचस्प हो गए जब बहस थमने का नाम ही नहीं ले रही थी। आखिरकार एक वरिष्ठ एसीएस को बीच-बचाव के लिए सामने आना पड़ा। उन्होंने साफ शब्दों में संदेश लिखा कि “ऑटोबायोग्राफी पर काफी चर्चा हो चुकी है, अब इस विषय को यहीं समाप्त किया जाए। आगे इस मामले में आने वाले कमेंट्स डिलीट कर दिए जाएंगे। इसके बाद जाकर ग्रुप में छाई ‘साहित्यिक लड़ाई’ पर विराम लग पाया।
2 आईपीएस मैडम अब बनेंगी सब इंस्पेक्टर
सीधी भर्ती की एक तेज-तर्रार महिला आईपीएस अफसर इन दिनों खासा चर्चा में हैं। वजह उनकी कोई नई पोस्टिंग या एक्शन नहीं, बल्कि उनका रील लाइफ अवतार है। जी हां, मैडम जल्द ही एक क्राइम बेस्ड फिल्म में सब इंस्पेक्टर की भूमिका में नजर आने वाली हैं। चौंकिए मत… यह प्रमोशन रियल लाइफ में नहीं, बल्कि सिल्वर स्क्रीन पर मिलने जा रहा है। फिल्म में मैडम एक ईमानदार और सख्त पुलिस अफसर का किरदार निभा रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि उनके कैरेक्टर का नाम भी प्रदेश की लाइफ लाइन मानी जाने वाली एक मशहूर नदी के नाम पर रखा गया है और फिल्म का टाइटल भी उसी नदी पर आधारित बताया जा रहा है। फिल्म की कहानी सत्य घटनाओं से प्रेरित मानी जा रही है, जिसमें एक आदिवासी महिला अपनी बेटी के लिए पूरे सिस्टम से लड़ाई लड़ती नजर आएगी। फिल्म में मैडम के साथ बॉलीवुड के मंझे हुए कलाकार मुकेश तिवारी और रघुवीर यादव भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे।
3 लूप लाइन से मेन लाइन में लौटने की जुगाड़ में पीएस
लूप लाइन माने जाने वाले एक विभाग में पदस्थ एक पीएस साहब इन दिनों फिर से मेन लाइन में वापसी की जोरदार कोशिशों में जुटे हैं। कभी सत्ता और सिस्टम के बेहद करीबी माने जाने वाले साहब को उनकी कार्यशैली से नाराज होकर प्रदेश के मुखिया और बड़े साहब ने साइड पोस्टिंग दे दी थी। तब से साहब लगातार ऐसी जगह तलाश रहे हैं, जहां से फिर से ताकत और प्रभाव दोनों हासिल हो सकें। अब अफसरशाही के गलियारों में चर्चा है कि साहब ने हाल ही में एक कद्दावर मंत्री से खास मुलाकात की है। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात में साहब ने मंत्री जी के विभाग में पोस्टिंग की इच्छा जताई। साथ ही यह भरोसा भी दिलाया कि अगर मौका मिला तो वे पूरी तरह “मंत्रीजी की कार्यशैली” के हिसाब से काम करेंगे। सूत्रों की मानें तो मंत्री जी ने भी साहब को निराश नहीं किया और दिल्ली दरबार में बात कर “उचित जगह” दिलाने का आश्वासन दे दिया है।
4 रिलीव होने से पहले ‘सुपरसोनिक स्पीड’ में दौड़ीं फाइलें
हाल ही में एक बड़े जिले में पदस्थ रहे युवा आईपीएस साहब का तबादला लूप लाइन मानी जाने वाली पोस्टिंग पर कर दिया गया। लेकिन साहब की सबसे ज्यादा चर्चा उनके ट्रांसफर से नहीं, बल्कि रिलीव होने से पहले दिखाई गई “बिजली जैसी फुर्ती” को लेकर हो रही है। पुलिस मुख्यालय के गलियारों में चर्चा है कि साहब ने जाते-जाते फाइल निपटाने की ऐसी रफ्तार दिखाई कि सुपरसोनिक विमान भी पीछे छूट जाए। किसी की सजा माफ हो गई, किसी का तबादला आदेश निकल गया, तो कई अफसरों और कर्मचारियों के महीनों से अटके काम महज 24 घंटे में पूरे हो गए। अब इतने कम समय में इतनी मेहरबानी कैसे बरसी, इसके पीछे क्या “मैनेजमेंट” या क्या “डील” रही, यह तो साहब और संबंधित लोग ही बेहतर जानते होंगे। लेकिन चर्चा खूब है और अंदाजे उससे भी ज्यादा लगाए जा रहे हैं। वैसे साहब की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि उनके तबादले की खबर आते ही जिले के लोगों ने सोशल मीडिया पर कैसी प्रतिक्रियाएं दीं। पोस्ट और कमेंट्स देखकर साफ समझा जा सकता है कि आम जनता साहब की विदाई से कितनी खुश… या कितनी राहत महसूस कर रही है।
5 अफसर की ‘सीएम हेल्पलाइन’ वाली चाल से खफा एसीएस
एक एसीएस साहब इन दिनों अपने विभाग के अंतर्गत आने वाले एक ऑटोनॉमस संस्थान के मुखिया से खासे नाराज बताए जा रहे हैं। वजह बनी है उस अफसर की एक ऐसी हरकत, जिसने मंत्रालय से लेकर मंत्रीजी तक सबको हैरान कर दिया।
दरअसल, संस्थान के मुखिया लंबे समय से अपने ही स्टाफ से परेशान चल रहे थे। हालत यह थी कि जैसे ही साहब किसी कर्मचारी पर कार्रवाई करते, जवाब में संस्थान में हड़ताल शुरू हो जाती। लगातार बढ़ते विवाद से परेशान साहब ने आखिरकार स्टाफ से निपटने के लिए एक “नायाब तरीका” निकाल लिया। चर्चा है कि साहब ने कर्मचारियों की शिकायत सीधे सीएम हेल्पलाइन में दर्ज करा दी और सबसे दिलचस्प बात यह रही कि शिकायत भी खुद अपने ही नाम से कर दी। बस फिर क्या था… मामला ऊपर तक पहुंच गया। एसीएस साहब से लेकर मंत्रीजी तक का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वजह यह बताई जा रही है कि इतनी बड़ी कार्रवाई से पहले न तो विभागीय स्तर पर चर्चा की गई और न ही किसी वरिष्ठ को भरोसे में लिया गया।
6 आईपीएस अफसर की रिपोर्ट से बढ़ीं मंत्रीजी की मुश्किलें
एक मंत्रीजी इन दिनों अपने बयानों से ज्यादा एक आईपीएस अफसर की रिपोर्ट को लेकर चर्चा में हैं। मामला उस वक्त गरमा गया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टिप्पणी कर दी कि मंत्रीजी को “विवादित बयान देने की आदत” है।
दरअसल, कोर्ट ने मंत्रीजी के एक खास बयान की जांच के लिए एसआईटी गठित की थी। जांच का दायरा सिर्फ उसी बयान तक सीमित माना जा रहा था। लेकिन एसआईटी की कमान संभाल रहे आईजी स्तर के एक आईपीएस अफसर ने अपनी रिपोर्ट में मंत्रीजी के पुराने विवादित बयानों का भी विस्तार से जिक्र कर दिया। बस फिर क्या था… रिपोर्ट कोर्ट पहुंची तो पूरा रिकॉर्ड सामने आ गया। बताया जा रहा है कि इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से मंत्रीजी के खिलाफ कार्रवाई पर विचार करने को कहा है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि एक बयान की जांच शुरू हुई थी, लेकिन आईपीएस अफसर की “डिटेल्ड रिपोर्ट” ने मंत्रीजी के पुराने कई विवाद फिर से जिंदा कर दिए।
फिलहाल मंत्रीजी की मुश्किलें बढ़ी हुई हैं।
7 पेंट हाउस ने बढ़ाई रिटायर्ड आईएएस की टेंशन
लूप लाइन मानी जाने वाली पोस्टिंग से रिटायर एक सीनियर आईएएस साहब इन दिनों खासे तनाव में बताए जा रहे हैं। वजह कोई नई प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि उनका करोड़ों रुपये का ड्रीम पेंटहाउस बन गया है।
चर्चा है कि साहब ने जिस आलीशान पेंटहाउस में मोटी रकम निवेश की थी, अब वही कानूनी पचड़े में फंस गया है। शासन ने इस प्रोजेक्ट को तैयार करने वाले एक नामचीन बिल्डर को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके बाद से अफसरशाही के गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि इन पेंटहाउस पर कभी भी कार्रवाई की तलवार चल सकती है। मुश्किल यह भी है कि साहब का रिटायरमेंट भी अब हो चुका है। ऐसे में एक तरफ करियर की चिंता और दूसरी तरफ करोड़ों के निवेश पर मंडराता खतरा—दोनों ने साहब की बेचैनी बढ़ा दी है।
8 शिकायत के बाद बदला प्रमोटी आईएएस मैडम का अंदाज़
एक आयोग में पदस्थ प्रमोटी आईएएस मैडम इन दिनों अपने बदले-बदले अंदाज़ को लेकर चर्चा में हैं। जिन मैडम की कार्यशैली कभी “अपने हिसाब से काम करने” वाली मानी जाती थी, अब वही पूरी सक्रियता और अनुशासन के साथ आयोग के कामकाज में जुटी नजर आ रही हैं। चर्चा है कि यह बदलाव आयोग के अध्यक्ष द्वारा की गई एक हाई-लेवल शिकायत के बाद आया है। बताया जाता है कि पहले मैडम किसी की ज्यादा सुनना पसंद नहीं करती थीं। उन्हें जो ठीक लगता, वही करतीं। कभी भी अवकाश पर निकल जाना, सीनियर अफसरों से दूरी बनाए रखना और कई बार उनके निर्देशों को नजरअंदाज करना—यह सब उनकी कार्यशैली का हिस्सा माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर पूरी तरह बदली हुई दिखाई दे रही है। मैडम आयोग के लंबित कामों को तेजी से निपटा रही हैं, सीनियर सदस्यों से लगातार चर्चा कर रही हैं और उनके निर्देशों का पालन भी पूरी गंभीरता से कर रही हैं।
9 जिला पंचायत सीईओ से खफा पूरा स्टाफ
एक बड़े जिले के जिला पंचायत सीईओ साहब इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर खासे चर्चा में हैं। लेकिन यह चर्चा तारीफ की नहीं, बल्कि नाराजगी की बताई जा रही है। खबर है कि साहब के काम करने के तरीके से पूरा स्टाफ परेशान चल रहा है। अंदरखाने चर्चा है कि साहब फैसले लेते समय न नियम-कायदे ज्यादा देखते हैं और न ही प्रक्रिया की परवाह करते हैं। जिस पर नाराज हुए, उसका वेतन रोक दिया और जिस पर शक हुआ, उसे नोटिस थमा कर जांच बैठा दी। लगातार हो रही ऐसी कार्रवाइयों से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। मामला अब जिला कलेक्टर तक भी पहुंच चुका है। बताया जा रहा है कि स्टाफ ने सामूहिक रूप से कलेक्टर से शिकायत कर सीईओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं, कर्मचारियों ने साफ संकेत दे दिए हैं कि अगर साहब ने अपना रवैया नहीं बदला, तो उन्हें हटाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता भी अपनाया जा सकता है।
10 कोयले वाले जिले को मिला ‘सख्त’ कप्तान
कोयले के लिए मशहूर प्रदेश के एक अहम जिले को आखिरकार लंबे इंतजार के बाद तेज-तर्रार और ईमानदार छवि वाले आईपीएस अफसर की कप्तानी मिल गई है। अफसरशाही और पुलिस महकमे में इस पोस्टिंग की खूब चर्चा हो रही है।
बताया जा रहा है कि पिछले काफी समय से जिले की कानून-व्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही थी। सही नेतृत्व नहीं होने के कारण नीचे के पुलिसकर्मियों पर भी लगाम नहीं लग पा रही थी। आम जनता पुलिस की कार्यशैली से परेशान थी, जबकि अपराध का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा था। ऐसे माहौल में नए आईपीएस साहब की एंट्री को सिस्टम के लिए “सख्त डोज” माना जा रहा है। साहब जहां-जहां पदस्थ रहे हैं, वहां अपनी तेज कार्यशैली और ईमानदार छवि के कारण अलग पहचान बना चुके हैं। यही वजह है कि जिले में अब उम्मीद की जा रही है कि पुलिसिंग फिर से पटरी पर लौटेगी और बेलगाम होती व्यवस्थाओं पर लगाम लगेगी।
Abhishek Dubey

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