फोन नहीं उठाए जाने से परेशान आईएएस की दोस्ताना सलाह : सीनियर आईपीएस को मिल सकता है बड़ा तोहफा! : कमिश्नर मैडम ने चर्चित आईएएस को बताया “शिकारी”

1 फोन नहीं उठाए जाने से परेशान आईएएस की दोस्ताना सलाह
राज्य काडर के एक आईएएस इन दिनों थोड़े दुखी बताए जा रहे हैं। वजह न कोई ट्रांसफर है, न कोई फाइल अटकी है—मामला है फोन कॉल का। साहब इस समय देश के सबसे ताकतवर दफ्तर में डेप्युटेशन पर पदस्थ हैं, लेकिन अपने ही प्रदेश के अफसर उनके फोन नहीं उठा रहे। कहते हैं, लगातार अनसुना किए जाने से परेशान होकर साहब ने आईएएस अधिकारियों के युवा आरआर व्हाट्सएप ग्रुप में एक “दोस्ताना सलाह” जारी कर दी। संदेश में लिखा—“जब भी कोई कॉल करे, उसे जरूर रिसीव करें। खासकर वे युवा अफसर जो कलेक्टर की भूमिका में हैं।” साहब ने उदाहरण भी पेश किया—“मैंने सात अफसरों को कॉल किया। सिर्फ दो ने रिसीव किया और एक ने कॉल बैक किया।” ग्रुप में माहौल हल्का करने के लिए एक सीनियर अफसर ने चुटकी ली—“क्या आप इस पर कोई स्टडी कर रहे हैं?” इस पर सलाह देने वाले साहब का जवाब और भी दिलचस्प था—“मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ!”
2 सीनियर आईपीएस को मिल सकता है बड़ा तोहफा!
पावर कॉरिडोर में इन दिनों एक सीनियर आईपीएस साहब को लेकर खूब कानाफूसी है। चर्चा थी कि केंद्र में डेप्युटेशन पर तैनात अपनी साफ-सुथरी और ईमानदार छवि के लिए पहचाने जाने वाले साहब जल्द ही प्रदेश लौट सकते हैं। इतना ही नहीं, यह भी कहा जा रहा था कि प्रदेश सरकार उन्हें कोई बड़ा और प्रभावशाली पद सौंप सकती है। लेकिन अब इन अटकलों पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। वजह भी दमदार है। साहब का एडीजी रैंक पर केंद्र सरकार में इम्पैनलमेंट होने वाला है। प्रदेश सरकार से केन्द्र सरकार ने एनओसी मांगी थी जो पिछले दिनों भेज दी गई है। जैसे ही यह खबर बाहर आई, समीकरण बदल गए। अब गलियारों में नई चर्चा शुरू हो गई है कि साहब की किस्मत का सितारा दिल्ली में ही चमकने वाला है। सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है। यहां तक कि किसी महत्वपूर्ण यूनिट की कमान स्वतंत्र रूप से देने की भी संभावना जताई जा रही है। कुल मिलाकर, प्रदेश वापसी की अटकलें भले ही थम गई हों, लेकिन साहब के कद में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
3 कमिश्नर मैडम ने चर्चित आईएएस को बताया “शिकारी”
नगर निगम की दबंग कमिश्नर मैडम इन दिनों फिर सुर्खियों में हैं। वजह—उनका ताज़ा सोशल मीडिया पोस्ट। मैडम अपनी बेबाकी के लिए जानी जाती हैं, लेकिन इस बार उन्होंने सीधे निशाने पर लिया है तीन शादियों को लेकर चर्चित एक सीधी भर्ती वाले आईएएस साहब को। मैडम ने लंबा-चौड़ा लेख लिखते हुए साहब को ‘शिकारी’ तक बता डाला। उनका सवाल सीधा है—जब महिलाएं आज हर क्षेत्र में सशक्त हैं, बड़े ओहदों पर पहुंच रही हैं, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं, तो फिर आखिर ऐसी शख्सियतों के झांसे में क्यों आ जाती हैं? पोस्ट में उन्होंने भावनात्मक पहलू पर भी चोट की। लिखा कि हमने पढ़-लिखकर कमाना सीख लिया, ऊंचे पद संभालना सीख लिया, लेकिन भावनात्मक समझ आज भी जैसे सौ साल पीछे अटकी हुई है। हर महिला यही सोचती है कि “मैं सब ठीक कर दूंगी”, मगर यह कोई नहीं सोचता कि पहली महिला ने भी शायद यही सोचा होगा।
4 आईएएस पति को छोड़ने के बाद अब नेता जी से भी होगा मैडम का तलाक
शादी, तलाक और आरोपों की इस कहानी ने राजधानी के सियासी और अफसरशाही गलियारों में खूब हलचल मचा रखी है। बात एक बैंक कर्मी मैडम की है, जिन्होंने शादी के महज चार साल बाद अपने आईएएस पति से अलग होने का फैसला लिया था। साहब इन दिनों ‘लूप लाइन’ मानी जाने वाली एक संस्था में सीईओ के तौर पर पदस्थ हैं। उस वक्त यह अलगाव भी कम चर्चित नहीं था। आईएएस पति से अलग होने के बाद मैडम ने कांग्रेस के एक नेता से दूसरी शादी कर ली। इस रिश्ते को अब करीब 19 साल हो चुके हैं। लेकिन अब खबर है कि यह शादी भी टूटने की कगार पर पहुंच गई है। सूत्रों की मानें तो नेता जी ने मैडम को तलाक का नोटिस थमा दिया है। मामला यहीं तक सीमित नहीं है। मैडम ने नेता पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनसे दो करोड़ रुपये और एक कार दहेज में मांगी गई। आरोप है कि मांग पूरी न करने पर उनके साथ मारपीट की जाती रही। मैडम ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि हालात इतने बिगड़ गए कि एक दिन उन्हें घर से ही बाहर निकाल दिया गया।
5 देश के “मोस्ट पावरफुल” आईएएस की यात्रा का राज
पिछले दिनों दिल्ली से देश के “मोस्ट पावरफुल” आईएएस साहब प्रदेश की राजधानी में उतरे—और बस, मंत्रालय के गलियारों में अफवाहों की बरसात शुरू। इतना बड़ा नाम आए और कहानी न बने, ऐसा भला कैसे हो सकता है? पहली कहानी उड़ी—साहब अगले मुख्य सचिव की दौड़ में शामिल अफसरों की फाइलें लेने आए हैं। थोड़ी देर बाद नई स्क्रिप्ट तैयार—नहीं, नहीं… मामला कुछ जमीनों की खरीदी-बिक्री से जुड़ा है। फिर तीसरा संस्करण—शराब घोटाले की फाइल दिल्ली जा रही है, और उसे खुद साहब संभालने आए हैं! हर घंटे कहानी का प्लॉट बदल रहा था और हर दफ्तर में “पक्की खबर” का दावा किया जा रहा था। लेकिन असली राज कुछ और ही निकला। दरअसल, साहब अपने एक करीबी रिश्तेदार के विवाह समारोह में शामिल होने राजधानी आए थे। उनके साथ धर्मपत्नी भी थीं। निजी कार्यक्रम के बीच शिष्टाचारवश उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात जरूर की, पर कोई आधिकारिक फाइल, कोई गोपनीय बैठक या कोई विशेष मिशन—कुछ भी नहीं।
6 प्रमोटी आईपीएस मैडम ने बदला अंदाज़, सीनियर को दे रहीं पूरा सम्मान
पुलिस महकमे में इन दिनों दो मैडमों की जोड़ी चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ प्रमोटी आईपीएस मैडम, तो दूसरी ओर उनकी नई बॉस — सीधी भर्ती वाली सीनियर आईपीएस मैडम। दोनों के बीच पहले कभी खास बनती नहीं थी। यहां तक कि एक बार तो मामला तीखी नोंकझोंक तक पहुंच गया था। ऐसे में जैसे ही सीनियर मैडम की ताजपोशी हुई, गलियारों में कानाफूसी शुरू हो गई कि अब टकराव तय है। लेकिन साहब, कहानी ने यहां यू-टर्न ले लिया। सीनियर मैडम के ज्वॉइन करते ही जिस सियासी ड्रामे की उम्मीद लगाई जा रही थी, वह सीन कहीं नजर नहीं आया। उल्टा, दोनों के बीच हैरान कर देने वाली ‘केमिस्ट्री’ देखने को मिल रही है। बैठकों में तालमेल, बातचीत में मिठास और सार्वजनिक तौर पर पूरा सम्मान—सब कुछ एकदम सलीके से। अब अंदरखाने की खबर ये है कि प्रमोटी मैडम रिटायरमेंट के करीब हैं। ऐसे में वे किसी अनावश्यक विवाद में पड़कर अपनी पारी का आखिरी ओवर खराब नहीं करना चाहतीं। लिहाजा सीनियर को पूरा रिस्पेक्ट, पूरा सहयोग। वैसे भी जब जूनियर खुद झुककर सम्मान दे रहा हो तो सीनियर को और क्या चाहिए!
7 प्रमोटी आईएएस का नहीं छूट रहा है बंगले से मोह
राजधानी के पॉश इलाके का एक सरकारी बंगला इन दिनों अफसरशाही की हॉट प्रॉपर्टी बना हुआ है—कागज़ों में कई बार हाथ बदल चुका, लेकिन ज़मीन पर कब्जा अब भी एक प्रमोटी आईएएस साहब का ही है। साहब का तबादला धार्मिक नगरी में हुए करीब सालभर बीत गया। नई पोस्टिंग को लोग ‘लूप लाइन’ बताते हैं, मगर राजधानी वाला पता छोड़ने का मन साहब का अब तक नहीं बना। गृह विभाग की फाइलों से लेकर नोटशीट तक ने कई बार दस्तक दी—“कृपया बंगला खाली करें।” पर साहब हैं कि सुनते ही नहीं। सूत्र कहते हैं, बंगला इस बीच दो-तीन अफसरों को आवंटित भी हो चुका। उनमें से कुछ तो आकर चक्कर लगाकर लौट गए, कुछ का तबादला भी हो गया—पर ताला वही, तख्ती वही, और अंदर की सजावट भी जस की तस। अफसरशाही के गलियारों में अब चुटकी ली जा रही है—धार्मिक नगरी में भले ‘वनवास’ हो, पर राजधानी का ‘राजमहल’ नहीं छूट रहा।
8 दिल्ली की ओर बढ़ते डीआईजी साहब!
प्रदेश के एक युवा और सीधी भर्ती वाले आईपीएस अधिकारी इन दिनों खासे चर्चा में हैं। पावर कॉरिडोर में खबर गर्म है कि साहब जल्द ही केन्द्र की राह पकड़ने वाले हैं। अभी तो वे फील्ड में डीआईजी के रूप में तैनात हैं, लेकिन लगता है उनकी अगली पोस्टिंग का पता राजधानी दिल्ली लिख चुकी है। केन्द्र सरकार ने साहब की बाकायदा 360 डिग्री एंगल से पड़ताल करवाई है। फाइलों से लेकर फीडबैक तक, हर पहलू को खंगाला गया—और नतीजा रहा ‘ऑल क्लियर’। कहा जा रहा है कि साहब इस जांच में पूरी तरह फिट पाए गए हैं, जिसने उनके डेप्युटेशन का रास्ता लगभग साफ कर दिया है। चर्चा है कि साहब की तैनाती सीबीआई में हो सकती है। अगर ऐसा होता है तो यह उनके करियर का बड़ा मोड़ साबित होगा, क्योंकि सीबीआई में जिम्मेदारी मिलना अपने आप में भरोसे और क्षमता की मुहर माना जाता है। दिलचस्प बात यह भी है कि फील्ड में सख्त लेकिन संतुलित कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले साहब की कार्यप्रणाली ने ही उन्हें यह मौका दिलाया है।
9 युवा आईएएस का टेंडर गेम!
सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक युवा आईएएस की खूब चर्चा है। साहब अभी करियर की शुरुआती सीढ़यां ही चढ़ रहे हैं, लेकिन काम करने का अंदाज़ ऐसा कि पुराने खिलाड़ी भी दंग हैं। मामला एक बड़े टेंडर का है, जिसमें करोड़ों रुपये का खेल होने की फुसफुसाहट तेज़ हो गई है। बताया जाता है कि साहब इन दिनों प्रधानमंत्री की एक फ्लेगशिप योजना से जुड़े संस्थान में सीईओ की कुर्सी संभाले हुए हैं। योजना का नाम बड़ा, बजट उससे भी बड़ा… और उसी बजट के एक टेंडर ने राजधानी के अफसरशाही सर्किल में हलचल मचा दी है। चर्चा है कि टेंडर प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही ‘किसे काम मिलना है’ इसकी पटकथा लिखी जा चुकी थी। सूत्रों की मानें तो एक खास कंपनी से साहब की नज़दीकियां अचानक बढ़ीं और देखते ही देखते वही कंपनी रेस में आगे निकल गई। बाकी दावेदार सिर्फ औपचारिकता निभाते रह गए। दरों में फर्क, शर्तों में बदलाव और तकनीकी अड़चनें—सब कुछ इतना सधे तरीके से हुआ कि कागज़ों में सब कुछ नियमों के मुताबिक दिखे, लेकिन अंदरखाने कहानी कुछ और ही बयां कर रही है।
10 चर्चा में इंजीनियर इन चीफ का सरकारी बंगला
अफसरों की सबसे पॉश कॉलोनी में इन दिनों एक खास बंगले की खूब चर्चा है। यह किसी मंत्री या बड़े अफसर का नहीं, बल्कि एक इंजीनियर इन चीफ का आशियाना बताया जा रहा है। बाहर से देखने पर ही अंदाजा हो जाता है कि डिजाइन और साज-सज्जा पर कितनी बारीकी से काम हुआ है। ऊंची दीवारें, और भव्य एंट्री गेट—सब कुछ ऐसा कि राह चलते लोग ठिठक कर नजर डालें। इसमें स्वीमिंग पूल भी बनाया गया है। कॉलोनी में रहने वाले अफसरों के बीच कानाफूसी है कि जब बाहर का नजारा इतना शानदार है तो अंदर की भव्यता कैसी होगी, इसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। ड्रॉइंग रूम से लेकर लॉन तक हर कोना चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इसे “मिनी पैलेस” कह रहे हैं तो कुछ इसे “इंजीनियरिंग का कमाल” बताकर मुस्कुरा रहे हैं। मजेदार बात यह है कि आसपास बने कई वरिष्ठ अफसरों के बंगलों की तुलना अब इसी से की जा रही है। यहां तक कि पास में स्थित चीफ सेक्रेट्री का सरकारी आवास भी इसके आगे फीका पड़ता दिख रहा है—कम से कम चर्चा तो यही कहती है।





