युवा आईएएस की सिंगापुर यात्रा पर लगा ब्रेक : आईपीएस को डेढ़ करोड़ की डिफेंडर कार खरीदने की बधाई : सरकार से बेहद नाराज हैं प्रमुख सचिव

युवा आईएएस की सिंगापुर यात्रा पर लगा ब्रेक : आईपीएस को डेढ़ करोड़ की डिफेंडर कार खरीदने की बधाई : सरकार से बेहद नाराज हैं प्रमुख सचिव
1 युवा आईएएस की सिंगापुर यात्रा पर लगा ब्रेक
एक बड़े जिले की कलेक्टरी से हटाए जाने के बाद एक युवा आईएएस अफसर इन दिनों बेहद दुखी हैं। उन्हें एक मलाईदार विभाग में ऐसे पद पर पदस्थ किया गया है, जिसे आमतौर पर “लूप लाइन” माना जाता है। इसी बीच साहब को खबर मिली कि उनके विभाग का एक दल सिंगापुर दौरे पर जा रहा है, और उसमें दो युवा आईएएस अफसरों को भी शामिल किया गया है। जब साहब ने देखा कि लिस्ट में उनका भी नाम है, तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वे तो मानो सातवें आसमान पर पहुंच गए — शॉपिंग शुरू कर दी, पासपोर्ट झाड़-पोंछ लिया, और विदेश यात्रा की पूरी तैयारी कर ली। लेकिन तभी झटका लगा — ऊपर से खबर आई कि साहब का नाम अंतिम समय में सूची से हटा दिया गया है। अब सिंगापुर का सपना टूट गया है। जबकि साहब से जूनियर आईएएस अफसर इस दौरे पर जा रहे हैं। नतीजा यह कि साहब दोगुने डिप्रेशन में चले गए हैं एक, कलेक्टरी जाने का ग़म और दूसरा, सिंगापुर दौरे से नाम कटने का सदमा।
2 आईपीएस को डेढ़ करोड़ की डिफेंडर कार खरीदने की बधाई
सोशल मीडिया आजकल क्या-क्या करवा देता है! अब देखिए न प्रदेश के एक युवा आईपीएस अफसर इन दिनों सोशल मीडिया की करतूत से बुरी तरह परेशान हैं। वजह भी कम दिलचस्प नहीं है। साहब के नाम से बना एक फर्जी फेसबुक अकाउंट पिछले दिनों अचानक एक्टिव हो गया। अकाउंट से एक पोस्ट डाली गई जिसमें डेढ़ करोड़ की ब्लैक डिफेंडर कार की फोटो थी और कैप्शन लिखा था, “मेरी नई डिफेंडर कार!” बस फिर क्या था सोशल मीडिया पर बधाइयों की झड़ी लग गई! किसी ने लिखा “Congrats sir, dream car!” तो किसी ने कहा “साहब तो रॉयल लाइफ जी रहे हैं!”ये बधाइयां सीधे साहब के मोबाइल तक पहुंच गईं। अब बेचारे दिनभर सफाई देते फिर रहे हैं “भाई, न मैंने कार खरीदी है, न पोस्ट मेरी है — अकाउंट ही फेक है!” मजेदार बात ये है कि उस अकाउंट पर हजारों फॉलोअर्स हैं, जिससे वो पूरी तरह असली जैसा लगता है।
3 सरकार से बेहद नाराज हैं प्रमुख सचिव
राष्ट्रीय स्तर के एक विवाद में सीधे सुपरस्टार मोड में रहे प्रमुख सचिव स्तर के अफसर अब लूप लाइन में हैं और सरकार से बेहद नाराज़।असाहब का कहना है — “हम तो गुड फेथ में काम कर रहे थे, लेकिन सरकार ने हमारी बात सुने बिना ही दूसरा पक्ष मान लिया और निपटा दिया।” बताते हैं, साहब अब कुछ दिन और सबर की घड़ी देखेंगे। अगर सरकार ने उन्हें ठीक-ठाक काम नहीं दिया, तो साहब दिल्ली डेप्युटेशन का रास्ता पकड़ लेंगे। वैसे साहब पहले भी दिल्ली में डेप्युटेशन कर चुके हैं और अनुभव ये बताते हैं कि “अगर काम की कद्र नहीं है, तो वहां रहकर क्या हासिल?”
4 नगर सरकार में नई कमिश्नर मैडम का ‘खौफनामा’!
हाल ही में एक बड़े शहर में नगर सरकार में कमिश्नर के तौर पर पदभार संभालने वाली युवा आईएएस मैडम का खौफ कुछ ही दिनों में वहां पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच छा गया है। मैडम स्वभाव से जितनी हंसमुख, काम के मामले में उतनी ही कड़क मानी जा रही हैं। पदभार संभालते ही उन्होंने साफ संकेत दे दिया कि उनके कार्यकाल में काम तो हर हाल में करना होगा। मैडम के सख्त तेवरों का पहला असर पड़ा फाइनेंस अफसर पर। यह वही अफसर हैं जो अब तक कई दिग्गज अधिकारियों को कुछ नहीं समझते थे। लेकिन अब मैडम के राज में इन्हें कई बार रात के चार-चार बजे तक जागकर फाइलें निपटानी पड़ रही हैं। इसी तरह, राज्य प्रशासनिक सेवा से आने वाले एक एडिशनल कमिश्नर को भी बैठक में बिना तैयारी पहुंचे देख मैडम ने फटकार लगा दी। उन्होंने साफ कह दिया —“मेरी बैठक में आना है, तो पूरी तैयारी के साथ आओ।” अब हालात ये हैं कि नगर सरकार के गलियारों में मैडम के सख्त रवैये की चर्चा जोरों पर है। कई अधिकारी तो “यहां से ट्रांसफर की आस” में अपना बोरिया-बिस्तर समेटने की सोचने लगे हैं।
5 प्रमोटी आईपीएस को लेकर मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय में खींचतान
प्रदेश की अफसरशाही में इन दिनों एक प्रमोटी आईपीएस को लेकर मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के बीच रस्साकशी खूब चल रही है। मामला ऐसा है कि पिछले डेढ़ साल से यह फाइल फुटबॉल बनी हुई है — कभी मंत्रालय के पाले में, तो कभी पुलिस मुख्यालय के। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय के सीनियर अफसर इस प्रमोटी आईपीएस के खिलाफ कार्रवाई के मूड में हैं और चार्जशीट भेजने का दबाव बनाए हुए हैं। लेकिन पुलिस मुख्यालय का कहना है कि जिस मामले में कार्रवाई की बात हो रही है, उसमें उस आईपीएस की कोई भूमिका ही नहीं थी! मंत्रालय अब तक तीन बार प्रस्ताव भेजने के निर्देश दे चुका है, मगर मुख्यालय हर बार वही पुराना जवाब देता है — “साहब बेगुनाह हैं।” अब सवाल यह है कि मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय के बीच चल रही यह तनातनी आखिर कहां जाकर रुकेगी? फिलहाल तो दोनों ही अपनी-अपनी “फाइल” पर डटे हुए हैं — और बेचारे प्रमोटी साहब, वही बीच में पिस रहे हैं!
6 आबकारी अफसर की मुसीबतें बढ़ने वाली हैं
सौ करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति वाले आबकारी अधिकारी की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रहीं। भ्रष्टाचार की जांच करने वाली एजेंसी ने कुछ दिन पहले इनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद साहब को सस्पेंड कर दिया गया था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती — ईडी ने भी बीच में कूदते हुए मामला दर्ज कर अपनी जांच शुरू कर दी है। और अब सुनने में आया है कि एक और जांच एजेंसी इस “कहानी” में नया मोड़ जोड़ने वाली है! दरअसल, हाल ही में एक बिल्डर के खिलाफ दर्ज मामले की जांच के दौरान एजेंसी को पता चला कि साहब ने भी उस बिल्डर के प्रोजेक्ट में भारी निवेश किया था। एजेंसी को इस निवेश के पुख्ता सबूत भी मिल गए हैं। अब तैयारियां चल रही हैं — जल्द ही साहब को पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा, और उसके बाद एक नया मामला दर्ज होने के आसार हैं। लगता है इस बार “आबकारी” नहीं, “आफत की बोतल” खुलने वाली है!
7 बैठकों के शौकीन साहब का चार्ज घटा!
पिछले दिनों एक सीनियर आईपीएस साहब की कई शाखाएं सरकार ने उनसे वापस ले लीं। वजह भी कम दिलचस्प नहीं है—साहब के खिलाफ शिकायतें आ रही थीं कि वे शिकायतों की जांच के नाम पर दिनभर बैठकों का मैराथन करवाते रहते हैं। अफसरों को तो अब उनसे ज़्यादा डर “मीटिंग कॉल” से लगने लगा था।सरकार ने आखिरकार कर दी कार्रवाई—अब साहब के पास सिर्फ एक ही शाखा रह गई है। दो और शाखाएं फिलहाल दूसरे अफसरों को सौंप दी गई हैं। माना जा रहा है कि सरकार ने यह कदम “मीटिंग से मुक्ति” अभियान के तहत उठाया है।
8 एमडी साहब के प्रस्ताव को लगा झटका
एक निगम में प्रमोटी आईएएस एमडी पद पर तैनात हैं, और अब उनके सीनियर अफसर ने उन्हें बड़ा झटका दे दिया है। साहब अपने मार्केटिंग डिवीजन में संविदा के आधार पर कर्मचारियों की भर्ती का प्रस्ताव लेकर गए थे। मज़ेदार बात यह कि डिवीजन मंत्री जी ने तो एक साल पहले ही बंद कर दिया था। ऐसे में प्रस्ताव का खारिज होना तय था। सीनियर अफसर ने सिर्फ प्रस्ताव खारिज नहीं किया, बल्कि साहब को यह भी अहसास करा दिया कि भविष्य में कोई प्रस्ताव लेकर जाएं तो सोच-समझकर और अच्छे पढ़कर ही जाएं। अब निगम में चर्चा ये है कि एमडी साहब मुंह लटकाए अपने कार्यालय लौट गए हैं और अफसरों में हंसी-खुशी का माहौल बन गया है।
9 आईजी साहब का सपना हुआ चकनाचूर
पिछले दिनों आईपीएस अफसरों की एक छोटी सी तबादला सूची सामने आई। मगर, यह सूची क्यों आई, अभी तक किसी को समझ नहीं आया। वजह? इसमें केवल “लूप लाइन” वाले विभाग शामिल थे, और अफसरों को आपस में बांट दिया गया – जैसे स्कूल में बच्चों को टीमों में बांटा जाता है। सबसे ज्यादा दुखी इस सूची के बाद आईजी रैंक के एक साहब हैं। यही वह अफसर हैं जिन्होंने कोयले वाले जोन में आईजी बनने के लिए बड़े जुगाड़ लगाए बैठे थे। लेकिन किस्मत ने उनका मज़ाक उड़ाया – साहब को वही शाखा सौंप दी गई जहां वे पहले से ही पदस्थ थे। हां, वही साहब जिन्हें अपने एसपी से विवाद के बाद हटाया गया था। और कोयले वाला जोन? वह अभी भी खाली है। यहां के आईजी साहब पिछले महीने रिटायर हो चुके हैं। लूप लाइन की दुनिया में अफसरों के सपनों और पोस्टिंग की यह खेल-कूद कभी कम नहीं होती।
10 बड़े साहब की “रेयर” तारीफ! एसीएस के काम पर फिदा हुए बॉस
प्रदेश के सबसे बड़े साहब आय-व्यय का हिसाब किताब देखने वाले साहब की वर्किंग से बेहद खुश हैं। आम तौर पर बड़े साहब बहुत ज्यादा किसी की तारीफ नहीं करते हैं। लेकिन पिछले दिनों हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में बड़े साहब ने एसीएस के काम के खूब कसीदे गढ़े। बैठक में मौजूद अफसरों को यहां तक नसीहत दे डाली कि काम कैसे किया जाता है यह एसीएस से सीखें। बड़े साहब का कहना था कि यदि हर अफसर ईमानदारी से इन एसीएस की तरह काम करने लगे तो प्रदेश को तरक्की करने से कोई नहीं रोक सकता है।
Abhishek Dubey

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A journalist with more than 15 years of experience in investigative reporting

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