Shahdol News: स्कूल में लापरवाही पर प्रधानाध्यापक सस्पेंड, 9 महीने से गैरहाजिर आरक्षक भी निलंबित

शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सरकारी व्यवस्था में लापरवाही और अनुशासनहीनता के मामलों में प्रशासन ने कार्रवाई की है। एक मामले में स्कूल में छात्रों की कम उपस्थिति और शैक्षणिक गुणवत्ता कमजोर पाए जाने पर कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया। वहीं पुलिस विभाग में करीब नौ महीने से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहे आरक्षक पर एसपी डॉ. संजय अग्रवाल ने निलंबन की कार्रवाई की है।
दोनों मामलों में संबंधित अधिकारियों के आदेश के आधार पर कार्रवाई की गई है।
स्कूल में कम मिली छात्रों की उपस्थिति, प्रधानाध्यापक निलंबित
जनपद पंचायत सोहागपुर के शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय पटासी के प्रधानाध्यापक एवं माध्यमिक शिक्षक सौरभ कुमार गुप्ता के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
निलंबन आदेश के मुताबिक मुख्यमंत्री जन विश्वास शिविर के दौरान ग्रामवासियों और जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की थी कि शिक्षक विद्यालयीन समय पर नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंचते और स्कूल में शिक्षा का स्तर भी अपेक्षित नहीं है।
शिकायत मिलने के बाद कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने स्वयं विद्यालय का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान स्कूल में छात्रों की उपस्थिति कम पाई गई। इसके साथ ही शैक्षणिक गुणवत्ता भी अत्यंत न्यून स्तर की मिली।
कलेक्टर के निरीक्षण के बाद कार्रवाई
निलंबन आदेश में कहा गया है कि प्रधानाध्यापक द्वारा विद्यालय के संचालन और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के लिए आवश्यक प्रयास नहीं किए जा रहे थे।
निरीक्षण के दौरान सामने आई स्थिति और शिकायतों के आधार पर कलेक्टर ने सौरभ कुमार गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, गोहपारू निर्धारित किया गया है।
करीब 9 महीने से ड्यूटी से गैरहाजिर था आरक्षक
दूसरी कार्रवाई पुलिस विभाग में हुई है। आरक्षक क्रमांक 247 नीलेश पटारिया को एसपी डॉ. संजय अग्रवाल ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
एसपी के आदेश के मुताबिक आरक्षक 19 दिसंबर 2025 से लगातार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित चल रहा था। वह 18 सितंबर को पुलिस लाइन शहडोल में उपस्थित हुआ, लेकिन इस दौरान उसकी वर्दी और वेशभूषा भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई।
पुलिस विभाग के आदेश में इसे भी अनुशासन संबंधी गंभीर लापरवाही के रूप में दर्ज किया गया है।
प्रशिक्षण के लिए भेजने के आदेश का भी पालन नहीं किया
आरक्षक नीलेश पटारिया को इससे पहले बुनियादी प्रशिक्षण के लिए पुलिस प्रशिक्षण शाला तिगरा, जिला ग्वालियर भेजने के निर्देश दिए गए थे। आदेश के अनुसार वह प्रशिक्षण में भी उपस्थित नहीं हुआ।
लगातार अनधिकृत अनुपस्थिति और प्रशिक्षण में उपस्थित नहीं होने के मामले को पुलिस रेगुलेशन के प्रावधानों के तहत अनुशासनहीनता माना गया। इसके बाद एसपी ने निलंबन की कार्रवाई की।
स्कूल से पुलिस विभाग तक सख्ती का संदेश
शहडोल में सामने आए इन दोनों मामलों में कार्रवाई अलग-अलग विभागों में हुई है, लेकिन दोनों का आधार सरकारी जिम्मेदारी के निर्वहन में सामने आई लापरवाही और अनुशासन से जुड़ा है।
एक तरफ स्कूल निरीक्षण में कम छात्र उपस्थिति और कमजोर शैक्षणिक गुणवत्ता मिलने के बाद प्रधानाध्यापक पर कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर लंबे समय तक बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहने और प्रशिक्षण में शामिल नहीं होने वाले आरक्षक को निलंबित किया गया।
इन कार्रवाइयों से सरकारी स्कूल और पुलिस विभाग में कर्मचारियों-अधिकारियों की जिम्मेदारी तथा विभागीय अनुशासन को लेकर प्रशासन की सख्ती सामने आती है।





