त्विषा शर्मा केस: पूर्व जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ दहेज एक्ट की धारा हटी, CBI ने हाईकोर्ट में दी जानकारी

भोपाल। मॉडल और बहू त्विषा शर्मा की मौत के मामले में जेल में निरुद्ध भोपाल की पूर्व जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर बुधवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कोर्ट को बताया कि दहेज की मांग से संबंधित पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण मामले में दहेज एक्ट की धाराओं को विलोपित कर दिया गया है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जमानत याचिका में संशोधन करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को निर्धारित की है।
CBI ने लिखित आपत्ति में दी जानकारी
गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान CBI ने पहले इसका विरोध किया था। एकलपीठ ने जांच एजेंसी को लिखित आपत्ति पेश करने के निर्देश दिए थे। बुधवार को CBI की ओर से लिखित आपत्ति पेश की गई, जिसमें बताया गया कि दहेज की मांग किए जाने के संबंध में साक्ष्य नहीं मिलने के कारण प्रकरण में दहेज एक्ट की धाराओं को हटा दिया गया है।
इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश जारी किए और मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 अक्टूबर की तारीख तय की।
12 मई को हुई थी त्विषा शर्मा की मौत
त्विषा शर्मा ने 12 मई को फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद पुलिस ने गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ के खिलाफ दहेज हत्या और दहेज एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था।
पूर्व न्यायाधीश को भोपाल जिला एवं सत्र न्यायालय से 15 मई को अग्रिम जमानत मिली थी। इस अग्रिम जमानत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने 27 मई को गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत निरस्त कर दी थी।
AIIMS दिल्ली की टीम ने किया दोबारा पोस्टमार्टम
त्विषा शर्मा के शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग को लेकर भी हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने दिल्ली स्थित एम्स की टीम से दोबारा पोस्टमार्टम कराने का आदेश दिया था।
बाद में राज्य सरकार ने मामले की जांच CBI को सौंप दी थी। जिला न्यायालय से जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरिबाला सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की।
अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को
अब हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। CBI की ओर से दहेज की मांग से जुड़े साक्ष्य नहीं मिलने और संबंधित धाराएं विलोपित किए जाने की जानकारी कोर्ट के समक्ष रखी गई है। मामले में आगे की स्थिति अगली सुनवाई में स्पष्ट होगी।





