Vidisha News: स्कूल प्राचार्य ने मासूम बच्ची को उठाकर पटका, हत्या की धमकी देने का आरोप, रिश्वत का वीडियो डिलीट कराने को लेकर विवाद

विदिशा। मध्यप्रदेश के विदिशा जिले में एक सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर मासूम बच्ची के साथ मारपीट करने और उसे जान से मारने की धमकी देने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि प्राचार्य रिश्वत मांगने से संबंधित एक वीडियो डिलीट कराने के लिए गांव के युवक पर दबाव बना रहा था। युवक के इनकार करने पर प्राचार्य ने स्कूल परिसर में खेल रही मासूम बच्ची को उठाकर जमीन पर पटक दिया। इतना ही नहीं, बच्ची की हत्या कर युवक को झूठे मामले में फंसाने की धमकी देने का भी आरोप है। मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने जांच टीम गठित कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
स्कूल परिसर में मासूम को उठाकर पटकने का आरोप
मामला विदिशा जिले के हैदरगढ़ क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय धामनोद का है।
यहां संकुल प्राचार्य के पद पर पदस्थ कमल सिंह मीणा पर एक मासूम बच्ची के साथ हिंसक व्यवहार करने का आरोप लगा है।
सामने आए वीडियो में प्राचार्य पर बच्ची को उठाकर फेंकने और धमकी देने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, घटना के दौरान बच्ची स्कूल परिसर में खेल रही थी। आरोप है कि प्राचार्य ने अचानक उसे उठाकर जमीन पर पटक दिया।
बच्ची के रोने और दर्द से कराहने पर आसपास मौजूद ग्रामीणों ने उसे संभाला।
घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्राचार्य के व्यवहार और स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रिश्वत मांगने का वीडियो डिलीट कराने को लेकर हुआ विवाद
गांव के युवक खुमान सिंह ने प्राचार्य कमल सिंह मीणा पर रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है।
खुमान सिंह के अनुसार, विद्यालय में कक्षा 12वीं की एक छात्रा को प्रथम स्थान प्राप्त करने पर स्कूटी और लैपटॉप का लाभ मिलना था।
आरोप है कि योजना का लाभ जल्द दिलाने के बदले में प्राचार्य ने रिश्वत की मांग की थी।
युवक का दावा है कि उसने रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत का वीडियो बना लिया था।
इसके बाद प्राचार्य उस पर वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाने लगे।
खुमान सिंह का आरोप है कि जब उसने वीडियो हटाने से इनकार किया, तो प्राचार्य ने गुस्से में स्कूल परिसर में खेल रही बच्ची को उठाकर पटक दिया।
हालांकि रिश्वत मांगने के आरोप की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बच्ची की हत्या कर युवक को फंसाने की धमकी देने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप प्राचार्य की ओर से दी गई कथित धमकी को लेकर है।
खुमान सिंह का दावा है कि बच्ची को जमीन पर पटकने के बाद प्राचार्य ने उसे जान से मारने की धमकी दी।
युवक के अनुसार, प्राचार्य ने बच्ची की हत्या करके उसे झूठे हत्या के मामले में फंसाने की बात भी कही।
इस घटना के बाद युवक डर गया और कुछ दिनों तक मामले की शिकायत सामने नहीं ला सका।
बाद में उसने हिम्मत जुटाकर मीडिया को घटना की जानकारी दी और प्राचार्य के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इन आरोपों की सत्यता और घटना के पूरे घटनाक्रम की जांच शिक्षा विभाग द्वारा की जानी है।
प्राचार्य के दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर भी उठाए सवाल
खुमान सिंह ने प्राचार्य कमल सिंह मीणा की नियुक्ति और दिव्यांगता प्रमाणपत्र को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
उसका आरोप है कि प्राचार्य ने फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र के आधार पर पदस्थापना का लाभ लिया है।
युवक ने प्राचार्य के व्यवहार को लेकर भी चिंता जताते हुए स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
हालांकि प्राचार्य के दिव्यांगता प्रमाणपत्र के फर्जी होने या उनकी मानसिक स्वास्थ्य संबंधी स्थिति की कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
इन बिंदुओं पर संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जिला शिक्षा अधिकारी ने गठित की जांच टीम
घटना का वीडियो और शिकायत सामने आने के बाद विदिशा के जिला शिक्षा अधिकारी एनके अहिरवार ने मामले को गंभीरता से लिया है।
उन्होंने प्राचार्य पर लगे आरोपों की जांच के लिए टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी के अनुसार, पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने प्राचार्य की दिव्यांगता श्रेणी और संबंधित प्रमाणपत्र की भी जांच कराने की बात कही है।
यदि जांच में प्रमाणपत्र या अन्य मामलों में अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
स्कूल में बच्चों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
सरकारी स्कूल के प्राचार्य पर मासूम बच्ची के साथ मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोपों ने विद्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक ओर ग्रामीण युवक ने रिश्वत मांगने और वीडियो डिलीट कराने के लिए दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचार्य के व्यवहार और दिव्यांगता प्रमाणपत्र की जांच की मांग भी उठी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में प्राचार्य कमल सिंह मीणा का पक्ष सामने नहीं आया है। शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति और संभावित कार्रवाई स्पष्ट हो सकेगी।





