Bhopal Land Auction Case: 5.5 एकड़ जमीन 55 हजार में नीलाम करने के मामले में अधिकारियों समेत 4 दोषियों को 3 साल की सजा

भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में करीब 20 साल पुराने जमीन नीलामी मामले में विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। भोपाल जिला सहकारी एवं ग्रामीण विकास बैंक की कृषि भूमि की नीलामी में पद का दुरुपयोग और आपराधिक षड्यंत्र करने के मामले में अदालत ने चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
मामला एक किसान की करीब 5.5 एकड़ कृषि भूमि को महज 55 हजार रुपए में नीलाम किए जाने से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2006-07 में नीलामी प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया और जमीन को निर्धारित मूल्य की तुलना में काफी कम राशि में नीलाम कराया गया।
विशेष लोक अभियोजक डॉ. राम कुमार खत्री के मुताबिक, विशेष न्यायालय के न्यायाधीश मनोज कुमार सिंह ने मामले में आरोपियों को दोषी माना। अदालत ने धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धारा 420 सहपठित 120-बी के तहत दोषी आरोपियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।
वहीं, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(डी) सहपठित 13(2) के तहत दोषी पाए गए अधिकारियों को भी तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया गया।
55 हजार रुपए में नीलाम हुई थी 5.5 एकड़ जमीन
अभियोजन के अनुसार, ग्राम सिकंदराबाद, तहसील हुजूर निवासी किसान काशीराम पिता छोटेराम ने अपनी कृषि भूमि को बैंक के पास बंधक रखकर ऋण लिया था।
मामले में आरोप था कि ऋण संबंधी कार्रवाई के दौरान बैंक अधिकारियों ने निर्धारित नीलामी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। वर्ष 2006-07 में किसान की करीब 5.5 एकड़ जमीन को सिर्फ 55 हजार रुपए में नीलाम कर दिया गया।
अभियोजन ने अदालत के सामने तर्क रखा कि जमीन का बाजार मूल्य और कलेक्टर द्वारा निर्धारित मूल्य 55 हजार रुपए से काफी अधिक था। इसके बावजूद नीलामी प्रक्रिया में नियमों को दरकिनार करते हुए जमीन को कम कीमत पर नीलाम कराया गया।
नीलामी की नोटशीट में भी हेरफेर का आरोप
मामले की जांच में नीलामी से संबंधित दस्तावेज और नोटशीट भी जांच के दायरे में आए। अभियोजन के मुताबिक, नीलामी प्रक्रिया से संबंधित नोटशीट और अन्य दस्तावेज तैयार कर उन्हें संयुक्त पंजीयक, सहकारी संस्थाएं, भोपाल के समक्ष पुष्टि के लिए भेजा गया था।
इसके बाद नीलामी की पुष्टि का आदेश जारी किया गया।
अभियोजन का आरोप था कि आरोपियों ने आपस में योजना बनाकर जमीनों की नीलामी प्रक्रिया को प्रभावित किया। मामले में करीब 23 भूमि को एक ही खरीदार संजीव जॉन के जरिए खरीदवाए जाने का भी आरोप लगाया गया।
लोकायुक्त पुलिस ने जांच के बाद दर्ज किया था मामला
मामले की लिखित शिकायत मिलने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने इसकी जांच की। जांच के दौरान नीलामी प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की जांच की गई।
विवेचना पूरी होने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने न्यायालय में अभियोग पत्र पेश किया। इसके बाद मामले की सुनवाई विशेष न्यायालय में हुई।
साक्ष्यों और दस्तावेजों के आधार पर सुनाया फैसला
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने न्यायालय के सामने दस्तावेजी साक्ष्य, अन्य साक्ष्य और लिखित तर्क प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन के तर्कों पर विचार करने के बाद आरोपियों को संबंधित धाराओं में दोषी ठहराया।
इसके बाद अदालत ने दोषियों को तीन-तीन साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।
शासन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी एवं सहायक निदेशक अभियोजन डॉ. राम कुमार खत्री तथा विशेष लोक अभियोजक श्रीमती हेमलता कुशवाहा ने मामले में पैरवी की।
20 साल पुराने मामले में आया फैसला
करीब दो दशक पुराने इस मामले में अदालत का फैसला ऐसे समय आया है जब जमीन की नीलामी से जुड़े दस्तावेजों और प्रक्रिया को लेकर लंबे समय से कानूनी कार्रवाई चल रही थी। अदालत के फैसले में संबंधित आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई है।





