भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप) जारी: 45 लाख आबादी के लिए बनेगा नया मास्टर प्लान, ग्रीन एरिया बढ़कर 27% होगा

भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप) जारी: 45 लाख आबादी के लिए बनेगा नया मास्टर प्लान, ग्रीन क्षेत्र बढ़कर 27% होगा

भोपाल विकास योजना 2047 (प्रारूप) जारी: 45 लाख आबादी के लिए बनेगा नया मास्टर प्लान, ग्रीन एरिया बढ़कर 27% होगा
भोपाल। राजधानी भोपाल के अगले 25 वर्षों के विकास की तस्वीर साफ हो गई है। भोपाल विकास प्राधिकरण ने भोपाल विकास योजना 2047 का प्रारूप जारी कर दिया है।
गौरतलब है कि भोपाल विकास योजना 1991 वर्ष 1975 में और विकास योजना 2005 वर्ष 1995 में प्रकाशित हुई थी, जिसका निवेश क्षेत्र 601.06 वर्ग किलोमीटर और 146 गांव थे। नई योजना 1016.90 वर्ग किलोमीटर निवेश क्षेत्र के लिए 254 गांवों को शामिल कर 45 लाख की आंकलित जनसंख्या हेतु तैयार की गई है। इसमें विकास योग्य प्रस्तावित क्षेत्रफल 61017.02 हेक्टेयर निर्धारित किया गया है।
भोपाल प्राकृतिक सुंदरता, झीलों और पहाड़ों की नगरी है। यहां रामसर साइट के रूप में चिन्हित भोजताल (बड़ी झील), राष्ट्रीय उद्यान और बाघ भ्रमण क्षेत्र भी स्थित हैं।
इस योजना को चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित किया गया है - प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण, आधुनिक दृष्टिकोण एवं नागरिक हितैषी नियोजन, सुधारोन्मुख एवं परिवर्तनकारी नियोजन और आत्मनिर्भर एवं आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने वाला विकास।
योजना की प्रमुख 19 विशेषताएं इस प्रकार हैं:
1. पर्यावरण संवेदनशील नियोजन: भोजताल एवं उसके जलग्रहण क्षेत्र के संरक्षण को आधारभूत रखते हुए योजना तैयार की गई है। पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों, बाघ भ्रमण क्षेत्र के संरक्षण के भी प्रावधान किए गए हैं।
2. आर्थिक विकास: पर्यावरणीय संरक्षण सुनिश्चित करते हुए शहर के आर्थिक विकास का आधार तैयार किया जाएगा। इसके लिए लगभग 3000 हेक्टेयर भूमि ग्रोथ कॉरिडोर के अंतर्गत प्रस्तावित है।
3. मेट्रोपोलिटन समन्वय: योजना के प्रस्ताव इस प्रकार रखे गए हैं कि भोपाल मेट्रोपोलिटन क्षेत्र के साथ इसका सामंजस्य हो सके।
4. 51 KM ग्रोथ कॉरिडोर: निवेश के माहौल के लिए 51 किलोमीटर लंबे ग्रोथ कॉरिडोर की परिकल्पना की गई है। यह EKAI सिटी, एयरपोर्ट, प्रस्तावित CMHU, लॉजिस्टिक भंडारण एवं थोक परिक्षेत्र के साथ विभिन्न उपनगरों को जोड़ेगा। इस कॉरिडोर में BRTS कॉरिडोर प्रस्तावित है, जिसका भविष्य में MRTS में उन्नयन किया जा सकेगा। इसमें होटल, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवा, IT सेक्टर, AI एवं डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, थोक व्यापार, हाइपर मार्केट, मॉल-मल्टीप्लेक्स, कॉर्पोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब, हाउसिंग जैसे रोजगारमुखी विकास होंगे। विदिशा मार्ग, रायसेन मार्ग, नर्मदापुरम मार्ग एवं इंदौर मार्ग को ग्रोथ कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा।
5. TOD नीति: राज्य की TOD नीति के अनुरूप मार्ग की चौड़ाई के आधार पर आवासीय उपयोग के तहत मिक्स लैंड यूज प्रस्तावित है, जिससे कार्यस्थल एवं आवास (Work-Home) में बेहतर सामंजस्य हो सके।
6. FAR का निर्धारण: मार्ग की चौड़ाई के आधार पर FAR निर्धारित किया गया है। अधिक चौड़े मार्गों पर स्थित भूमियों को FAR एवं भवन की ऊंचाई की सीमा से मुक्त रखा गया है।
7. मापदंडों का सरलीकरण: विकास मापदंडों में भूतल कवरेज को हटाया गया है, जिससे नागरिकों एवं विकासकर्ताओं को लाभ होगा। MOS का पुनर्निर्धारण और मापदंडों का सरलीकरण किया गया है।
8. हरित क्षेत्र में वृद्धि: 2005 में हरित क्षेत्र लगभग 16% था, जिसे बढ़ाकर 2047 में लगभग 27% किया गया है। भानपुर खंती के पुनर्विकास हेतु गोल्फ कोर्स प्रस्तावित है। कॉलोनी स्तर पर खुला क्षेत्र 10% से बढ़ाकर 12% किया गया है।
9. स्थानीय निकाय की आय में वृद्धि: प्रीमियम FAR, प्रशमन आदि के माध्यम से स्थानीय निकाय की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
10. पुनर्विकास को प्रोत्साहन: भूखंडों का संविलयन, बेस FAR में छूट जैसे प्रावधान रखे गए हैं। 70% रहवासियों की सहमति पर RWA आवासीय अपार्टमेंट का पुनर्विकास कर सकेगी।
11. अफोर्डेबल हाउसिंग: शहर में अधिकाधिक अफोर्डेबल हाउसिंग निर्मित हो सके, इसके लिए ऐसी परियोजनाओं को FAR क्रय करने की बाध्यता से मुक्त रखा गया है। रेंटल हाउसिंग को भी प्रोत्साहन दिया गया है।
12. ग्रीन TDR: आमोद-प्रमोद क्षेत्र में आने वाले भूमि स्वामियों की क्षतिपूर्ति हेतु ग्रीन TDR और हेरिटेज TDR के प्रावधान रखे गए हैं।
13. डिजिटल ट्विन सिटी: योजना के क्रियान्वयन का रियल टाइम पर्यवेक्षण और अनाधिकृत निर्माण की समस्याओं के यथासमय निराकरण हेतु डिजिटल ट्विन सिटी की व्यवस्था प्रस्तावित है।
14. सुरक्षा व्यवस्था: सार्वजनिक स्थानों पर निजी CCTV कैमरों की नेटवर्किंग और सार्वजनिक भवनों की बाउंड्री वॉल को पारदर्शी रखने के प्रावधान शामिल हैं।
15. पार्किंग व्यवस्था: मल्टीलेवल पार्किंग, मैकेनाइज्ड पार्किंग, सामुदायिक खुले क्षेत्रों के नीचे पार्किंग के प्रावधान रखे गए हैं।
16. निजी विकासकर्ता बनाएंगे मार्ग: निजी विकासकर्ता भी विकास योजना के मार्ग का निर्माण कर सकेंगे, इसके लिए शासकीय भूमि अथवा TDR के माध्यम से भूमि अर्जन कर उपलब्ध कराई जा सकेगी।
17. EKAI सिटी: भौंरी स्थित एजुकेशन हब का उन्नयन करते हुए EKAI सिटी की परिकल्पना शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और AI आधारित ज्ञान अर्थव्यवस्था के रूप में की गई है।
18. चैरिटेबल गतिविधियों को छूट: अनाथ आश्रम, मूक बधिर विद्यालय, दिव्यांग विशेष विद्यालय, वृद्धाश्रम जैसी पूर्व प्रयोजन (charitable) गतिविधियों को FAR क्रय करने की बाध्यता से मुक्त रखा गया है।
19. भूमि उपयोग विवरण: कुल 61017.02 हेक्टेयर में - आवासीय 26755.50 (43.85%), मिश्रित 2448.84 (4.01%), वाणिज्यिक 1348.97 (2.21%), औद्योगिक 2137.25 (3.50%), लॉजिस्टिक्स 771.44 (1.26%), सार्वजनिक 4887.97 (8.01%), परिवहन 5793.82 (9.53%) और ग्रीन क्षेत्र 16489.94 हेक्टेयर (27.01%) प्रस्तावित है।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →