भोपाल पटवारी रिश्वत मामला: 8 हजार रुपये लेते पकड़े गए मंगलेश खण्डेलवाल पर अभियोजन की मंजूरी

भोपाल। मध्य प्रदेश में रिश्वत लेने के आरोपी पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के खिलाफ अब अभियोजन चलाने की मंजूरी मिल गई है। भोपाल के कोलार क्षेत्र में पदस्थ रहे पटवारी पर मकान के नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के बदले 8 हजार रुपये रिश्वत लेने का आरोप है। लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था।
जांच पूरी होने के बाद भोपाल जिला प्रशासन ने पटवारी के खिलाफ अभियोजन की अनुमति जारी की है। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी प्रियंक मिश्रा ने एसडीएम स्तर से मिले रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह मंजूरी दी। जांच रिपोर्ट में सरकारी काम में लापरवाही और भ्रष्टाचार से जुड़े कृत्य में पटवारी की प्रथम दृष्टया संलिप्तता का उल्लेख किया गया था।
लोकायुक्त के 295 मामलों में मंजूरी का इंतजार
यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विधानसभा में दी गई जानकारी के मुताबिक लोकायुक्त के सैकड़ों मामलों में जांच पूरी होने के बाद भी अभियोजन की मंजूरी का इंतजार है।
21 जून 2026 तक की जानकारी के अनुसार, लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना ने 1 जनवरी 2020 से 21 जून 2026 के बीच 1,318 मामलों की जांच पूरी की थी। इनमें से 1,302 मामलों में अभियोजन की अनुमति के लिए प्रस्ताव संबंधित सक्षम अधिकारियों को भेजे गए।
इनमें 985 मामलों में अभियोजन की मंजूरी मिल चुकी है, जबकि 295 मामले अब भी मंजूरी के इंतजार में हैं।
विभागवार देखें तो नगरीय विकास एवं आवास विभाग के 36 मामले लंबित बताए गए हैं। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 15, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के 12, सामान्य प्रशासन विभाग के 11 और लोक निर्माण विभाग के 10 मामलों में भी अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है। राजस्व विभाग के छह और जल संसाधन विभाग के पांच मामले लंबित बताए गए हैं।
2022-23 से 1379 मामले जांच के दायरे में
फरवरी 2026 में विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्ष 2022-23 से उस समय तक लोकायुक्त संगठन में 1,884 शिकायतें दर्ज हुई थीं। वहीं, विशेष पुलिस स्थापना में 1,063 आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे।
इनमें शिकायत एवं जांच शाखा के 1,291 और तकनीकी शाखा के 88 मामले समेत कुल 1,379 मामले जांच के दायरे में थे। 1,063 आपराधिक मामलों में से 393 की जांच पूरी हो चुकी थी, जबकि 134 मामलों में अभियोजन की मंजूरी लंबित बताई गई थी।
इस तरह पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के मामले में अभियोजन की मंजूरी मिलने के बावजूद विधानसभा में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि लोकायुक्त के कई मामलों में जांच पूरी होने के बाद भी अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार बना हुआ है।





