भोपाल के दो पुलिस थानों पर LockBit रैनसमवेयर का साइबर अटैक, CCTNS डेटा लॉक, FIR और संवेदनशील रिकॉर्ड पर खतरा

भो पाल के दो पुलिस थानों पर LockBit रैनसमवेयर का साइबर अटैक, CCTNS डेटा लॉक, FIR और संवेदनशील रिकॉर्ड पर खतरा
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में साइबर अपराधियों ने पुलिस के डिजिटल सिस्टम को ही निशाना बना लिया। शहर के अयोध्या नगर और शाहपुरा पुलिस थानों के कंप्यूटरों पर खतरनाक लॉकबिट रैनसमवेयर से हमला हुआ है। इस साइबर अटैक के कारण दोनों थानों के क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) से जुड़े कंप्यूटरों का डेटा लॉक हो गया। हालांकि तकनीकी टीम ने दोनों थानों की प्रणालियों को दोबारा दुरुस्त कर दिया है। फिलहाल किसी तरह का डेटा चोरी होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इस घटना के बाद मध्यप्रदेश साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (MP-CERT) ने प्रदेश के पुलिस कंप्यूटरों और नेटवर्क की सुरक्षा को लेकर एडवाइजरी जारी की है।
अयोध्या नगर और शाहपुरा थाने के कंप्यूटर बने निशाना
साइबर अपराधियों ने भोपाल के अयोध्या नगर और शाहपुरा पुलिस थानों के कंप्यूटरों को लॉकबिट रैनसमवेयर के जरिए निशाना बनाया। इस हमले के कारण कंप्यूटरों में मौजूद डिजिटल फाइलें लॉक हो गईं।
पुलिस थानों के CCTNS सिस्टम में एफआईआर, आपराधिक मामलों की जानकारी और जांच से संबंधित महत्वपूर्ण रिकॉर्ड दर्ज रहते हैं। ऐसे में साइबर हमले से संवेदनशील जानकारी की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तकनीकी टीम ने दोनों थानों के प्रभावित सिस्टम को दोबारा चालू कर दिया है। हालांकि हमले के दौरान किसी फाइल की चोरी हुई है या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है।
हार्ड डिस्क की जांच में जुटीं साइबर टीमें
हमले के बाद दोनों थानों के प्रभावित कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क जांच के लिए भेजी गई हैं।
एमपी-सर्ट और स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की तकनीकी टीमें हार्ड डिस्क की जांच कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि रैनसमवेयर कंप्यूटरों तक कैसे पहुंचा और उसने कितनी फाइलों को प्रभावित किया।
इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि हमले का असर केवल संबंधित कंप्यूटरों तक सीमित रहा या पुलिस नेटवर्क के दूसरे हिस्सों तक भी पहुंचा।
क्या है लॉकबिट रैनसमवेयर और कितना खतरनाक है?
लॉकबिट एक खतरनाक रैनसमवेयर है, जिसका इस्तेमाल साइबर अपराधी कंप्यूटरों में मौजूद फाइलों को एन्क्रिप्ट करके लॉक करने के लिए करते हैं।
इस तरह के हमलों में अपराधी संवेदनशील डेटा चोरी कर उसे सार्वजनिक करने की धमकी भी दे सकते हैं।
एमपी-सर्ट के अनुसार लॉकबिट रैनसमवेयर कंप्यूटर की सुरक्षा प्रणालियों को निष्क्रिय करने, बैकअप की शैडो कॉपी मिटाने और विंडोज के सिक्योरिटी लॉग डिलीट करने की क्षमता रखता है।
इससे प्रभावित सिस्टम को दोबारा सुरक्षित करना और साइबर हमले के सबूत जुटाना मुश्किल हो सकता है।
कमजोर पासवर्ड और पुराने सॉफ्टवेयर से हो सकती है सेंधमारी
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार रैनसमवेयर हमलों में अपराधी अक्सर कमजोर पासवर्ड, इंटरनेट पर खुले रिमोट डेस्कटॉप, पुराने सॉफ्टवेयर और फिशिंग ईमेल का सहारा लेते हैं।
ऐसे तरीकों से कंप्यूटर या नेटवर्क में प्रवेश करने के बाद अपराधी महत्वपूर्ण फाइलों को लॉक कर सकते हैं।
हालांकि भोपाल के दोनों पुलिस थानों में रैनसमवेयर किस रास्ते से पहुंचा, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
प्रदेश के पुलिस कंप्यूटरों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश
एमपी-सर्ट के संयुक्त संचालक वैभव श्रीवास्तव ने बताया कि साइबर हमले के खतरे को देखते हुए संबंधित संस्थानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।
एडवाइजरी में सभी विंडोज सिस्टम को नियमित रूप से अपडेट रखने, प्रमाणित एंटीवायरस और एंडपॉइंट डिटेक्शन एंड रिस्पांस (EDR) सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
इसके साथ ही मजबूत पासवर्ड, मल्टी फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) और महत्वपूर्ण डेटा का नियमित बैकअप रखने के निर्देश दिए गए हैं।
पेन ड्राइव के इस्तेमाल पर भी सावधानी बरतने की सलाह
एमपी-सर्ट ने कंप्यूटर नेटवर्क को अलग-अलग हिस्सों में विभाजित रखने और पेन ड्राइव के अनियंत्रित इस्तेमाल से बचने की भी सलाह दी है।
भोपाल के दो पुलिस थानों में हुए इस साइबर हमले के बाद पुलिस के डिजिटल रिकॉर्ड की सुरक्षा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है। फिलहाल तकनीकी जांच जारी है और इसकी रिपोर्ट से ही स्पष्ट हो सकेगा कि हमले में कितना डेटा प्रभावित हुआ और क्या कोई संवेदनशील जानकारी चोरी हुई है।
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