Dewas TI Dilip Puri Murder Case: टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड में शराब कारोबार की डायरियां और लाखों की नकदी जब्त, गुजरात कनेक्शन की जांच तेज

देवास। मध्यप्रदेश के देवास जिले में खातेगांव थाना प्रभारी दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच में पुलिस को महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं। हत्या के आरोपियों की तलाश के साथ पुलिस अब अवैध शराब तस्करी के नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और कारोबार से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। पुलिस ने हरदा और टिमरनी में शराब दुकानों से जुड़े कार्यालयों पर छापेमारी कर लाखों रुपये की नकदी और कारोबार के हिसाब-किताब से संबंधित डायरियां जब्त की हैं। गुजरात तक शराब पहुंचाने के संभावित रास्तों का पता लगाने के लिए संबंधित ट्रक के पिछले छह महीने के फास्टैग रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं।
हरदा और टिमरनी में दो दिन तक छापेमारी
देवास पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा के अनुसार, टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच के दौरान हरदा और टिमरनी में शराब दुकानों से जुड़े कार्यालयों पर लगातार दो दिनों तक छापेमारी की गई।
इस कार्रवाई में पुलिस को नकदी, टैक्स से संबंधित दस्तावेज, शराब बिक्री के रिकॉर्ड और कारोबार में साझेदारों के बीच मुनाफे के बंटवारे का हिसाब रखने वाली डायरियां मिली हैं।
पुलिस के अनुसार, जिस विशेष बैच नंबर की शराब संबंधित ट्रक में मिली थी, उससे जुड़े रिकॉर्ड भी इन कार्यालयों से बरामद किए गए हैं।
जांच टीम अब इन दस्तावेजों के आधार पर शराब के परिवहन, बिक्री और वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जोड़ रही है।
टिमरनी शराब दुकान का एरिया मैनेजर गिरफ्तार
एसपी आदित्य मिश्रा ने बताया कि मामले में पहले से हिरासत में लिए गए पांच आरोपियों में से दो अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि तीन आरोपी पुलिस रिमांड पर हैं।
इसके अलावा टिमरनी शराब दुकान के एरिया मैनेजर भूपेंद्र राणा को भी गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की है।
पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शराब के परिवहन और कारोबार से जुड़े निर्णयों में किन लोगों की भूमिका थी।
पत्नी के कियोस्क खाते से भरी गई ट्रक की किस्तें
जांच में शराब परिवहन के लिए इस्तेमाल किए गए ट्रक की फाइनेंसिंग को लेकर भी जानकारी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी केरम सिंह ने ट्रक की फाइनेंस किस्तों का भुगतान अपनी पत्नी के कियोस्क बैंक खाते के माध्यम से किया था।
अब पुलिस इस बैंक खाते से हुए लेन-देन की जांच कर रही है। इसके जरिए ट्रक के संचालन और शराब कारोबार से जुड़े वित्तीय संबंधों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
पुलिस अन्य संबंधित खातों और आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है।
छह महीने का फास्टैग डेटा खंगाल रही पुलिस
अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल किए गए ट्रक की आवाजाही का पता लगाने के लिए पुलिस उसके पिछले छह महीने के फास्टैग रिकॉर्ड की जांच कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में महू, पीथमपुर और आलीराजपुर से होकर गुजरने वाले रास्ते का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी मिली है।
जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि ट्रक कितनी बार इस रास्ते से गुजरा और गुजरात की ओर शराब परिवहन में किन लोगों की भूमिका रही।
इसके अलावा ट्रक की बॉडी में बदलाव करने वाले व्यक्ति की पहचान भी कर ली गई है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
राहुल जायसवाल से जुड़ी बसें जब्त
पुलिस ने मामले में आरोपी राहुल जायसवाल से जुड़ी संपत्तियों की जांच भी शुरू की है।
पूछताछ के दौरान राहुल ने खुद को कारोबार में साझेदार बताते हुए बसों और पेट्रोल पंपों के संचालन से जुड़े होने का दावा किया था।
हालांकि, पुलिस की जांच में पेट्रोल पंपों के दस्तावेज आरोपियों के नाम पर नहीं मिले हैं।
पुलिस अब संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों और संभावित बेनामी लेन-देन की जांच कर रही है। इसी कार्रवाई के तहत राहुल जायसवाल से जुड़ी कुछ बसों को जब्त किया गया है।
फरार आरोपियों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम
एसपी आदित्य मिश्रा के अनुसार, हत्याकांड में अभी चार से पांच आरोपी फरार हैं। इनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का नकद इनाम घोषित किया है।
फरार आरोपियों की तलाश में विशेष पुलिस टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं।
पुलिस की टीमें इंदौर, गुजरात के अहमदाबाद और अन्य संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। आरोपियों की लोकेशन का पता लगाने के लिए तकनीकी जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
शराब तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच
टीआई दिलीप पुरी हत्याकांड की जांच अब हत्या की घटना के साथ शराब परिवहन और उससे जुड़े आर्थिक नेटवर्क तक पहुंच गई है।
पुलिस जब्त डायरियों, नकदी, बैंक खातों, ट्रक के फास्टैग रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण कर रही है।
जांच अधिकारियों का प्रयास यह पता लगाना है कि शराब परिवहन के पीछे किन लोगों की भूमिका थी, कारोबार से प्राप्त रकम का बंटवारा कैसे होता था और आरोपियों के बीच किस तरह के आर्थिक संबंध थे।
फिलहाल पुलिस बरामद साक्ष्यों और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की आगे की जांच कर रही है।





