Jabalpur Organ Donation: ब्रेन डेड नरेंद्र रजक के अंगदान से 5 मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद, दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अहमदाबाद भेजा लिवर

Jabalpur Organ Donation: ब्रेन डेड नरेंद्र रजक के अंगदान से 5 मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद, दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अहमदाबाद भेजा लिवर
जबलपुर। मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक परिवार ने अपने प्रियजन को खोने के गहरे दुख के बीच ऐसा फैसला लिया, जिसने पांच जरूरतमंद मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद दी है। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल 40 वर्षीय नरेंद्र रजक को डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था। इसके बाद उनकी पत्नी पूजा रजक और परिवार ने अंगदान करने का निर्णय लिया। नरेंद्र की दोनों किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा दान की गई। अंगों को निर्धारित समय पर अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन ने रात में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए। लिवर को विशेष चार्टर्ड विमान से अहमदाबाद भेजा गया, जबकि एक किडनी जबलपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाई गई। इस दौरान अस्पताल में मौजूद परिवार के सदस्य भावुक हो गए।
सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हुए थे नरेंद्र
जबलपुर की नव निवेश कॉलोनी, गंगानगर निवासी 40 वर्षीय नरेंद्र रजक एचसीएल कंपनी में कार्यरत थे। वे 31 दिसंबर को अपने साले के निधन के बाद गंगा पूजन के लिए कुआंखेड़ा गए थे।
परिजनों के अनुसार, नरेंद्र हमेशा घर से निकलते समय हेलमेट पहनते थे, लेकिन हादसे वाले दिन उन्होंने हेलमेट नहीं लगाया था।
घर लौटते समय एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में नरेंद्र गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जबलपुर के मेट्रो प्राइम अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने उनकी जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार नहीं हुआ। बाद में चिकित्सकों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
पत्नी पूजा ने लिया अंगदान का फैसला
नरेंद्र के ब्रेन डेड होने की जानकारी मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पत्नी पूजा रजक और उनके दोनों बच्चों के लिए यह बेहद कठिन समय था।इसी बीच परिवार ने नरेंद्र के अंगदान का निर्णय लिया, ताकि उनके अंगों से दूसरे जरूरतमंद मरीजों की जान बचाई जा सके।
परिजनों की सहमति के बाद डॉक्टरों ने अंगदान और प्रत्यारोपण की प्रक्रिया शुरू की।
नरेंद्र की दोनों किडनी, लिवर, आंखें और त्वचा दान करने का निर्णय लिया गया। हालांकि उनके हृदय की स्थिति प्रत्यारोपण के अनुकूल नहीं होने के कारण उसका उपयोग नहीं किया जा सका।
अहमदाबाद से चार्टर्ड विमान से पहुंची डॉक्टरों की टीम
अंगदान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए जबलपुर से अहमदाबाद तक चिकित्सा व्यवस्था को सक्रिय किया गया।
अहमदाबाद के मरेन्गो सिम्स अस्पताल से पांच सदस्यीय डॉक्टरों की टीम चार्टर्ड विमान से जबलपुर पहुंची।
इस टीम में कार्डियक सर्जन डॉ. निकुंज व्यास, लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. विकास पटेल, कार्डियक एनेस्थेटिस्ट डॉ. चिंता सेठ और दो स्टाफ नर्स शामिल थीं।
शुरुआत में लिवर और हृदय दोनों को अहमदाबाद ले जाने की तैयारी थी, लेकिन चिकित्सकीय परीक्षण में हृदय प्रत्यारोपण के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया।
इसके बाद लिवर को अहमदाबाद भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।
एक किडनी मेट्रो अस्पताल में, दूसरी मेडिकल कॉलेज भेजी गई
मेट्रो प्राइम अस्पताल के ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. राजेश पटेल के अनुसार, नरेंद्र की एक किडनी मेट्रो अस्पताल में ही एक जरूरतमंद मरीज को प्रत्यारोपित करने की व्यवस्था की गई।
दूसरी किडनी जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजी गई, जहां संबंधित मरीज के प्रत्यारोपण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी।
वहीं, लिवर को अहमदाबाद भेजने की व्यवस्था की गई। नरेंद्र की आंखें और त्वचा भी दान की गईं।
इस अंगदान से पांच जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
दो ग्रीन कॉरिडोर बनाकर अस्पताल से एयरपोर्ट पहुंचाए अंग
अंग प्रत्यारोपण में समय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसी को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस ने जबलपुर में दो ग्रीन कॉरिडोर बनाए।
पहला ग्रीन कॉरिडोर मेट्रो प्राइम अस्पताल से अब्दुल हमीद चौक होते हुए डुमना एयरपोर्ट तक बनाया गया।
दूसरा ग्रीन कॉरिडोर अस्पताल से रानी दुर्गावती फ्लाईओवर होते हुए मेडिकल कॉलेज तक तैयार किया गया।
दोनों मार्गों पर पुलिस और यातायात विभाग की टीम तैनात रही। एंबुलेंस के आगे पुलिस वाहन चलते रहे और रास्तों को यातायात से खाली कराया गया, ताकि अंगों को बिना किसी देरी के गंतव्य तक पहुंचाया जा सके।
रात में खुलवाया एयरपोर्ट, विशेष विमान से भेजा लिवर
जबलपुर एयरपोर्ट पर सामान्य तौर पर रात में विमान संचालन की सुविधा सीमित रहती है। ऐसे में प्रशासन ने विशेष अनुमति लेकर रात में विमान संचालन और लैंडिंग की व्यवस्था कराई।
इसका उद्देश्य अहमदाबाद से आई डॉक्टरों की टीम को अंगों के साथ निर्धारित समय में वापस रवाना करना था।
सुबह करीब चार बजे लिवर को विशेष मेडिकल सुरक्षा के साथ एंबुलेंस से डुमना एयरपोर्ट पहुंचाया गया।
इसके बाद चार्टर्ड विमान से लिवर को अहमदाबाद रवाना किया गया।
सुबह करीब साढ़े चार बजे दूसरी एंबुलेंस से किडनी को जबलपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
अस्पताल में जलीं मोमबत्तियां, भावुक हुआ परिवार
अंगदान की प्रक्रिया के दौरान मेट्रो प्राइम अस्पताल में भावुक माहौल देखने को मिला।
अस्पताल प्रशासन ने मोमबत्तियां जलाकर नरेंद्र रजक और उनके परिवार के अंगदान के फैसले को सम्मान दिया।
इस दौरान नरेंद्र की पत्नी पूजा रजक और दोनों बच्चे भावुक हो गए।
एक तरफ परिवार अपने प्रियजन को हमेशा के लिए खोने के दुख में था, तो दूसरी तरफ उनके अंगों से दूसरे मरीजों को जीवन मिलने की उम्मीद थी।
अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने भी परिवार के इस निर्णय की सराहना की।
पत्नी बोलीं- इससे बड़ा कोई दान नहीं
नरेंद्र की पत्नी पूजा रजक ने इस कठिन समय में भी दूसरे परिवारों को अंगदान के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा, "हमारे परिवार ने अपना प्रियजन खो दिया, लेकिन जिनके घर के मरीज ब्रेन डेड होते हैं, उन्हें अंगदान जरूर करना चाहिए। इससे बड़ा कोई दान नहीं है।"
पूजा ने अपने पति के अंगदान के फैसले के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों की सहायता करने की इच्छा जताई।
पांच मरीजों के लिए नई उम्मीद छोड़ गए नरेंद्र
नरेंद्र रजक के अंगदान से पांच मरीजों को जीवन और बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद मिली है। हालांकि सभी प्रत्यारोपण की सफलता और मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति की अंतिम जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
जबलपुर में इस अंगदान के लिए डॉक्टरों, पुलिस, जिला प्रशासन और एयरपोर्ट प्रबंधन ने मिलकर काम किया।
नरेंद्र रजक के परिवार का यह निर्णय अंगदान के महत्व को सामने लाने के साथ ही यह संदेश भी देता है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसके अंग जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन की नई उम्मीद बन सकते हैं।
The Naradmuni Desk

लेखक के बारे में

The Naradmuni Desk

Naradmuni News Network

The Naradmuni-Credible source of investigative news stories from Central India.

View all posts by The Naradmuni Desk →