लाड़ली योजना को बंद कराने हाईकोर्ट पहुंची महिला, सरकार को जारी हुआ नोटिस

*ग्वालियर।* मध्यप्रदेश सरकार की सबसे बड़ी योजना मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना अब कानूनी पचड़े में फंस गई है। योजना को बंद कर 1.25 करोड़ महिलाओं को दी जा रही 1500 रुपये की मासिक किस्त रोकने की मांग को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की गई है।
*किसने लगाई याचिका ?*
ये याचिका ग्वालियर के थाटीपुर की रहने वाली पूर्व पार्षद सुधा दुबे ने अपने वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार मिश्रा के माध्यम से दायर की है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वो महिला सशक्तिकरण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार जिस तरह सीधे कैश बांट रही है वो स्थायी समाधान नहीं है।
*कोर्ट में क्या दलील दी गई ?*
वकील अनिल मिश्रा ने कोर्ट में कहा कि -
1. महिलाओं के कल्याण के नाम पर हर महीने करीब 1,878 से 1,900 करोड़ रुपये और सालाना 22,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का सीधा भार खजाने पर पड़ रहा है। इस साल के बजट में ही इसके लिए 23,882 करोड़ रुपये रखा गया है।
2. प्रदेश पर पहले से ही करीब 3.08 लाख करोड़ का कर्ज है, ऐसे में कर्ज लेकर नकद बांटने से बेरोजगारी और आर्थिक संकट बढ़ेगा।
3. इस पैसे से अगर उद्योग-धंधे लगाए जाएं, स्किल डेवलपमेंट और रोजगार के स्थायी अवसर पैदा किए जाएं तो एक आर्थिक चक्र बनेगा और महिलाएं सच में आत्मनिर्भर बनेंगी।
*हाईकोर्ट ने क्या कहा ?*
मामले की सुनवाई जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने फिलहाल बहुत ही महत्वपूर्ण टिप्पणी की है :
- कोर्ट ने लाड़ली बहना योजना बंद करने का कोई आदेश नहीं दिया है।
- किस्त रोकने पर कोई अंतरिम स्टे नहीं लगाया है।
- योजना को अवैध भी घोषित नहीं किया है।
कोर्ट ने सिर्फ प्रदेश के मुख्य सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रमुख सचिव और वित्त विभाग के प्रमुख सचिव को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में विस्तृत जवाब मांगा है।
कोर्ट ने सरकार से 4 चीजों का पूरा रिकॉर्ड मांगा है -
1. कुल कितने हितग्राही हैं और उन्हें कितनी राशि दी जा रही है।
2. योजना शुरू होने से अब तक कितनी महिलाओं के नाम काटे गए और क्यों काटे गए।
3. इस योजना पर अब तक कुल कितना बजट खर्च हुआ।
4. योजना से महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर क्या असर पड़ा।
*सरकार की आपत्ति पर कोर्ट का जवाब*
सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा कि सभी 1.25 करोड़ हितग्राहियों को पार्टी नहीं बनाया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि पूरा डाटा सरकार के पास है, सरकार वो डाटा याचिकाकर्ता को दे ताकि जरूरी पक्षकारों को जोड़ा जा सके। नोटिस तामील कराने का पूरा भार याचिकाकर्ता पर नहीं डाला जा सकता। सरकार को याचिका का हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराने को भी कहा गया है। कोर्ट ने 3 दिन के अंदर प्रोसेस फीस जमा कर अगली सुनवाई नवंबर में तय करने के निर्देश दिए हैं।





