MP Police Recruitment 2013: हाईकोर्ट ने विवादित मेरिट लिस्ट की निरस्त, 12 हफ्ते में नई सूची जारी करने के निर्देश

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 की पुलिस भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद पर महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। कोर्ट ने सूबेदार, उप निरीक्षक (SI) और प्लाटून कमांडर के पदों के लिए वर्ष 2015 में जारी मेरिट सूची के विवादित हिस्से को निरस्त कर दिया है। अदालत ने शासन और संबंधित विभाग को 12 सप्ताह के भीतर संशोधित मेरिट सूची जारी करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब संबंधित पदों के लिए मेरिट और पद आवंटन की प्रक्रिया को नियमों के मुताबिक दोबारा निर्धारित करना होगा।
आरक्षित वर्ग के पहले से चयनित अभ्यर्थियों को राहत
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया है कि संशोधित मेरिट सूची तैयार करने की प्रक्रिया के दौरान पहले से चयनित और सेवा में कार्यरत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्तियां रद्द नहीं की जाएंगी।
अदालत ने आरक्षित पदों पर पूर्व में किए गए समायोजन को नियमों के अनुरूप ठीक करने और इसके बाद नए सिरे से मेरिट सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को राहत मिल सकती है, जो लंबे समय से पद आवंटन और मेरिट को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे।
क्या था 2013 की पुलिस भर्ती का विवाद?
यह मामला वर्ष 2013 में आयोजित पुलिस भर्ती परीक्षा में नियमों के तहत पद आवंटन और आरक्षण व्यवस्था से जुड़ा था। याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि उन्हें परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने और अपनी पसंद का पद बताने के बावजूद उनकी प्राथमिकता के अनुरूप पद नहीं दिया गया।
याचिकाकर्ताओं के मुताबिक, एक अभ्यर्थी ने 162 अंक हासिल किए थे और जिला पुलिस बल में उप निरीक्षक (SI) पद को प्राथमिकता दी थी, लेकिन उसे प्लाटून कमांडर का पद आवंटित कर दिया गया।
आरक्षित अभ्यर्थियों के समायोजन पर उठे सवाल
याचिका में मुख्य रूप से आरक्षण और आयु सीमा में छूट से जुड़े नियमों के पालन को लेकर सवाल उठाए गए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि आयु सीमा में छूट का लाभ लेने वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को निर्धारित नियमों के अनुसार आरक्षित कोटे में समायोजित किया जाना चाहिए था।
आरोप था कि ऐसे अभ्यर्थियों को अनारक्षित पदों पर समायोजित किए जाने के कारण मेरिट और पद आवंटन की प्रक्रिया प्रभावित हुई और कुछ अन्य अभ्यर्थियों को उनकी योग्यता एवं प्राथमिकता के अनुसार पद नहीं मिल सके।
12 सप्ताह में जारी होगी नई मेरिट सूची
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब शासन और संबंधित विभाग को निर्धारित प्रक्रिया के तहत 12 सप्ताह यानी करीब तीन महीने में संशोधित मेरिट सूची तैयार कर जारी करनी होगी।
नई सूची तैयार करते समय कोर्ट के निर्देशों और संबंधित भर्ती नियमों को ध्यान में रखना होगा। हालांकि, पहले से नियुक्त और सेवा में कार्यरत आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्तियों को इस प्रक्रिया के कारण रद्द नहीं किया जाएगा।
वर्ष 2013 की इस भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट का यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके बाद मेरिट और पद आवंटन की प्रक्रिया को दोबारा निर्धारित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।





