MP Teacher TET Protest: 28 साल पढ़ाने के बाद अब TET की परीक्षा पर सवाल, भोपाल में भूख हड़ताल पर शिक्षक

भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) और सेवा संबंधी मांगों को लेकर शिक्षकों का आंदोलन तेज हो गया है। डॉ. अंबेडकर पार्क में भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने 1998 से सेवा कर रहे शिक्षकों को अब TET के दायरे में लाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
आंदोलनकारी शिक्षकों का कहना है कि यदि वे 1998 में नियुक्ति के समय अयोग्य थे, तो सरकार ने उन्हें नियुक्त किस आधार पर किया और करीब 28 वर्षों तक उनसे बच्चों को पढ़ाने का काम क्यों लिया गया। शिक्षक संगठन के पदाधिकारी परशुराम कपाड़िया ने कहा कि इतने लंबे समय तक सेवा लेने के बाद अब उनकी योग्यता पर सवाल उठाना शिक्षकों के लिए बड़ा मुद्दा है।
'हम अयोग्य हैं तो हमारे पढ़ाए विद्यार्थी भी?'
कपाड़िया ने कहा कि आंदोलन में शामिल शिक्षक केवल अपने निजी हितों के लिए प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं, बल्कि उन शिक्षकों के लिए भी आवाज उठा रहे हैं जो सेवानिवृत्त हो रहे हैं और सेवा अवधि से जुड़े लाभों को लेकर परेशान हैं।
उन्होंने दावा किया कि 1998 में हुई नियुक्ति को बाद में 2018 से मानने के कारण करीब 20 साल की सेवा अवधि प्रभावित हुई। इसका असर ग्रेच्युटी, पेंशन और अर्जित अवकाश जैसे सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ा।
TET के मुद्दे पर कपाड़िया ने सवाल उठाया कि जिन शिक्षकों ने करीब 28 वर्षों तक विद्यार्थियों को पढ़ाया, उनकी योग्यता पर अब सवाल क्यों उठाया जा रहा है। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि यदि आज इन शिक्षकों को अयोग्य माना जा रहा है तो उनके पढ़ाए डॉक्टर, इंजीनियर और दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे विद्यार्थियों की योग्यता को लेकर भी सवाल खड़े होंगे।
तीन दिन से भूख हड़ताल
आंदोलनकारी शिक्षक भरत भार्गव के मुताबिक, भूख हड़ताल शनिवार को तीसरे दिन में पहुंच गई है। उनका कहना है कि शिक्षक लंबे समय से ज्ञापन, आवेदन और अधिकारियों से निवेदन के जरिए अपनी मांगें उठा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसके बाद शिक्षकों ने भूख हड़ताल शुरू करने का फैसला लिया।
भार्गव के अनुसार शिक्षकों की मांगों में TET से राहत, पुरानी सेवा अवधि के लाभ, वेतनमान और अनिवार्य उपस्थिति से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
उन्होंने दावा किया कि सेवा गणना को लेकर छठे वेतनमान की करीब 10 साल की अवधि और सातवें वेतनमान की करीब ढाई साल की अवधि भी प्रभावित हुई है। इसके अलावा मोबाइल आधारित अनिवार्य उपस्थिति को लेकर भी शिक्षक विरोध जता रहे हैं।
'सेवा और अधिकार वापस मिलें'
भार्गव ने कहा कि शिक्षकों ने ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षों तक सेवाएं दी हैं। उनके मुताबिक, शिक्षकों की मांग केवल सम्मान की नहीं, बल्कि उनके सेवा संबंधी अधिकारों को सुरक्षित करने की है।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने अपनी पूरी जवानी सेवा में लगा दी है और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन को लेकर उनका पक्ष सुना जाना चाहिए। आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से बातचीत कर उनकी समस्याओं का समाधान करने की मांग की है।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो भूख हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है और आगे आंदोलन का स्वरूप भी बढ़ाया जा सकता है।





