MP Urban Body Election 2027: निकाय चुनाव लड़ना हुआ महंगा, महापौर के लिए ₹32 हजार और नपा अध्यक्ष के लिए ₹24 हजार जमानत राशि

भोपाल। मध्य प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव से पहले सरकार ने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से जुड़ी जमानत राशि और चुनावी प्रक्रिया के नियमों में बदलाव किया है। नए प्रावधानों के तहत नगर निगम महापौर पद के उम्मीदवार को ₹32 हजार और नगर पालिका अध्यक्ष पद के उम्मीदवार को ₹24 हजार की जमानत राशि जमा करनी होगी।
पहले महापौर पद के लिए ₹20 हजार और नगर पालिका अध्यक्ष के लिए ₹15 हजार जमानत राशि निर्धारित थी। अप्रैल 2026 में राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से जमानत राशि बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया था, जिसमें महापौर के लिए ₹32 हजार और नगर पालिका अध्यक्ष के लिए ₹24 हजार करने की बात थी।
नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने मध्यप्रदेश नगरपालिका निर्वाचन नियम, 1994 में संशोधन करते हुए नामांकन, जमानत राशि, निर्वाचन व्यय और अन्य चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया है।
महापौर और अध्यक्ष के लिए कितनी जमानत राशि?
संशोधित प्रावधानों के तहत प्रमुख पदों के लिए जमानत राशि में बढ़ोतरी की गई है। प्रस्तावित नई दरों में नगर निगम महापौर के लिए ₹32 हजार, नगर पालिका अध्यक्ष के लिए ₹24 हजार और नगर परिषद अध्यक्ष के लिए ₹16 हजार की राशि शामिल थी।
इस बदलाव का असर अगले आम नगरीय निकाय चुनाव में महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों पर पड़ेगा।
नामांकन की अवधि अब सात दिन से कम नहीं
संशोधित नियमों में नामांकन दाखिल करने की समय-सीमा को लेकर भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है। निर्वाचन की सूचना प्रकाशित होने के बाद नामांकन दाखिल करने की अवधि सात दिन से कम नहीं होगी।
यदि सातवां दिन सार्वजनिक अवकाश होता है, तो नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख उसके अगले कार्यदिवस को होगी। इससे उम्मीदवारों को नामांकन की तैयारी के लिए निर्धारित न्यूनतम समय मिल सकेगा।
एक पद के लिए एक से ज्यादा नामांकन स्वीकार नहीं
नए नियमों के अनुसार किसी एक पद के चुनाव के लिए यदि कोई उम्मीदवार दो या उससे अधिक नामांकन पत्र जमा करता है, तो एक से अधिक नामांकन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
निर्वाचन अधिकारी अतिरिक्त नामांकन पत्रों को स्वीकार नहीं करेगा। इससे एक ही उम्मीदवार की ओर से कई नामांकन दाखिल करने की स्थिति को लेकर प्रक्रिया स्पष्ट की गई है।
चुनावी खर्च के लिए अलग बैंक खाता अनिवार्य
संशोधित नियमों में चुनावी खर्च के लेखे-जोखे को लेकर भी महत्वपूर्ण व्यवस्था की गई है। महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष, नगर परिषद अध्यक्ष और पार्षद पद के उम्मीदवारों को चुनावी खर्च के लिए अलग और स्वतंत्र बैंक खाता खोलना होगा।
यह खाता किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में खोला जाना होगा और नामांकन पत्र दाखिल करते समय इसकी जानकारी संबंधित रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी।
चुनाव से संबंधित प्राप्तियों और खर्च का रिकॉर्ड इसी खाते के माध्यम से रखने का प्रावधान किया गया है।
नामांकन से मतगणना तक खर्च का हिसाब
उम्मीदवारों को चुनावी खर्च का पूरा लेखा प्रस्तुत करना होगा। इसमें नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख से लेकर मतगणना की तारीख तक चुनाव से संबंधित खर्च शामिल होगा।
निर्धारित समय में निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करने पर राज्य निर्वाचन आयोग नियमों के तहत उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। मध्य प्रदेश के मौजूदा नगरपालिका कानून में भी निर्वाचन व्यय का लेखा जमा नहीं करने पर अयोग्यता का प्रावधान है।
खर्च के दस्तावेज भी रखने होंगे सुरक्षित
उम्मीदवारों को चुनावी खर्च से जुड़े बिल, रसीद और अन्य जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखने होंगे। अलग बैंक खाते और खर्च के रिकॉर्ड की व्यवस्था का उद्देश्य चुनावी आय-व्यय का स्पष्ट हिसाब उपलब्ध कराना है।
इससे निर्वाचन अधिकारियों को उम्मीदवार के चुनावी खर्च का सत्यापन करने में सुविधा होगी।
खर्च का हिसाब नहीं दिया तो चुनाव लड़ने पर रोक संभव
यदि कोई उम्मीदवार निर्धारित समय और तरीके से निर्वाचन व्यय का लेखा प्रस्तुत नहीं करता है और उसके पास ऐसा न करने का उचित कारण भी नहीं है, तो राज्य निर्वाचन आयोग उसे निर्धारित अवधि के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर सकता है। मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम में ऐसी अयोग्यता की अवधि अधिकतम पांच वर्ष तक हो सकती है।
महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने की प्रक्रिया भी शामिल
संशोधित नियमों में महापौर और अध्यक्ष को पद से वापस बुलाने से संबंधित प्रक्रिया को भी शामिल किया गया है। इसके लिए मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम, 1956 और मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 में दिए गए संबंधित प्रावधानों तथा राज्य निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।
इसी तरह मृत्यु, त्यागपत्र, निर्वाचन निरस्त होने या अन्य कारणों से महापौर, अध्यक्ष अथवा पार्षद का पद रिक्त होने पर निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसकी सूचना जिला निर्वाचन अधिकारी को देनी होगी।
2027 में होना है नगरीय निकाय चुनाव
मध्य प्रदेश में अगले साल नगरीय निकायों के आम चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्य में कुल 413 नगरीय निकाय, जिनमें 16 नगर निगम, 99 नगर पालिका और 298 नगर परिषद शामिल हैं। अप्रैल 2026 की रिपोर्टों में इन चुनावों के लिए करीब 1 लाख संभावित उम्मीदवारों का अनुमान और जमानत राशि बढ़ाने का प्रस्ताव सामने आया था।
अब नियमों में किए गए बदलावों के बाद आगामी चुनाव में उम्मीदवारों को जमानत राशि, नामांकन और निर्वाचन व्यय से जुड़े नए प्रावधानों का पालन करना होगा।





