Rahul Gandhi Indore: ‘छात्रों की गूंज’ से Gen-Z तक पहुंच, रोजगार-पेपर लीक से युवा वोटर तक राहुल के एजेंडे में क्या?

इंदौर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार, 19 सितंबर को इंदौर पहुंच रहे हैं। यहां वे ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं से शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर संवाद करेंगे। कार्यक्रम शाम 5:30 बजे रीजनल पार्क के सामने स्थित IDA ग्राउंड में प्रस्तावित है। राहुल गांधी के आधिकारिक अभियान पेज के मुताबिक, इंदौर इस अभियान का पांचवां आयोजन है। इससे पहले कोटा, प्रयागराज, देहरादून और पुणे में कार्यक्रम हो चुके हैं।
कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने बड़े पैमाने पर रजिस्ट्रेशन का दावा किया है। अलग-अलग समय पर पार्टी की ओर से रजिस्ट्रेशन के अलग आंकड़े सामने आए हैं। वहीं प्रशासन को कार्यक्रम में करीब 15 हजार विद्यार्थियों के शामिल होने की जानकारी दिए जाने की बात कही गई है। ऐसे में रजिस्ट्रेशन और वास्तविक उपस्थिति के आंकड़ों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
कार्यक्रम को पुलिस की ओर से सुरक्षा और आयोजन से जुड़ी 31 शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। इनमें भीड़ प्रबंधन, मंच और प्रवेश व्यवस्था, निगरानी, मेडिकल सुविधा और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं। पुलिस ने सुरक्षा संबंधी शर्तों के लिए जस्टिस जेएस वर्मा आयोग की सिफारिशों का भी संदर्भ दिया है।
छात्रों से सीधे सवाल-जवाब का मंच
‘छात्रों की गूंज’ का फोकस केवल भाषण तक सीमित नहीं रखा गया है। राहुल गांधी के अभियान के अनुसार, छात्रों को शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए मंच दिया जा रहा है। अभियान की आधिकारिक वेबसाइट पर पेपर लीक और रोजगार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से रखा गया है।
इंदौर में भी छात्रों से शिक्षा और रोजगार से जुड़े सवाल पूछे जाने की उम्मीद है। इनमें प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी, परीक्षा परिणाम, भर्ती प्रक्रिया, पेपर लीक, फीस और नौकरी के अवसर जैसे विषय शामिल हो सकते हैं।
युवाओं में बेरोजगारी का आंकड़ा क्या कहता है?
युवा रोजगार का मुद्दा इस अभियान के प्रमुख विषयों में है। PLFS Annual Report 2025 के अनुसार, 15-29 वर्ष के युवाओं की बेरोजगारी दर 9.9% रही। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 10.3% से कम था।
यहां एक जरूरी तथ्यात्मक सावधानी है। आपके इनपुट में ग्रामीण युवाओं की बेरोजगारी दर 8.3% और शहरी युवाओं की 13.6% बताई गई है।
देश के हर चार मतदाताओं में करीब एक युवा
युवा मतदाताओं की राजनीतिक हिस्सेदारी भी इस अभियान को समझने का एक महत्वपूर्ण पहलू है। निर्वाचन आयोग के 2024 Lok Sabha Election Atlas के मुताबिक, 18-29 वर्ष आयु वर्ग के मतदाताओं की हिस्सेदारी कुल मतदाताओं में 22.78% थी। यानी मोटे तौर पर हर चार मतदाताओं में करीब एक मतदाता 18-29 आयु वर्ग का था।
यह आंकड़ा 2024 के लोकसभा चुनाव का है। इसे 2026 की मौजूदा मतदाता संरचना के बराबर मानना सही नहीं होगा, लेकिन इससे युवा मतदाताओं के आकार का एक आधिकारिक संदर्भ जरूर मिलता है।
‘छात्रों की गूंज’ के जवाब में ‘झूठ की गूंज’?
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम से पहले ‘झूठ की गूंज’ शब्द भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर में अलग-अलग सार्वजनिक कार्यक्रमों में ‘झूठ की गूंज’ वाक्यांश का इस्तेमाल किया था।
5 सितंबर को दिल्ली के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के कार्यक्रम में मोदी ने कहा था कि “सच की हुंकार के आगे झूठ की गूंज नहीं टिकेगी।” इस बयान को कई मीडिया रिपोर्टों ने विपक्ष और राहुल गांधी की राजनीति से जोड़कर रिपोर्ट किया, हालांकि उस वक्त के बयान में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का नाम सीधे नहीं लिया गया था।
इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले ‘झूठ की गूंज’ लिखे पोस्टर सामने आने के बाद इस वाक्यांश को लेकर राजनीतिक संदर्भ और चर्चा बढ़ गई है। पोस्टर किसने लगाए, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने कोटा से शुरुआत क्यों की?
‘छात्रों की गूंज’ अभियान की शुरुआत कोटा से हुई, जो देश के प्रमुख कोचिंग केंद्रों में गिना जाता है। यहां बड़ी संख्या में विद्यार्थी JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
कोटा को चुनने के पीछे शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण संदर्भ हैं। राहुल गांधी ने कोटा में छात्रों से बातचीत के दौरान परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए थे।
कोटा में छात्रों की आत्महत्या का मुद्दा भी लंबे समय से राष्ट्रीय बहस में रहा है। हालांकि, ऐसे मामलों के आंकड़ों को रिपोर्ट करते समय अलग-अलग वर्षों और स्रोतों के आंकड़ों को एक साथ जोड़ने से बचना जरूरी है।
कांग्रेस का फोकस छात्रों पर क्यों?
‘छात्रों की गूंज’ को कांग्रेस के युवा और छात्र आउटरीच अभियान के रूप में देखा जा सकता है। इसके माध्यम से पार्टी शिक्षा से जुड़े सवालों को रोजगार और सरकारी भर्ती जैसे बड़े मुद्दों से जोड़ रही है।
इसके तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं—
पहला—सीधा संवाद:
छात्रों से सीधे सवाल सुनना और शिक्षा तथा रोजगार से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक संवाद का हिस्सा बनाना।
दूसरा—शिक्षा से रोजगार तक मुद्दों का विस्तार:
पेपर लीक, भर्ती में देरी, प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था, फीस और रोजगार के अवसर जैसे मुद्दों को एक साथ उठाना।
तीसरा—युवा मतदाताओं तक पहुंच:
18-29 वर्ष के मतदाता 2024 में कुल मतदाताओं का 22.78% थे। ऐसे में युवा मतदाताओं से जुड़े मुद्दे राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसे 2029 के चुनाव की सीधी रणनीति कहना राजनीतिक विश्लेषण होगा। इतना जरूर है कि देश की युवा आबादी और युवा मतदाताओं का आकार राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक-राजनीतिक समूह बनाता है।
कार्यक्रम से पहले विवाद भी कम नहीं
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम को लेकर पिछले दिनों आयोजन स्थल और अनुमति को लेकर विवाद रहा। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम की अनुमति नहीं मिलने के बाद कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने IDA की जमीन को वैकल्पिक स्थल के रूप में चुना। IDA ने 17 से 19 सितंबर के लिए करीब 12,000 वर्गमीटर जमीन लीज पर दी थी।
बाद में IDA ने निर्धारित अवधि से पहले करीब 4,800 वर्गमीटर हिस्से के इस्तेमाल को लेकर कांग्रेस से ₹4,03,270 अतिरिक्त भुगतान मांगा। कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया, जबकि प्रशासनिक पक्ष में इसे जमीन के निर्धारित उपयोग और लीज शर्तों से जुड़ा मामला बताया गया।
अब कार्यक्रम स्थल पर पुलिस की 31 शर्तें भी लागू हैं। ऐसे में शनिवार का कार्यक्रम केवल छात्र-युवा मुद्दों के संवाद के लिहाज से ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश की राजनीति में भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।





